NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
बिजली संकट को लेकर आंदोलनों का दौर शुरू
पूरा देश इन दिनों बिजली संकट से जूझ रहा है। कोयले की प्रचुर मात्रा होने के बावजूद भी पावर प्लांट में कोयले की कमी बनी हुई है। इसे लेकर देश के कई इलाके में विरोध शुरू हो गए हैं।  
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 May 2022
protest

पिछले छह सालों में इन दिनों देश सबसे बड़े बिजली के संकट से जूझ रहा है, ज्यादातर राज्यों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुरा है, ऐसे में बिजली कटने की समस्या ने लोगों का जीवन बेहद मुश्किल कर दिया है। रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और फिर पावर प्लांट में  कोयले की कमी ने बिजली के संकट को और ज्यादा विकराल कर दिया है। हालांकि अभी ये भी नहीं कहा जा सकता कि आने वाले दिनों में कब इस संकट से निज़ात मिलेगी क्योंकि फिलहाल देश के हर राज्य के पावर प्लांट में पर्याप्त कोयला नहीं होने को लेकर आवाज़ें बुलंद हो रही हैं।

भारत में करीब 70 फीसदी बिजली का उत्पादन कोयले से चलने वाले प्लांट के ज़रिए किया जाता है। लेकिन इस समय ज्यादातर प्लांट्स बढ़ती हुई बिजली की मांग और कोयले की कमी के कारण पर्याप्त सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के तमाम कोयला प्लांट्स के पास पिछले 9 सालों में सबसे कम कोयले का भंडार बचा है। वहीं बात कोल इंडिया की करें तो बिजली प्लांट्स को रोज़ाना 16.4 लाख टन कोयले की सप्लाई कर रहा है। जबकि कोयले की मांग प्रतिदिन 22 लाख टन पहुंच गई है। आपको बता दें कि देश में कोयले का उत्पादन 80 फीसदी कोल इंडिया की तरफ से ही किया जाता है।

रायटर्स के मुताबिक अप्रैल के पहले 27 दिनों में बिजली सप्लाई डिमांड से 1.88 अरब यूनिट यानी 1.6 प्रतिशत बिजली कम रही। ये पिछले 6 सालों में सबसे ज्यादा बिजली की कमी है। वहीं बीते हफ्तों की बात करें तो देश में 63.3 करोड़ यूनिट बिजली की कमी हुई। ये पूरे मार्च महीने में हुई बिजली की कमी से भी ज्यादा है। यही कारण है कि जम्मू कश्मीर से लेकर आंध्र प्रदेश तक देश के लगभग हर राज्य को 2 से 8 घंटे बिजली कटौती का दंश झेलना पड़ रहा है।

सीईए यानी सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक देश के कोयले से चलने वाले 150 बिजली प्लांट्स में से 86 प्लांट् के पास कोयले का स्टॉक बहुत कम है। कहने का मतलब, इन प्लांट्स के पास ज़रूरत के विपरीत महज़ 25 प्रतिशत ही स्टॉक बचा है।

वहीं बात देश में मौजूद थर्मल बिजली प्लांट्स की करें तो यहां 2.12 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जो कि सामान्य स्तर 6.63 करोड़ टन से काफी कम है।

इसे भी पढ़ें: बिजली संकट: पूरे देश में कोयला की कमी, छोटे दुकानदारों और कारीगरों के काम पर असर

कोयला संकट की एक बड़ी वजह बिजली उत्पादन करने वाले प्लांट्स और बिजली डिस्ट्रीब्यूट करने वाली कंपनियां का समय पर भुगतान नहीं करना है। ख़बरों के मुताबिक देश में 80 फीसदी तक कोयला देने वाली कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड पर बिजली उत्पादन कंपनियों का लगभग 7918.72 करोड़ रुपये का बकाया है।

ख़ैर... इन तमाम वजहों के बीच देश में बढ़ती बिजली समस्याओं के कारण देश की जनता की हालत ख़राब है, भीषण गर्मी और बिजली कटौती की जुगलबंदी ने केंद्र समेत राज्य सरकारों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्योंकि इसके कारण महज़ घर-परिवार ही नहीं बल्कि व्यापार पर भी बड़ा असर पड़ रहा है। कहने का अर्थ है कि गांव-देहात में छोटे व्यापार करने वाले व्यापारियों का सामान बिजली कटौती के कारण ख़राब हो रहा है जिसका उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

