NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
नियमित शिक्षकों की कमी से जूझ रहे पटना के दो ट्रेनिंग कॉलेज
उच्चशिक्षा से जुड़ी समस्याओं और शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की भी स्थापना की गई थी लेकिन इसकी स्थापना के कई महीने बीत जाने के बाद भी शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Oct 2021
नियमित शिक्षकों की कमी से जूझ रहे पटना के दो ट्रेनिंग कॉलेज

पटना यूनिवर्सिटी के दो ट्रेनिंग कॉलेजों में नियमित शिक्षक नहीं हैं। ये कॉलेज केवल प्राचार्य और गेस्ट फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं। इन कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी की भी कमी है। प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार पटना ट्रेनिंग कॉलेज और पटना वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज में प्राचार्य को छोड़कर कोई भी नियमित शिक्षक नहीं है। पिछले सात-आठ वर्षों से शिक्षकों की नियुक्ति तो चल रही है लेकिन अब तक दोनों ही कॉलेजों को नियमित शिक्षक नहीं मिले हैं।

सरकार द्वारा फिर से नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू हो गई है लेकिन पिछली नियुक्ति ही अब तक नहीं हो पाई है। इससे बीएड कॉलेज के सामने मान्यता को लेकर संकट पैदा हो गया है। एनसीटीई ने इसी वजह से काफी समय तक दोनों ही कॉलेज की मान्यता रोक दी थी लेकिन बाद में काफी प्रयास के बाद मान्यता बहाल की गई थी। लेकिन हालात यही रहे तो अगले वर्ष फिर से वही नौबत आ सकते हैं।

पटना ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आशुतोष कुमार ने प्रभात खबर को बताया कि एनसीटीई की गाइडलाइंस के अनुसार दोनों ही कॉलेजों में प्राचार्य के अलावा 15-15 नियमित शिक्षकों की दरकार है। नियमित शिक्षक नहीं हैं। सीट सैंक्शन को लेकर भी विश्वविद्यालय के माध्यम से सरकार को पत्र भेजा गया है। पहले जो पद हैं उन पर भी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो रही है। इससे आने वाले दिनों में दोनों ही कॉलेजों पर मान्यता का संकट उत्पन्न हो सकता है।

नियमित शिक्षकों के सभी पद खाली

पटना ट्रेनिंग कॉलेज की बात करें तो प्राचार्य के अलावा यहां आठ शिक्षकों के पद हैं लेकिन सभी खाली हैं। जो खाली पद हैं उन पर गेस्ट फैकल्टी की बहाली कर अस्थायी तौर पर काम चलाया जा रहा है। यही स्थिति पटना वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज की भी है जहां नौ पद है लेकिन सभी खाली पड़े हैं। खाली पड़े पदों पर गेस्ट फैकल्टी से काम लिया जा रहा है। दोनों ही कॉलेजों में 15-15 गेस्ट फैकल्टी बहाल हुए थे लेकिन पटना कॉलेज में दस शिक्षक छोड़कर चले गए और पटना वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज के पांच शिक्षकों ने पद छोड़ दिया। इससे स्पष्ट है कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

अब दोगुने शिक्षकों की है जरूरत

पहले एक वर्षीय बीएड प्रोग्राम चलते थे। पिछले कुछ वर्षों से एनसीटीई ने एक की जगह दो वर्षीय बीएड कोर्स स्ट्रक्चर को लागू कर दिया। इस तरह अब कॉलेज में एक साथ दो बैच बीएड के चलते हैं। शिक्षकों की सीट उतनी ही है जबकि अब सौ कि जगह दो सौ छात्र एक समय में कॉलेज में क्लास करते हैं। न जगह बढ़ी है और न ही शिक्षकों की संख्या। इन कॉलेजों में दोनों ही प्राचार्य किसी तरह से सभी कक्षाओं को मैनेज करते हैं। एनसीटीई के अनुसार दोनों ही कॉलेजों में प्राचार्य को छोड़कर 15-15 शिक्षक होने चाहिए। कॉलेज में सीट सैंक्शन को लेकर सरकार को लिखा गया है लेकिन सरकार का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। पहले से जो पद हैं पहले तो उसी पर बहाली नहीं हो पा रही है।

