NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
साहित्य-संस्कृति
विज्ञान
भारत
…सब कुछ ठीक-ठाक है
"क्यों, क्या सब ठीक-ठाक नहीं हैं? क्या सब ख़ैरियत से नहीं है? क्या हम हिंदू राष्ट्र नहीं बन रहे हैं? ठीक है भाई! बेरोज़गारी है, महंगाई है, शिक्षा बरबाद हो रही है और अस्पताल बदहाल। पर देश में क्या सबको सब कुछ ठीक-ठाक नहीं लग रहा है?”
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
23 Jan 2022
cartoon

इसी सप्ताह मेरे एक मित्र का जन्मदिन था। मैंने शुभकामनाएं देने के लिए फोन किया। मैंने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शुभकामनाएं लीं और धन्यवाद दिया।  

मैंने बात आगे बढ़ाई, "कैसे हो"।

वे बोले, "मजे में हूं, तीसरी बार कोविड हुआ हुआ है। वैसे तो सारी दुनिया घर पर है परन्तु मैं जरा ज्यादा ही घर पर हूं। लगता है देश में हर लहर मेरे ऊपर से ही गुजरती है। तीनों बार मुझे कोविड जरूर हुआ। पहले सितंबर 2020 की पहली लहर में, फिर मई 21 में दूसरी लहर में और अब तीसरी लहर में भी। बाकी सब ठीक है। मैं तो अब कहता हूं कि मुझे कोविड हो तो सरकार लहर घोषित कर दे"।

मैंने कहा, "तीन तीन बार कोविड हो गया। खैरियत से तो हो ना"। वे बोले, "हां, हां! खैरियत से हूं। खैरियत से नहीं होता तो तुम्हारे से बात कैसे करता। यहीं मृत्युलोक से ही बोल रहा हूं, स्वर्ग या नरक से नहीं। दूसरी लहर में जरुर जाते जाते बचा। ऑक्सीजन कम हो गई थी। अस्पताल में बिस्तर किसी को भी नहीं मिल रहा था, वीआईपी लोगों को भी नहीं तो मुझे ही कहां से मिलता। भइया, बस समझ लो, लोगों को तो एक ही बार जीवन मिलता है, मुझे दूसरी बार मिला है"। 

"यह कोविड चला तो गया पर अपनी निशानी छोड़ गया है। कमजोरी बहुत आ गई है। भूलने भी लगा हूं, बात करते करते अटक जाता हूं। क्या कह रहा था,याद ही नहीं रहता है। पहले टेलीप्रॉम्पटर पर देख कर तो पढ़ लेता था परन्तु अब वह भी साथ नहीं देता है। इसके अलावा जरा सा चले नहीं कि सांस फूलने लगता है। डाक्टर फैंफड़े खराब हो गये बताते हैं। भइया, अब तो पूरा ठीक होना मुश्किल है। और अब यह तीसरी बार भी कोविड हो गया। बाकी सब ठीक है"। उन्होंने बात आगे जारी रखी।

"और भाभी जी, उनका क्या हाल है" मैंने पूछा। मित्र बोले, "अरे कहां! उस भाग्यवान को तो दूसरी लहर ही लील गई। उसे तो ढंग से श्मशान भी नसीब नहीं हुआ। मैं अभागा ही गया था उसको लेकर, पीपीई किट में। साथ में चार म्युनिसिपैलिटी वाले थे बस। वहां तो इतनी लंबी लाइन लगी थी कि गुजरे जमाने की राशन की लाइन भी उसके सामने शरमा जाए। उसकी चिता बुझी भी नहीं थी कि उन्होंने उस पर दूसरी लाश रख दी। उस भाग्यवान को तो चिता मिल भी गई, पर कइयों को तो वह भी नसीब नहीं हुई। बाकी सब ठीक-ठाक है"।

"तो फिर तो अकेले रहते होगे घर पर"। 

"अरे नहीं, बिटिया इंदू और उसके बाल बच्चे यहीं पर हैं। साथ ही रह रहे हैं"। 

"इंदू, उसकी तो तुमने कई वर्ष पहले शादी कर दी थी। उसका आदमी तो बैंक में अफसर है ना। क्या उसका यहीं ट्रांसफर हो गया है"। मैंने पूछा। "अरे नहीं, उसका अपने आदमी से तलाक हो गया है। तब से वह अपने दोनों बच्चों के साथ यहीं रह रही है। वही घर संभालती है"। 

