NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
क्या है तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी और पुलिस कमिश्नर सज्जनार का इतिहास!
इस मामले में सबसे पहले सवाल 30 नवंबर को अंग्रेजी अखबार डेक्कनक्रॉनिकल में छपी एक रिपोर्ट ने उठाए थे। इसमें दावा किया गया था कि घटना के 24 घंटे बाद पुलिस ने दूसरों विकल्पों के बारे में सोचना शुरू कर दिया था।
सोनिया यादव
06 Dec 2019
hyderabad case

शुक्रवार, 6 दिसंबर की सुबह-सुबह तेलंगाना से एक एनकाउंटर की खबर सामने आई, जिसमें तेलंगाना पुलिस ने दावा किया कि हैदराबाद वेटरनरी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या में शामिल चारों आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। तेलंगाना पुलिस के मुताबिक आरोपियों को मौका ए वारदात पर सीन रिक्रिएशन के लिए ले जाया गया था। जहां उन्होंने भागने की कोशिश की, जिसके बाद नेशनल हाईवे 44 पर चारों आरोपियों की पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में चारों आरोपियों को गोली लगी और इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

इस मामले में शुरुआत से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अब बहुत लोग एनकाउंटर के लिए पुलिस की तारीफ़ कर रहे हैं। इससे पहले मृत पीड़िता के परिवार वालों ने ये भी आरोप लगाया था कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की।
एनकाउंटर के संबंध में हैदराबाद के साइबराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने मीडिया से कहा, ‘सभी आरोपी मोहम्मद आरिफ, नवीन, शिवा और चेन्नाकेशवुलु शुक्रवार तड़के तीन से छह बजे के बीच शादनगर के चतनपल्ली के पास पुलिस एनकाउंटर में मारे गए। मामले की विस्तृत जानकारी जल्द दी जाएगी।’

इस मामले में सबसे पहले सवाल 30 नवंबर को अंग्रेजी अखबार डेक्कनक्रॉनिकल में छपी एक रिपोर्ट ने उठाए थे। इसमें दावा किया गया था कि घटना के 24 घंटे बाद पुलिस ने दूसरों विकल्पों के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। अख़बार की रिपोर्ट में कहा गया कि इस केस में पुलिस के अलावा राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री केसीआर पर भी सवाल उठे हैं। अखबार के मुताबिक आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले ही पुलिस कमिश्नर सीपी सज्जनार ने आरोपियों को सबक सिखाने को लेकर चर्चा की थी।

अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि आमलोगों का गुस्सा शांत करने के पुलिस वाले 'एनकाउंटर' जैसी चीजों पर भी विचार कर रहे हैं। दरअसल 11 साल पहले 2008में आन्ध्र प्रदेश के वालंगर में पुलिस ने एसिड अटैक के एक केस में आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराया था और पुलिस यहां भी घटना के सीन को रि-क्रिएट करना चाहती थी। उस वक्त यहां के एसपी सीपी सज्जनार ही थे।

फिलहाल देश की एक बड़ी आबादी इस एनकांउटर पर संतुष्टि जाहिर कर रही है। लेकिन इन सब के बीच एक ऐसा तबका भी है जो अपराधियों की सज़ा चाहता है, पीड़िता के लिए इंसाफ की मांग करता है लेकिन इस एनकाउंटर को लोकतंत्र और न्यायिक व्यवस्था की हत्या के रूप में भी देख रहा है।

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता वृंदा ग्रोवर ने इस एनकाउंटर के संदर्भ में पुलिस पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पुलिस पर मुकदमा दर्ज किया जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए। महिला के नाम पर कोई भी पुलिस एनकाउंटर करना गलत है।

लंबे समय से देश-विदेश में महिला सशक्तिकरण और मानवाधिकारों के लिए संघर्षरत कमला भसीन ने न्यूज़क्लिक से कहा, मैं इस एनकाउंटर के खिलाफ हूं। जो पुलिस एफआईआर तक दर्ज नहीं करती, वो क्या किसी को न्याय देगी? हमें न्याय और न्यायिक प्रक्रिया की इज्ज़त करने के साथ जल्द न्याय की मांग करनी है। हम पीड़िता के लिए इंसाफ चाहते हैं, किसी और के साथ नाइंसाफी नहीं।

उन्होंने आगे कहा कि पुलिस एनकाउंटर के बहाने पहले से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, आरटीआई कार्यकर्ताओं को मारती रही है। क्योंकि ये एक वैचारिक लड़ाई बनती जा रही है। जो भी सत्ता या प्रशासन की विचारधारा से मेल नहीं खाता, उन्हें मिटाने की साजिश एनकाउंटर के जरिए की जा रही है।