राज्य में बीएड के कुल 352 कॉलेज हैं। जिनमें से 325 प्राइवेट हैं और 25 यूनिवर्सिटी बेस्ड सेल्फ फाइनेंस के कॉलेज हैं और दो यूनिवर्सिटी के कांस्टीट्यूएंट कॉलेज हैं। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के गाइडलाइन के तहत बीएड के लिए महाविद्यालय में 100 छात्रों पर 15 शिक्षकों का होना अनिवार्य है। मगर सभी कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है।

पटना में यूनिवर्सिटी के दो कांस्टीट्यूएंट कॉलेज हैं जो पटना यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आते हैं। पहला पटना ट्रेनिंग कॉलेज है जो लड़कों के लिए है। यहां बीएड के100 सीट हैं। जबकि दूसरा कॉलेज मगध महिला कॉलेज के पास स्थित विमेंस ट्रेनिंग कॉलेज है। इन कॉलेजों में बीपीएससी और यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन के तहत शिक्षकों की बहाली होती है।

राज्य के बाकी सरकारी विश्वविद्यालयों में चलने वाले यूनिवर्सिटी बेस्ड सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हैं। यहां कॉलेज प्रबंधन शिक्षकों की अस्थाई नियुक्ति करता है और इन शिक्षकों का वेतन का भुगतान छात्रों से ली गई फीस से दिया जाता है।

राज्य में सबसे ज्यादा प्राइवेट बीएड कॉलेज की संख्या है। इनकी कुल संख्या 325 है। यहां प्राइवेट बीएड कॉलेज का हाल यह है कि एनसीटीई के गाइडलाइन के तहत यह कॉलेज 15 शिक्षकों की संख्या अपने पास जरूर रखते हैं लेकिन कॉलेज में पढ़ाने के लिए 5 से 6 शिक्षक ही होते हैं।

विश्वविद्यालयों में भी शिक्षकों की भारी कमी

उधर विश्वविद्यालयों की बात करें तो बिहार में 11 विश्वविद्यालय हैं लेकिन इन विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं। जुलाई 2021 की रिपोर्ट के अनुसार पटना विश्वविद्यालय में 274 शिक्षकों के पद खाली है। वहीं पटना स्थित पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में 462 पद रिक्त है जबकि मुजफ्फरपुर के बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी में 603 पद खाली है वहीं एलएन मिथिला यूनिवर्सिटी दरभंगा में 856 पद खाली है। छपरा स्थित जेपी यूनिवर्सिटी की बात करें तो 319 पद रिक्त है वहीं मधेपुरा के बीएन मंडल यूनिवर्सिटी में 377 पद खाली है जबकि आरा स्थित वीरकुंवर सिंह विश्वविद्यालय में 428 पद रिक्त है, तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी में 284 पद खाली है, पूर्णिया विश्वविद्यालय पूर्णिया में 213 पद रिक्त है वहीं मुंगेर विश्वविद्यालय में 245 पद खाली है और गया स्थित मगध विश्वविद्यालय में 381 शिक्षकों के पद खाली है।

उच्चशिक्षा से जुड़ी समस्याओं और शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की भी स्थापना की गई थी लेकिन इसकी स्थापना के कई महीने बीत जाने के बाद भी शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इस आयोग को 4 हजार 638 असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली करनी थी। राज्य में बड़े पैमाने पर प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली हैं।

Patna Training College
Women Training College
Teachers
patna university
Bihar
B.Ed

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

बिहार : सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 1.10 करोड़ बच्चों के पास किताबें नहीं

बिहार : सातवें चरण की बहाली शुरू करने की मांग करते हुए अभ्यर्थियों ने सिर मुंडन करवाया

बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे

बीपीएससी प्रश्न पत्र लीक कांड मामले में विपक्षी पार्टियों का हमला तेज़

कोरोना लॉकडाउन के दो वर्ष, बिहार के प्रवासी मज़दूरों के बच्चे और उम्मीदों के स्कूल

बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की मांग में भाकपा-माले विधायकों का प्रदर्शन

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License