NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर हुआ आदिवासी अधिकार सम्मेलन
बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर आदिवासी सवालों के मुखर स्वर शहीद फादर स्टैन स्वामी द्वारा स्थापित संस्थान बगइचा ( नामकोम, रांची ) में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी अधिकार कन्वेंशन में विभिन्न राज्यों के आदिवासी कार्यकर्ता जुटे। 
अनिल अंशुमन
16 Nov 2021
Tribal rights convention

आदिवासी महानायक बिरसा मुंडा के जन्मदिवस 15 नवम्बर को प्रधान मंत्री मोदी द्वारा ‘जन जातीय गौरव दिवस’ मनाने की घोषणा के समानांतर झारखण्ड प्रदेश में विभिन्न आदिवासी संगठनों और समुदाय के लोगों ने बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को आदिवासी पहचान के नायक के तौर पर मनाया।  

इसी क्रम में 15 नवम्बर को आदिवासी सवालों के मुखर स्वर शहीद फादर स्टैन स्वामी द्वारा स्थापित संस्थान बगइचा ( नामकोम, रांची ) में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी अधिकार कन्वेंशन में विभिन्न राज्यों के आदिवासी कार्यकर्ता जुटे. 

14 नवम्बर से शुरू हुए इस कन्वेंशन में सुदूर कर्नाटक के कॉफ़ी बगान में बंधुवागिरी खट रहे श्रमिक आदिवासियों से लेकर असम और दार्जिलिंग के चाय बागानों में आदिवासियत के दर्जे से भी वंचित श्रमिक आदिवासी प्रतिनिधि शामिल हुए. झारखण्ड समेत कार्बीआंग्लांग, ओड़िसा, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश (सोनभद्र), पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू तथा दिल्ली से आये 150 आदिवासी एक्तिविष्ट प्रतिनिधियों ने भाग लिया. 

15 नवम्बर को बिरसा मुंडा कि प्रतिमा और बगईचा में फादर स्टैन द्वारा झारखण्ड के आदिवासी-मूलवासी आन्दोलनकारी शहीदों की स्मृति में स्थापित ‘पत्थलगड़ी’ स्मारक ( जिसमें अब फादर स्टैन का भी नाम शामिल है) पर – बिरसा मुंडा का उलगुलान जारी है ... के जोशपूर्ण नारों के साथ पुष्प अर्पित किया गया. 

एआईपीएफ़ झारखण्ड के आदिवासी कार्यकर्ता देवकी नंदन बेदिया ने कन्वेंशन का आधार पत्र प्रस्तुत किया जिसपर उपस्थित प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे. 

जानी मानी अन्दोलाकारी और आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच की दयामनी बारला ने वर्तमान की आदिवासी समुदाय की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि मोदी शासन डिजिटल इंडिया के नाम पर ‘ज़मीन लूट और दमन’ का तिकड़मी गणित थोप रहा है. जिसे समझना एक बड़ी चुनौती बन गयी है. झारखण्ड की पिछली भाजपा रघुवर सरकार ने ‘लैंड बैंक’ कानून बनाकर रातों रात प्रदेश कि सारी आम व गैर मजरुवा, ससना-मसना, चरगाह, नदी-तालाब और गांवों के खेल मैदानों- अखड़ा की ज़मीनें छीन लिया और खाता खतियान डिजिटल करने के नाम पर इन ज़मीनों के पीढ़ी दर पीढ़ी मालिक रहे आदिवासी-मूलवासियों का अधिकार कानूनी तौर से हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया. मोदी जी ने उसे आगे बढ़ाते हुए ‘राष्ट्रीय भूमि बैंक’ का नाम देकर अपने अपने हाथों में कर लिया है. लैंड बैंक की अधिकांश ज़मीनों को ऑन लाईन कई निजी कंपनियों को सौपा जा चुका है. जिसकी खबर आज भी  किसी स्थानीय ग्रामीणों को नहीं है कि उनके कब्ज़े की ज़मीनें कागज़ पर उनसे छीनी जा चुकी है और वे हमेशा के लिए बेदखल किये जा चुके हैं. पूर्व नियोजित संस्थाबद्ध साजिश के तहत सभी आदिवासी मूलवासी किसानों की ज़मीनों के सभी कागजात डिजिटल कराये जाने के नाम पर ब्लॉक-जिला के सरकारी कार्यालयों से लेकर पुणे स्थित NIC निजी कंपनी को सौंपा जा चुका है. 

