NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: सरकार जी की सरकार में बहस
सरकार जी जानते हैं और समझते हैं कि ये बहस, ये विचार विमर्श, ये चर्चायें, ये सब जी का जंजाल हैं। ये हरगिज़ नहीं होनी चाहियें।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
22 Aug 2021
modi

अभी हाल ही में मुख्य न्यायाधीश जी ने बहस ना होने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि देश में कानून बिना बहस के बनाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि बिना बहस के बनाए जा रहे कानूनों की वजह से जो कानून बन रहे हैं उनमें कई कमियां रह जाती हैं।

लेकिन हमारे सरकार जी, वे बिल्कुल भी बहस नहीं चाहते हैं। वह सिर्फ और सिर्फ चुपचाप, बिना बहस के, बिना संशोधन के बिल पास कराना चाहते हैं। जैसा बिल वे सदन में लाएं, वैसे का वैसा बिल पास करवाना चाहते हैं। सरकार जी नहीं चाहते हैं कि बिल पर बहस हो, उसकी कमियां सामने आएं, और उसमें कोई सुधार हो और बिल सुधार के बाद ही पास हो, कानून बने। 

यह जो बहस की संस्कृति है, हमारी संस्कृति नहीं है। बड़ों से बहस करना हमारे यहां नहीं होता है। बड़ों से बहस करने को हम शुरू से ही बुरा मानते हैं। बचपन से ही हमें सिखाया जाता है की बड़ों से बहस मत करो और उनका कहा मान लो। अब सरकार जी भी इतने बड़े तो हो ही गए हैं उनसे बहस ना की जाए। चार साल बाद वे भी पिचहतर वर्ष के हो जायेंगे, मार्गदर्शक मंडल में शामिल हो जाएंगे। कम से कम चार साल तक तो उनकी बात मान ही सकते हैं। चार वर्ष बाद उनकी बात तो न कोई सुनेगा और न ही कोई मानेगा। वे तो मन की बात कहने के काबिल भी नहीं रहेंगे। तो इसलिए वे चाहते हैं कि अभी तो उनकी बात बिना बहस के मान लेनी चाहिए।

बुजुर्गों से बहस मत करो। बुजुर्गों से बहस नहीं की जाती है। हम बचपन से यही सीखते आ रहे हैं। इसलिए भी संसद में बहस हरगिज़ नहीं होनी चाहिए। आखिर संसद में आमतौर पर बुजुर्ग ही बैठे हुए हैं। गिनती के ही सांसद हैं जो बुजुर्ग नहीं है अन्यथा सभी बुजुर्ग हैं। और राज्यसभा में तो बहस होनी ही नहीं चाहिए। वहां तो सिर्फ और सिर्फ बुजुर्ग ही बैठे हैं। इसीलिए तो उसे वरिष्ठों (बुजुर्गों) का सदन (हाउस ऑफ एल्डर्स) कहा जाता है। इसलिए सरकार जी से थोड़ी बहुत जो बहस करनी है, लोक-सभा में कर लो, वहां ईट का जवाब पत्थर से दे देंगे। पर राज्य-सभा में बहस, यह सरकार जी को बिल्कुल भी पसंद नहीं है।

ऐसा नहीं है कि सरकार जी बहस के पक्ष में नहीं हैं। जितनी बहस करनी है, जहां करनी है, कर लो, लेकिन सरकार जी के मन मुताबिक विषय पर करो। हिंदू मुस्लिम पर बहस कर लो, मंदिर मस्जिद पर बहस कर लो, शमशान कब्रिस्तान पर बहस कर लो, पाकिस्तान पर बहस कर लो। संसद में कर लो या संसद के बाहर कर लो, चुनावों में कर लो या टीवी पर कर लो, सरकार जी और उनके बंदे कहीं भी तैयार हैं। पर भारत पर बहस बिल्कुल भी मत करो। पर यह बिलों पर बहस बिल्कुल भी मत करो। जनता की परेशानियों पर बहस बिल्कुल भी मत करो। यह विपक्ष भले ही चाहता हो, पर सरकार जी को यह बेकार की बहसें बिल्कुल भी पसंद नहीं है।

