NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
'हम काग़ज़ विहीन भारत के लोग'
तिरछी नज़र : सरकार ने स्पष्ट कर दिया है। आपके पास जमीन के कागजात होने चाहियें, भारत के लोग में शामिल होने के लिए। सरकार जमींदार बन चुकी है और जमींदार के लिए जमीन के कागजात ही सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
26 Jan 2020
71st republic day 2020
image courtesy: InReuters

आज गणतंत्र दिवस है। इकहत्तरवां गणतंत्र दिवस। आज हमें गणतंत्र बने सत्तर वर्ष बीत चुके हैं। हमारा संविधान लागू हुए सत्तर वर्ष बीत चुके हैं। आज के दिन, छब्बीस जनवरी से इकहत्तरवां वर्ष शुरू हो गया है। हमारा देश पिछले सत्तर साल से गणतंत्र है, गण यानी जनता का, लोक का, लोगों का तंत्र।

logo tirchhi nazar_15.PNG

हमारे देश के संविधान की प्रस्तावना शुरू होती है 'हम भारत के लोग......' से। मतलब कि देश को, संविधान को देश के लोगों से मतलब है। देश की जमीन से मतलब उस जमाने के नेताओं को नहीं होता था। न जाने कैसे लोग थे ये संविधान बनाने वाले। जरा सी 'अक्ल' नहीं थी। 'अक्ल' होती तो देश की जमीन को महत्व देते, लोगों का क्या है। 

अब हमारे पास 'अक्लमंद' नेता आये हैं। कहते हैं कि अगर 'भारत के लोग' बने रहना चाहते हो तो आपके पास कागजात होने चाहियें। पर कागजात का मतलब वोटर कार्ड नहीं है। वोटर कार्ड तो वोट देने के लिए है। वह नागरिकता की निशानी थोड़े ही है। वोटर कार्ड की मदद से जिस सरकार को बनाया, वही सरकार कह रही है कि वोटर कार्ड तो नागरिकता का सबूत नहीं है। यानी जिनके पास वोटर कार्ड है, वह जरूरी नहीं है कि देश के नागरिक हों। जरूरी नहीं है कि वे लोग जिनके पास वोटर आईडी कार्ड हो वे लोग "भारत के लोग" हो। तो इस हिसाब से यह सरकार, जिसे लोगों ने वोटर कार्ड का ही प्रयोग कर, वोट डाल कर चुना है, भारत देश की सरकार तो नहीं ही है। 

अब प्रश्न उठता है कि उन कागजात से जिनसे आप 'भारत के लोग' सिद्ध हो सकते हैं, और क्या हो सकता है। सरकार ने बता दिया है कि वह पासपोर्ट तो हरगिज नहीं हो सकता है। अमरीकी सरकार भारतीय पासपोर्ट से आपको भारत का नागरिक मान लेगी। यूके, जर्मनी और फ्रांस भी। पर अब भारत सरकार आपको भारत के पासपोर्ट से 'भारत के लोग' (नागरिक) नहीं मानेगी। कम से कम सरकार का तो यही कहना है।

एक और कागज है हमारे पास। पैन कार्ड। यह कार्ड भी सरकार द्वारा ही इशू किया गया है। पर यह भी आपको 'भारत के लोग' सिद्ध करने के लिए किसी भी काम का नहीं है। इसके द्वारा आप सरकार को पैसा (टैक्स) देते हैं, पर सरकार आपको कुछ भी नहीं देती है, नागरिकता भी नहीं। पैन कार्ड से आप सरकार के साहूकार तो बन जाते हैं, बैंकर तो बन जाते हैं पर सरकार आपको 'भारत के लोग' भी नहीं बनाती है।

आप सरकार की योजनाओं के लिए पैसा देते हैं। प्रधानमंत्री जी के विदेश दौरों के लिए पैसा देते हैं, सरकार की उपलब्धियों को दिखाने के लिए विज्ञापनों के लिए पैसा देते हैं, और यह सब आपको बिलकुल नहीं अखरता है। पर ध्यान रहे, आप कितना भी पैसा दे रहे हों, पैन कार्ड से आपको नागरिकता नहीं मिलने वाली। पैन कार्ड भी आपको 'भारत के लोग' नहीं बना सकता है।

सरकार ने साफ कर दिया है कि कागजात का मतलब आधार कार्ड भी नहीं है। इसी आधार कार्ड के पीछे ये सरकार पड़ी रहती है। सारी की सारी चीजें, बैंक अकाउंट, बीमा पॉलिसी, मोबाइल फोन, सब आधार कार्ड से लिंक करवा ली हैं। स्कूल में वजीफा चाहिए तो आधार जरूरी। कोई सब्सिडी चाहिए तो आधार जरूरी। यहां तक कि मनरेगा में दो-चार दिन की भी मजदूरी की है तो वह भी मिलेगी तभी जब आधार कार्ड होगा। आधार कार्ड न होने से गरीबों के राशन कार्ड बेकार हो जाते हैं, वे भूख से मर जाते हैं। पर अब इतना इंपोर्टेंट आधार कार्ड, लोगों को भूखा मार डालने वाला आधार कार्ड भी आपके 'भारत के लोग' होने का सबूत नहीं है।

