NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
हे राम से श्री राम और हाय राम तक
आज सभी त्रस्त हैं और हाय राम, हाय राम का जाप कर रहे हैं। कोई कोरोना की वजह से हाय राम कर रहा है तो कोई महंगाई की वजह से। कोई अत्याचार से त्रस्त है तो कोई भ्रष्टाचार से हाय राम बोल रहा है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
20 Jun 2021
हे राम
तस्वीर केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए। साभार

गांधी जी की जब हत्या की गई तो बताते हैं कि उनके मुंह से 'हे राम!' निकला था। जिस हत्यारे ने गांधी जी की हत्या की थी वह हिन्दू था और महात्मा गांधी भी सनातनी हिन्दू। माना जाता है कि वह गोडसे स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी था। 'हे राम' को मारने वाला 'जय श्री राम' बोलने वालों का पूज्य बन गया।

आतंकवादियों को कोई भी सिर्फ आतंकवादी नहीं रहने देता है। दूसरे धर्म के आतंकवादियों से घृणा करने वाले अपने धर्म के आतंकवादी से प्यार करते हैं, उसके मंदिर बनवाते हैं। अब औरों को आतंकी मानने वाले गोडसे को देशभक्त मानते हैं। जगह जगह गोडसे के मंदिर बनवाते हैं। और उधर उल्टा है, कुछ लोग उन को स्वतंत्रता सेनानी माने बैठे हैं। इस उलटे-पुल्टे के चक्कर में जो दोनों को आतंकवादी माने, वह सिक्यूलर है। वैसे 'सिक्यूलर' सेक्युलर से अधिक अच्छा शब्द है क्योंकि सिक्यूलर में इस शब्द को ईजाद करने वाले की बीमार (सिक) मानसिकता भी जुड़ी हुई है।

हमने बहुत ही विकास किया है। हम 'हे राम' से जल्द ही 'जय श्री राम' तक पहुंच गए। जहां हे राम के समय निशाना एक मनुष्य था, वहीं जय श्री राम के समय एक पूरी कौम निशाना बन गई। भगवान राम जैसे शांत, मर्यादा पुरुषोत्तम पुरुष का इस्तेमाल कर खून खौलाना जैसी बातें होने लगीं। ऐसी बातें करने वाले हर समय रहे हैं। वे हे राम के समय में भी थे, जय श्री राम के समय में भी थे और अब हाय राम के समय में भी हैं।

अब हम जय श्री राम से भी आगे बढ़ चुके हैं। अब हम हाय राम तक पहुंच चुके हैं। हाय राम तक पहुंचाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है जिन्होंने हे राम और जय श्री राम तक पहुंचाया था। आज सभी त्रस्त हैं और हाय राम, हाय राम का जाप कर रहे हैं। कोई कोरोना की वजह से हाय राम कर रहा है तो कोई महंगाई की वजह से। कोई अत्याचार से त्रस्त है तो कोई भ्रष्टाचार से हाय राम बोल रहा है। और अधिकतर लोग तो सभी चीजों से त्रस्त हैं।

हाय राम, यह महंगाई भी कितनी तेजी से बढ़ रही है। समझाया जा रहा है कि जब विकास होता है तो महंगाई बढ़ती ही है। जैसे महंगाई न हुई, विकास का बेरोमीटर (ऊंचाई नापने का यंत्र) हो गई। सरकार मनवाती है कि चीजें जितनी महंगी होती हैं, उतना ही विकास होता है। अब आप स्वयं बताएं कि क्या इतना विकास कम है कि पेट्रोल सौ के पार हो गया है और डीजल भी सौ तक पहुंचने वाला है। और खाने का तेल, पकाने का तेल, वह तो, हाय राम, दो सौ पार हो गया है।

और इन रोजमर्रा की चीजों को तो छोड़ भी दें तो प्रोपर्टी-जमीन जायदाद, ये तो इतनी तेजी से बढ़ रही है कि मिनटों में कहां की कहां पहुंच रही है। यह विकास का चरम है और भगवान राम की कृपा है कि जमीन का एक टुकड़ा दो करोड़ से दस मिनट में लगभग दस गुना बढ़ गया। अब खुद ही बताओ कि इतने विकास से ही संतुष्ट हो या फिर और अधिक, और तेज विकास चाहिए। सोच लो, जितना विकास मांगोगे, उतना मिलेगा। अगर आप और विकास न मांगो तो सरकार जी अब विकास का काम छोड़ दूसरे कामों में लगें।

