NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
उत्पीड़न
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
लखीमपुर में किसानों की हत्या भाजपा सरकार के ताबूत में आख़िरी कील
लखीमपुर जनसंहार का जो ताजा वीडियो वायरल हो रहा है, उसने भाजपा और गोदी मीडिया द्वारा 3 अक्टूबर से लगातार खड़े किए जा रहे झूठ के हवामहल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
लाल बहादुर सिंह
05 Oct 2021
kisan

लखीमपुर खीरी में किसानों को गाड़ियों से जानबूझकर कुचलने का यह वीडियो किसी की भी आत्मा को झखझोर देगा।

पुलिस इस वीडियो का संज्ञान लेकर इन गाड़ियों के मालिकों, इनमें बैठे लोगों, और इस प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्तियों को चिन्हित कर तत्काल गिरफ्तार करे।

#LakhimpurKheri@dgpup pic.twitter.com/YmDZhUZ9xq

— Varun Gandhi (@varungandhi80) October 5, 2021

(यह वीडियो वरुण गांधी ने शेयर किया है। जो किसी विपक्ष के नेता नहीं बल्कि पीलीभीत से बीजेपी के ही सांसद हैं।)

लखीमपुर जनसंहार का जो ताजा वीडियो वायरल हो रहा है, उसने भाजपा और गोदी मीडिया द्वारा 3 अक्टूबर से लगातार खड़े किए जा रहा झूठ के हवामहल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। अब इसमें कोई शक की गुंजाइश ही नहीं बची है कि मोदी जी के मंत्री अजय मिश्र टेनी ने किसानों को 2 मिनट में ठीक कर देने की जो धमकी दी थी, उनके लाडले ने 3 अक्टूबर को उसे ही सच कर दिखाया था।

वीडियो से बिल्कुल साफ है कि शांतिपूर्वक लौट रहे किसानों पर धोखे से, पीछे से गाड़ी-चढ़ाई गयी। हत्यारों का निशाना सम्भवतः तेजिंदर सिंह विर्क थे, जो तराई किसान यूनियन के जांबाज नेता और संयुक्त किसान मोर्चा की वर्किंग कमेटी के सदस्य हैं। 26 जनवरी के नाटकीय घटनाक्रम के सबसे नाजुक, निर्णायक क्षणों में राकेश टिकैत की सबसे बड़ी ताकत बन कर उन्होंने गाजीपुर बॉर्डर पर एक बेमिसाल भूमिका निभाई थी, जिसके लिए किसान-आंदोलन उनका हमेशा ऋणी रहेगा। वे फिलहाल मेदांता अस्पताल दिल्ली में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

(लखीमपुर की घटना को लेकर यह एक नया वीडियो और सामने आया है। जिसमें लोग गाड़ी से कूदकर भागते नज़र आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये वही लोग हैं जिन्होंने किसानों को गाड़ी से कुचला।)

इस वीडियो में एक थार से कूद कर भागते लोग नज़र आते हैं।कहा जा रहा है कि यह लखीमपुर में थार से किसानों को कुचल कर भागते लोग हैं।@Lakhimpurpolice को इसकी सच्चाई बतानी चाहिए। pic.twitter.com/tdauUuaOjb

— Kamal khan (@kamalkhan_NDTV) October 5, 2021

लखीमपुर जनसंहार का एक false narrative गढ़ने के लिए भाजपा और गोदी मीडिया इसे 26 जनवरी के घटनाक्रम से जोड़ रहे हैं। उनका कहना बेशक सच है, लेकिन उल्टे ढंग से !

