NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र : क्या डराना इतना ही ज़रूरी है, साहेब?
…यह जानते हुए भी कि मैं ही सरकारें बनाता-बिगाड़ता हूँ, मैं आजकल बहुत ही डरा हुआ हूँ। 
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
21 Feb 2021
तिरछी नज़र : क्या डराना इतना ही ज़रूरी है, साहेब?
Image courtesy: Tehelka

मैं डरा हुआ हूँ। बहुत ही अधिक डरा हुआ। मैं उम्र के सातवें दशक में चल रहा हूँ पर इतना डरा हुआ कभी नहीं था जितना इस समय हूँ। शायद मैं आपातकाल में भी इतना डरा हुआ नहीं था जितना इस समय डरा हुआ हूँ। इस समय मैं इतना डरा हुआ इसलिए हूँ क्योंकि इस समय का निजाम चाहता कि भारतवासी डर कर ही रहें।

मैं भारत का वासी हूँ। भारत मेरा देश है। मेरे देश में लोकतंत्र है, जनतंत्र है, प्रजातंत्र है। मैं ही सरकार बनाता हूँ। सरकार जी को भी मैंने ही बनाया है। मैं जानता हूँ कि मैं बहुत ताकतवर हूँ। और कुछ नहीं तो कम से कम पाँच साल में तो एक बार तो बहुत ही ताकतवर बन जाता हूँ। यह जानते हुए भी कि मैं ही सरकारें बनाता-बिगाड़ता हूँ, मैं आजकल बहुत ही डरा हुआ हूँ। 

मेरे देश में बहुत ही ताकतवर संस्थायें हैं। ताकतवर उच्चतम न्यायालय है, ताकतवर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) है, आयकर विभाग है, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) है, अन्य ताकतवर संस्थायें भी हैं। और ये सभी संस्थायें मेरी रक्षा के लिए ही बनी हुई हैं। फिर भी मैं बहुत ही डरा हुआ हूँ क्योंकि मुझे पता है कि ये ताकतवर संस्थायें भी बहुत ही डरी हुई हैं।  

देश की सीमाएं भी बहुत सुरक्षित हैं। चीन के अंदर तक घुस आने के बावजूद देश सुरक्षित हैं। देश की सेनाएं तो हमेशा से ही देश की सीमाओं की रक्षा करती रही हैं पर इस समय देश की सुरक्षा से सेना के साथ साथ एक छप्पन इंच का सीना भी कर रहा है। इसीलिए देश इस समय  हमेशा के मुकाबले अधिक सुरक्षित है। पर फिर भी मैं हमेशा के मुकाबले अधिक डरा हुआ हूँ। 

मैं डरा हुआ हूँ। मैं डरा हुआ हूँ क्योंकि मैं ट्विटर पर  रेआना को फोलो करता था। मुझे उसके गाने अच्छे लगते हैं। मुझे लता मंगेशकर जी के गाने भी अच्छे लगते हैं पर मैं डर गया हूँ कि मुझे रेआना की गायकी क्यों पसंद है। मैं ट्विटर पर ग्रेटा को भी फोलो करता था। पर अब मैंने रेआना के साथ साथ ग्रेटा को भी फोलो करना बंद कर दिया है पर फिर भी मैं डरा हुआ हूँ। डर कर मैंने अपना ट्विटर अकाउंट बंद ही कर दिया है। 

मैं डरा हुआ हूँ। मैं डरा हुआ इसलिए भी हूँ क्योंकि मैं पर्यावरण को लेकर चिंतित हूँ और मैं इस पर काम करने वाले कुछ लोगों का फेसबुक मित्र भी हूँ। मैं डरा हुआ हूँ क्योंकि मैं उनकी पर्यावरण संबंधी पोस्टों को लाइक करता रहता हूँ और स्वंय भी बिगड़ते पर्यावरण पर चिंताग्रस्त हो पोस्ट करता रहता हूँ। अब मैंने अपने उन सभी मित्रों को, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए चिंतित रहते हैं, ब्लाक कर दिया है। मै फिर भी डरा हुआ हूँ। डर कर सोचता हूँ अपना फेसबुक अकाउंट ही बंद कर दूं। 