मोदी सरकार द्वारा आदिवासी-किसानों कि ज़मीन लूट के लिए हाल ही में लायी गयी  ‘स्वामित्व योजना’ के नाम पर प्रशासन इन दिनों खूंटी जिले में ड्रोन से आदिवासी गांवों और ज़मीनों का सर्वे करा रहा है. पूछने पर ग्रामीणों को उल्टा सीधा समझाया जा रहा है कि मोदी जी आपलोगों की भलाई के लिए ही आपकी ज़मीन का डिजिटल नक्शा बनवा रहें हैं ताकि सब कुछ आप ऑन लाईन करा सकें. मोदी शासन आदिवासियों की ज़मीनें कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले करने के लिए नित नए नए कानून और सियासी तिकड़मों को लागू करने पर आमादा है. इसीलिए कुछ दिन पहले ही जब खूंटी क्षेत्र के आदिवासियों ने कंपनी व ज़मीन लुटेरों को अपने इलाकों में घुसने से रोकने के लिए पत्थलगड़ी अभियान चलाया तो अपने आदमी घुसाकर उस अभियान को बदनाम करते हुए हजारों आदिवासियों पर देशद्रोह का मुक़दमा थोप दिया गया. आदिवासी इलाकों में इन दिनों के हालात इतने भयावह होते जा रहें हैं की गाँव गाँव में ही कम्पनियों के दलाल खड़े किये जा चुके हैं.  

कर्नाटक स्थित सुदूरवर्ती कॉफ़ी बागन से आई काव्या ने बताया कि आज भी वहाँ के आदिवासी महिला-पुरुष शर्मिकों की स्थिति गुलामों जैसी बनी हुई है. जहाँ के बागन मालिकों का व्यवहार पुराने ज़मींदारों और दास मालिकों जैसा है. कॉफ़ी बगान के श्रमिकों के लिए सरकार प्रदत्त लेबर-कोड के किसी प्रावधान को नहीं लागू किया जाता है. वहां के सारे श्रमिक आदिवासी आज भी कानूनी तौर से भूमिहीन की ही स्थिति में जी रहें हैं. 

कार्बी अंग्लांग के प्रतिनिधि ने बताया कि किस तरह से 2014 के लोकसभा चुनाव के समय में भाजपा नेता राजनाथ सिंह वहाँ पहुंचकर कार्बी के लोगों को स्वायत्त राज्य देने का झांसा देकर वोट ले लिया और अपना प्रत्याशी जीता लिया. लेकिन अब वहां के लोग भाजपा को अपना वादा याद दिला रहें हैं तो जवाब में वहां बसे बाहरियों और कार्बी जनता में सांप्रदायिक विभाजन और तनाव का कुचक्र रचा जा रहा है.  

महाराष्ट्र के श्याम गोहिल ने बताया कि पुरे महाराष्ट्र में आदिवासी बाहुल्य इलाकों को आज भी पांचवी अनुसूची का क्षेत्र नहीं घोषित किया गया है. जिससे उनकी ज़मीन लूट सबसे आसान बनी हुई है. आवाज़ उठाने वालों को नक्सली-माओवादी होने का आरोप मढ़कर जेलों में डाल दिया जाना आम परिघटना बनी हुई है. 

छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाकों में आदिवासियों पर हो रहे सरकारी दमन और ज़मीन लूट की जानकारी देते हुए बिजेंद्र ने बताया कि प्रदेश में गैर भाजपा कांग्रेस का शासन होने के बावजूद बस्तर समेत पुरे प्रदेश में आदिवासियों पर पुलिस अत्याचार और ज़मीन लूट की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है. आदिवासियों के एकजुट प्रतिरोध को कमज़ोर करने के लिए संघ परिवार संचलित संगठनों द्वारा जगह जगह इसाई बनाम गैर इसाई का सांप्रदायिक विभाजन का कुचक्र तेज़ी से फैलाया जा रहा है. 

झारखण्ड के वरिष्ठ आदिवासी बुद्धिजीवि प्रेमचन्द मुर्मू ने कहा है कि आजादी 75 वर्ष पुरे होने के बावजूद आज भी जिस संविधान की शपथ लेकर सरकार और मंत्री पद की शपथ ली जाती है, सत्ताशीन होते ही व्यवाहर में उसे लागू ही नहीं होने दिया जाता है. ऐसे में आदिवासियों को खुद से ही अपने अधिकारों की जागरूकता बढ़नी होगी. 

झारखण्ड के ही वाल्टर कंडूलना ने कहा कि आज भी यहाँ पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों तथा पेसा कानून को दरकिनार कर अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था थोपकर अदिवासियों की अपनी स्वशासन प्रणाली को लागू है नहीं होने दिया जा रहा है. आगामी झारखण्ड विधान सभा के सत्र में इसे प्रमुख मुद्दा बनाने के लिए सभी गैर भाजपा विधायकों पर जन दबाब बनाने का सुझाव दिया.

गुजरात से आये प्रतिनिधि ने जानकारी दी कि कैसे सरदार पटेल की मूर्ति बनाने के नाम पर सैकड़ों आदिवासी परिवारों को उजाड़ दिया गया. मोदी- शाह ने इसे राष्ट्रिय पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की थी लेकिन अब इसे निजी कंपनियों को सौंप कर पिकनिक स्पॉट बनाया जा रहा है.  

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र तथा बिहार के पूर्णिया से आये प्रातिनिधियों ने बताया कि कैसे वे वहां अल्पसंख्यकों की दुर्दशा जैसी स्थितियों में जी रहें हैं. 

कन्वेंशन को विशेष रूप से संबोधित करते हुए माले राष्ट्रिय महासचिव ने कहा कि मोदी सरकार ने भारत में अडानी-अम्बानियों का कॉर्पोरेटी राज स्थापित करने के लिए आदिवासियों के खिलाफ युद्ध जैसे हालात बना दिए हैं. जल जंगल ज़मीन और खनिज लूट का विरोध करनेवाले हजारों आदिवासियों को जेलों में डाल दिया गया है. आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को छीने जाने और विचाराधीन आदिवासी कैदियों की रिहाई का सवाल उठाने पर 84 वर्षीय फादर स्टैन स्वामी को रांची से विस्थापित कर महाराष्ट्र की जेल में विचारधीन क़ैदी बनाकर मार डाला गया. मोदी सरकार द्वारा खेती किसानी को कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले किये जाने की साजिश के खिलाफ देश में जारी किसान आन्दोलन की चर्चा करते हुए कहा कि आदिवासियों का भी संघर्ष कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ है तो ऐसे में ज़रूरी है कि पुरे देश को कंपनी राज के हवाले किये जाने के खिलाफ एक व्यापक और लड़ाकू मोर्चेबंदी हो. आदिवासी आन्दोलन को भी देश में जारी किसान और सार्जनिक क्षेत्र के मजदूर आन्दोलन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा. 

कन्वेंशन से देशव्यापी आदिवासी आन्दोलन के 30 सूत्री मुद्दों का चार्टर पारित कर मोदी सरकार की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों और राज्य दमन के खिलाफ व्यापकतम और एकताबद्ध संघर्ष कार्यक्रम तय किये गए. साथ ही अन्य आन्दोलनकारी समूहों को एक मंच पर लाने हेतु सर्वसम्मति से ‘आदिवासी अधिकार मोर्चा’ का गठन किया गया.   

