NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र : अरे शर्म नहीं आती फ़ीस जैसी चीज़ के लिए आंदोलन करते हुए!
नये भारत में जेएनयू जैसी यूनिवर्सिटी नहीं होंगी और न ही पीएचडी जैसे कोर्स होंगे। अरे, इस पढ़ाई में युवाओं का सारा का सारा यौवन बरबाद हो जाता है। सरकार को युवाओं की बहुत ही चिंता है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
24 Nov 2019
JNU
फोटो साभार : Hindustan Time

छात्र आंदोलनरत हैं। पर उनका यह आंदोलन हम टैक्स पेयर्स की समझ से बिल्कुल ही परे है। विशेष रूप से जेएनयू के छात्रों का आंदोलन। अरे भाई, फ़ीस क्या बढ़ा दी, आप आंदोलन पर ही उतर आए। शर्म नहीं आती, चुनी हुई सरकार के खिलाफ आंदोलन करते हुए, मोदी-सरकार के खिलाफ आंदोलन करते हुए, एक महालोकप्रिय सरकार के खिलाफ आंदोलन करते हुए।

logo tirchhi nazar_6.PNG

पहली बात तो यह है कि छात्रों को इतनी कम फ़ीस में पढ़ने का अधिकार दिया किसने है? सरकार ने ही तो दिया है न। यह सरकार अब वह अधिकार वापस ले रही है तो भई, कठिनाई क्या है! पहले की सरकारों से अलग है यह सरकार। पिछली सरकार के, बुरे या अच्छे सभी फैसलों को बदल डालेगी यह सरकार। नया भारत बनायेगी यह सरकार।

नये भारत में जेएनयू जैसी यूनिवर्सिटी नहीं होंगी और न ही पीएचडी जैसे कोर्स होंगे। अब बताओ, पहले बारहवीं कक्षा तक पढ़ो, फिर बीए, एमए करो। उसके बाद रिसर्च यानी एमफिल, पीएचडी करो। यानी पढ़ते पढ़ते ही बुढ़ा जाओ। अरे, इस पढ़ाई में युवाओं का सारा का सारा यौवन बरबाद हो जाता है। सरकार को युवाओं की बहुत ही चिंता है। सरकार यह जो जेएनयू, एएमयू, हैदराबाद विश्वविद्यालय जैसे सारे विश्वविद्यालयों को समाप्त करना चाह रही है, वह युवाओं के और देश के भले के लिए ही चाह रही है।

वैसे भी सरकार आखिर कितना पैसा खर्च करे इस बेकार की पढ़ाई के लिए। ऐसा नहीं है कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं। सरकार के पास पैसा बहुत है पर ढंग के काम के लिए है। कारपोरेटस् का टैक्स कम करने के लिए है, उद्योगपतियों का बैंक लोन माफ करने के लिए है, मंत्रियों और बाबुओं के हर साल बढ़ने वाले वेतन और विदेश दौरों के लिए है और ऊंची से ऊंची प्रतिमाएं बनवाने के लिए है, पर ये बेकार की पढ़ाई-लिखाई में बरबाद करने के लिए फालतू का पैसा सरकार के पास नहीं है। 

यह सरकार चाहती है कि जो भी बच्चे इंजीनियरिंग, मेडिकल या मैनेजमेंट न कर पायें, वे बच्चे अधिक से अधिक बीए तक पढ़ें और काम धंधे में लग जायें। नौकरी न मिले तो पकोड़े तलने या पंक्चर लगाने का ही बिजनेस शुरू कर लें। बच्चे बीस-बाईस के होते ही काम धंधे में लग जायें तो देश का बहुत ही भला होगा। देश की जीडीपी जो बढ़ेगी सो अलग। हमारा देश पांच ट्रिलियन डालर तक ऐसे ही तो नहीं पहुंचेगा।

