NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: कुछ भी मत छापो, श..श..श… देश में सब गोपनीय है
एक कानून है, गोपनीयता का कानून। पहले से ही है। सरकारी गोपनीयता का कानून। बलिया में वह भंग कर दिया गया। तीन पत्रकारों ने उसे भंग किया।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
10 Apr 2022
ballia
बलिया में अपने साथियों की गिरफ़्तारी के विरोध में आंदोलनरत पत्रकार। (फ़ाइल फ़ोटो)

देश में कानून का राज है। होना भी चाहिए। और कानून की नजर में सब बराबर हैं। यह भी होना ही चाहिए। कानून सबको एक ही निगाह से देखता है। यह भी होना चाहिए। साथ ही यह भी कहा जाता है कि कानून अंधा होता है। तो फिर कानून सबको किसकी निगाह से देखता है। कानून सबको सरकार की निगाह से देखता है।

एक कानून है, गोपनीयता का कानून। पहले से ही है। सरकारी गोपनीयता का कानून। बलिया में वह भंग कर दिया गया। तीन पत्रकारों ने उसे भंग किया। सरकार ने तो अंग्रेजी का परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए अंग्रेजी विषय का गोपनीय प्रश्न पत्र गोपनीय ढंग से लीक करवाया था। उत्तर प्रदेश की सरकार बार बार प्रश्न पत्र लीक करवाती है तो इस बार भी करवा दिया। सरकार ने तो सोचा था कि छात्र दो वर्ष से कोविड के कारण पढ़ नहीं पा रहे हैं। अतः छात्रों की सुविधा के लिए प्रश्न पत्र ही लीक कर दिया जाए। पर इन तीन पत्रकारों को न तो छात्रों पर दया आई और न ही सरकार की यह योजना पसंद आई। बस उन्होंने यह प्रश्न पत्र लीक की खबर अपने अखबार में प्रकाशित कर दी।

सरकार ऐसी बेअदबी कैसे पसंद कर सकती है। सरकार ने तो गोपनीयता से गोपनीय प्रश्न पत्र लीक करवाया था। छात्रों को कम पैसे में उपलब्ध करवाया था। यहां तक कि गरीब छात्रों तक वाट्सएप पर फ्री में पहुंचाया गया था। पर कुछ पत्रकारों को सरकार का यह गोपनीय कार्य पसंद नहीं आया। उन्होंने खबर छाप दी। सरकार की गोपनीयता भंग कर दी। खैर अंततः सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर उन्हें उनके किए की सजा दे ही दी।

ऐसा ही एक वाकिया मध्यप्रदेश के सीधी जिले में भी हुआ। एक पत्रकार महोदय को सरकारी पार्टी के विधायक द्वारा गोपनीय ढंग से किये जा रहे कुछ गोपनीय कार्यों का पता चला। तो उन पत्रकार जी ने उसकी खबर दिखा दी। गोपनीय ढंग से किए जा रहे गोपनीय कार्यों की खबर दिखाना भी गोपनीयता के कानून को भंग करना ही तो है। सो गिरफ्तारी बनती थी, सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार कर थाने में रखा गया। 

मध्यप्रदेश की पुलिस बहुत होशियार है, समझदार है। उन्हें थाने में बिना कपड़ों के, मात्र कच्छे में रखा गया। वर्तमान सरकार की पुलिस पिछली सारी सरकारों की पुलिस से अधिक लायक है। बताया गया कि पुलिस ने इसलिए कपड़े उतरवाये क्योंकि लोग गिरफ्तारी के बाद कपड़ों से फांसी लगा कर आत्महत्या कर लेते हैं। काश! अंग्रेजों की पुलिस भी आज की पुलिस जितनी ही समझदार होती। तो आज हम गांधी जी की जेल की तस्वीरों में उन्हें धोती में चरखा कातते नहीं, लंगोट या कच्छे में चरखा कातते देखते। जेल की फोटो में नेहरू भी कच्छा पहने 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' लिखते हुए दिखाई देते। यहां तक कि भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, सभी अंग्रेजों की जेल में कच्छे में ही रहते। सावरकर भी कच्छे में ही देखे जाते।

अंग्रेजों की ही नहीं, पिछली सरकारों की पुलिस भी आज की पुलिस जितनी समझदार नहीं निकली। समझदार होती तो हमारे पास देखने के लिए मोटा भाई की भी थानेदार के सामने कच्छे वाली तस्वीर होती। नहीं है तो सिर्फ इसलिए कि पिछली सरकारों की पुलिस समझदार नहीं थी। वैसे उस पुलिस वाले को, थानेदार को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इसलिए नहीं कि उन्होंने पत्रकार महोदय और कुछ अन्य कलाकारों को कच्छे में क्यों रखा बल्कि इसलिए कि कच्छे में रखने की फोटो वायरल कैसे हो गई। 