कन्वेंशन सञ्चालन के लिए प्रतिमा इन्ग्पी व रवि फान्गचो  ( कार्बी आन्गालंग,असम ), तिरुपति गोमंगो ( ओड़िसा ) , सुमंती तिग्गा ( चाय बगान, सिलीगुड़ी) , देवकी नंदन बेदिया व जेवियर कुजूर को अध्यक्ष मंडल का सदस्य चुना गया. 

कन्वेंशन के अंतिम सत्र में दयामनी बारला , देवकीनंदन बेदिया व जेवियर कुजूर समेत 19 सदस्यीय राष्ट्रिय संयोजन समिति, 41 सदसीय राष्ट्रिय परिषद् का चुनाव किया. असम के डा. जयंत रंगपी, झारखण्ड के प्रेमचंद मुर्मू व वाल्टर कंडूलना समेत 5 सदस्यीय राष्ट्रिय सलाहकार मंडल एवं  सॉलीडिरीटी टीम का गठन किया गया. 

कन्वेंशन में झारखण्ड जन संस्कृति मंच की आदिवासी सांस्कृतिक टीमों द्वारा आदिवासी जन गीत व लोकनृत्यों की प्रस्तुती ने कार्यक्रम में अच्छा समां बांधने का काम किया. जिसमें संताली टीम अन्जोम द्वारा संताली, प्रेरणा व मांदर द्वारा हो तथा नागपुरी और सेंगेल टीम द्वारा मुंडारी में गीत नृत्य प्रस्तुत किये गए.

कन्वेंशन ने उपस्थित सभी आदिवासी कार्यकर्ता प्रतिनिधियों द्वारा मोदी सरकार द्वारा बिरसा मुंडा जयंती को ‘जन जातीय गौरव दिवस’ मनाने के फैसले का पुर जोर विरोध करते हुए आदिवासी समुदायों को इस झांसे के खिलाफ जागरूक करने का फैसला लिया गया.

birsa munda
Birsa Munda's birthday
Tribal rights convention

Related Stories

झारखंड : ‘जनजातीय गौरव दिवस’ से सहमत नहीं हुआ आदिवासी समुदाय, संवैधानिक अधिकारों के लिए उठाई आवाज़! 


बाकी खबरें

  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत एक मौज: क्यों नहीं हैं भारत के लोग Happy?
    28 Mar 2022
    'भारत एक मौज' के आज के एपिसोड में संजय Happiness Report पर चर्चा करेंगे के आखिर क्यों भारत का नंबर खुश रहने वाले देशों में आखिरी 10 देशों में आता है। उसके साथ ही वह फिल्म 'The Kashmir Files ' पर भी…
  • विजय विनीत
    पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर
    28 Mar 2022
    मोदी सरकार लगातार मेहनतकश तबके पर हमला कर रही है। ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती इसका ताजा उदाहरण है। इस कटौती से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सर्वाधिक नुकसान होगा। इससे पहले सरकार ने 44 श्रम कानूनों…
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट:जेलेंस्की के तेवर नरम, बातचीत में ‘विलंब किए बिना’ शांति की बात
    28 Mar 2022
    रूस लंबे समय से मांग कर रहा है कि यूक्रेन पश्चिम के नाटो गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद छोड़ दे क्योंकि मॉस्को इसे अपने लिए खतरा मानता है।
  • मुकुंद झा
    देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर
    28 Mar 2022
    सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    माले का 11वां राज्य सम्मेलन संपन्न, महिलाओं-नौजवानों और अल्पसंख्यकों को तरजीह
    28 Mar 2022
    "इस सम्मेलन में महिला प्रतिनिधियों ने जिस बेबाक तरीक़े से अपनी बातें रखीं, वह सम्मेलन के लिए अच्छा संकेत है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License