NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
न भारत की आबादी में भयंकर बढ़ोतरी हो रही है और न ही मुस्लिमों की आबादी में
उत्तर प्रदेश से लेकर असम तक हर जगह जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की बात की जा रही है। तो चलिए जरा ठोक पीटकर देखें कि क्या सच में जनसंख्या नियंत्रण क़ानून की ज़रूरत है?
अजय कुमार
22 Jun 2021
न भारत की आबादी में भयंकर बढ़ोतरी हो रही है और न ही मुस्लिमों की आबादी में
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: सोशल मीडिया

एनसीईआरटी की सातवीं क्लास की किताब में एक लाइन लिखी है कि जनसंख्या एक ऐसा संदर्भ बिंदु है, जिसके सहारे दुनिया की हर परेशानी की व्याख्या की जा सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उस परेशानी की असली वजह जनसंख्या ही हो।

भारत में शोर मचाकर सच की हवा निकाल देने वाली भारतीय राजनीति भी यही खेल खेल रही है। बेरोजगारी क्यों है? जवाब मिलेगा की जनसंख्या बहुत अधिक है। गरीबी क्यों है? जवाब मिलेगा की जनसंख्या बहुत अधिक है। कोरोना से लड़ने में परेशानी क्यों हो रही है? जवाब मिलेगा की जनसंख्या बहुत अधिक है। अगर भाजपा जैसी पार्टी सरकार में हो तो इसके साथ एक लाइन और जुड़ जाएगी कि मुस्लिमों की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। यह हिंदुओं के सामने बहुत अधिक परेशानी खड़ा करेगी।

उत्तर प्रदेश से लेकर असम तक हर जगह जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की बात की जा रही है। तो चलिए जरा ठोक पीटकर देखें कि क्या सच में जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है?

सबसे पहला सवाल यही कि क्या सच में भारत की आबादी बढ़ रही है? इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। आबादी की सालाना वृद्धि दर की गणना के फॉर्मूले के आाधार पर भारत में आबादी बढ़ने की दर अब केवल 1.3 फीसद (2011-16) रह गई है जो 1971 से 1981 के बीच में 2.5 फीसद थी। यह रफ्तार अब दक्षि‍ण एशि‍या (1.2 फीसद) के प्रमुख देशों के आसपास है और निम्न मझोली आय वाले देशों की वृद्धि दर (1.5 फीसद) से कम है (वि‍श्व बैंक)। यानी ऊंची आबादी वृद्धि दर (2 से 2.5 फीसद) के दिन पीछे छूट चुके हैं।

अगर इन आंकड़ों को खंगाल कर देखें तो पता चलता है कि दक्षिण भारत के राज्य की आबादी तो एक फ़ीसदी से कम के दर से बढ़ रही है। केवल दक्षिण भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण भारत समेत बंगाल उड़ीसा पंजाब असम हिमाचल महाराष्ट्र कुल 13 राज्यों की आबादी एक फ़ीसदी से कम की दर पर बढ़ रही है। यानी भारत की तकरीबन आधी आबादी 1 फ़ीसदी कम की दर से बढ़ रही है। यह स्थिति यूरोप की आबादी में हो रही बढ़ोतरी की तरह है। बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान बहुत अधिक आबादी बढ़ने वाले जगहों के तौर पर कुख्यात हैं। पिछले कुछ सालों में इनकी भी आबादी बढ़ने की दर में बहुत तेजी से गिरावट देखी गई है।

एक औरत की अपने प्रजनन काल में बच्चा पैदा करने की दर को टोटल फर्टिलिटी रेट कहा जाता है। सिंपल शब्द में समझे तो मातृत्व आयु के दौरान प्रति औरत बच्चा पैदा करने की संभावना। साल 1971 में यह दर करीबन 5.3 फीसद थी। साल 2016 में यह दर घटकर 2.3 फीसद हो गई। इसका नतीजा यह हुआ है कि 13 राज्यों में टोटल रिप्लेसमेंट दर 2.1 फीसद से भी कम हो चुकी है। जनसंख्या बढ़ोतरी के मामले में रिप्लेसमेंट दर का पैमाना बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर रिप्लेसमेंट दर्द 2.1 फीसद के नीचे है तो इसका मतलब यह है कि आने वाली पीढ़ी में पैदा होने वाले बच्चों से आबादी बढ़ेगी नहीं बल्कि नियंत्रित रहेगी। दक्षिण और पश्चिम के राज्य में तो यह दर 1.4 से 1.6 फीसद के आसपास आ चुकी है। मतलब दक्षिण भारत के राज्य मान चुके हैं कि दो से कम बच्चा पैदा करना ही सबसे अच्छा है।

