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आंदोलन
भारत
राजनीति
बिहार में भी दिखा रेल रोको आंदोलन का असर, वाम दलों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करने और कृषि कानून और श्रम कोड रद्द करने सहित अन्य कई मांगें उठाई।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Oct 2021
Muzaffarpur rail

लखीमपुर कांड को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को बिहार के विभिन्न हिस्सों में रेल रोको अभियान का आयोजन किया गया। इसमें सीपीआई-एम, सीपीआई (एमएल)सहित लेफ्ट पार्टियों के सभी किसान संगठन शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा को गिरफ़्तार और बर्खास्त करने, कृषि कानून और श्रम कोड रद्द करने सहित अन्य कई मांगें उठाई।

सीपीआई-एम की केंद्रीय समिति के सदस्य अरूण कुमार ने फोन पर हुआ बातचीत में कहा कि रेल रोको आंदोलन के दौरान दो मुख्य मांगें थीं। इनमें पहली मांग केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उनके बेटे आशीष मिश्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि आशीष मिश्रा को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस का ढीला रवैया है। वह बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि रेल रोको आंदोलन बिहार में सफल रहा है, खासकर उत्तरी बिहार में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर सहित तमाम जगहों पर यह पूरी तरफ सफल रहा है। लोगों ने ट्रैक पर बैठकर ट्रेनें रोकी। इस दौरान भारी संख्या में लोग मौजूद थें, कहीं कहीं बारिश के चलते लोगों को परेशानी हुई है।

उधर मुजफ्फरपुर के सादपुरा रेलवे गुमटी पर भी किसान संगठनों ने पटरी को अवरुद्ध कर ट्रेनें रोक दी। किसानों ने यहां पर करीब एक घंटे तक ट्रेनें रोकी गई। इस प्रदर्शन के दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। पश्चिम चंपारण में बेतिया में बरौनी से बांद्रा को जाने वाली अवध एक्सप्रेस को प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया। प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक पर कुछ घंटों तक जमे रहे। बाद में इसे खाली कर दिया और उसके गाड़ी का परिचालन शुरू हुआl

प्रदर्शन कर रहे किसानों और लेफ्ट पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने लखीमपुर खीरी कांड को लेकर केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के खिलाफ नारेबाजी की और उन्हें बर्खास्त करने की मांग की। इस प्रदर्शन में शामिल नेताओं का कहना है कि अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि निहत्थे किसानों पर थार गाड़ी से किसानों को रौंदना जालियांवाला बाग की घटना से कम नहीं है। इसलिए केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा और उनके आरोपी दोस्तों पर सख्त कार्रवाई की जाए। बेतिया में रेल रोको आंदोलन के दौरान जुलूस में किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रभुराज नारायण राव, किसान सभा के जिला मंत्री चांदीसी प्रसाद यादव सहित सीटू के जिला सचिव शंकर कुमार राव तथा अन्य नेता शामिल रहे।

बिहार के नवादा में भी रेल रोको आंदोलन का आयोजन किया गया। किसान संगठनों ने यहां करीब आधे घंटे तक रेलवे लाइन पर रहे। इस आंदोलन को लेकर नवादा जिला के सचिव नरेश चंद्र ने कहा कि हमलोग जुलूस की शक्ल में स्टेशन पर गए और करीब आधा घंटा तक ट्रेन को रोका। पुलिस ने हमलोगों को पटरी से हटने को कहा। बाद में पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने गया-हावड़ा एक्सप्रेस को रोक दिया और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि लखीमपुर खीरी कांड के दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त से सख्त सजा दी जाए। साथ ही किसानों ने मांग की कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द की जाए,बिजली कानून 2020को रद्द किया जाए। इस प्रदर्शन में रामजतन सिंह सहित अन्य नेता शामिल हुए।

रेल रोको आंदोलन के दौरान बिहार के समस्तीपुर जंक्शन पर किसानों ने ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन किया और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करने की मांग की। किसानों ने लखीमपुर खीरी कांड के दोषियों को फांसी देने की मांग की। यहां किसानों ने करीब आधे घंटे तक प्रदर्शन किया केंद्रीय मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। दोपहर करीब बारह बजे किसानों ने प्रदर्शन शुरु किया और करीब आधे घंटे तक ये प्रदर्शन जारी रहा।

उधर सीतामढ़ी जंक्शन पर भी लखीमपुर खीरी कांड को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने ट्रेनें रोकी। इस दौरान वे नारे लगाए और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बर्खास्तगी की मांग करते हुए अन्य मांगें भी उठाईं। उन्होंने तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की भी मांग की। इस दौरान उन्होंने मिथिलांचल एक्स्प्रेस को रोक कर प्रदर्शन किया। किसानों ने सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में बेचे जाने के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में किसान नेता आनंद किशोर सहित अन्य नेता व किसान शामिल हुए।

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