विपक्ष चाहता है, बेरोजगारी पर बहस करें। बेरोजगारी तो बुरी चीज है ही, उस पर बहस क्या करनी। विपक्ष चाहता है, जासूसी कांड पर बहस करें। जासूसी, और वह भी अपने ही नागरिकों की, बहुत बुरी चीज है, तो उस पर भी बहस करना फिजूल है। विपक्ष चाहता है, किसानों के मुद्दे पर बहस हो, पर सरकार जी बहस नहीं, काम चाहते हैं। इसीलिए तीनों किसान बिल चुपचाप पास कर दिये हैं। हैं न! न कोई बहस, न कोई मतदान। बस ध्वनिमत से पारित कर दिये।

ये जो लोग बात बात पर बहस की मांग करते हैं, संसद को बहस का अखाड़ा बनाना चाहते हैं, ये नहीं जानते हैं कि वे जनता का कितना पैसा बर्बाद कर रहे हैं। जनता का पैसा बर्बाद करने का काम सिर्फ और सिर्फ सरकार का है विपक्ष का नहीं। सरकार जी विपक्ष को सिखाने के लिए उन्हें मार्शलों से पिटवा सकते हैं, सदन से निष्कासित/निलंबित करवा सकते हैं या फिर दोनों काम करवा सकते हैं। ये जो दोनों सदनों के सभापति हैं न, जो ठीक होता है वही करते हैं और ठीक वही होता है जो सरकार जी ठीक समझते हैं। 

सरकार जी जानते हैं और समझते हैं कि ये बहस, ये विचार विमर्श, ये चर्चायें, ये सब जी का जंजाल हैं। ये हरगिज़ नहीं होनी चाहियें, लेकिन कब तक, तब तक ही जब तक सरकार जी की सरकार है, सरकार जी की पार्टी की सरकार है। और ये सब कुछ तब अवश्य ही होना चाहिए जब सरकार जी की पार्टी विपक्ष में हो। ऐसा सरकार जी मानते हैंं, उनकी पार्टी मानती है। आप अगर चाहते हो कि आपके लिए बनने वाले कानूनों पर, संसद में बिल पारित होने से पहले बहस हो, उन पर विचार विमर्श किया जाए, आपकी समस्याओं को लेकर सदन में चर्चा हो तो आप कहां होने चाहिएं, आप स्वयं ही समझदार हैं।

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
Modi Govt
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • worker
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमपीः रीवा में मज़दूरी मांगने गए दलित मज़दूर का मालिक ने काटा हाथ, आईसीयू में भर्ती
    25 Nov 2021
    पीड़ित अशोक की पत्नी ने कहा गणेश मिश्रा पर लगभग 15,000 रुपये बकाया थे, लेकिन कई महीनों से वे भुगतान नहीं कर रहे थे। हम ग़रीब लोग हैं, अपना पेट पालने के लिए मज़दूरी पर निर्भर हैं।
  • Farmers
    रवि कौशल
    आंशिक जीत के बाद एमएसपी और आपराधिक मुकदमों को ख़ारिज करवाने के लिए किसान कर रहे लंबे संघर्ष की तैयारी
    25 Nov 2021
    कृषि क़ानूनों की वापसी की घोषणा के बावजूद, किसान, अपने संघर्ष की दूसरी मांगों पर अडिग हैं, जिनमें एमएसपी पर गारंटी, प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज केस रद्द किए जाने, केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी की…
  • workers
    विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: देश की सबसे बड़ी कोयला मंडी में छोटी होती जा रही मज़दूरों की ज़िंदगी
    25 Nov 2021
    यूपी के चंदौली जिले में चंधासी, देश की सबसे बड़ी कोयला मंडी है। यह इलाका उस संसदीय क्षेत्र के साथ लगा है, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुना है। ..."जिस सड़क से पांच मिनट गुजरने में दम निकलता हो…
  • Gandhi ji
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    ख़तो-किताबत: आंदोलनजीवी बापू की चिट्ठी आई है
    25 Nov 2021
    पेशे से चिकित्सक, व्यंग्यकार डॉ. द्रोण कुमार शर्मा ने दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर उनके नाम एक चिट्ठी लिखकर उन्हें देश के हालात से अवगत कराया था। अब उन्होंने इसका जवाब लिखा है। यानी लेखक…
  • farmers
    अजय गुदावर्ती
    कृषि क़ानूनों को निरस्त करने के बाद भाजपा-आरएसएस क्या सीख ले सकते हैं
    25 Nov 2021
    सत्ताधारी पार्टी संकट आने पर हर बार हिंदू-मुस्लिम का बटन नहीं दबा सकती और कामयाब भी नहीं हो सकती। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License