यह जो गोपनीयता का कानून है ना, इसको भंग करने के अपराध में जेल जाने के वाकिये पहले भी हो चुके हैं। अभी कोई तीन-एक वर्ष पहले ही एक पत्रकार को इसलिए जेल हो गई थी क्योंकि उसने सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में मिड डे मील की योजना के तहत दिए जाने वाले खाने की गोपनीय रैसिपी सार्वजनिक कर दी थी। यह बात सरकार को बर्दाश्त नहीं हुई। इतनी गोपनीय बात, सबको बता दी। उसने सरकारी गोपनीयता कानून भंग किया, तो उसको भी गिरफ्तार किया गया।

तो सभी पत्रकारों से, और पत्रकारों से ही नहीं, सभी जनता से अनुरोध है कि वह सरकारी गोपनीयता कानून का सम्मान करे। सरकार से कोई भी गोपनीय बात न पूछे। जैसे यह पूछने का साहस तो कोई भी नहीं जुटा सकता है कि हमारे लिए रफाल कितने रुपये में खरीदे गए हैं। जैसे यह भी कोई नहीं पूछ सकता है कि किस कारपोरेट घराने ने किस राजनैतिक दल को कितने रुपये दिए हैं। लेकिन कोई छोटी मोटी बात भी न पूछे। मतलब सरकार से कुछ भी नहीं पूछे, सरकार के बारे में कुछ भी नहीं छापे, क्योंकि कुछ भी गोपनीयता कानून के अंतर्गत आ सकता है। कोई भी गिरफ्तार किया जा सकता है। किसी को भी बिना कपड़ों के थाने में बंद रखा जा सकता है।

(व्यंग्य स्तंभ ‘तिरछी नज़र’ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Ballia
UP board paper leak
journalist
Press freedom
Yogi Adityanath
UP police
yogi government

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं


बाकी खबरें

  •  मुस्लिम विरोधी नारेबाजी: छात्र-नौजवानों का विरोध प्रदर्शन; अदालत ने भाजपा नेता सहित 6 को न्यायिक हिरासत में भेजा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुस्लिम विरोधी नारेबाजी: छात्र-नौजवानों का विरोध प्रदर्शन; अदालत ने भाजपा नेता सहित 6 को न्यायिक हिरासत में भेजा
    11 Aug 2021
    दिल्ली की एक अदालत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से मुस्लिम विरोधी नारे लगाने के मामले में गिरफ्तार किए गए भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय समेत छह लोगों को मंगलवार को दो दिन की न्यायिक…
  • जनांदोलन के लिए संसदीय संघर्ष के इस्तेमाल का नायाब प्रयोग है किसान-आंदोलन
    लाल बहादुर सिंह
    जनांदोलन के लिए संसदीय संघर्ष के इस्तेमाल का नायाब प्रयोग है किसान-आंदोलन
    11 Aug 2021
    किसान-आंदोलन के गर्भ में मूल्य-आधारित जन-राजनीति की विराट संभावनाएं पल रही हैं।
  • अर्श रामपाल
    चर्चा नहीं, सिर्फ़ खुलासे : लोकतंत्र को ख़तरे में डालती केंद्र सरकार
    11 Aug 2021
    अर्श रामपाल लिखते हैं कि, देश का संविधान भारत में प्रतिनिधि सरकार की स्थापना की इजाज़त देता है। जिसके चलते जन-भागीदारी का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता है। एक सहभागी लोकतंत्र में, जनता सरकार के निर्णय लेने की…
  • मध्य प्रदेश
    काशिफ काकवी
    मध्य प्रदेश विधानसभा ने सदन में 1,161 शब्दों के इस्तेमाल पर लगायी रोक, विधायकों ने जताया ऐतराज़
    11 Aug 2021
    विधानसभा में जिन शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, उनमें वेंटिलेटर, तानाशाह, पोस्टमैन, नक्सलवाद, अन्याय, आदी, बेचारा, हल्ला, भेदभाव जैसे शब्द शामिल हैं।
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 38,353 नए मामले, 497 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 38,353 नए मामले, 497 मरीज़ों की मौत
    11 Aug 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 38,353 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में कोरोना के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 20 लाख 36 हज़ार 511 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License