बिजली संकट से फिलहाल निज़ात नहीं मिलता देख अब सरकार और विद्युत विभाग के खिलाफ आंदोलन भी शुरु हो चुके हैं। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) की राजस्थान राज्य कमेटी ने राजस्थान राज्य विद्युत निगम द्वारा लगातार की जा रही बिजली कटौती का कड़े शब्दों में विरोध किया गया। सीपीआई(एम) की राज्य कमेटी ने ब्यान जारी करते हुए बताया कि खासतौर पर राज्य के ग्रामीण इलाकों में तो लगातार कई कई घंटों तक आम जनता को बिजली उपलब्ध नहीं हो रही है। इस भीषण गर्मी और विद्यार्थियों के परीक्षा के समय में यह बिजली संकट गंभीर आपदा का रूप धारण किये हुये है। जिसके लिए पार्टी ने केन्द्र और राज्य सरकार की ग़लत नीतियों, अदूरदर्शिता और अकर्मण्यता को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पर्याप्त बिजली आपूर्ति के लिए दोनों ही सरकारों ने समय रहते समन्वय स्थापित करते हुए समुचित कदम नहीं उठाये, इसी वजह से आज राजस्थान की जनता को यह परेशानी उठानी पड़ रही है।

दूसरी ओर राजस्थान माकपा ज़िला सचिव किशन पारीक के नेतृत्व में अजमेर के विद्युत विभाग के बाहर भारी प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिजली कटौती के कारण पीने के लिए पानी की भी समस्या हो रही है, जिसकी वजह बच्चे और बुजुर्गों का बुरा हाल हो गया है।

छोटे व्यापारियों, विद्यार्थियों, आम जनों को हो रही परेशानियों को अनदेखी कर रही केंद्र और राज्य सरकारों को समझना होगा कि जितनी ज़रूरत शहरों में बिजली की ही उतनी ही ज़रूरत गांवों में भी... हालांकि बिजली की कटौती धुआंधार कटौती से जूझ रही जनता को राहत कब मिलेगी इसका जवाब हाल-फिलता नहीं दिख रहा.. दूसरी ओर ये कहना ग़लत नहीं होगा कि अगर स्थिति ऐसे ही बनी रही तो आगे कई आंदोलन भी देखने को मिल सकते हैं।

इसे भी पढ़ें- सरकार का दो तरफ़ा खेल... ‘’कोयले की कमी भी नहीं विदेशों से आयात भी करना है’’

इस साल यूपी को ज़्यादा बिजली की ज़रूरत

power cut
electricity
electricity shortage
Coal
Coal Shortage
Coal Import
NTPC
Protest

Related Stories

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज

दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

स्कीम वर्कर्स संसद मार्च: लड़ाई मूलभूत अधिकारों के लिए है

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

जानें: RRB-NTPC के खिलाफ क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं छात्र? क्या है पूरा मामला?


बाकी खबरें

  • Moscow
    एम. के. भद्रकुमार
    भारत ने खेला रूसी कार्ड
    06 Nov 2021
    पुतिन की दिल्ली यात्रा से कुछ हफ्ते पहले इस महीने के अंत में मास्को में रूसी-भारतीय "2+2" मंत्रिस्तरीय की पहली बैठक घटनापूर्ण या महत्वपूर्ण होने वाली है क्योंकि यह वाशिंगटन में मंत्रिस्तरीय यूएस-…
  • Dalit-Adivasi education
    राज वाल्मीकि
    महामारी से कितनी प्रभावित हुई दलित-आदिवासी शिक्षा?
    06 Nov 2021
    हाल ही में नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स  ने दलित आदिवासियों की शिक्षा पर एक अध्ययन किया। इस अध्ययन में अपेक्षा से अधिक दुखद तथ्य सामने आए हैं।
  • lakshwdeep
    अयस्कांत दास
    भारत में सबसे कम जेल में रहने की दर होने के बावजूद लक्षद्वीप को पांचवीं जेल की आवश्यकता क्यों है?
    06 Nov 2021
    पूरे देश में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में लक्षद्वीप में जेल में रह रहे कैदियों की तादाद सबसे कम 6 फीसदी है। इसकी तुलना में दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश में जेल अधिभोग दर क्रमशः 174.9…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,929 नए मामले, 392 मरीज़ों की मौत
    06 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.43 फ़ीसदी यानी 1 लाख 46 हज़ार 950 हो गयी है।
  • brick workers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: ईंट-भट्ठा उद्योग के बंद होने से संकट का सामना कर रहे एक लाख से ज़्यादा श्रमिक
    06 Nov 2021
    बशीरहाट के ईंट-भट्ठों को फिर से खोलने की अपनी मांग को लेकर बड़ी संख्या में भट्ठा मज़दूर मंगलवार को उत्तर 24 परगना ज़िला प्रशासन कार्यालय पहुंचे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License