NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: हैप्पी न्यू ईयर सरकार जी!
एक व्यंग्यकार के लिए नव वर्ष के अवसर पर व्यंग्य लिखते हुए शुभकामनाएं देना बहुत ही मुश्किल काम है। यह इतना ही मुश्किल काम है जितना मुश्किल काम है सरकार जी के लिए कुछ भी करना।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
02 Jan 2022
cartoon
प्रतीकात्मक तस्वीर। कार्टून साभार: मंजुल

हैप्पी न्यू ईयर, हैप्पी न्यू ईयर 2022। सभी मित्रों को, सभी सुधीजनों को, सभी पाठकों को मेरी ओर से नववर्ष की शुभकामनाएं।

एक व्यंग्यकार अपने पाठकों को शुभकामनाएं दे तो कैसे दे। कवि हो तो नववर्ष पर कोई नई नवेली कविता लिख सकता है। कोई लेखक हो तो नववर्ष की संभावनाओं पर लेख लिख सकता है, पुराने वर्ष का लेखा जोखा लिख सकता है। सरकार हो तो अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं दे सकती है, और उपलब्धियों पर गर्व भी कर सकती है। और विरोधी हों तो सरकार की कमियां निकालते हुए आने वाले वर्ष की बधाइयां दे सकते हैं। पर एक व्यंग्यकार के लिए नव वर्ष के अवसर पर व्यंग्य लिखते हुए शुभकामनाएं देना बहुत ही मुश्किल काम है। 

यह इतना ही मुश्किल काम है जितना मुश्किल काम है सरकार जी के लिए कुछ भी करना। सरकार जी के लिए कुछ भी करना बहुत ही मुश्किल काम है। सरकार जी जो कुछ करते हैं, उसके लिए तो उनकी आलोचना होती ही है, जो नहीं करते हैं, उसके लिए भी उन्हें आलोचना झेलनी पड़ती है। वास्तव में ही सरकार जी बनना बहुत ही मुश्किल काम है।

सरकार जी अपना सब कुछ छोड़ कर, अपना बसा बसाया घर बार छोड़कर, सरकार जी बनने आए। ऐसा मैं नहीं, सरकार जी बार बार स्वयं कहते हैं। सोचो जरा, सरकार जी सरकार जी बनने से पहले कितनी एशो आराम की जिंदगी जीते थे। घर में उनके नीचे सैकड़ों नौकर चाकर थे, दसियों कारों का बेड़ा खड़ा रहता था। और तीन चार तो हवाई जहाज ही खड़े रहते थे। और अब सरकार जी सरकार जी बनकर कितनी बेचारगी की जिंदगी जी रहे हैं। अब जाकर, सात साल बाद अपने लिए बामुश्किल पंद्रह करोड़ रुपए की एक साधारण सी कार का इंतजाम कर पाए हैं। और एक हम हैं कि सरकार जी की आलोचना किए जाते हैं।

सोचो जरा, सरकार जी बनना कितना मुश्किल काम है। सरकार जी जो करते हैं उसकी तो आलोचना होती ही है, जो नहीं करते हैं उसकी भी आलोचना होती है। अब नोटबंदी की तो उसकी तो आलोचना हुई ही, रोजगार नहीं दे पाए तो उसकी भी आलोचना हो रही है। जीएसटी लागू किया तो उसकी बुराई तो होती ही रहती है कि ढंग से लागू नहीं किया, अभी तक फेरबदल किये जा रहे हैं। और जीडीपी नहीं बढ़ा पाए तो उसका दंश भी झेलना पड़ रहा है। यह अजीब बात है जो करो उसकी भी आलोचना हो और जो ना करो उसकी भी आलोचना झेलो।

अब कोरोना काल में ही देखो, पीएम केयर्स फंड बनाया तो उसकी आलोचना हुई। और जब पीएम केयर्स फंड का हिसाब ही नहीं दिया तो उसकी भी आलोचना। जल्दबाजी में लोगों को लॉकडाउन कर दिया तो उससे भी लोगों को चैन नहीं और बेड और ऑक्सीजन नहीं दिये तो उसकी इतनी आलोचना हुई कि पूछो ही मत। मतलब सरकार जी को किसी भी तरह चैन नहीं। न काम करने पर और न काम न करने पर। सरकार जी ने जब श्मशान घाटों को अच्छा, सुविधा संपन्न बनाने की बात की तो लोगों ने वोट तो दे दिया पर जब उन नये बनवाये गये सुविधा संपन्न श्मशान घाटों पर सरकार जी लाइन लगवाने लगे तो लोगों में हाहाकार मच गया।

