NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: कोरोना में ढूंढिये, "मैं कौन हूँ...", क्योंकि बताना तो पड़ेगा!
चाहे कितना लम्बा लॉकडाउन हो जाये और चाहे कितना भी बडा़ आर्थिक स्लोडाउन हो जाये पर एनपीआर और एनआरसी तो आयेगा ही। तो वत्स, लॉकडाउन के समय समय है। अभी तपस्या में डूब जा। ढूंढ ले, इस प्रश्न का उत्तर ढूंढ ले कि तू और तेरा परिवार "कौन है, कहाँ से आया है और क्यों आया है"।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
19 Apr 2020
कोरोना वायरस
Image courtesy: new Indian express

लॉकडाउन और बढ़ा दिया गया है। अब हम लोग तीन मई तक लॉकडाउन में रहेंगे। यानी तीन मई तक घर से बाहर निकलना बंद। अब तक तो आप ने पिछले चार हफ्ते में घर में रखी सारी किताबें चाट ली होंगी। टीवी के कार्यक्रम, फिल्में देख देख कर बोर हो गये होंगे। पर लॉकडाउन कोरोना से लड़ाई के लिए आवश्यक कदम है। किसी ने देर से लगाया है और किसी ने जल्दी, पर लगाया सभी ने जरूर है।

tirchi nazar.png

जिनके पेट में खाना है और सर पर छत है, उन्हें ही यह लॉकडाउन की बोरियत अधिक सता रही है। भूखे पेट तो भोजन की ही चिंता लगी रहती है, बोरियत के लिए समय ही कहां है। भूखे पेट और बिना छत वालों का समय तो फ्री में मिलने वाले खाने की लाइन में और रात को सोने की जगह ढूंढने में निकल जाता है। भूखे पेट तो भजन भी नहीं हो सकता है लेकिन भरे पेट वाले भी भजन आखिर कब तक करें। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजाघर सब बंद हैं। भजन, आरती, कीर्तन, अजान और गिरजाघर के घंटे सब के सब शांत हैं। और घर में तो पूजा पाठ की लिमिट होती है। तो आप बोर हो ही रहे होंगे। मैं आपको अपनी बोरियत दूर करने के लिए एक उपाय सुझाता हूं।

आप खोजने लगिये कि "मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ"। सभी दार्शनिकों को यह प्रश्न सदियों से परेशान करता रहा है, "मैं कौन हूँ, मैं कहाँ से आया हूँ"। सारी दुनिया में बहुत सारे दार्शनिक इस प्रश्न का उत्तर खोजते खोजते इस दुनिया से चले गये। जिन्हें इसका उत्तर मिला भी, वे स्वयं ही उस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुए। जो स्वयं अपने उत्तर से संतुष्ट हो गये, उनके उत्तर से दूसरे संतुष्ट नहीं हुए। लब्बोलुआब यह है कि यह प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है।

हमारे जम्बूद्वीप के भारत खण्ड में भी अनेकों अनेक ऋषि मुनि इसी प्रश्न के उत्तर में सदियों लगे रहे। हम ऐसे ऋषियों मुनियों की कहानियां जानते हैं जो बियाबान जंगलों में, दुर्गम पर्वतों पर गुफाओं,  कंदराओं में वर्षों तक बिना खाये पीये अडिग अटल बैठे हुए या खड़े हुए तपस्या करते रहे। क्यों, क्योंकि उन्हें सिर्फ इसी प्रश्न का उत्तर ढूंढना था "मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ, क्यों आया हूँ"।

वे तपस्वी ऋषि-मुनि वर्षों तपस्या करते रहे, लम्बे लम्बे लॉकडाउन में रहे। यहां तक कि उनके ऊपर मकड़ियों के जाले लग गये, उन की जटाओं में बयाओं ने घोसले बना लिये। शरीर पर चींटियों और दीमक के छत्ते बन गये। पर इस प्रश्न का उत्तर न मिलना था, न मिला "मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ, क्यों आया हूँ"।

क्योंकि उस काल में इस प्रश्न का एक निश्चित उत्तर नहीं मिल सका इसलिए यह प्रश्न कि "मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ, क्यों आया हूँ," आज भी मूंह बाये खड़ा है। आज अब इस शासनकाल में, सभी को, आज नहीं तो कल, इस प्रश्न का उत्तर देना ही पड़ेगा। सबको बताना पड़ेगा कि वह कौन है, वह कहाँ से आया है और यदि वह कहीं से आया है तो कहां से आया है और यहां ही क्यों आया है। और उससे भी महत्वपूर्ण, यदि वह कहीं से यहां आया है तो वह किस धर्म को मानता है। भले ही बडे़ बडे़ तपस्वी, ऋषि, मुनि इस प्रश्न का उत्तर कि "मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ, क्यों आया हूँ," नहीं ढूंढ पाये हों पर अब आम आदमी को भी इस प्रश्न का उत्तर ढूंढना पड़ेगा। बल्कि उत्तर ढूंढना ही नहीं पडे़गा, देना भी पड़ेगा। इस प्रश्न का उत्तर हर व्यक्ति को इस सरकार को देना ही होगा।

कोरोना से तो आप बच भी सकते हैं पर एक बार कोरोना कंट्रोल में आ जाये, इस प्रश्न का उत्तर कि "मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ, क्यों आया हूँ", आपको अवश्य देना पडे़गा। कोरोना ने एनपीआर और एनआरसी को सिर्फ टाला है, मारा नहीं है। कोरोना सिर्फ आदमी को ही मार सकता है, सरकार या उसकी नीयत को नहीं। अब लॉकडाउन ने हमें मौका दिया है कि हम इस प्रश्न का उत्तर ढूंढें कि "मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ, क्यों आया हूँ"।

तो जो छत के नीचे हैं, भरे पेट से हैं उन सबसे मेरा अनुरोध है कि वे सब इस तपस्या में लग जायें। लॉकडाउन खुलने के बाद तो समय मिलेगा नहीं। रोजीरोटी में लग जाओगे, दुनियादारी में लग जाओगे। तो भईया, अभी समय है, अभी तपस्या कर लो। अभी ढूंढ लो कि तुम कौन हो, ........

