NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: ‘सरकार जी’ गये परदेस…वाह...आह...लेकिन
पिछले लगभग सौ हफ्तों के बाद ऐसा शुभ अवसर आया है कि सरकार जी विदेश की यात्रा पर गए हैं। ट्रंप जी रहे होते तो वहां, अमरीका में ही 'अबकी बार, योगी सरकार' कर लेते, 'हाउडी मोदी' जैसा कुछ कर लेते। पर अबकी बार...
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
26 Sep 2021
Modi

‘सरकार जी’ विदेश गए हैं। ऐसे वैसे किसी देश नहीं, अमरीका गए हैं। पिछले लगभग सौ हफ्तों के बाद ऐसा शुभ अवसर आया है कि सरकार जी विदेश की यात्रा पर गए हैं। मैं हर रविवार को 'तिरछी नज़र' लिखता हूं और 'तिरछी नज़र' के इतिहास यह रविवार ऐतिहासिक है क्योंकि ऐसा ऐतिहासिक रविवार भी लगभग सौ सप्ताह बाद ही आया है कि जब सरकार जी विदेश में हैं, और विदेश में ही 'तिरछी नज़र' पढ़ेंगे।

वैसे तो सरकार जी बीच में बांग्लादेश भी हो आए हैं। पर वह कोई विदेश जैसा देश थोड़ी ही ना है। हमारे देश जैसा ही देश है। वहां पर भी आप कपड़े देख कर लोगों को पहचान सकते हैं और दूरी इतनी कम कि  हवाई जहाज में एक भी फाइल ढंग से न निपटा सको। हवाई जहाज की सवारी का मजा भी ढंग से ना आ सके। बांग्लादेश की यात्रा भी कोई विदेश यात्रा थी भला। तो मान सकते हैं कि सरकार जी की कोई दो साल बाद ही ढंग की विदेश यात्रा है यह।

सरकार जी बहुत ही कर्मठ हैं। दिन के चौबीस में से अट्ठारह घंटे तो बस काम ही काम करते हैं। और बाकी के छह घंटे में बाकी सब कुछ। खाना-पीना,सोना, शौच और मूत्र, योग और व्यायाम भी। और हां, टीवी देखना भी। और उसी छह घंटे में ही मोरों को दाना खिलाना भी होता है । कोई और आदमी हो तो अट्ठारह घंटे के काम में भले ही न थके पर इस छह घंटे के आराम में जरूर ही थक जाये। पर हमारे सरकार जी तो इस आराम के छह घंटे में से भी काम का समय निकाल लेते हैं, शूटिंग तो कर ही लेते हैं, साक्षात्कार भी दे देते हैं।

पहले मुझे लगता था कि इतना कर्मठ व्यक्ति इतनी लम्बी हवाई यात्रा में क्या करता होगा। ये बारह-चौदह घंटे तो बेकार ही हो जाते होंगे। आखिर समय बीतता भी कैसे होगा। आम आदमी हो तो कुछ भी कर ले। फोन पर कोई गेम ही खेल ले, कोई उपन्यास आदि ही पढ़ ले। और कुछ नहीं तो बिना कुछ किए ही समय गुजार ले। पर ऐसा व्यक्ति जो एक पल भी बेकार नहीं करता हो, वह क्या करेगा। पर अब क्लीयर हो गया है। वह अपने साथ फाइलों का अंबार ले जायेगा और उन्हें वहीं, आकाश में ही, निपटायेगा।

अब अमरीका गये हैं तो कुछ तो करेंगे ही। ट्रंप जी रहे होते तो वहां, अमरीका में ही 'अबकी बार, योगी सरकार' कर लेते, 'हाउडी मोदी' जैसा कुछ कर लेते। पर अबकी बार बातों से ही काम चलाना पड़ रहा है। कभी इससे बात करो तो कभी उससे बात करो। पहले कमला हैरिस सरकार जी से मिलीं तो उन्होंने लोकतंत्र पर ही बात कर दी। और बोल ऐसे रहीं थीं कि जैसे सरकार जी के ही देश में, विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में ही लोकतंत्र खतरे में है। हद है! कमला हैरिस ने बहुत उकसाया पर सरकार जी चुप ही रहे। 

बाद में राष्ट्रपति बाइडन मिले तो उन्होंने भी महात्मा गांधी का नाम ले लिया। सरकार जी मन मसोस कर रह गये। बदले में सरकार जी को भी गांधी जी का नाम बार-बार लेना पड़ा। ट्रंप जी ने तो ऐसा कभी भी नहीं किया था। उन्होंने तो गांधी जी को एक किनारे कर सरकार जी को ही भारत का पापा (father of India) बना दिया था। अपने घर बुला कर ऐसे भी कोई बेइज्जती करता है भला? 'फादर ऑफ इंडिया' के सामने 'फादर ऑफ नेशन' का जिक्र करता है क्या? पर हमारे सरकार जी भी बहुत तेज निकले। अटक अटक कर बोले पर गांधी जी का नाम नौ-दस बार तो ले ही लिया। कर दी न बाइडन की ऐसी की तैसी। बड़ा चला था सरकार जी के होते गांधी का नाम लेने।

सरकार जी औरों से भी मिलेंगे। राजाध्यक्षों के अलावा बड़े-बड़े व्यवसायियों से भी मिलेंगे। भाषण भी देंगे। पाकिस्तान की मिट्टी पलीत करेंगे और चीन को भी खरी खोटी सुनायेंगे। मौका मिला तो अफगानिस्तान पर भी बोल देंगे। पर सरकार जी की इस बार की अमरीका यात्रा में वह मजा नहीं रहेगा जो ट्रंप जी के रहते रहता था।

पर मुझे तो चिंता सरकार जी के समय की है। पता नहीं वहां, अमरीका में सरकार जी का कितना समय बेकार हो रहा होगा। रात में तो शायद कुछ भी काम कर ही नहीं पा रहे होंगे। मैं तो बस यह चाहता हूं कि जल्द ही कोई नया बुलेट हवाई जहाज आ जाए जिससे भारत और अमरीका की दूरी बस दो घंटे की रह जाए। पैसे की कोई चिंता नहीं है, जितने का भी होगा, सरकार जी खरीद लेंगे। जब वहां अमरीका में रात होगी तो भारत में दिन होगा, तब सरकार जी बुलेट हवाई जहाज से भारत आ यहां के सारे काम निपटा सकेंगे, और जब तक यहां रात आयेगी तब तक अमरीका में दिन शुरू हो जाएगा और सरकार जी वहां जा वहां के काम शुरू कर सकेंगे।

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
America

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License