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कहानी अंतर्राष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी की, जो अब खेत मज़दूरी कर रही हैं
कौर पंजाब के मांसा ज़िले के गुर्ने कलां गांव से हैं। वह एक अंतर्राष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी हैं और सरकार से निराश हैं।
सागरिका किस्सू
13 Jun 2021
कौर

2018 में, मलेशिया के एक टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीतने वाली हरदीप कौर पंजाब के खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी से मिलीं, जिन्होंने उनको कराटे में महारत के लिए एक नौकरी देने की बात कही थी। 3 साल बाद, सोढी उन्हें पहचानने से भी इनकार करते हैं। कौर पंजाब के मांसा ज़िले के गुर्ने कलां गांव से हैं, वह एक अंतर्राष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी हैं। वह सुर्ख़ियों में तब आईं जब उन्हें खेत में मज़दूरी करते हुए देखा गया।

उनकी कहानी एक महिला और खिलाड़ी की है जिसे सरकार से निराशा मिली। भारत के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 20 पदक जीतने वाली कौर एक खेत में धान काटने का काम कर रही हैं।

कौर ने न्यूज़क्लिक से कहा, "एक लाइव वीडियो इंटरव्यू में, जिसमें मैं और सोढी सर दोनों थे, उन्होंने कहा कि वह मुझसे कभी मिले ही नहीं हैं। मैं हैरान हो गई। उन्होंने कहा कि अगर वह मुझसे मिले भी थे, तो मुझे उनसे फिर से जा कर मिलना चाहिये था।"

कौर ने बताया कि उन्होंने उनसे दोबारा मिलने की भी कोशिश की थी। 2019 में, कौर और उनके पिता 55 साल के नायब सिंह ने अपने मकानमालिक से पैसे उधार लिए और सोढी से मिलने चंडीगढ़ गए। जहाँ उन्होंने सुना था कि सोढी का घर है, उन्होंने उसके आसपास के कई सेक्टरों के चक्कर लगाए।

उन्होंने आगे कहा, "मेरे पिताजी अनपढ़ हैं और मैं सिर्फ़ 19 साल की थी और मुझे काम की बहुत ज़रूरत थी। जिस शख़्स ने हमें पहली बार सोढी से मिलवाया था, उनकी मौत हो गई थी। हमने चंडीगढ़ में पूरा दिन बिताया मगर उनसे नहीं मिल पाए।"

एक दलित परिवार में पैदा हुईं कौर के माता-पिता खेत मज़दूर हैं। उनके भाई एक होटल में शेफ़ हैं। बचपन में कौर अपने माता-पिता के साथ खेत जाती थीं और उन्हें काम करते देखती थीं। अब जब वो लोग कौर को फिजिकल एजुकेशन में मास्टर्स के कोर्स के लिए मदद नहीं कर सकते तो कौर ने ख़ुद खेत में काम करना शूरू कर दिया है। धान के खेत में काम करने का उन्हें 300 रुपये प्रतिदिन मिलता है।

निराश कौर ने कहा, "पहले मेरे माता-पिता और भाई ने अपनी इच्छाओं को दबा कर मेरा समर्थन किया। अब मेरी बारी है।"

2006 में, जब पंजाब में बलात्कार और छेड़खानी के मामले बहुत बढ़ गए थे, ग्रामीण इलाक़ों में लड़कियों-महिलाओं को आत्म-रक्षा के लिए कराटे सिखाने के लिए वर्कशॉप की गई थीं। उसी समय कौर को इस खेल के बारे में पता चला था। उन्होंने कहा, "मैं बहुत जल्दी सीख गई थी।"

कौर ने बचपन में अपने गांव के खुले मैदान में कराटे सीखा था, उनके माता-पिता और पड़ोसियों को तभी उनकी काबिलियत नज़र आ गई थी। अपने सपने को पाने में उनकी मदद की गई। उन्होंने कहा, "मैं एक ग्रामीण इलाक़े से हूँ और मैंने अपने पिंड के मैदान में कराटे सीखा है। कराटे ऐसा खेल है जिसमें महंगे इक्विपमेंट और संसाधनों की ज़रूरत नहीं होती। यह सिर्फ़ एक इंसान की ताक़त और टेक्नीक का खेल है।"

हालांकि, यह काफ़ी नहीं था। कौर के पास कराटे की ड्रेस ख़रीदने के भी पैसे नहीं थे; वह टूर्नामेंट से पहले अपने साथियों से मांग लेती थीं। वह कहती हैं कि उन्हें कभी शर्म नहीं आती थी।

उन्होंने कहा, "मुझे क्यों शर्म आती? मैं ग़रीब हूँ और यह सच्चाई है। मगर अब मैंने खेत में काम करते हुए कुछ पैसे कमा लिए हैं। अब इससे सबसे पहले मैं एक कराटे सूट ख़रीदूंगी।"

इसे "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए, कांग्रेस विधायक और पूर्व हॉकी खिलाड़ी प्रगट सिंह ने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम ऐसे खिलाड़ियों को निराश कर रहे हैं जिन्हें हमारे देखरेख और समर्थन की ज़रूरत है। खेल मंत्री को हर खेल के लिए विभाग बनाने चाहिये और कार्यप्रणाली स्थापित करनी चाहिये।

कौर की ज़िंदगी सिर्फ़ सरकार की नाकामी नहीं है, मगर भारत में क्रिकेट के अलावा हर खेल की प्रणालीगत नज़रअंदाज़ी का उदाहरण भी है। खिलाड़ियों ने लगातार यह कहा है कि बाक़ी खेलों को सरकार नज़रअंदाज़ करती है।

मशहूर मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह के अनुसार यह भेदभाव बहुत ज़्यादा है, उन्हें लगता है कि इसमें सरकार और मीडिया दोनों का हाथ है। उन्होंने कहा, "कोविड-19 के दौरान, जब सारी दुनिया में सब कुछ रुका हुआ था, तब भी सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप तक आईपीएल के मैच जारी थे। यह धंधा नहीं तो और क्या है?"

सिंह ने न्यूज़क्लिक से कहा, "मेनस्ट्रीम मीडिया चैनल सिर्फ़ क्रिकेट की ख़बरें दिखाते हैं। किसी और खेल की बात नहीं होती और इसी भेदभाव की वजह से खिलाड़ी कष्ट में हैं। बाक़ी खेलों में भी खिलाड़ी हैं जो बहुत मेहनत कर रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सरकार और मीडिया दोनों को उनपर ध्यान देना चाहिये।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

The International Karate Player who Now Works as a Farm Labourer

Hardeep Kaur
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COVID-19 lockdown
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