NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: चुनाव सेवक का अश्वमेध यज्ञ
बीजेपी सरकार चलाने में जितनी मेहनत करती है उससे अधिक मेहनत सरकार बनाने में करती है। सरकार जब एक बार बन जाए तो चल तो रामभरोसे जाती ही है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
13 Mar 2022
cartoon

पांचों विधानसभा चुनावों के नतीजे आ चुके हैं। चार में बीजेपी की उंगलियां घी में रही हैं और एक में आप पार्टी की। पर सिर कढा़ई में किसी का नहीं गया। बीजेपी पंजाब भी जीत जाती तो फिर उसकी पांचों उंगलियां घी में होतीं और सिर भी कढा़ई में हो जाता। अच्छा ही हुआ, ऐसा नहीं हुआ।

सामने के घर में रहने वाले गुप्ता जी चुनावों के इन नतीजों से बहुत ही खुश थे। मिलते ही बोले, "लो, बीजेपी तो जीत गई। तुम ही बार बार कह रहे थे, सरकार के खिलाफ माहौल है। महंगाई, बेरोज़गारी, किसान आंदोलन मुद्दे हैं और उनकी वजह से सरकार के खिलाफ माहौल है। पर उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड, मणिपुर, कहीं भी सरकार से नाराजगी का नामोनिशान तक दिखाई नहीं दिया। सिर्फ तुम्हारे पंजाब में ही सरकार के खिलाफ नाराजगी का माहौल था। वहां कांग्रेस हार गई। वैसे भी कांग्रेस बची ही कहां है"। उनकी आवाज़ में बीजेपी के जीतने की बजाय कांग्रेस के हारने की खुशी ज्यादा थी।

वास्तव में ही बीजेपी ने चुनाव जीतने के लिए बहुत अधिक मेहनत की है और सफलता मेहनत से ही मिलती है। बीजेपी सरकार चलाने में जितनी मेहनत करती है उससे अधिक मेहनत सरकार बनाने में करती है। सरकार जब एक बार बन जाए तो चल तो रामभरोसे जाती ही है। पर सरकार बनाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। राम जी को ही नहीं, शिव जी को भी भरोसे में लेना पड़ता है। जरूरत पड़े तो भगवान कृष्ण को भी भरोसे में ले सकते हैं।

सरकार बनाने के तरीकों में से एक कठिन तरीका है चुनाव जीत कर सरकार बनाना। और चुनाव जीतने के लिए मेहनत करने में बीजेपी पूरी तरह से सक्षम है और अपनी पूरी सक्षमता से ही चुनाव लड़ती है। वैसे भी अगर चुनाव जीत भी न पाए तो भी बीजेपी सरल तरीका अपना सरकार बना ही लेती है। दो राज्यों, गोवा और मणिपुर की जनता ने तो पिछली बार के अनुभव से सीख ले इस बार बीजेपी को ही जिता दिया। उन्हें पता है कि सरकार तो बीजेपी की ही बनेगी, जीते भले कोई भी। तो क्यों न बीजेपी को ही जिता दिया जाए।

बीजेपी की सरकार ने मेहनत तो की ही और वह मेहनत दिखाई भी दी। जैसे कोविड में लोगों को बचाने के लिए इतनी कोशिश, इतनी मेहनत नहीं की गई जितनी मेहनत मृत लोगों की संख्या कम करने में की गई। अभी अभी एक ताजा अनुमान आया है कि भारत में कोरोना वायरस से चार लाख नहीं, चालीस लाख लोगों ने जान गंवाई थी। ऐसे अनुमान पहले भी आते रहे हैं पर बीजेपी की सरकार उसे मेहनत पूर्वक नकारती रही है। जितनी मेहनत नकारने पर की जा रही है उतनी बचाने पर की जाती तो बात अलग ही होती।

ऐसी ही मेहनत बीजेपी की सरकार ने सरकार-जी की जनसभाएं आयोजित करने में की। आचार संहिता लागू होने से पहले ही सरकार ने सरकारी खजाने से सरकार जी की जनसभाएं करवाईं। बहुत मेहनत कर, बसों में भर कर दूर दूर से लाभार्थियों को लाया गया। उन्हें मेहनत पूर्वक समझाया गया कि वे बीजेपी की सरकार की उन सभी योजनाओं के लाभार्थी हैं जो चल तो पहले से ही रही थीं पर जिनका नाम बीजेपी सरकार ने श्रम पूर्वक बदल डाला है। जो नहीं समझे उन्हें समझाने में अतिरिक्त मेहनत की गई। बीजेपी को मेहनत तो गरीबों को यह समझाने में भी करनी पड़ती है कि बीजेपी की पूंजीपतियों की सरकार गरीबों के कल्याण हेतु ही बनी है।

चुनाव जीतने के लिए लोगों को समझाना पड़ता है कि सरकार ने कितना अच्छा काम किया है। लेकिन लोगों को कोई काम दिखता नहीं है तो दिखाना भी पड़ता है। पर कुछ हुआ हो तो दिखाएं भी। तो लोगों को दिखाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। जो काम हुआ नहीं, जितना काम हुआ नहीं, वह काम हुआ है और बहुत काम हुआ है यह बताने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। और इस काम के लिए बड़ी बड़ी होर्डिंग लगानी पड़ती हैं, विज्ञापन देने पड़ते हैं। और यह काम आसानी से नहीं हो जाता है। इसके लिए बहुत मेहनत लगती है।