"और बेटा बहू। वे तो ठीक हैं ना, वहां मुम्बई में"। 

"अरे कहां! बहू भी कहां रही। बेटे की नौकरी तो पहले ही छूट गई थी, पहले लॉकडाउन में ही। नौकरी नहीं रही थी तो मैंने उसे यहीं बुला लिया था। पत्नी उसकी बची नहीं। दूसरी लहर ने उसको भी नहीं छोड़ा। उसे अस्पताल में बिस्तर तो मिल गया था पर बच न सकी। बेटा तब से डिप्रेशन में ही है। क्या करे, बस दिन भर अपने कमरे में बंद रहता है। किसी से बोलता तक नहीं है। मेरी छोड़ो, तुम अपनी सुनाओ यार। हमारे यहां तो बाकी सब ठीक है”।

"खाक ठीक है तुम्हारे यहां। बीवी, बहू रही नहीं। बेटे की नौकरी चली गई। वह डिप्रेशन में है। बेटी का तलाक हो गया। वह बच्चों के साथ तुम्हारे यहां है। और तुम कह रहे हो, सब ठीक-ठाक है, सब खैरियत से है, सब अच्छा है"।

"क्यों, क्या सब ठीक-ठाक नहीं हैं? क्या सब खैरियत से नहीं है? क्या हम हिंदू राष्ट्र नहीं बन रहे हैं? ठीक है भाई! बेरोजगारी है, महंगाई है, शिक्षा बरबाद हो रही है और अस्पताल बदहाल। पर देश में क्या सबको सब कुछ ठीक-ठाक नहीं लग रहा है? चीन बाउंड्री पर ही नहीं, देश के अंदर तक आ कर कालोनी बना रहा है। प्रधानमंत्री जी अपने जिंदा बच आने का थैंक्स कह रहे हैं। पर देश में सब ठीक-ठाक है क्योंकि देश हिन्दू राष्ट्र जो बन रहा है। जब देश में खाने के लाले पड़े हों, सरकार देश बेचने को पूरी तरह तैयार बैठी हो और फिर भी सब कुछ ठीक-ठाक लग रहा हो तो क्या मुझे सब कुछ लुटने के बाद भी ठीक-ठाक नहीं लग सकता है। और मैं नहीं, सभी ऐसे ही हैं"।

मैंने फोन रख दिया । मैं निरुत्तर था। 

(‘तिरछी नज़र’ एक व्यंग्य स्तंभ है। इसके लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

Satire
Political satire
tirchi nazar
Hindutva
Inflation
unemployment
poverty
Modi government

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं


बाकी खबरें

  • कैथरीन स्काएर, तारक गुईज़ानी, सौम्या मारजाउक
    अब ट्यूनीशिया के लोकतंत्र को कौन बचाएगा?
    30 Apr 2022
    ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति धीरे-धीरे एक तख़्तापलट को अंजाम दे रहे हैं। कड़े संघर्ष के बाद हासिल किए गए लोकतांत्रिक अधिकारों को वे धीरे-धीरे ध्वस्त कर रहे हैं। अब जब ट्यूनीशिया की अर्थव्यवस्था खस्ता…
  • international news
    न्यूज़क्लिक टीम
    रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार
    29 Apr 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार ने पड़ोसी देश श्रीलंका को डुबोने वाली ताकतों-नीतियों के साथ-साथ दोषी सत्ता के खिलाफ छिड़े आंदोलन पर न्यूज़ क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से चर्चा की।…
  • NEP
    न्यूज़क्लिक टीम
    नई शिक्षा नीति बनाने वालों को शिक्षा की समझ नहीं - अनिता रामपाल
    29 Apr 2022
    नई शिक्षा नीति के अंतर्गत उच्च शिक्षा में कार्यक्रमों का स्वरूप अब स्पष्ट हो चला है. ये साफ़ पता चल रहा है कि शिक्षा में ये बदलाव गरीब छात्रों के लिए हानिकारक है चाहे वो एक समान प्रवेश परीक्षा हो या…
  • abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    अगर सरकार की नीयत हो तो दंगे रोके जा सकते हैं !
    29 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस अंक में अभिसार बात कर रहे हैं कि अगर सरकार चाहे तो सांप्रदायिक तनाव को दूर कर एक बेहतर देश का निर्माण किया जा सकता है।
  • दीपक प्रकाश
    कॉमन एंट्रेंस टेस्ट से जितने लाभ नहीं, उतनी उसमें ख़ामियाँ हैं  
    29 Apr 2022
    यूजीसी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट पर लगातार जोर दे रहा है, हालाँकि किसी भी हितधारक ने इसकी मांग नहीं की है। इस परीक्षा का मुख्य ज़ोर एनईपी 2020 की महत्ता को कमजोर करता है, रटंत-विद्या को बढ़ावा देता है और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License