NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
खोरी गांव के बाशिंदों के समर्थन में आएं ट्रेड यूनियन और युवाओं के समूह
सर्वोंच्च न्यायालय के फैसले के बाद फरीदाबाद गांव के निवासी अपने घरों के आसन्न ध्वस्तीकरण का सामना कर रहे हैं।
रौनक छाबड़ा
06 Jul 2021
खोरी गांव के बाशिंदों के समर्थन में आएं ट्रेड यूनियन और युवाओं के समूह

हरियाणा में फरीदाबाद जिले के खोरी गांव में “अतिक्रमणों को हटाए जाने” की नियत अवधि के नजदीक आते जाने से इलाके में तनाव बढ़ गया है। हरियाणा पुलिस के निवासियों पर लाठी भांजने के बाद से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इसी के साथ-उस क्षेत्र में रहनेवाले उन लोगों के प्रति ट्रेड यूनियनों और असंख्य युवा समूहों एवं का समर्थन बढ़ता जा रहा है, जो अपने घरों के ध्वस्तीकरण का खतरा झेल रहे हैं।
ये संगठन दो तरह से उनकी मदद कर रहे हैं: पहला, निवासियों की न्याय की मांग को उनके संगठन के मंच से कर रहे हैं ताकि वे अधिक “अनुशासित अभियान” के रूप में संचालित हो सकें।

विगत सात जून को सर्वोच्च न्यायालय ने फरीदाबाद नगर निगम को आदेश दिया कि वह “वन की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए बिना किसी अपवाद के सभी आवश्यक कार्रवाई करे”। इसके लिए नगर निगम को छह हफ्ते का वक्त मुकर्रर किया गया है।

खोरी गांव के बाशिंदे, उनमें से अधिकतर लोग, वहां 20 से 25 वर्षों से रह रहे हैं, वे खुद के निशाना बनाए जाने पर विलाप कर रहे हैं। इसके अलावा, न्यायालय का फैसला उन्हें ऐसे बुरे समय में उनको अपने घरों से बेदखल कर देगा, जब उनका घर-परिवार कोरोना महामारीजनित आर्थिक चुनौतियों का भारी दबाव झेल रहा है। लोगों का कहना कि इससे अधिक बुरा समय और क्या हो सकता है! इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

पिछले हफ्ते, निवासियों ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का विरोध करने के लिए एक महापंचायत बुलाई थी पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस की दलील थी कि इलाके में धारा 144 लागू है और इसके चलते किसी तरह की भीड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। इस दलील पर विरोध बढ़ गया और लोग प्रदर्शन करने लगे तो पुलिमकर्मियों ने प्रदर्शनकारी बाशिंदों पर लाठियां चलाईं।

शनिवार को, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) की दिल्ली एवं हरियाणा इकाइयों के एक प्रतिनिधिमंडल ने फरीदाबाद के उप आयुक्त से मुलाकात की और स्थानीय निवासियों पर किए गए लाठी चार्ज की निंदा की। इस प्रतिनिधिमंडल में सीटू के अन्य सहयोगी-संगठनों अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ (एआइ डीडब्ल्यूए) एवं सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

 “इस शिष्टमंडल ने उप आयुक्त से कहा कि सरकार (हरियाणा) की यह कार्रवाई मानवाधिकारों का उल्लंघन है। हमने फरीदाबाद प्रशासन से मांग की कि खोरी गांव में बिजली एवं पानी की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाना चाहिए,” हरियाणा के सीटू के महासचिव जय भगवान ने कहा। प्रशासन ने इस इलाके की बिजली-पानी की आपूर्ति सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तुरंत बाद ही ठप कर दी थी।
एक अन्य उदाहरण में, पिछले हफ्ते युवाओं के अनेक समूह ने स्थानीय लोगों को एक साथ “लामबंद” करने की गरज से आगे आए थे।

नौजवान भारत सभा की कार्यकर्ता लता ने सोमवार को न्यूजक्लिक से बातचीत में कहा कि इस अभियान में गांव के निवासियों को संगठित किया जा रहा है, जो “उनके संघर्ष को मजूबती देगा और यह केवल उनके तात्कालिक मसले के हल तक ही सीमित नहीं होगा।

लता ने कहा,“हम एक व्हाटसएप्प ग्रुप बना कर गांव के निवासियों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। हम सूचनाओं की बेहतर पहुंच बनाने के लिए मोहल्ला कमेटियों का भी गठन कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में शहरी इलाकों में “बेहतर रिहाइश” की मांग करने एवं उस पर जोर देने के लिए इन बांशिदों के बीच स्थानीय समूह का होना भी महत्वपूर्ण हैं।

इन सारी कवायदों के अलावा, खोरी गांव के लोगों को किसान आंदोलन के नेताओं का भी समर्थन मिला है, जो अपनी मांगों को लेकर पिछले नवम्बर से ही राजधानी दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा प्रदेश के नेता गुरनाम सिंह चारुनी भी खोरी गांव की महापंचायत को संबोधित करने वाले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गांव में प्रवेश करने से ही रोक दिया।

किसान यूनियन की तरफ से एक प्रवक्ता ने न्यूजक्लिक से कहा कि सोमवार को किसान खोरी गांव के लोगों को अपना समर्थन दिया था। उन्होंने कहा,“हम सरकार को खोरी गांव में घरों को नहीं गिराने देंगे।”

बस्ती सुरक्षा मंच भी खोरी गांव के लोगों के समर्थन में आगे आना वाला एक अन्य संगठन है, उसके नेता शकील अहमद ने सोमवार को कहा कि विभिन्न संगठनों के समर्थन देने से खोरी गांव में आसन्न ध्वस्तीकरण के फैसले के विरुद्ध उसके निवासियों के जारी संघर्ष को और मजबूती मिली है।

अहमद ने कहा, “यह पहले से एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। इन संगठनों और समूहों का समर्थन शहरी कामगारों के आवास के अधिकारों की व्यापक मांग को भी सरकार के समक्ष रखने में भी मददगार होगा।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Trade Unions, Youth Groups Come Out in Support of Khori Village Residents

Khori village
Haryana
Supreme Court
Eviction
Centre of Indian Trade Unions
Naujawan Bharat Sabha
Basti Suraksha Manch
Farmers Protests

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License