ठीक जिस तरह 26 जनवरी को खालिस्तान से जोड़कर, सिखों के खिलाफ अंधराष्ट्रवादी उन्माद को उभारकर कत्लेआम करने और किसान-आंदोलन को कुचल देने की साजिश रची गयी थी, ठीक वैसे ही तराई इलाका, जहां सिख किसानों की बड़ी आबादी है, जो पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ किसान-आंदोलन का UP में सबसे मजबूत इलाका है और जो अवध व पूर्वांचल में आंदोलन के विस्तार का लॉन्चिंग पैड बन रहा है, वहां बब्बर खालसा और खालिस्तान की कहानी गढ़कर सिख किसानों के ख़िलाफ़ ध्रुवीकरण करने, आंदोलन के नेतृत्व को खत्म कर देने और शैशवावस्था में ही UP में आंदोलन की सम्भावनाओं को खत्म कर देने का भयानक षड्यंत्र रचा गया था। पर्दे के पीछे सूत्रधार और होंगे, पर इसे अंजाम दिया गया मोदी जी के नए नवेले गृह-राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के माध्यम से, जिन्हें हाल ही में चुनाव के मद्देनजर जाति विशेष के चेहरे के बतौर लाया गया था। लोग आश्चर्यचकित थे कि जातिवाद के लिए मोदी जी को कोई और नहीं मिला !

बहरहाल, टेनी ने मोदी जी के अपने प्रति व्यक्त विश्वास को ' सही ' साबित करते हुए 3 अक्टूबर के खूनी खेल के 1 सप्ताह पूर्व 25 सितंबर को संपूर्णानगर में एक सभा में अपना असली परिचय बता दिया ( जिसे स्थानीय लोग पहले से जानते थे)। उन्होंने कहा कि वे मंत्री और विधायक बनने के पहले कुछ और थे, उन्हें किसानों को ठीक करने में 2 मिनट लगेगा। उन्होंने सिख किसानों को लक्ष्य कर कहा कि निघासन-पलिया ही नहीं पूरे लखीमपुर, उत्तर प्रदेश से खदेड़वा दूंगा।

और इसी के साथ सिख किसानों के खिलाफ उस पूरे इलाके में नफरती अभियान छेड़ दिया गया, लालच दिया गया कि सिखों को खदेड़ने के बाद उनकी जमीन-जमीन जायदाद हमारे कब्जे में आ जायेगी !

यह कम आश्चर्यजनक नहीं है कि एक केंद्रीय मंत्री, वह भी उस गृह विभाग का जिसका सीधा सम्बन्ध आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था से है, उसके ऐसे संवेदनशील मसले पर, इस तरह के खुले आम गैर-कानूनी, संविधान-विरुद्ध, आपराधिक, भड़काऊ बयान के बावजूद मोदी-योगी किसी सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इससे शक होना स्वाभाविक है कि क्या टेनी के इस खतरनाक खेल को ऊपर से हरी झंडी थी ?

यह शक और गहरा हो जाता है क्योंकि अब यह बात सार्वजनिक हो चुकी है कि जिला प्रशासन ने सरकार को सूचित कर दिया था कि टेनी के बयान को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है और टेनी के गांव में उपमुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आने से हालात बिगड़ सकते हैं। इस सब को अनसुना करके कार्यक्रम आयोजित किया गया। हेलीपैड पर किसानों के कब्जे के बाद भी कार्यक्रम कैंसिल नहीं किया गया और अंततः किसानों को सबक सिखाने के लिए यह जनसंहार रच दिया गया।

घबराई योगी सरकार को डैमेज कंट्रोल के लिए जिस तरह किसानों के आगे झुकना पड़ा है और मंत्रीपुत्र के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करना पड़ा है, उससे यह साफ है कि पूरा दांव उल्टा पड़ गया है। पूरे देश में भाजपाइयों के इस राज्य-प्रायोजित जनसंहार के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है।

5 राज्यों, विशेषकर UP व उत्तराखंड चुनाव के पहले यह सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है, मतदान तक और उसके बाद भी शहीद किसानों का खून अब मोदी-योगी सरकार को चैन से नहीं बैठने देगा। उत्तराखंड की 70 में से 20 और यूपी की 406 में लगभग 150 सीटें- पश्चिम यूपी और तराई की-सीधे आंदोलन की चपेट में हैं। इस खूंरेजी के बाद मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी भाजपा के खिलाफ किसानों का गुस्सा भड़क उठा है।