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा),अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला समिति (एपवा) समेत कई महिला संगठनों ने भी इस एनकाउंटर की निंदा की है।

एपवा की ही कविता कृष्णनन ने कड़े शब्दों में इस एनकाउंटर का विरोध करते हुए पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े किए। कविता ने ट्विट किया कि सरकार और पुलिस महिला सुरक्षा के मुद्दे पर विफल रही है। जो पुलिस आदतन महिला पीड़ित को ही और प्रताड़ित करती है, वो आज चार शवों पर महिलाओं की रक्षक बनने का दिखावा कर रही है।

प्रगतिशील महिला संगठन ने तेलंगना के मुख्यमंत्री और पुलिस कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि ये एक कस्टुडियल मर्डर यानी हिरासत हुई हत्या है। पहले पुलिस प्रशासन पीड़ित महिला के परिवारवालों की एफआईआर तक दर्ज नहीं कर रही थी। उसके बाद पूरा प्रशासन और सरकार ये मानने से इंकार करता रहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। कई दिनों तक मुख्यमंत्री ने चुप्पी साध रखी थी इसके बाद तेलंगना पुलिस ने इस एनकाउंटर को अंजाम देकर पूरी न्यायिक व्यवस्था के साथ बलात्कार कर दिया है। उसकी हत्या कर दी है। महिलाओं को सुरक्षा चाहिए, न्याय चाहिए लेकिन हमारे नाम पर ऐसी हत्याएं नहीं चाहिए।

हालांकि इस मामलें में मृत महिला डॉक्टर के पिता ने भी कहा कि मेरी बेटी की मौत को 10 दिन हो गए। मैं पुलिस और सरकार के प्रति अपना आभार प्रकट करता हूं। अब मेरी बेटी की आत्मा को शांति मिल जाएगी।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, ‘एक आम आदमी के नाते मैं खुश हूं कि जो अंतिम चीज़ हम चाहते थे वो हो गया। लेकिन ये अंत कानूनी तरीके से होना चाहिए। हम हमेशा से इन लोगों के लिए मृत्यु दंड की मांग कर रहे थे। ऐसे में पुलिस ने न्याय किया है, लेकिन मुझे नहीं पता कि ये किन परिस्थितियों में किया गया है।’

हालांकि हमारे देश की कानून व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हमारे देश में 2012 में हुए निर्भया केस का भी उदाहरण है। जिसे लेकर आज फिर निर्भया की मां ने कहा कि मैं पिछले 7 साल से न्याय के लिए लड़ रही हूं। मैं इस देश की न्याय व्यवस्था और सरकार से अपील करती हूं कि निर्भया के दोषियों को मौत की सजा दी जाए।

दिल्ली हाई कोर्ट में वकील आस्था जैन बताती हैं, ‘आप एक आम नागरिक के तौर पर भावनाओं में बह सकते हैं और तब आपको ये पूरी घटना सही लग सकती है। लेकिन एक समाज, एक राष्ट्र और एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर आप इसका समर्थन नहीं कर सकते। कानून की नज़र में आरोपी तब तक दोषी नहीं होता, जब तक उसका गुनाह साबित न हो जाए। किसी बेगुनाह को अदालत द्वारा सज़ा ना मिले इसलिए हमारी कानूनी कार्रवाई थोड़ी जटिल है। हम आरोपी को बेगुनाह और पुलिस को आरोप साबित करने का पूरा समय देते हैं। कई बार आपके सामने एस दौरान हैरान करने वाली बातें सामने आती हैं जिसे सज़ा के दौरान ध्यान में रखा जाता है, परिस्थितियों पर गौर फरमाया जाता है। किसी को तुरंत दोषी या अपराधी हम नहीं मान सकते हैं।

अब इस मामले में तमाम राजनीतिक दलों के सदस्यों की भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। एक बड़ा वर्ग जहां इस मसले पर हैदराबाद पुलिस की तारीफ कर रहा है तो कुछ लोगों ने इस एनकाउंटर पर सवाल भी खड़े किए हैं।

वामपंथी दल सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि गैर-न्यायिक हत्याएं महिलाओं के प्रति हमारी चिंता का जवाब नहीं हो सकतीं। उन्होंने कहा कि बदला कभी न्याय नहीं हो सकता। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप कांड के बाद लागू हुए कड़े कानून को हम सही से लागू क्यों नहीं कर पा रहे है।

