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व्यंग्य
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राजनीति
तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष
हमारे वर्तमान सरकार जी पिछले आठ वर्षों से हमारे सरकार जी हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार जी भविष्य में सिर्फ अपने पहनावे और खान-पान को लेकर ही जाने जाएंगे। वे तो अपने कथनों (quotes) के लिए भी याद किए जाएंगे।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
05 Jun 2022
cartoon

मैं एक देश में रहता हूं। हम सभी एक देश में ही रहते हैं। हो सकता है कुछ लोग एक से अधिक देशों में भी रहते हों पर अधिकतर लोग एक ही देश में रहते हैं। वे लोग भी रहते भले ही कितने भी देशों में हों पर वे सभी लोग भी आमतौर पर नागरिक एक ही देश के होते हैं।

जिस देश में मैं रहता हूं, जिस देश का मैं नागरिक हूं, उस देश में एक सरकार जी भी हैं। अधिकतर देशों में एक ही सरकार जी होते हैं। कुछ देश ऐसे भी होते हैं जहां एक से अधिक सरकार जी होते हैं। कुछ देशों में वहां के सरकार जी तो होते ही हैं पर साथ ही साथ अमरीका के सरकार जी, अमरीका के सरकार जी होने के साथ-साथ वहां के सरकार जी भी होते हैं। पता नहीं यह हमारा सौभाग्य है या दुर्भाग्य, हमारे साथ ऐसा नहीं है। हमारे सरकार जी सिर्फ एक ही हैं जो जब विदेश में नहीं होते हैं तब देश में ही होते हैं।

हमारे वर्तमान सरकार जी पिछले आठ वर्षों से हमारे सरकार जी हैं। बहुत सारे सरकार जी को बहुत सारे शौक होते हैं। सो हमारे सरकार जी को भी बहुत सारे शौक हैं। हमारे सरकार जी को सुंदर सुंदर अचकनें मतलब जैकेट पहनने का बहुत ही शौक है। जैकेट तो वे इतनी खूबसूरत और रंग-बिरंगी पहनते हैं कि सभी लोग, देशी या विदेशी, उन पर फिदा हैं। और खूबी यह कि सरकार जी जैकेट बदल भी पलक झपकते ही लेते हैं और वह भी दिन में चार-छह बार। लोग बाग किस्से सुनाते हैं कि किस राजा के पास हजारों जूते थे या फिर किस तानाशाह के पास सैकड़ों सूट। वर्षों बाद लोग हमारे सरकार जी को भी ऐसे ही याद किया करेंगे कि उनकी अलमारी में हजारों अचकनें टंगी रहतीं थीं।

सरकार जी सिर्फ अचकनों यानी जैकेटों के लिए ही याद नहीं किए जाएंगे अपितु अपनी लाखों की घड़ियों, ऐनकों और कलमों के लिए भी याद किए जाएंगे। साथ ही साथ विभिन्न प्रकार की टोपियों, शानदार शालों और खाने में महंगे मशरूम के लिए भी जाने जाएंगे। भविष्य में लोग बाग कहानियां सुनाया करेंगे कि उस जमाने के सरकार जी बहुत ही शौकीन मिजाज थे। क्या महंगी महंगी घड़ियां पहनते थे। क्या जानदार गोगल्स लगाते थे। और पेन तो ऐसा कि उसको जेब से निकालने का, उसको इस्तेमाल करने का, उससे कुछ लिखने का मन ही न करे। लोग अपने बच्चों को सरकार जी के सूट की कहानी भी सुनायेंगे कि कैसे सरकार जी ने एक बार ऐसा सूट पहना था कि विश्व के सबसे अमीर देश का सरकार जी भी बस उन्हें निहारता रह गया, एकटक देखता रह गया।

ऐसा नहीं है कि सरकार जी भविष्य में सिर्फ अपने पहनावे और खान-पान को लेकर ही जाने जाएंगे। वे तो अपने कथनों (quotes) के लिए भी याद किए जाएंगे। उनका एक प्रसिद्ध कथन है, 'झूठ बोलो, झूठ बोलो, बार बार झूठ बोलो'। सरकार जी ने यह न सिर्फ कहा है, बल्कि इसे अपने जीवन में भी बखूबी उतारा। उन्होंने इस कथन को पूरी तरह से जिया है। और उन्होंने ही नहीं, उनके सभी मंत्रियों, प्रवक्ताओं और फोलोवर्स ने भी सरकार जी के इस झूठ बोलने के मंत्र को पूरी तरह फोलो किया।

सरकार जी का एक और कथन है, जिसे देश की जनता, देश का समाज हमेशा याद रखेगा। वह यह कि 'हिप्पोक्रेसी की भी सीमा होती है'। लेकिन हिप्पोक्रेसी की यह सीमा समाज ने नहीं, किसी और ने नहीं, अपने लिए हिप्पोक्रेसी की सीमा सरकार जी ने अपने आप ही फिक्स की है। पर एक बार जो सीमा सरकार जी ने बनाई है, सरकार जी ने उसे कभी नहीं लांघा है। वह सीमा बनाई ही ऐसी गई है कि कितना भी पाखंड कर लो, कितनी भी हिप्पोक्रेसी कर लो, लंघती ही नहीं है।

खैर ये सब तो बेकार की, मजाक की बातें हैं। असली बात तो यह है कि सरकार जी ने काम भी बहुत से किए। आठ वर्षों में सरकार जी ने इतने काम किए कि काम करने के चक्कर में रात रात भर जागते रहते हैं, सोते तक नहीं हैं। जब सरकार जी ने जरा ज्यादा ही काम कर लिए तो जनता ने भी रात को सोना छोड़ दिया। जनता को भी अनिंद्रा की बीमारी हो गई। जनता की नींद पहले तो नोटबंदी ने हरी। वह इतना महान और ऐतिहासिक काम था कि सरकार जी भी अब उसको याद नहीं करते हैं। नोटबंदी की बरसी भी नहीं मनाते हैं। हां! जनता जरूर उसे याद करती है, याद रखती है।

नोटबंदी एक चीज हो तो याद रखी जाए। नोटबंदी के बाद जीएसटी, फिर लॉकडाउन। अब महंगाई, बेरोज़गारी। सरकार जी के काल में जनता की नींद उड़ाने के लिए एक चीज हो तो बताई जाए। एक चीज को भूलते हैं तो दूसरी चीज आ जाती है, नींद उड़ाने के लिए। सरकार जी के कम सोने की बात तो इतिहास में जरूर लिखी जाएगी पर जनता के कम सोने की बात इतिहास में कौन लिखेगा? इतिहास तो राजाओं और सरकार जीयों का ही लिखा जाता है। जनता का इतिहास कौन लिखेगा?

(व्यंग्य स्तंभ ‘तिरछी नज़र’ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
8 years of Modi government

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