वैसे तो देश में नौकरियां हैं ही नहीं और उस पर भी जब कभी कभार चपरासी की नौकरी भी निकलती है, जिसमें दसवीं-बारहवीं पास लोगों को मांगा जाता है, तो उसके लिए भी पीएचडी किये हुए नौजवान तक अप्लाई कर देते हैं। ऐसे में सरकार की बडी़ फजीहत होती है। सरकार उसी फजीहत से बचने के लिए ही पीएचडी का कोर्स बंद कर देना चाहती है। न पीएचडी की पढ़ाई होगी और न ही चपरासी की पोस्ट के लिए भी पीएचडी किये हुए लोग फार्म भर सकेंगे।

जेएनयू में पढ़ाई होती भी क्या है। न तो इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है और न ही मेडिकल की। और तो और कमाई वाले अन्य क्षेत्रों जैसे कॉमर्स, कानून, मैनेजमेंट या फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई भी इस

विश्वविद्यालय में नहीं होती है। इन पढ़ाईयों के अलावा कोई और पढ़ाई भी काम की होती है भला! तो फिर किस काम का है यह विश्वविद्यालय। ऐसे विश्वविद्यालय को तो सरकार को जरा सा भी अनुदान नहीं देना चाहिए। कम से कम हम टैक्स पेयर्स के पैसे से तो हरगिज नहीं।

हम टैक्स पेयर्स भी अब जागरूक हो गये हैं। हमारे द्वारा दिये गए टैक्स के पैसे से सरकार मुफ्त शिक्षा दे, मुफ्त इलाज करे, ये नहीं चलेगा। पर हां, कारपोरेट घरानों को टैक्स में रियायत दे तो चलेगा। जेएनयू को चार सौ करोड़ रुपये साल का अनुदान दे, तो हम टैक्स पेयर्स प्रश्न उठायेंगे ही, पर सरकार तीन हजार करोड़ रुपये का स्टैचू बनवाये, हम कुछ नहीं कहेंगे। नौ हजार रुपये के ऋण से दबा किसान आत्महत्या कर ले, कोई बात नहीं पर हमारे टैक्स के पैसे से बडे़ उद्योगपतियों का ऋण माफ होने ही चाहिये। अब देश ऐसे ही चलेगा और ऐसे ही आगे बढ़ेगा।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Fee Hike
JNU
Student Protests
Narendra modi
modi sarkar

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें


बाकी खबरें

  •  AFSPA
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या AFSPA को आंशिक तौर पर हटाना होगा पर्याप्त ?
    17 Apr 2022
    31 मार्च को, भारत सरकार की, पत्र सूचना कार्यालय ने गृह मंत्रालय का एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया। सरकार ने ऐलान किया -- मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने एक महत्वपूर्ण कदम लिया है -- दशकों बाद नागालैंड,…
  • सत्यम् तिवारी
    जहांगीरपुरी हिंसा में अभी तक एकतरफ़ा कार्रवाई: 14 लोग गिरफ़्तार
    17 Apr 2022
    उत्तरी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाक़े में 16 अप्रैल की शाम बजरंग दल के हनुमान जयंती जुलूस के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा में पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ़्तार किया है, जिनमें सब मुस्लिम समुदाय के हैं।
  • इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा -  क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं
    बादल सरोज
    इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं
    17 Apr 2022
    बिना कोई देर या हीलाहवाला किए उन्हें भारत उसके संविधान और लोकतंत्र पर झपट रही भेड़ियों की इस फ़ौज से लड़ना होगा।
  • DELHI VOILENCE
    सत्यम् तिवारी
    मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक
    17 Apr 2022
    जंतर मंतर पर जब सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों को हटाने लगे तो भाईचारे और एकता का सबूत देते हुए रोज़ेदारों के साथ मिल कर प्रदर्शनकारियों ने इफ्तारी भी की और नारे लगाते हुए हिन्दू राष्ट्र, मुस्लिम विरोधी…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो
    17 Apr 2022
    “धर्म से आदम नहीं है, आदमी से धर्म है/ गुल का ख़ुशबू से नहीं, गुल से है ख़ुशबू का वजूद” ये शेर है ओम प्रकाश नदीम का, लेकिन इत्ती सी बात आज भी हमें समझ नहीं आ रही है। तभी वे कहते हैं कि सर जोड़ के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License