सरकार जी बहुत ही धार्मिक व्यक्ति हैं। पूजा अर्चना भी करते हैं। सरकार जी की आलोचना तब भी हुई जब उन्होंने केदारनाथ में कैमरे के सामने ध्यान लगाया और तब तो और भी अधिक हुई जब लाखों लोगों के कोरोना से मरने का ग़म समाप्त होने से पहले ही काशी विश्वनाथ में कैमरों के सामने पूजा पाठ किया। जो किया उसकी तो आलोचना हुई ही, पर जो नहीं किया उसकी भी आलोचना तब हुई जब सरकार जी ने हरिद्वार में हुई धर्म संसद में दिए गए भाषणों की आलोचना नहीं की।

पर हम तो बात नववर्ष पर शुभकामनाओं की कर रहे हैं। हमारी सरकार जी को नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं। शुभकामनाएं हैं कि वे ऐसे काम करें जिन्हें करने पर आलोचनाएं न हो। और ऐसे काम जरूर करें जिनके नहीं करने पर उनकी आलोचना हो। और हम जनता को नववर्ष पर यह शुभकामना है कि सरकार जी में यह बदलाव आ जाये कि वे हम जनता भले के लिए ही काम करें।

उम्मीद है वर्ष 2021 से सरकार जी ने और हमने कुछ सीखा हो और 2022 में हमें वर्ष इक्कीस जैसा दौर देखने को न मिले। हम सब अपनों में, अपनों के साथ खुश और स्वस्थ रहें। 2022 के लिए मेरी यही शुभकामनाएं हैं।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
New Year 2022

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • राजनीति: राज्यसभा की आठ सीटें खाली लेकिन उपचुनाव सिर्फ़ एक पर
    अनिल जैन
    राजनीति: राज्यसभा की आठ सीटें खाली लेकिन उपचुनाव सिर्फ़ एक पर
    26 Jul 2021
    हैरानी की बात यह है कि अपने कामकाज और फ़ैसलों पर लगातार उठते सवालों के बावजूद चुनाव आयोग ऐसा कुछ करता नहीं दिखता, जिससे लगे कि वह अपनी मटियामेट हो चुकी साख को लेकर जरा भी चिंतित है।
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 39,361 नए मामले, 416 मरीज़ों की मौत
    26 Jul 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 39,361 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 1.30 फ़ीसदी यानी 4 लाख 11 हज़ार 189 हो गयी है।
  • किसान आज देश की संसद का एजेंडा तय कर रहे हैं, कल देश की राजनीति की तक़दीर तय करेंगे
    लाल बहादुर सिंह
    किसान आज देश की संसद का एजेंडा तय कर रहे हैं, कल देश की राजनीति की तक़दीर तय करेंगे
    26 Jul 2021
    इस अभूतपूर्व आंदोलन में महिलाओं ने अप्रतिम भूमिका निभाई है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि महिलाओं की इस अग्रगामी भूमिका के बिना किसान-आंदोलन का वह चेहरा देश-दुनिया के सामने न होता, जो आज है।
  • modi bhakt
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    "दूर हूँ प्रश्न से, भक्त हूँ स्वप्न से, मैं नहीं जागता, मैं नहीं जागता..."
    25 Jul 2021
    इतवार की कविता में आज पेश है इंदौर से ताल्लुक़ रखने वाले युवा कवि पुनीत शर्मा द्वारा लिखी हबीब जालिब की नज़्म "मैं नहीं जानता" की पैरोडी "मैं नहीं जागता"...
  • क्या Pegasus जैसा कुछ पहले भी हुआ है?
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Pegasus जैसा कुछ पहले भी हुआ है
    25 Jul 2021
    पिछले कुछ दिनों से आयी Pegasus की खबर ने देश और दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है. क्या ऐसा भारत के इतिहास में पहले भी कभी हुआ है? आइये जानते हैं वरष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय के साथ "इतिहास के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License