और हाय राम! ये कैसा जमाना आ गया है। ये जो लड़कियां हैं न, अब तोड़-फोड़ पर उतर आईं हैं। पिंजरा तोड़ने की बात करने लगी हैं। यह पिंजरा बनाया ही किस लिए जाता है। पिंजरा तोड़ने के लिए नहीं, कैद करने के लिए बनाया गया है न। लेकिन यह सरकार मुस्तैद है, पिंजरा तोड़ने से पहले ही उन लड़कियों को जेल में कैद कर दिया। लो भई, पिंजरे की नहीं तो जेल की कैद में रहो। और जेल न तोड़ पायें इसीलिए यूएपीए भी लगा दिया। अब पिंजरा तोड़तीं तो नुकसान किसका होता, समाज का ही न, देश का ही न। तो सरकार ने समाज को, देश को नुकसान से बचाने के लिए ही इन्हें जेल में डाल दिया।

और हाय राम ये न्यायाधीश लोग, कुछ न्यायाधीश तो ऐसे हो गये है कि उन्हें न सरकार की चिंता है और न देश की। सरकार और देश की तो छोड़ो, उन्हें अपनी जान की, अपने प्रमोशन की भी चिंता नहीं है। उन्हें सिर्फ न्याय की चिंता है। जैसे न्याय सरकार से ऊपर हो गया हो। ये न्यायाधीश महोदय कहते हैं, नारे लगाने से, रास्त रोकने, रोड ब्लाक करने से देशद्रोह नहीं होता है। ये पुराने जमाने में पढ़े-लिखे न्यायाधीश हैं, पहले का कानून पढ़ रखा है। तब यह सब देशद्रोह नहीं होता होगा पर अब होता है। अब सरकार जी की आलोचना से भी देशद्रोह होता है, यूएपीए लगता है, जेल मिलती है।

मैं तो सोचता हूं, अपने जमाने में भगवान राम ही पीछे रह गए, आधुनिक नहीं बन पाये। उस समय सीता जी को वनवास देने की बजाय आलोचना करने वाले, प्रश्न पूछने वाले, उंगली उठाने वाले धोबी को ही जेल में डाल दिया होता तो, तो उनका न्याय आज नजीर बन जाता। पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने ऐसा नहीं किया। अगर किया होता तो फिर किसी भी टुकड़े-टुकडे़ गैंग, अर्बन नक्सलियों, पिंजरा तोड़ती बालाओं, खालिस्तानी आतंकवादी देशद्रोही किसानों को सरकार पर उंगली उठाने, आलोचना करने, प्रश्न पूछने की हिम्मत नहीं होती। तब किसी की भी राम जी के नाम पर खरीदी जमीन पर आरोप लगाने की जुर्रत नहीं होती। हाय राम, कैसा जमाना आ गया है!

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Coronavirus
COVID-19
Inflation
Narendra modi
modi sarkar

Related Stories

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...


बाकी खबरें

  • बिहार शेल्टर होम कांड-2: युवती ने अधीक्षिका पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- होता है गंदा काम
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार शेल्टर होम कांड-2: युवती ने अधीक्षिका पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- होता है गंदा काम
    02 Feb 2022
    राजधानी पटना में गाय घाट स्थित महिला रिमांड होम से भागी एक युवती ने इस रिमांड होम की अधीक्षिका वंदना गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वहां खूबसबरत लड़कियां मैम को प्यारी होती हैं। उसने कहा कि…
  • uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखंड चुनाव: थपलियालखेड़ा सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा से वंचित
    02 Feb 2022
    उत्तराखंड राज्य बने लगभग 22 साल हो गए हैं, पर आज भी अंतर्राष्ट्रीय सीमा और पहाड़ी इलाकों में जरुरी सुविधा से लोग वंचित हैं। गांव के लोगों को ज़रूरी सुविधाओं के लिए नेपाल पर निर्भर होना पड़ता है।
  • ASEEM
    अनिल सिन्हा
    यूपी के चुनाव मैदान में आईपीएस अफसरः क्या नौकरशही के इस राजनीतिकरण को रोकना नहीं चाहिए?
    02 Feb 2022
    ईडी के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह और कानपुर के पुलिस कमिश्नर असीम अरुण को टिकट देकर भाजपा ने निश्चित तौर पर नौकरशाही की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
  • सोनिया यादव
    जेंडर बजट में कटौती, मोदी सरकार के ‘अमृतकाल’ में महिलाओं की नहीं कोई जगह
    02 Feb 2022
    महामारी के बाद की स्थिति में भी महिलाओं की जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने के लिए सरकार कोई खास पहल करती दिखाई नहीं दे रही। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जेंडर बजट का हिस्सा कुल बजट का केवल 4.4 प्रतिशत था, जो…
  • Myanmar
    चेतन राणा
    तख़्तापल्ट का एक वर्ष: म्यांमार का लोकतंत्र समर्थक प्रतिरोध आशाजनक, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एकजुटता डगमग
    02 Feb 2022
    आसियान, भारत और चीन ने म्यांमार में सैन्य तख्तापलट की न केवल निंदा की है, बल्कि अलग-अलग स्तर पर सैन्य सत्ता को वैधता भी प्रदान की है। इनकी प्रेस विज्ञप्तियों में वहां लोकतंत्र के प्रति सामान्य…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License