फर्टिलिटी रेट में आने वाली कमी के पीछे कई सारे कारण मौजूद होते हैं। जैसे एक प्रमुख कारण है - इस समय सूचनाओं का प्रसार, आमदनी और परिवार की देखभाल को लेकर सजग चिंता। इन सभी प्रवृत्तियों के आधार पर अनुमान है कि साल 2031 तक भारत की जनसंख्या वृद्धि दर एक फ़ीसदी से नीचे आ सकती है और 2041 तक यह 0.5 फीसद से नीचे हो सकती है। अगर यह स्थिति होगी तो जनसंख्या वृद्धि दर के मामले में हम विकसित देशों के बराबर खड़े होंगे।

इन सभी आंकड़ों का इशारा इस तरफ है कि भारत की आबादी नियंत्रित है और आने वाले दौर में भी नियंत्रित रहेगी। लेकिन सवाल यही है कि सरकारें यह खेल क्यों खेलती हैं कि भारत की आबादी को नियंत्रित करने के लिए कानून लाया जाएगा?

इसका कोई निश्चित जवाब देना मुमकिन नहीं है। इस के ढेर सारे कारण हो सकते हैं। पहला कारण तो यही होता है कि किसी भी परेशानी के सामने जनसंख्या वृद्धि का पासा फेंक कर लोगों को गुमराह कर दिया जाए। लोक प्रशासन बेहतर न किया जाए और सारा ठीकरा भारत की जनसंख्या पर फोड़ दिया जाए। जबकि हकीकत यह है कि अगर जनसंख्या में नौजवानों की संख्या अधिक है, कार्यबल अधिक है तो वह किसी भी देश के लिए एक संपदा की तरह होता है। उसका भरपूर दोहन करने की जरूरत होती है। अगर इन्हें नौकरी मिलेगी तो इनकी भी तरक्की होगी और देश की भी तरक्की होगी। लेकिन डर बिल्कुल उलट है।

डर की असली कहानी शायद यह हो सकती है कि सरकार नौजवानों को नौकरी नहीं दे पा रही है। नौजवानों की बड़ी फौज बेरोजगारी में जी रही है। बेरोजगारी की परेशानी को विकराल बनने से बचाने के लिए हर साल तकरीबन एक करोड़ पचास लाख नौकरी मुहैया कराना जरूरी है। अब यह कैसे हो? इसका सीधा और सिंपल जवाब यह हो सकता है कि जनसंख्या को कंट्रोल करने का रास्ता अख्तियार करने का कानून लाया जाए।

अब आते हैं जनसंख्या वृद्धि और सांप्रदायिक मुद्दे पर। आप सबने अपने आसपास यह तर्क जरूर सुना होगा कि मुस्लिम लोग खूब बच्चे पैदा करते हैं। इस योजना के तहत करते हैं कि वह आबादी के मामले में इतने  अधिक हो जाए पूरी दुनिया पर उनकी हुकूमत चले। अगर यह हो जाएगा तब तो हिंदू खतरे में पड़ जाएगा। जिस तरह से मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ रही है वह एक दिन पूरे भारत को अपने अंदर खा जाएंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थकों की तरफ से कहा जाता है कि  भारत में आजादी के समय हिंदुओं की जनसंख्या कुल आबादी में 88 फ़ीसदी थी और मुस्लिम तकरीबन 9.3 फ़ीसदी थे। साल 2011 की जनगणना के बाद हिंदुओं की आबादी घटकर तकरीबन 83 फ़ीसदी हो गई और मुस्लिम की आबादी बढ़कर तकरीबन 15 फ़ीसदी हो गई। इस तरह से एक दिन ऐसा आएगा कि मुस्लिम लोग पूरे भारत की आबादी बन जाएंगे।