मैं डरा हुआ हूँ। मैं और भी डर जाता हूँ जब मैं पढ़ता हूँ कि एक इक्कीस वर्ष की बच्ची को टूल-किट की वजह से जेल जाना पड़ रहा है। मैंने अपने घर में सम्हाल कर रखी, कभी कभार काम आने वाली टूल-किट को निकाल कर बाहर फेंक दिया है। मैंने तो कार में रखी टूल किट को भी फेंक दिया है। लेकिन मेरा डर है कि खत्म ही नहीं हो रहा है। 

मेरा डर और भी बढ़ जाता है जब मैं देखता हूँ कि मेरा देश, विश्व का सबसे बड़ा जनतंत्र, जनसंख्या के हिसाब से विश्व में दूसरे नंबर का देश, क्षेत्रफल के आधार पर विश्व में सातवें स्थान पर, सैन्य शक्ति में विश्व में चौथे स्थान पर, एक पॉप गायिका के ट्वीट से, पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय एक अट्ठारह साल की कार्यकर्ता के ट्वीट से डर जाता है। देश के इस तरह डर जाने से मैं और भी अधिक डर गया हूँ। 

मैं किसान आंदोलन में किसानों के साथ रहा हूँ। मेरी संवेदना और समर्थन किसानों के साथ रहा है। मैं किसान आंदोलन के समर्थन में आंदोलन स्थल पर भी गया था। लेकिन जब से रेआना के सिर्फ यह कहने पर कि हम इस (किसान आंदोलन) के बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं, सब को भड़कते देखा है, मैं डर गया हूँ। अब मैंने किसानों के पक्ष में बात करना, लिखना-पढ़ना सब बंद कर दिया है। लगता है कि किसानों के साथ दिखना भी डरने की बात हो गई है। इस बात ने तो मुझे और भी डरा दिया है। मैं किसान आंदोलन से संबंधित अधिकतर पोस्ट वाट्सएप पर शेयर और फारवर्ड करता था। पर अब लगता है, डर कर वाट्सएप भी बंद करना पड़ेगा। 

अब जबसे मुझे रोना विल्सन के बारे में पता चला है, मेरा डर अपने कम्प्यूटर और ईमेल अकाउंट को लेकर भी बढ़ गया है। मुझे पता चला है कि भीमा कोरेगांव केस के आरोपी रोना विल्सन का कम्प्यूटर हैक कर उसमें फर्जी सबूत डाले गए, फर्जी ईमेल डाली गईं! उन्हें यूएपीए और राजद्रोह में गिरफ्तार किया गया है। मैं डर गया हूँ क्योंकि ऐसा किसी भी सोचने-समझने, पढ़ने-लिखने वाले के साथ हो सकता है। 

पहले से डरा हुआ मैं और भी डर जाता हूँ। मेरी तो डर के मारे जान ही निकल जाती है जब मैं देखता हूँ कि देश के गृहमंत्री अपने दल के आईटी सेल के लोगों को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि वाट्सएप ग्रुप बनाओ। वाट्सएप पर लाखों करोड़ों की संख्या में लोगों तक पहुंचो और उन तक मैसेज पहुंचाओ। हँसाने के साथ डराने के भी मैसेज पहुंचाओ। मैं डरा हुआ इसलिए हूँ क्योंकि मुझे उनकी हँसाने की प्रतिभा पर तो संदेह है पर उनकी डराने की प्रतिभा निसंदेह ही विलक्षण है। डरे हुए को और कितना डराओगे, साहेब। मरे हुए को और कितना मारोगे, सरकार। 

(‘तिरछी नज़र’ एक व्यंग्य स्तंभ है। लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।) 

tirchi nazar
Satire
Political satire
democracy
Fundamental Rights
Modi government

Related Stories

हिजाब बनाम परचम: मजाज़ साहब के नाम खुली चिट्ठी

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License