मेहनत इस बात को समझाने में भी लगती है जैसे कि गुप्ता जी मेरे ऊपर बार बार मेहनत कर चुके हैं। मुझे समझा चुके हैं कि तुम तो हिन्दू हो, सवर्ण भी हो और मध्य वर्ग के भी। हिन्दू राष्ट्र बनेगा तो तुम्हें क्या नुकसान? तुम्हें तो लाभ ही होगा। बुलडोजर तो मुसलमानों पर चलेगा और विरोधियों पर भी। और अगर आप मुसलमान नहीं हैं, बीजेपी के विरोध में नहीं हैं तो जैसे भी हैं, सेफ हैं। बीजेपी मेहनत कर अधिकतर पढ़े लिखे मध्य वर्ग को यह बात समझा भी चुकी है। और वे यह बात समझ भी चुके हैं।

मेहनत तो बीजेपी ने और भी बहुत की है। और भई, जो मेहनत करेगा उसे उसका फल मिलेगा ही। तो बीजेपी ने जितनी मेहनत फील्ड में की है उससे अधिक मेहनत ऑफिसों में की है। अजी साहेब, सरकार जी के ऑफिस में नहीं, मेहनत की है ईडी के ऑफिस में, आई बी के ऑफिस में, सीबीआई के ऑफिस में, इनकम टैक्स के ऑफिस में, और चुनाव आयोग के ऑफिस में भी। इन सब ऑफिसों में मेहनत कर ली जाए तो, कहते हैं, मेहनत का फल दुगना तिगुना प्राप्त होता है।

सरकार जी तो चुनाव में बहुत ही अधिक मेहनत करते हैं। अपना ऑफिस छोड़ तीन तीन दिन काशी में पड़े रहते हैं। उन अकेले की जान को चुनाव का कितना काम है। बेचारे सरकार जी सरकार चलाने पर ध्यान दें भी तो कैसे। लगता है प्रधान सेवक की बजाय चुनाव सेवक हों। जैसे आरएसएस के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े हों। इधर उत्तर प्रदेश और बाकी के चार राज्यों का चुनाव परिणाम आया ही था कि उन्हें गुजरात में रोड शो करने जाना पड़ा। अगला चुनाव गुजरात में जो है। भले ही नौ महीने बाद हो पर मेहनत तो अभी से करनी पड़ेगी। यह होती है मेहनत। जो सरकार चलाने में की जाये या न की जाए, चुनाव जीतने के लिए जरूरी है।

तो इतनी मेहनत कर भी चुनाव न जीते जाएं तो गजब बेइज्जती है। तो चुनाव तो जीते जाने ही चाहिए। चुनाव जीते जाने के लिए ही बने हैं। तो जीतने वालों को बधाई। जो नहीं जीत पाए वे भी कोशिश करें, मेहनत करें। उन्हें भी जीत जरुर मिलेगी।

'लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती'

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Assembly elections
BJP
Modi government

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नज़र भी, ख़बर भी: मोहन भागवत की अच्छी बातें और कुछ किंतु-परंतु
    05 Jul 2021
    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर कुछ अच्छी-अच्छी बातें कहीे हैं, हालांकि सवाल ये है कि उन्हें भी इन बातों पर कितना यक़ीन है! और विडंबना ये भी कि उनको मानने वाले उनकी इन बातों को शायद ही मानते…
  • स्टेन स्वामी
    भाषा
    स्टेन स्वामी की सेहत नाज़ुक, ज़मानत याचिका के लिए नहीं जा सकते उच्च न्यायालय : वकील
    05 Jul 2021
    अदालत के 28 मई के आदेश के बाद से स्वामी का यहां होली फैमिली हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। निजी अस्पताल में उनके इलाज का खर्च उनके सहयोगी एवं मित्र उठा रहे हैं।
  • रूठा मानसून, संकट में खेती और निष्ठुर राजनीति
    अनिल जैन
    रूठा मानसून, संकट में खेती और निष्ठुर राजनीति
    05 Jul 2021
    सवाल है कि क्या हमारी सत्ता केंद्रित राजनीति इस चुनौती से निबटने का कोई ठोस रास्ता तलाशेगी या कुदरत को ही कोसती रहेगी या फिर खेती को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने के इरादों पर कायम रहेगी?
  • धर्म को लेकर किये गये प्यू के सर्वे से पता चलता है कि हम भारतीय पाखंडी हैं
    एजाज़ अशरफ़
    धर्म को लेकर किये गये प्यू के सर्वे से पता चलता है कि हम भारतीय पाखंडी हैं
    05 Jul 2021
    भारतीयों का दावा होता है कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, मगर उनका यह दावा उन धार्मिक समुदायों के प्रति उनके नज़रिये से मेल नहीं खाता, जिनसे वे जुड़े हुए नहीं हैं।
  • नए शौचालय बनाने से पहले पुराने शौचालयों की कार्यक्षमता और सफ़ाई कर्मियों की दशा दुरुस्त करने की ज़रूरत
    मोहित यादव, आशुतोष रंगा
    नए शौचालय बनाने से पहले पुराने शौचालयों की कार्यक्षमता और सफ़ाई कर्मियों की दशा दुरुस्त करने की ज़रूरत
    05 Jul 2021
    नए सूखे शौचालय भारत में ख़राब स्वच्छता व्यवस्था के बुनियादी ढांचों और साफ-सुथरे शौचालयों की बदतर हालत का भी एक नतीजा हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License