4 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों, शहरों, कस्बों में जनता ने सड़कों पर उतर कर प्रतिरोध किया, जिसे पुलिस दमन के बल पर कुचलने की नाकाम कोशिश की गई। योगी सरकार ने सारे विपक्षी नेताओं को बिल्कुल गैरकानूनी ढंग से गिरफ्तार कर, मुख्यमंत्रियों तक को यहां land करने से रोककर जिस तरह जनता की आवाज दबाने की कोशिश किया, वह अभूतपूर्व है और लोकतन्त्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। एक बार फिर यह बिल्कुल साफ हो गया कि मोदी-योगी संसदीय लोकतन्त्र की न्यूनतम मर्यादाओं की भी परवाह नहीं करते और एकछत्र, एकपार्टी अधिनायकवादी राज के रास्ते पर बढ़ रहे हैं।

किसानों के ख़िलाफ़ लट्ठ उठाने के लिए संघ-भाजपा कायकर्ताओं को provoke करते हुए मुख्यमंत्री खट्टर का जो वीडियो वायरल हो रहा है, और अब लखीमपुर में मोदी जी के गृह राज्यमंत्री द्वारा गुंडावाहिनी के बल पर किसान-आंदोलन से निपटने का जो कारनामा अंजाम दिया गया है, वह बढ़ते जनप्रतिरोध के खिलाफ राज्य-प्रायोजित vigilante गिरोहों के फासिस्ट रास्ते की ओर बढ़ने का ही संकेत है। दरअसल, मॉब लिंचिंग इसी का localised स्वतःस्फूर्त version था जिसे अब सीधे शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा प्रायोजित और संगठित किया जा रहा है।

जाहिर है अगले कुछ महीने हमारे लोकतंत्र के भविष्य के लिए निर्णायक होंगे। नफरत की आग में पूरे प्रदेश और देश को झुलसाने, जनता की एकता को तोड़ने और चुनावी वैतरणी पार करने के लिए अनगिनत साजिशें होंगी। मेहनतकश जनसमुदाय, नागरिक समाज, लोकतान्त्रिक शक्तियों जनान्दोलन की ताकतों, विपक्षी दलों को एकजुट होकर इसका मुकाबला करना होगा और सड़क पर तथा ballot पर, दोनों मोर्चों पर इसे शिकस्त देना होगा।

लखीमपुर जनसंहार के जिम्मेदार केंद्रीय मंत्री टेनी की मोदी मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी, खट्टर और टेनी के खिलाफ संवैधानिक पद पर बैठकर वैमनस्य फैलाने और हिंसा भड़काने के आरोप में कार्रवाई की मांग आने वाले दिनों में किसान आंदोलन और लोकतांत्रिक ताकतों की सर्वप्रमुख मांग बनी रहनी चाहिए।

हमारे लोकतंत्र और देश को बचाने की अवाम की फैसलाकुन जंग में महान किसान आंदोलन इसके मेरुदण्ड की तरह खड़ा है। इसकी हर हाल में रक्षा करनी होगी, इसके बचे रहने और ताकतवर होने में ही हमारे गणतंत्र के पुनर्जीवन की उम्मीद पल रही है।

जनता आगामी चुनावों में लोकतन्त्र की हत्या पर आमादा योगी -मोदी सरकार का अंत करेगी।

(लेखक इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Lakhimpur Kheri Update
Lakhimpur Kheri
farmers protest
Attack on Farmers
Union Minister Ashish Mishra
kisan andolan
Indian Farmers Union
Samyukt Kisan Morcha
rakesh tikait
UP police
Yogi Adityanath

Related Stories

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

कौन हैं ओवैसी पर गोली चलाने वाले दोनों युवक?, भाजपा के कई नेताओं संग तस्वीर वायरल

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

पीएम को काले झंडे दिखाने वाली महिला पर फ़ायरिंग- किसने भेजे थे बदमाश?


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License