NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: आत्मनिर्भर भारत के सबक़
‘सरकार जी’ ने इतना अच्छा बंदोबस्त कर दिया कि इलाज के लिए डाक्टर ढूंढना है तो खुद ही ढूंढो, अस्पताल और उसमें बिस्तर भी खुद ही ढूंढो। ऑक्सीजन सिलेंडर खुद ढूंढो और उसमें भरवाने के लिए ऑक्सीजन भी खुद ही ढूंढो।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
30 May 2021
तिरछी नज़र: आत्मनिर्भर भारत के सबक़
फोटो साभार: जनसत्ता

देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘सरकार जी’, जब से वे सरकार जी बने हैं, तब से ही बहुत कोशिश कर रहे हैं। सरकार जी देश को अपने ऊपर निर्भर बनाने की यथा संभव कोशिश कर रहे हैं। जब कभी भी कोई बात उठती है तो प्रश्न यही उठाया जाता है कि वे नहीं तो और कौन। अर्थात देश उन्हीं पर निर्भर है। सरकार जी और उनके सारे समर्थकों की निगाह में इसी को 'आत्म-निर्भर' बनना कहते हैं।

लेकिन ऐसा नहीं है कि सरकार जी इसी को, देश को अपने ऊपर निर्भर बनाने को ही आत्मनिर्भरता कहते हैं। सरकार जी ने यह भी चाहा और कोशिश की है कि देश के लोग देश पर निर्भर न हों, अपने आप पर ही निर्भर हों। तो आत्मनिर्भरता के पहले सबक की शुरुआत नौकरी से की गई। सरकार जी का मानना है कि लोगों को नौकरी के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, आत्मनिर्भर होना चाहिये। वैसे तो सरकारी नौकरियाँ थीं ही गिनती की पर सरकार जी की सरकार ने नौकरियों का ऐसा टोटा कर दिया है कि लोगों को झक मार कर नौकरियों के मामले में आत्मनिर्भर होना ही पड़ रहा है।

सरकार जी और उनके ढेर सारे मंत्रियों और मुख्य मंत्रियों ने बताया है कि नौकरी के पीछे मत भागो, खुद का काम करो। पकौड़े बनाओ, पंक्चर लगाओ। पान खिलाओ, बीड़ी-सिगरेट पिलाओ। अरे! ये भी न करना चाहो तो नौकरी के पीछे क्यों भागते हो, भैंस पाल लो। लेकिन नौकरी के लिए सरकार पर निर्भर मत रहो। आत्मनिर्भर बनो, अपना काम शुरू करो। जिन दिनों सरकार जी आत्मनिर्भर बनने के ये पकौड़े बनाने जैसे फार्मूले बता रहे थे उन्हीं दिनों अखबार भी उन लोगों की कहानियां छाप रहे थे जो पकौड़े तल तल कर नोट छाप रहे थे। आयकर विभाग भी पकौड़े वालों के यहाँ रेड मार कर पकौड़े बनाने के रोजगार की 'वैल्यू' बढ़ा रहे थे। यानी अखबार और आयकर विभाग भी देश के युवाओं को रोजगार के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में अपनी भूमिका निभा रहे थे।

इधर सरकार जी 'नौकरी में आत्मनिर्भरता' के इस फार्मूले पर काम कर रहे थे उधर मोदी जी के मित्र कार्पोरेट घराने मोदी जी को समझा रहे थे कि अगर सभी पकौड़े बनाने में, पंक्चर लगाने में लग गये तो उनके यहां चाकरी कौन करेगा, मजदूरी कौन करेगा। उनके कारखाने कैसे चलेंगे। सरकार जी में समझ की कमी थोड़ी न है। बोले, तो अब तुम ही दो लोगों को नौकरियाँ। सरकार जी ने झटपट कार्पोरेट टैक्स कम कर दिया। बताया गया कि अब कार्पोरेट बनायेगा देश को आत्मनिर्भर। वही देगा देश भर को नौकरियाँ।

खैर कार्पोरेट ने सारे के सारे पैसे डकार लिए और डकार भी नहीं ली। किसी को भी नौकरी नहीं मिली, बल्कि छिन और गईं। बेरोजगारी दर और अधिक बढ़ गई। देश की जनता आत्मनिर्भर होते होते रह गई। इससे पहले कि सरकार जी देश की जनता को आत्मनिर्भर बनाने के और फार्मूले ढूंढते, कि कोरोना आ गया। कोरोना छा गया।

अब सरकार जी ने सोचा कि देश आत्मनिर्भर बने न बने, ऑक्सीजन तक विदेशों से आयात करनी पड़े, वेंटिलेटर सहायता के रूप में मंगवाने पड़ें, पर इस आपदा में लोगों को पूरी तरह आत्मनिर्भर बना देना है। पहले तो पहले लॉकडाउन में सरकार जी ने आवागमन के सारे साधन बंद कर दिए। क्या हवाई जहाज, क्या रेल गाड़ी और क्या बस, सब बंद। आना-जाना सब बंद। आत्मनिर्भरता का दूसरा पाठ था पहला लॉकडाउन। खाने को नहीं है तो भूखे रहो। सब्र टूट जाये, अपना गांव देहात बुलाने लगे तो न बस, न ट्रेन। आत्मनिर्भर बनो और पैदल जाओ। साथ में लाठियां भी खाओ। सरकार जी द्वारा देश के नागरिकों को सिखाया गया आत्मनिर्भरता का यह पहला लॉकडाउन दूसरा सबक था। पहला सबक तो नौकरी में आत्मनिर्भरता थी।

