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जॉर्डन में सैन्य अड्डे के पास विस्फ़ोट में दो लोगों की मौत, तीन अन्य घायल
क़रीब 1.5 मिलियन की आबादी वाला जारका गवर्नरेट पिछले वर्षों में कई ऐसे विस्फोटों का शिकार हुआ है जो आसपास के क्षेत्र में स्थित सेना के डिपो और गोदामों के कारण हुए हैं।
पीपल्स डिस्पैच
11 Sep 2020
jordan explosion

जॉर्डन में बड़े पैमाने पर सिलसिलेवार कई विस्फोटों में शुक्रवार 11 सितंबर को तड़के कम से कम 2 लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य लोग को घायल हो गए। ये विस्फोट जॉर्डन की राजधानी अम्मान के उत्तरपूर्वी ज़रक़ा शहर के बाहरी इलाक़े में अल-ग़बावी क्षेत्र में सेना के युद्ध सामग्री वाले डिपो में हुआ।

इन विस्फोटों की वजह से बड़े पैमाने पर आग की लपटें दिखी और बाद में धुएं का बादल छा गया, जो लगभग 35 किलोमीटर दूर अम्मान से भी दिखाई दे रहा था। इन विस्फोटों से शहर के कई घरों की खिड़कियों के शीशे टूटने की ख़बर सामने आई है। इन विस्फोटों के झटके को सुदूर अम्मान में महसूस किया जा रहा था। इस घटना ने पिछले महीने बेरूत बंदरगाह विस्फोट की याद दिला दी जिसमें 200 लोग मारे गए और लगभग 7,000 लोग घायल हो गए।

प्रेस को दिए एक बयान में जॉर्डन के मीडिया मामलों के राज्य मंत्री अमजद अदैलेह ने कहा, "प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि ये विस्फोट सेना के गोला बारूद डिपो में इलेक्ट्रिक सर्किट के कारण हुआ था"। सेना कमान ने अभी तक इन विस्फोटों के बारे में आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है।

क़रीब 1.5 मिलियन की आबादी वाला ज़ारका गवर्नरेट को पिछले कई वर्षों में आसपास के क्षेत्र में स्थित कई युद्ध सामग्री डिपो और गोदामों के कारण इस तरह के विस्फोटों का सामना करना पड़ा है।

जॉर्डन के प्रधानमंत्री उमर अल-रज़ाज़ के बुधवार 9 सितंबर को सरकार की तरफ से सीमित एक वर्ष की अवधि के लिए 25-29 वर्ष की आयु के बीच के जॉर्डन के लोगों के लिए सैन्य भर्ती पुनः जारी करने की इस घोषणा के दो दिन बाद इस विस्फोट की ख़बर आई है। सरकार ने उक्त आयु वर्ग के पुरुषों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा को फिर से शुरू करने का फैसला किया है जिससे देश में बेरोज़गारी की दर को कम करने की कोशिश है जो ख़तरनाक गति से बढ़ रहा है।

पहले से ही कमज़ोर जॉर्डन की अर्थव्यवस्था को COVID-19 महामारी के आने के बाद बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान और आर्थिक अस्थिरता और गिरावट का सामना करना पड़ा है। 2020 की दूसरी तिमाही में देश में बेरोज़गारी की दर बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई जो साल 2019 की इसी अवधि की तुलना में 3.8 प्रतिशत अधिक है। विश्वविद्यालय के डिग्री हासिल करने वालों की यह दर काफी अधिक है अर्थात ये 26.6 प्रतिशत तक है।

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