NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
खेल
भारत
राजनीति
कहानी अंतर्राष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी की, जो अब खेत मज़दूरी कर रही हैं
कौर पंजाब के मांसा ज़िले के गुर्ने कलां गांव से हैं। वह एक अंतर्राष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी हैं और सरकार से निराश हैं।
सागरिका किस्सू
13 Jun 2021
कौर

2018 में, मलेशिया के एक टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीतने वाली हरदीप कौर पंजाब के खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी से मिलीं, जिन्होंने उनको कराटे में महारत के लिए एक नौकरी देने की बात कही थी। 3 साल बाद, सोढी उन्हें पहचानने से भी इनकार करते हैं। कौर पंजाब के मांसा ज़िले के गुर्ने कलां गांव से हैं, वह एक अंतर्राष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी हैं। वह सुर्ख़ियों में तब आईं जब उन्हें खेत में मज़दूरी करते हुए देखा गया।

उनकी कहानी एक महिला और खिलाड़ी की है जिसे सरकार से निराशा मिली। भारत के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 20 पदक जीतने वाली कौर एक खेत में धान काटने का काम कर रही हैं।

कौर ने न्यूज़क्लिक से कहा, "एक लाइव वीडियो इंटरव्यू में, जिसमें मैं और सोढी सर दोनों थे, उन्होंने कहा कि वह मुझसे कभी मिले ही नहीं हैं। मैं हैरान हो गई। उन्होंने कहा कि अगर वह मुझसे मिले भी थे, तो मुझे उनसे फिर से जा कर मिलना चाहिये था।"

कौर ने बताया कि उन्होंने उनसे दोबारा मिलने की भी कोशिश की थी। 2019 में, कौर और उनके पिता 55 साल के नायब सिंह ने अपने मकानमालिक से पैसे उधार लिए और सोढी से मिलने चंडीगढ़ गए। जहाँ उन्होंने सुना था कि सोढी का घर है, उन्होंने उसके आसपास के कई सेक्टरों के चक्कर लगाए।

उन्होंने आगे कहा, "मेरे पिताजी अनपढ़ हैं और मैं सिर्फ़ 19 साल की थी और मुझे काम की बहुत ज़रूरत थी। जिस शख़्स ने हमें पहली बार सोढी से मिलवाया था, उनकी मौत हो गई थी। हमने चंडीगढ़ में पूरा दिन बिताया मगर उनसे नहीं मिल पाए।"

एक दलित परिवार में पैदा हुईं कौर के माता-पिता खेत मज़दूर हैं। उनके भाई एक होटल में शेफ़ हैं। बचपन में कौर अपने माता-पिता के साथ खेत जाती थीं और उन्हें काम करते देखती थीं। अब जब वो लोग कौर को फिजिकल एजुकेशन में मास्टर्स के कोर्स के लिए मदद नहीं कर सकते तो कौर ने ख़ुद खेत में काम करना शूरू कर दिया है। धान के खेत में काम करने का उन्हें 300 रुपये प्रतिदिन मिलता है।

निराश कौर ने कहा, "पहले मेरे माता-पिता और भाई ने अपनी इच्छाओं को दबा कर मेरा समर्थन किया। अब मेरी बारी है।"

2006 में, जब पंजाब में बलात्कार और छेड़खानी के मामले बहुत बढ़ गए थे, ग्रामीण इलाक़ों में लड़कियों-महिलाओं को आत्म-रक्षा के लिए कराटे सिखाने के लिए वर्कशॉप की गई थीं। उसी समय कौर को इस खेल के बारे में पता चला था। उन्होंने कहा, "मैं बहुत जल्दी सीख गई थी।"

कौर ने बचपन में अपने गांव के खुले मैदान में कराटे सीखा था, उनके माता-पिता और पड़ोसियों को तभी उनकी काबिलियत नज़र आ गई थी। अपने सपने को पाने में उनकी मदद की गई। उन्होंने कहा, "मैं एक ग्रामीण इलाक़े से हूँ और मैंने अपने पिंड के मैदान में कराटे सीखा है। कराटे ऐसा खेल है जिसमें महंगे इक्विपमेंट और संसाधनों की ज़रूरत नहीं होती। यह सिर्फ़ एक इंसान की ताक़त और टेक्नीक का खेल है।"

हालांकि, यह काफ़ी नहीं था। कौर के पास कराटे की ड्रेस ख़रीदने के भी पैसे नहीं थे; वह टूर्नामेंट से पहले अपने साथियों से मांग लेती थीं। वह कहती हैं कि उन्हें कभी शर्म नहीं आती थी।

उन्होंने कहा, "मुझे क्यों शर्म आती? मैं ग़रीब हूँ और यह सच्चाई है। मगर अब मैंने खेत में काम करते हुए कुछ पैसे कमा लिए हैं। अब इससे सबसे पहले मैं एक कराटे सूट ख़रीदूंगी।"