जब ये सब सारे कार्ड, चार चार कार्ड आपके पास हों, पर फिर भी आप 'भारत के लोग' न बन पायें तो आखिर कौन से कागजात चाहियें, हम भारत के लोग में शामिल होने के लिए, भारत का नागरिक बनने के लिए। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है। आपके पास जमीन के कागजात होने चाहियें, भारत के लोग में शामिल होने के लिए। सरकार जमींदार बन चुकी है और जमींदार के लिए जमीन के कागजात ही सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। गरीब हो, जमीन नहीं है, तो सोच लो। गरीब भूमिहीन लोग 'हम भारत के लोग' मेंं शामिल नहीं हैं।

पर एक और तरकीब है। अगर जमीन न हो तो आपके पास बर्थ सर्टिफिकेट हो। यानी जन्म प्रमाणपत्र। अपना ही नहीं, अपने मां-बाप का भी, वह भी किसी एक का नहीं, दोनों का। दोनों का जन्म भारत में हुआ हो। किसी एक के से काम नहीं चलेगा। पर मां-बाप, दोनों का जन्म प्रमाणपत्र तो शायद मुकेश अंबानी के पास भी नहीं होगा। पर अंबानी-अडानी, टाटा-बिरला को चिंता की जरूरत नहीं है।

उनके पास तो जमीन ही बहुत सारी है। वैसे तो अभी तक दसवीं कक्षा का सर्टिफिकेट जन्म प्रमाणपत्र की तरह से चल जाता है पर इस मामले में यह चलेगा या नहीं, सरकार ने साफ नहीं किया है। अगर नहीं चला तो हो सकता है कि पढा़ लिखा होना भी आपके काम न आये।

फिर आखिर आपके काम क्या आयेगा। शहनशाह जी ने और शाह साहब ने अभी साफ साफ नहीं बताया है कि कौन सा कागज काम आयेगा। पर स्पष्ट है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इशू किया गया कागज तो अवश्य ही काम आयेगा। भले ही उसे आप भाजपा के खाते में जमा करवायें या फिर आपको 'भारत के लोग' साबित करने वाले विभाग के लोगों के पास। रिजर्व बैंक द्वारा इशू किये गये कागजों को चलाने के बाद अमीर तो बन ही जायेंगे 'भारत के लोग'। गरीब लोग ही रह जायेंगे संविधान सम्मत 'हम भारत के लोग' में सम्मिलित होने से।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
republic day
CAA
NRC
documents
Land papers
modi sarkar
Narendra modi
BJP
Constitution of India
71st Republic Day 2020

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • brooklyn
    एपी
    ब्रुकलिन में हुई गोलीबारी से जुड़ी वैन मिली : सूत्र
    13 Apr 2022
    गौरतलब है कि गैस मास्क पहने एक बंदूकधारी ने मंगलवार को ब्रुकलिन में एक सबवे ट्रेन में धुआं छोड़ने के बाद कम से कम 10 लोगों को गोली मार दी थी। पुलिस हमलावर और किराये की एक वैन की तलाश में शहर का चप्पा…
  • non veg
    अजय कुमार
    क्या सच में हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ है मांसाहार?
    13 Apr 2022
    इतिहास कहता है कि इंसानों के भोजन की शुरुआत मांसाहार से हुई। किसी भी दौर का कोई भी ऐसा होमो सेपियंस नही है, जिसने बिना मांस के खुद को जीवित रखा हो। जब इंसानों ने अनाज, सब्जी और फलों को अपने खाने में…
  • चमन लाल
    'द इम्मोर्टल': भगत सिंह के जीवन और रूढ़ियों से परे उनके विचारों को सामने लाती कला
    13 Apr 2022
    कई कलाकृतियों में भगत सिंह को एक घिसे-पिटे रूप में पेश किया जाता रहा है। लेकिन, एक नयी पेंटिंग इस मशहूर क्रांतिकारी के कई दुर्लभ पहलुओं पर अनूठी रोशनी डालती है।
  • एम.के. भद्रकुमार
    रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं
    13 Apr 2022
    यह दोष रेखाएं, कज़ाकिस्तान से म्यांमार तक, सोलोमन द्वीप से कुरील द्वीप समूह तक, उत्तर कोरिया से कंबोडिया तक, चीन से भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान तक नज़र आ रही हैं।
  • ज़ाहिद खान
    बलराज साहनी: 'एक अपरिभाषित किस्म के कम्युनिस्ट'
    13 Apr 2022
    ‘‘अगर भारत में कोई ऐसा कलाकार हुआ है, जो ‘जन कलाकार’ का ख़िताब का हक़दार है, तो वह बलराज साहनी ही हैं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी के बेहतरीन साल, भारतीय रंगमंच तथा सिनेमा को घनघोर व्यापारिकता के दमघोंटू…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License