मुस्लिमों पर लगाए जाने वाले इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। है तो केवल सांप्रदायिकता की भावना। जिसके दम पर मुस्लिमों के खिलाफ नफरत ही हवा बहाई जाती है। हकीकत यह है कि साल 2011 की जनगणना के मुताबिक मुस्लिमों की आबादी साल 2001 में भारत की कुल आबादी की तकरीबन 13.4 फ़ीसदी थी जो साल 2011 में बढ़कर 14.2 फ़ीसदी हो गई।  पिछले दशक के मुकाबले महज 0.8 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि हर साल होने वाली बढ़ोतरी की दर में पिछले दशक से गिरावट दर्ज की गई। इस तरह से मुस्लिमों की जो जनसंख्या साल 2001 में तकरीबन 13.8 करोड़ थी वह बढ़कर साल 2011 में 17.22 करोड़ हो गई। जबकि साल 2011 में हिंदुओं की आबादी तकरीबन 96. 63 करोड़ थी।

यह आंकड़े बताते हैं कि मुस्लिमों की जनसंख्या की प्रवृत्ति बढ़ने वाली नहीं बल्कि घटने वाली है। आजादी के बाद गिनती के मामले में मुस्लिम जनसंख्या भले बढ़ी हो लेकिन मुस्लिम लोगों ने कम बच्चे पैदा करने की चाह भी विकसित की है। यह भविष्य में और कम होती जाएगी। इसलिए आंकड़ों के मद्देनजर देखा जाए तो वह सारे आरोप बेबुनियाद हैं जो मुस्लिमों की भयंकर आबादी बढ़ने के तौर पर दिए जाते हैं।

इस विषय पर और पढ़ें :

जनसंख्या नियंत्रण– एक ख़तरनाक प्रस्ताव

जनसंख्या विस्फोट पर नरेंद्र मोदी की चिंता और संघ का एजेंडा

पीएम साहब कृपया ध्यान दें: 96 बीजेपी सांसदों के तीन या इससे अधिक बच्चे हैं

बढ़ती आबादी पर प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी की चिंता के मायने

Population of India
demographics
minorities
Muslim population trends
Hindu rate of growth
indian population

Related Stories

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

संकट की घड़ी: मुस्लिम-विरोधी नफ़रती हिंसा और संविधान-विरोधी बुलडोज़र न्याय

मुसलमानों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा पर अखिलेश व मायावती क्यों चुप हैं?

मेरे मुसलमान होने की पीड़ा...!

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

रुड़की : हनुमान जयंती पर भड़की हिंसा, पुलिस ने मुस्लिम बहुल गांव में खड़े किए बुलडोज़र

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

देश भर में निकाली गई हनुमान जयंती की शोभायात्रा, रामनवमी जुलूस में झुलसे घरों की किसी को नहीं याद?

अब भी संभलिए!, नफ़रत के सौदागर आपसे आपके राम को छीनना चाहते हैं

देश में पत्रकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ एकजुट हुए पत्रकार, "बुराड़ी से बलिया तक हो रहे है हमले"


बाकी खबरें

  • cartoon
    आज का कार्टून
    किसान आंदोलन का एक साल: ...अब MSP का पहाड़ तोड़ना बाक़ी है
    26 Nov 2021
    रस्ता हो जाता है परबत सागर में भी, जब जज़्बा होता है, जब हिम्मत होती है।
  • Police Turkey fired tear gas to stop female protesters
    एपी
    तुर्की में पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दागे आंसू गैस के गोले
    26 Nov 2021
    महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के उन्मूलन के लिए 25 नवंबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में इस्तांबुल की मुख्य सड़क इस्तिकलाल पर मार्च निकाला गया।
  • Siberia
    एपी
    रूस के साइबेरिया में कोयला खदान में आग लगने से 52 लोगों की मौत : रूसी मीडिया
    26 Nov 2021
    दक्षिण-पश्चिमी साइबेरिया के केमेरोवो क्षेत्र में घटना के वक्त लिट्सव्याजहन्या खदान में कुल 285 लोग थे और ‘वेंटिलेशन सिस्टम’ के माध्यम से खदान में धुआं जल्दी ही भर गया। इससे पहले, बचाव दल ने 239…
  • constitution
    भाषा
    संवैधानिक संस्थाओं पर निरंतर आघात कर रही भाजपा सरकार: कांग्रेस
    26 Nov 2021
    कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद आज संविधान दिवस के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
  • Akhilesh Yadav
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश में सपा-आरएलडी के गठबंधन के बाद बीजेपी को नहीं मिलेगा स्पष्ट बहुमत - विशेषज्ञों का दावा
    26 Nov 2021
    अखिलेश और जयंत की साझेदारी से जाट और मुस्लिम क़रीब आ सकते हैं और इससे बीजेपी का संतुलन ख़राब हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License