इसे "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए, कांग्रेस विधायक और पूर्व हॉकी खिलाड़ी प्रगट सिंह ने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम ऐसे खिलाड़ियों को निराश कर रहे हैं जिन्हें हमारे देखरेख और समर्थन की ज़रूरत है। खेल मंत्री को हर खेल के लिए विभाग बनाने चाहिये और कार्यप्रणाली स्थापित करनी चाहिये।

कौर की ज़िंदगी सिर्फ़ सरकार की नाकामी नहीं है, मगर भारत में क्रिकेट के अलावा हर खेल की प्रणालीगत नज़रअंदाज़ी का उदाहरण भी है। खिलाड़ियों ने लगातार यह कहा है कि बाक़ी खेलों को सरकार नज़रअंदाज़ करती है।

मशहूर मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह के अनुसार यह भेदभाव बहुत ज़्यादा है, उन्हें लगता है कि इसमें सरकार और मीडिया दोनों का हाथ है। उन्होंने कहा, "कोविड-19 के दौरान, जब सारी दुनिया में सब कुछ रुका हुआ था, तब भी सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप तक आईपीएल के मैच जारी थे। यह धंधा नहीं तो और क्या है?"

सिंह ने न्यूज़क्लिक से कहा, "मेनस्ट्रीम मीडिया चैनल सिर्फ़ क्रिकेट की ख़बरें दिखाते हैं। किसी और खेल की बात नहीं होती और इसी भेदभाव की वजह से खिलाड़ी कष्ट में हैं। बाक़ी खेलों में भी खिलाड़ी हैं जो बहुत मेहनत कर रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सरकार और मीडिया दोनों को उनपर ध्यान देना चाहिये।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

The International Karate Player who Now Works as a Farm Labourer

Hardeep Kaur
COVID-19
sports
Karate
Sportspeople during COVID
COVID-19 lockdown
punjab

Related Stories

कोहली बनाम गांगुली: दक्षिण अफ्रीका के जोख़िम भरे दौरे के पहले बीसीसीआई के लिए अनुकूल भटकाव

विक्रम और बेताल: सरकार जी और खेल में खेला

जापान ने भारतीय ओलंपिक दल पर कड़े नियम लगाये, आईओए ने कहा, ‘‘अनुचित और भेदभावपूर्ण’’

मिल्खा सिंह का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

रोनाल्डो के कोका कोला बोतल हटाने वाले प्रकरण को थोड़ा खुरच कर देखिए!

सुरक्षित ओलंपिक के लिये वायरस आपातकाल बढ़ायेगा जापान

कोविड मामलों के कारण आईपीएल अनिश्चितकाल के लिये निलंबित

आईपीएल पर कोविड का कहर : बालाजी की पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद सीएसके-रॉयल्स मैच स्थगित

आईपीएल के बायो बबल का फूटा गुबार केकेआर के दो सदस्य कोरोना पॉजिटिव, आरसीबी के खिलाफ मुकाबला स्थगित

भारतीय विमानों पर रोक के बाद बीसीसीआई ने विदेशी खिलाड़यों को सुरक्षित घर वापसी का भरोसा दिया


बाकी खबरें

  • दुनिया बीमारी से ख़त्म नहीं होगी
    अजय सिंह
    दुनिया बीमारी से ख़त्म नहीं होगी
    31 May 2021
    दुनिया ख़त्म होगी प्यार के घटते जलस्तर से। नफ़रत व इस्लामोफ़ोबिया के सैलाब से, जो लगातार उमड़ता चला आ रहा है...
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: नए मामलों में कमी लेकिन मरने वालों की संख्या रोज़ाना अभी भी 3 हज़ार से ज़्यादा
    31 May 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,52,734 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 7.22 फ़ीसदी यानी 20 लाख 26 हज़ार 92 हो गयी है।
  • wealth redistribution
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    हमें धन के वितरण और उसके लोकतंत्रीकरण की ज़रूरत क्यों है?
    31 May 2021
    अमेरिकी पूंजीवादी मॉडल ख़ुदगर्ज़ी और विद्वेष को पोषित करता है
  • media with spine
    भाषा सिंह
    हिंदी पत्रकारिता दिवस: अपनी बिरादरी के नाम...
    30 May 2021
    आज न तो सियापा करने का दिन है और न ही जश्न मनाने का। आज, अपने काम, लेखनी व बोली की वकत जानने और इसकी ज़रूरत को पहचाने का दिन है। ...वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह का आलेख
  • कैसे बना सोशल मीडिया राजनीति का अभिन्न अंग?
    न्यूज़क्लिक टीम
    कैसे बना सोशल मीडिया राजनीति का अभिन्न अंग?
    30 May 2021
    भारत में सोशल मीडिया का चलन तेजी से पिछले एक दशक में बढ़ा है और सारी ही पार्टियाँ अब इसका इस्तेमाल कर रही हैं। इतिहास के पन्ने के इस अंग में इस बात पर चर्चा कर रहे हैं नीलांजन
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License