NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अरब लीग ने क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों को मिलाने की योजना के ख़िलाफ़ इज़रायल को चेतावनी दी
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अगुवाई में इज़राइल की नई राष्ट्रीय यूनिटी गवर्नमेंट ने अमेरिका की मदद से क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के बड़े हिस्से को मिलाने की योजना की घोषणा की थी।
पीपुल्स डिस्पैच
01 May 2020
अरब लीग

अरब लीग के सदस्यों के विदेश मंत्रियों ने 30 अप्रैल को एक आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए बैठक की। बैठक के बाद इज़रायल को चेतावनी देते हुए एक बयान जारी किया गया जिसमें कहा गया कि इज़रायल वेस्ट बैंक को मिलाने की अपनी योजना के साथ आगे न बढ़े क्योंकि ये "नया युद्ध अपराध" (वार क्राइम) होगा और "द्विराष्ट्र के सिद्धांत" को समाप्त कर देगा।

इसके सभी 22 सदस्यों के मंत्रियों ने भी राजनीतिक, क़ानूनी, राजनयिक और वित्तीय तरीक़े से फिलिस्तीनी मामलों को मदद करने की अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन को फिलिस्तीन के संबंध में संयुक्त राष्ट्र चार्टर और उसके प्रस्तावों का पालन करने और इज़रायल की औपनिवेशिक नीतियों का समर्थन नहीं करने को कहा।

पिछले हफ्ते बेंजामिन नेतन्याहू और बेनी गैंट्ज़ के बीच गठबंधन की घोषणा के बाद इज़रायल की नई कैबिनेट का गठन किया गया था, जिसमें वेस्ट बैंक के क़ब्ज़े वाले बड़े हिस्से को मिलाने के निर्णय पर सहमति दी गई है जिसमें सभी बस्तियां शामिल होंगी। इनमें जॉर्डन घाटी और अन्य क्षेत्रों को महत्वपूर्ण माना गया है। 1967 के युद्ध के तुरंत बाद इज़रायल ने पूर्वी येरुशलम को मिला लिया था। नेतन्याहू ने उम्मीद ज़ाहिर की थी कि अमेरिका इसके मिलाने की योजनाओं को मंज़ूरी देगा।

पिछले सोमवार 27 अप्रैल को जारी एक बयान में यूएस के स्टेट डिपार्टमेंट ने इस फ़ैसले के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया था। अपनी पिछली प्रतिबद्धताओं और कई अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प के तथाकथित "डील ऑफ द सेंचुरी" का जनवरी 2020में खुलासा हुआ जो जॉर्डन घाटी और अवैध बस्तियों को इज़रायली क्षेत्र के रूप में मान्यता देता है।

यह पहले ही 2017 में येरूशलम को इज़रायल की राजधानी के रूप में मान्यता दे चुका है और अपने दूतावास को तेल अवीव से येरूशलम ले गया है। आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने वाले संभावित उम्मीदवार जोए बिडेन ने बुधवार 29 अप्रैल को कहा कि अगर वे चुनाव जीत जाते हैं तो वे अमेरिकी दूतावास येरुशलम में रखेंगे पर इस तथ्य के बावजूद कि "इसे स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए था।"

मंत्रियों के समूह ने यूरोपीय संघ से 1967 की सीमाओं के अनुसार फिलिस्तीन को मान्यता देने और राजनीतिक संघर्ष को धार्मिक संघर्ष में बदलने से रोकने का आग्रह किया।

फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएफए ने बताया, "अरब विदेश मंत्रियों ने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून, अंतरराष्ट्रीय वैधता के फैसले और अरब शांति पहल के आधार पर एक व्यापक और नियमित शांति अरब का रणनीतिक चुनाव है और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व शांति के लिए एक आवश्यकता भी है।"

साभार : पीपल्स डिस्पैच

Palestine
Israel
Arab League
International news

Related Stories

दुनिया भर की: कोलंबिया में पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति बनने की संभावना

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

अमेरिका में महिलाओं के हक़ पर हमला, गर्भपात अधिकार छीनने की तैयारी, उधर Energy War में घिरी दुनिया

रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

इज़रायली सुरक्षाबलों ने अल-अक़्सा परिसर में प्रार्थना कर रहे लोगों पर किया हमला, 150 से ज़्यादा घायल

दुनिया भर की: सोमालिया पर मानवीय संवेदनाओं की अकाल मौत

लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया


बाकी खबरें

  • तालिबान के काबुल पर नियंत्रण के बाद अफ़ग़ान नागरिकों के मानवाधिकारों को लेकर चिंताएं बढ़ीं
    पीपल्स डिस्पैच
    तालिबान के काबुल पर नियंत्रण के बाद अफ़ग़ान नागरिकों के मानवाधिकारों को लेकर चिंताएं बढ़ीं
    16 Aug 2021
    यूएस सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट ने यहां से जल्दबाज़ी में वापसी का बचाव करने की कोशिश की और 1975 में हार के बाद वियतनाम से अमेरिका की वापसी के साथ इसकी तुलना का खंडन किया।
  • फाइल फोटो। 2 मार्च, 2006 को दिल्ली में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह।
    प्रबीर पुरकायस्थ
    12 साल में कितना सफल हुआ भारत-अमेरिका नाभिकीय सौदा?
    16 Aug 2021
    भारत-अमेरिका नाभिकीय सौदे को भारतीय जनता के बीच यह कहकर चलाया गया था कि यह जादुई छड़ी है, जिसके हाथ में आने की देर है, भारत की ऊर्जा संबंधी जरूरतें पलक झपकते ही पूरी हो जाएंगी और बार-बार होने वाले…
  • बंपर उत्पादन के बावजूद भुखमरी- आज़ादी के 75 साल बाद भी त्रासदी जारी
    सुबोध वर्मा
    बंपर उत्पादन के बावजूद भुखमरी- आज़ादी के 75 साल बाद भी त्रासदी जारी
    16 Aug 2021
    जब भारत अपने 75वें स्वतंत्रता वर्ष में प्रवेश कर चुका है, तब भी हमारे यहां कई लोग भूखे हैं, जबकि खाद्यान्न अनाजों की हमारे यहाँ बंपर पैदावार होती है।
  • Antonio Guterres
    एपी
    संयुक्त राष्ट्र ने अफ़ग़ानिस्तान में सभी से 'संयम' दिखाने का आग्रह किया
    16 Aug 2021
    तालिबान के एक प्रवक्ता एवं वार्ताकार ने कहा कि चरमपंथी संगठन अफगानिस्तान में ‘‘खुली, समावेशी इस्लामी सरकार” बनाने के मकसद से वार्ता कर रहा है।
  • लोकतंत्र, फ़ासला, असमानता और अनादर
    उपेंद्र बक्सी
    लोकतंत्र, फ़ासला, असमानता और अनादर
    16 Aug 2021
    लोकतंत्र शासन का एकमात्र ऐसा स्वरूप है जो शासन की कला और शिल्प को एक सम्मानजनक फ़ासले पर विकसित करता है और हमेशा उस उपलब्धि को हासिल करना चाहता है जिसे दार्शनिक जॉन रॉल्स ने "ज़िम्मेदार बहुलवाद" के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License