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म्यांमा में तख़्तापलट के बाद सबसे ख़ूनी दिन, बड़ी संख्या में लोगों ने जान गंवाई!
यांगून में मौजूदा समय के मृत्यु के आंकड़ों को एकत्रित कर रहे एक स्वतंत्र शोधकर्ता ने शनिवार को दोपहर बाद तक मरने वाले लोगों का आंकड़ा 74 बताया है। एसोसिएटेड प्रेस स्वतंत्र रूप से मौत के इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं करता है।
एपी
27 Mar 2021
म्यांमा में तख़्तापलट के बाद सबसे ख़ूनी दिन, बड़ी संख्या में लोगों ने जान गंवाई!

यांगून (म्यांमा): म्यांमा की सेना ने देश की राजधानी में शनिवार को परेड के साथ वार्षिक सशस्त्र बल दिवस का अवकाश मनाया, वहीं देश के अन्य इलाकों में पिछले महीने हुए तख्तापलट के विरोध में हो रहे प्रदर्शन को दबाने के तहत सैनिकों व पुलिसकर्मियों द्वारा दर्जनों लोगों की हत्या किये जाने की खबर है।

यांगून में मौजूदा समय के मृत्यु के आंकड़ों को एकत्रित कर रहे एक स्वतंत्र शोधकर्ता ने शनिवार को दोपहर बाद तक मरने वाले लोगों का आंकड़ा 74 बताया है। ये मृतक करीब दो दर्जन शहरों और कस्बों से थे। यह आंकड़े इसे तख्तापलट के बाद से सबसे रक्तरंजित दिनों में से एक बनाते हैं।

अपनी सुरक्षा के मद्देनजर नाम न जाहिर करने की इच्छा व्यक्त करने वाला यह शोधकर्ता आम तौर पर प्रतिदिन ‘असिस्टेंस असोसिएशन ऑफ पॉलिटिकल प्रिजनर्स’ द्वारा जारी आंकड़ों का मिलान करता है। यह संस्था मृत्यु और गिरफ्तारी के आंकड़ों का ब्योरा रखती है और इसे पुख्ता सूत्र के तौर पर देखा जाता है। एसोसिएटेड प्रेस स्वतंत्र रूप से मौत के इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं करता है।

इन हत्याओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक निंदा हुई है और म्यांमा में कई कूटनीतिक मिशनों ने बयान जारी किए हैं जिनमें शनिवार को बच्चों समेत नागरिकों की हत्या का जिक्र है।

म्यांमा के लिये यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने ट्विटर पर कहा, “76वां म्यांमा सशस्त्र बल दिवस आतंक और असम्मान के दिन के तौर पर याद किया जाएगा। बच्चों समेत निहत्थे नागरिकों की हत्या ऐसा कृत्य है जिसका कोई बचाव नहीं है।”

आन सान सू ची की निर्वाचित सरकार को एक फरवरी को तख्तापलट के जरिये हटाने के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों से निपटने के लिये प्रशासन ज्यादा ताकत का इस्तेमाल कर रहा है और ऐसे में म्यांमा में मरने वालों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। करीब पांच दशक के सैन्य शासन के बाद लोकतांत्रिक सरकार की दिशा में हुई प्रगति पर इस सैन्य तख्तापलट ने विपरीत असर डाला है।

एसोसिएशन ऑफ पॉलिटिकल प्रिजनर्स ने शुक्रवार तक तख्तापलट के बाद हुए दमन में 328 लोगों की मौत की पुष्टि की थी। सबसे ज्यादा मौत 14 मार्च को दर्ज की गई थीं जब कम से कम 74 लोगों की जान गई थी लेकिन तब देश के सबसे बड़े शहर यांगून में कुछ ही लोगों की जान गई थी।

जुंटा प्रमुख वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने तख्तापलट के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों का प्रत्यक्ष जिक्र नहीं किया, लेकिन उन्होंने देश की राजधानी नेपीता के परेड मैदान में हजारों जवानों के समक्ष दिए भाषण में ‘‘ राज्य की शांति एवं सामाजिक सुरक्षा के लिए हानिकारक हो सकने वाले आतंकवाद’’ का जिक्र किया और इसे अस्वीकार्य बताया।

इस साल के कार्यक्रम को हिंसा को उकसाने वाले के तौर पर देखा जा रहा है प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि वे तख्तापलट का दोगुना सार्वजनिक विरोध करेंगे और बड़े प्रदर्शनों का आयोजन करेंगे।

प्रदर्शनकारियों ने अवकाश को उसके मूल नाम ‘प्रतिरोध दिवस’ के तौर पर मनाया जो द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी कब्जे के विरोध में बगावत की शुरुआत थी।

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Aung Saan Suu Kyi
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Violence
Protest

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