NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
राम के नाम पर देश में फिर नब्बे के दशक जैसा माहौल बनाने की कोशिश!
विश्व हिन्दू परिषद ने पूरे देश में 1990 के दशक जैसा जहरीला और तनावभरा माहौल बनाने की योजना बनाई है। इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में हो चुकी है, जहां कुछ कस्बों में सांप्रदायिक झडपें हुई हैं।
अनिल जैन
05 Jan 2021
राम
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : सोशल मीडिया

सदियों से करोडों लोगों के लिए श्रद्धा और विश्वास के प्रतीक रहे मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम पर एक बार फिर देश को सांप्रदायिक तौर पर गरमाने और नफरत फैलाने का अभियान शुरू हो गया है। विश्व हिन्दू परिषद ने पूरे देश में 1990 के दशक जैसा जहरीला और तनावभरा माहौल बनाने की योजना बनाई है। इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में हो चुकी है, जहां कुछ कस्बों में सांप्रदायिक झडपें हुई हैं।

कोई सवा साल पहले जब दशकों पुराने अयोध्या विवाद का जैसे-तैसे अदालती निबटारा हुआ था यानी नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था तो यह माना गया था कि अब इसको लेकर देश में किसी तरह का दंगा-फसाद नहीं होगा। तमाम तरह के विरोधाभासों से भरा फैसला होने के बावजूद देश के मुसलमानों ने भी देश की सबसे बडी अदालत के आदेश का एहतराम किया था। इसलिए माना गया कि अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर का निर्माण करने में अब किसी तरह की बाधा नहीं है।

सचमुच, मंदिर निर्माण में अब कोई बाधा नहीं है, लेकिन लगता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) अभी भी इस मसले को लेकर अब तक हुए खून-खराबे से संतुष्ट नहीं हैं। उनका मकसद मंदिर बनाने से ज्यादा इस मसले पर अपनी विभाजनकारी राजनीति करना है। वे अभी भी इस मामले को अपने राजनीतिक एजेंडा के तौर इस्तेमाल करने यानी सांप्रदायिक नफरत और तनाव फैलाना का इरादा रखते हैं। इस सिलसिले में उनका नया उपक्रम है राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के लिए देश में चंदा उगाही करना।

विहिप का यह अभियान 15 जनवरी से शुरू होकर 27 फरवरी तक चलेगा। इस काम में भाजपा के सांसद, विधायक, पार्षद, पार्टी पदाधिकारी और नेता आदि भी मदद करेंगे। इसे 'मंदिर आंदोलन पार्ट टू’ भी कह सकते हैं और लोकप्रिय बंबइया फिल्मों की भाषा में 'मंदिर आंदोलन रिटर्न’ भी। इस बार विश्व हिन्दू परिषद ने तय किया है और वह छह लाख गांवों में 13 करोड़ हिन्दू परिवारों तक जाएगी और मंदिर निर्माण के लिए चंदा मांगेगी। विहिप की ओर से कहा गया है कि जो मुसलमान भगवान राम को 'इमाम-ए-हिन्द’ मानते हैं, वे भी मंदिर निर्माण के लिए चंदा दे सकते हैं।

विहिप ने 'राम शिलापूजन’ के नाम से ऐसा ही अभियान इससे पहले 1989 में चलाया था। पूरे देश में यह अभियान तीन साल चलता रहा था। उसी दौर में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक की राम रथयात्रा निकाली थी, जिसने देश के कई इलाकों को सांप्रदायिक हिंसा की आग में झोंकने का काम किया था। उस समय भी उत्तर भारत के शहरों, गांवों और कस्बों में विहिप, बजरंग दल और भाजपा के कार्यकर्ताओं का हुजूम भडकाऊ नारे लगाते हुए निकलता था। विहिप और भाजपा के इन अभियानों की अंतिम परिणति अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के रूप में हुई थी।

संविधान और सुप्रीम कोर्ट को ठेंगा दिखा कर बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के उस संगीन आपराधिक कृत्य के बाद मामला अदालत में चलता रहा। दूसरी ओर विहिप की ओर से मंदिर निर्माण की तैयारियां भी जारी रहीं। उस समय भी पूरे देश से चंदा वसूला गया था और करोडों रुपये मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए थे। जिसका कोई लोकतांत्रिक लेखा-जोखा आज तक देश के सामने पेश नहीं किया गया है। उस पैसे का क्या हुआ, आज तक किसी को नहीं मालूम। सवाल है कि क्या वह पैसा मंदिर निर्माण के लिए पर्याप्त नहीं है और इसलिए चंदा इकट्ठा करने का अभियान चलाना पड़ रहा है या कोई और मकसद है? गौरतलब है कि मंदिर आंदोलन से जुडे कई संतों और उस दौर में विहिप के महत्वपूर्ण नेता रहे प्रवीण तोगडिया तो उस चंदे में घपले के आरोप भी लगा चुके हैं।

वैसे भी मंदिर निर्माण के लिए चंदा वसूलने की क्या जरुरत है? जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मंदिर का शिलान्यास किया है तो इसे सरकारी खर्च से क्यों नहीं बना दिया जा रहा है? जैसे प्रधानमंत्री ने दिल्ली में नए संसद भवन की नींव रखी या 31 दिसंबर को गुजरात के राजकोट में एम्स की नींव रखी है तो इनका निर्माण सरकार करा रही है।

यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि प्रधानमंत्री भूमिपूजन और शिलान्यास करे और निर्माण जनता के चंदे से हो! वैसे उत्तर प्रदेश में तो राज्य सरकार करोड़ों खर्च कर सरयू के किनारे भगवान राम की मूर्ति बनवा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से कहीं हनुमान जी की मूर्ति बननी है तो कहीं लक्ष्मण और सीता की मूर्ति बनाने की बात हो रही है। जब भगवानों की मूर्तियां सरकारी खर्च से बन सकती है, अयोध्या में दीपोत्सव और बनारस में गंगा आरती का खर्च सरकारी खजाने से दिया जाता है, प्रधानमंत्री का सारा धार्मिक पर्यटन सरकारी खर्च पर होता है तो मंदिर भी सरकारी खर्च से क्यों नहीं बना लिया जाता? कौन रोक सकता है?

दरअसल राम मंदिर के नाम पर एक बार फिर देश में नब्बे के दशक जैसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है। इसका मकसद केंद्र सरकार की तमाम नाकामियों के चलते लोगों में पनप रहे असंतोष और प्रतिरोध की आवाजों की ओर से ध्यान हटाना है। मध्य प्रदेश में इसकी शुरुआत हो गई है। राज्य के मालवा इलाके के कई कस्बों और गांवों में पिछले एक सप्ताह के दौरान मुस्लिम बहुल इलाकों में विहिप, बजरंग दल आदि संगठनों ने भडकाऊ नारों के साथ जुलूस निकाले हैं, मस्जिदों के बाहर हनुमान चालीसा के पाठ के आयोजन किए हैं। सबसे आपत्तिजनक और हैरानी की बात यह है कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले इन आयोजनों को स्थानीय पुलिस-प्रशासन का भी संरक्षण मिला हुआ है।

राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण अदालत के फैसले से हो रहा है और प्रधानमंत्री ने इसका शिलान्यास किया है। इसलिए यह दोनों की जिम्मेदारी है कि वे चंदा उगाही के नाम पर इस तरह की हरकतों को रोकें। कल्पना कीजिए कि मंदिर की जमीन के बदले में मस्जिद बनाने के लिए जो जमीन दी गई है, वहां मस्जिद निर्माण के लिए अगर इसी तरह मुस्लिम समुदाय के लोग 'जन जागरण अभियान’ शुरू कर दे और चंदा उगाही के लिए देश के चार-पांच करोड़ मुस्लिम परिवारों तक पहुंचने का अभियान चलाएं तो क्या तस्वीर बनेगी?

(लेखक वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Jai Shri Ram
Raam
Communalism
communal politics
RSS
Hindutva
Religion Politics
1990s Politics
BJP
Supreme Court
Constitution of India
Ram Mandir
Babri Demolition

Related Stories

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी

बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे


बाकी खबरें

  • International
    न्यूज़क्लिक टीम
    2021: अफ़ग़ानिस्तान का अमेरिका को सबक़, ईरान और युद्ध की आशंका
    30 Dec 2021
    'पड़ताल दुनिया भर' की के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने न्यूज़क्लिक के मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बात की कि 2021 में अफ़ग़ानिस्तान ने किस तरह एक ध्रुवी अमेरिकी परस्त कूटनीति को…
  • Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University
    सत्येन्द्र सार्थक
    दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पर गंभीर आरोप, शिक्षक और छात्र कर रहे प्रदर्शन
    30 Dec 2021
    गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पर कुछ प्रोफेसर और छात्रों ने आरोप लगाया है कि “कुलपति तानाशाही स्वभाव के हैं और मनमाने ढंग से फ़ैसले लेते हैं। आर्थिक अनियमितताओं के संदर्भ में भी उनकी जाँच होनी…
  • MGNREGA
    सुचारिता सेन
    उत्तर प्रदेश में ग्रामीण तनाव और कोविड संकट में सरकार से छूटा मौका, कमज़ोर रही मनरेगा की प्रतिक्रिया
    30 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश में देश की तुलना में ग्रामीण आबादी की हिस्सेदारी थोड़ी ज़्यादा है। सबसे अहम, यहां गरीब़ी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों की संख्या देश की तुलना में कहीं ज़्यादा है। इस स्थिति में कोविड…
  • delhi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना पाबंदियों के कारण मेट्रो में लंबी लाइन बसों में नहीं मिल रही जगह, लोगों ने बसों पर फेंके पत्थर
    30 Dec 2021
    दिल्ली के मेट्रो स्टेशनों के बाहर गुरुवार सुबह लगातार दूसरे दिन यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं।
  • AFSHPA
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    नगा संगठनों ने अफस्पा की अवधि बढ़ाये जाने की निंदा की
    30 Dec 2021
    केंद्र ने बृहस्पतिवार को नगालैंड की स्थिति को ‘‘अशांत और खतरनाक’’ करार दिया तथा अफस्पा के तहत 30 दिसंबर से छह और महीने के लिए पूरे राज्य को ‘‘अशांत क्षेत्र’’ घोषित कर दिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License