तेलंगाना एनकाउंटर पर बीजेपी की सांसद मेनका गांधी ने भी नाखुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वहां जो हुआ वह बहुत भयानक हुआ इस देश के लिए। आप लोगों को ऐसे नहीं मार सकते हैं। आप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते हैं। मेनका गांधी ने कहा कि वे आरोपी थे और वैसे भी कोर्ट से उसे फांसी की सजा मिलती। उन्होंने कहा कि ऐसा होने लगे तो फिर फायदा क्‍या है कानून का, फायदा क्‍या है सिस्‍टम का।

मेनका ने कहा, 'इस तरह तो अदालत और कानून का कोई फायदा ही नहीं, जिसको मन हो बंदूक  उठाओ जिसको मारना हो मारो। कानूनी प्रक्रिया में गए बिना आप उसे मार रहे हो तो फिर कोर्ट, कानून और पुलिस का क्‍या औचित्य रह जाएगा'।

एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हर मुठभेड़ की जांच की जानी चाहिए।

उनके अलावा कांग्रेस के सीनियर लीडर शशि थरूर ने ट्वीट किया, 'न्यायिक व्यवस्था से परे इस तरह के एनकाउंटर स्वीकार नहीं किए जा सकते।' एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, 'हमें और जानने की जरूरत है। यदि क्रिमिनल्स के पास हथियार थे तो पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही ठहरा सकती है। जब तक पूरी सच्चाई सामने न आए तब तक हमें निंदा नहीं करनी चाहिए। लेकिन कानून से चलने वाले समाज में इस तरह का गैर-न्यायिक हत्याओं को सही नहीं ठहराया जा सकता।'

गौरतलब है इससे पहले महिला डॉक्टर के लापता होने की एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही बरतने के मामले में तीन पुलिसकर्मियों को बर्खास्त भी किया जा चुका है। 27 नवंबर की रात महिला डॉक्टर लापता हो गई थीं और अगली सुबह उनका जला हुआ शव हैदराबाद के शादनगर में एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे मिला था। इस घटना को लेकर पूरे देश में आक्रोश उत्पन्न हो गया था। देश के विभिन्न शहरों में इसको लेकर प्रदर्शन किए जा रहे थे। 

Hyderabad Rape Case
Hyderabad Encounter
Police Commissioner VC Sajjanar
crimes against women
violence against women
Telangana Police
K. Chandrashekar Rao
Rape And Murder Case
ncw
Sitaram yechury
Kavita Krishnan
Shashi Tharoor
Menka Gandhi

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

असम: बलात्कार आरोपी पद्म पुरस्कार विजेता की प्रतिष्ठा किसी के सम्मान से ऊपर नहीं


बाकी खबरें

  • prashant kishor
    अनिल सिन्हा
    नज़रिया: प्रशांत किशोर; कांग्रेस और लोकतंत्र के सफ़ाए की रणनीति!
    04 Dec 2021
    ग़ौर से देखेंगे तो किशोर भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ने में लगे हैं। वह देश को कारपोरेट लोकतंत्र में बदलना चाहते हैं और संसदीय लोकतंत्र की जगह टेक्नोक्रेट संचालित लोकतंत्र स्थापित करना चाहते हैं…
  • All five accused arrested in the murder case
    भाषा
    माकपा के स्थानीय नेता की हत्या के मामले में सभी पांच आरोपी गिरफ्तार
    04 Dec 2021
    घटना पर माकपा प्रदेश सचिवालय ने एक बयान जारी कर आरएसएस को हत्या का जिम्मेदार बताया है और मामले की गहराई से जांच करने की मांग की है.पुलिस के अनुसार, घटना बृहस्पतिवार रात साढ़े आठ बजे हुई थी और संदीप…
  • kisan andolan
    लाल बहादुर सिंह
    MSP की कानूनी गारंटी ही यूपी के किसानों के लिए ठोस उपलब्धि हो सकती है
    04 Dec 2021
    पंजाब-हरियाणा के बाहर के, विशेषकर UP के किसानों और उनके नेताओं की स्थिति वस्तुगत रूप से भिन्न है। MSP की कानूनी गारंटी ही उनके लिए इस आंदोलन की एक ठोस उपलब्धि हो सकती है, जो अभी अधर में है। इसलिए वे…
  • covid
    भाषा
    कोरोना अपडेट: देशभर में 8,603 नए मामले सामने आए, उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक लाख से कम हुई
    04 Dec 2021
    देश में कोविड-19 के 8,603 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,46,24,360 हो गई है।  
  • uttarkhand
    सत्यम कुमार
    देहरादून: प्रधानमंत्री के स्वागत में, आमरण अनशन पर बैठे बेरोज़गारों को पुलिस ने जबरन उठाया
    04 Dec 2021
    4 दिसंबर 2021 को उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं। लेकिन इससे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए आमरण अनशन पर बैठे बेरोजगार युवाओं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License