जब दूसरी लहर आई तो सरकार ने पूरा प्रबंध कर दिया कि लोगों को आत्मनिर्भरता का अगला, यानी तीसरा सबक सिखाया जाये कि बीमारी से खुद ही लड़ना है, सरकार कुछ नहीं करेगी। अपने लिए, अपने मां-बाप के लिए, अपने भाई-बहन के लिए, अपने मित्रों के लिए, सब के लिए बीमारी से खुद ही लड़ना है।

सरकार जी ने इतना अच्छा बंदोबस्त कर दिया कि इलाज के लिए डाक्टर ढूंढना है तो खुद ही ढूंढो, अस्पताल और उसमें बिस्तर भी खुद ही ढूंढो। ऑक्सीजन सिलेंडर खुद ढूंढो और उसमें भरवाने के लिए ऑक्सीजन भी खुद ही ढूंढो। वेंटिलेटर की जरूरत आन पड़े तो वह भी तो खुद ही ढूंढना है न भाई। दवाइयां नहीं मिल रही हैं तो खुद ढूंढो और ढूंढने पर भी न मिलें तो ब्लैक में खरीदो। और इंजेक्शन, वह तो ब्लैक में भी मिल जाये तो अपने को भाग्यशाली मानो। और बच न पाओ तो श्मशानघाट भी रिश्तेदार ढूंढ ही लेंगे। अब सरकार ने हम सबको इतना आत्मनिर्भर तो बना ही दिया है कि ये सारे काम हम बिना शिकायत किये कर लेते हैं। अब सरकार जी जनता को और कितना आत्मनिर्भर बनायें। आखिर सरकार जी को बंगाल के बाद अब लक्षद्वीप भी तो देखना है कि नहीं! एक जान और इतने सारे काम।

ऐसा नहीं है कि सरकार जी आत्मनिर्भरता के इन सबकों को सिखा कर ही मान जायेंगे। अब सरकार जी की अगला सबक लोगों को खाने-पीने की चीजों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का है। वह मंशा तो पूरी हो ही जाती अगर ये देशद्रोही, रुरल नक्सली, खालिस्तानी किसान सरकार की राह में रोड़ा न बनते। ये तीनों किसान विरोधी कानून इसी सबक को सिखाने के लिए ही तो लाये गये हैं। इन कानूनों को जरा ढंग से लागू हो जाने दीजिए। फिर देखियेगा, अनाज और अन्य खेती उत्पाद इतने मंहगे हो जायेंगे कि जब आप, आपके बच्चे, भाई-बहन, सगे-संबंधी और मित्र भूखे मरेंगे तो आप खेती में भी आत्मनिर्भर बनना चाहेंगे। खुद की ही खेती करना चाहेंगे। अगले सबक के रूप में सरकार जी चाहेंगे कि लोग-बाग पेट्रोल और डीजल के मामले में आत्मनिर्भर बनें। सरकार ने पेट्रोल और डीजल में तो यह स्थिति बना तो दी ही गई है कि अगर अनुमति मिल जाये तो लोग अपना तेल अपने आप ही निकालने में लग जायें, आत्मनिर्भर हो जायें।

ठीक ही तो है, जब पिसेगा भारत!

तभी तो आत्मनिर्भर बनेगा भारत!!

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Atmanirbhar Bharat
Corona Crisis
COVID-19
Modi government

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान मोदी को लोकतंत्र का सबक़ सिखाएगा और कॉरपोरेट की लूट रोकेगा: उगराहां
    27 Nov 2021
    ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने टिकरी बॉर्डर स्थित गुलाब बीबी नगर में बात की जुझारू किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (एकता) उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां से और उनसे जानने की…
  • P Chidambaram his son Karti
    भाषा
    एयरसेल-मैक्सिस मामला: अदालत ने चिदंबरम और कार्ति को 20 दिसंबर को तलब किया
    27 Nov 2021
    विशेष न्यायाधीश ने इस बात पर गौर करते हुए आदेश पारित किया कि सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार और धन शोधन के मामलों में चिदंबरम और अन्य आरोपियों को समन भेजे जाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
  • Covid new variant omicron
    एपी/भाषा
    अब कोविड-19 के नए स्वरूप ‘ओमीक्रॉन’ का डर, दुनियाभर के देशों ने लगायी यात्रा पाबंदियां
    27 Nov 2021
    डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ओमीक्रॉन के वास्तविक खतरों को अभी समझा नहीं गया है लेकिन शुरुआती सबूतों से पता चलता है कि अन्य अत्यधिक संक्रामक स्वरूपों के मुकाबले इससे फिर से संक्रमित होने का जोखिम अधिक है।…
  • gadchiroli
    अजय सिंह
    गढ़चिरौलीः यह लहू किसका है
    27 Nov 2021
    सरकार और बड़े पूंजीपति घरानों के दमन चक्र और लूट चक्र से अपने जीवन, सम्मान, जल, जंगल व ज़मीन को बचाने की लड़ाई आदिवासी लंबे समय से लड़ते आ रहे हैं। देश के अन्य हिस्सों की तरह गढ़चिरौली में भी ऐसी ही…
  • skm
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संयुक्त किसान मोर्चा का 29 नवंबर का संसद कूच स्थगित, 4 को अगली बैठक
    27 Nov 2021
    एसकेएम ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि क़ानून वापस लिए जाने के मद्देनज़र फ़िलहाल 29 नवंबर को शीत सत्र की शुरुआत के दिन संसद तक होने वाला ट्रैक्टर मार्च स्थगित कर दिया गया है। भविष्य की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License