लॉकडाउन की वजह से हिमालय में या घनघोर वनों में जाना तो असंभव है तो घर को ही गुफा समझ लो। घर के खाने को ही कंदमूल मान लो और तपस्या में लग जाओ। इस प्रश्न का उत्तर ढूंढ कर रखो कि "मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ, क्यों आया हूँ"। अगर कोरोना से बच गये तो इस प्रश्न का उत्तर अवश्य ही देना पडे़गा।

वैसे भी इस प्रश्न का उत्तर कि "मैं कौन हूँ,......" बाहर बियाबान जंगलों में या ऊंची पर्वत श्रंखलाओं पर जाने से नहीं मिलेगा। इस प्रश्न का उत्तर तो घर में ही खोजना पड़ेगा। इस प्रश्न का उत्तर यदि किसी को कहीं मिला भी तो घर में किसी कोने में पड़े किसी जंग लगे संदूक में मिलेगा। या फिर कबाड़ में पड़ी किसी धूल धुसरित फाइल में मिल सकता है। वैसे तो इस प्रश्न का उत्तर किसी पंडित, ज्योतिषी या शास्त्री द्वारा आपके जन्म के समय बनाई गई जन्म कुंडली में भी मिल सकता है पर यह साक्ष्य अभी मान्य नहीं है। देश वर्तमान रास्ते पर ही आगे बढ़ता रहा तो जन्म कुंडली वाला यह साक्ष्य जल्दी ही मान्य हो जायेगा।

आजकल कोरोना काल में गृहमंत्री अमित शाह जी नहीं दिख रहे हैं। न तो किसी को डरा धमका रहे हैं और न ही किसी राज्य सरकार को उलट पुलट रहे हैं और न ही कोरोना को रोकने की कोशिशों में मशगूल हैं। वे अवश्य ही कोरोना के बाद की योजनाओं को बनाने में व्यस्त हैं। चाहे कितना लम्बा लॉकडाउन हो जाये और चाहे कितना भी बडा़ आर्थिक स्लोडाउन हो जाये पर एनपीआर और एनआरसी तो आयेगा ही। तो वत्स, लॉकडाउन के समय समय है। अभी तपस्या में डूब जा। ढूंढ ले, इस प्रश्न का उत्तर ढूंढ ले कि तू और तेरा परिवार "कौन है, कहाँ से आया है और क्यों आया है"। कोरोना से बच गया तो इन प्रश्नों का उत्तर अवश्य ही देना पडे़गा।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Coronavirus
COVID-19
NPR
NRC
Social Distancing
Social Discrimination
Lockdown
Narendra modi
Amit Shah

Related Stories

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

कटाक्ष: नये साल के लक्षण अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं...


बाकी खबरें

  • yogi
    एम.ओबैद
    सीएम योगी अपने कार्यकाल में हुई हिंसा की घटनाओं को भूल गए!
    05 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखपुर में एक बार फिर कहा कि पिछली सरकारों ने राज्य में दंगा और पलायन कराया है। लेकिन वे अपने कार्यकाल में हुए हिंसा को भूल जाते हैं।
  • Goa election
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनाव: राज्य में क्या है खनन का मुद्दा और ये क्यों महत्वपूर्ण है?
    05 Feb 2022
    गोवा में खनन एक प्रमुख मुद्दा है। सभी पार्टियां कह रही हैं कि अगर वो सत्ता में आती हैं तो माइनिंग शुरु कराएंगे। लेकिन कैसे कराएंगे, इसका ब्लू प्रिंट किसी के पास नहीं है। क्योंकि, खनन सुप्रीम कोर्ट के…
  • ajay mishra teni
    भाषा
    लखीमपुर घटना में मारे गए किसान के बेटे ने टेनी के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ने का इरादा जताया
    05 Feb 2022
    जगदीप सिंह ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने उन्हें लखीमपुर खीरी की धौरहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वे 2024 के लोकसभा…
  • up elections
    भाषा
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहला चरण: 15 निरक्षर, 125 उम्मीदवार आठवीं तक पढ़े
    05 Feb 2022
    239 उम्मीदवारों (39 प्रतिशत) ने अपनी शैक्षणिक योग्यता कक्षा पांच और 12वीं के बीच घोषित की है, जबकि 304 उम्मीदवारों (49 प्रतिशत) ने स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षणिक योग्यता घोषित की है।
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    "चुनाव से पहले की अंदरूनी लड़ाई से कांग्रेस को नुकसान" - राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह
    05 Feb 2022
    पंजाब में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा करना राहुल गाँधी का गलत राजनीतिक निर्णय था। न्यूज़क्लिक के साथ एक खास बातचीत में राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह ने कहा कि अब तक जो मुकाबला…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License