NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
डीयू के दो और प्रोफ़ेसर को भीमा कोरेगांव मामले में समन, छात्र-शिक्षकों ने किया विरोध
प्रोफेसर राकेश रंजन और प्रोफेसर पी के विजयन को भी जांच में शामिल होने के लिए कहा गया। छात्रों और शिक्षकों ने इस कार्रवाई को कानूनों का गलत उपयोग और सरकार द्वारा विरोधी आवाज़ों को दबाने की कोशिश बताया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Aug 2020
डीयू के दो और प्रोफ़ेसर

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय के दो और प्रोफ़ेसर को NIA ने समन किया। इससे पहले इसी मामले में डीयू के प्रोफेसर हैनी बाबू की गिरफ़्तारी हो चुकी है। श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर राकेश रंजन और हिन्दू कॉलेज के इंग्लिश विभाग के प्रोफेसर पी के विजयन को भी जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है। छात्रों और शिक्षकों ने इस कार्रवाई को कानूनों का गलत उपयोग और सरकार द्वारा विरोधी आवाज़ों को दबाने की कोशिश बताया।

प्रो. विजयन के समर्थन में और सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई को लेकर हज़ारो छात्रों-शिक्षकों ने संयुक्त बयान जारी किया है। इसी तरह छात्र संगठनों ने और शिक्षकों ने प्रो. राकेश रंजन के समर्थन में ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू किया और उनके समर्थन में बयान जारी किया है।

67a7fcec-3134-4f52-8137-f19734d2708b.jpg

आपको बता दें कि दोनों शिक्षकों को स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पूर्व यानी शुक्रवार 14 अगस्त को समन किया गया था। दोनों पर ही भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े होने का शक जताया जा रहा है। लेकिन छात्र शिक्षक इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं और इसे लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने और जन मुद्दों पर लिखने बोलने वालो को डराने की कार्रवाई बता रहे हैं। शुक्रवार को जब प्रो. विजयन और रंजन से पूछ्ताछ हो रही थी तब उनके समर्थन में डीयू शिक्षक संघ (डूटा) के अध्यक्ष राजीव रे सहित कई शिक्षक और छात्र सीजीओ कॉम्प्लेक्स एनआईए कार्यालय के बाहर सुबह 10 बजे दिन भर खड़े रहे।

117954443_3362635520498542_2497197817423996975_o.jpg

इसी मामले अभी तक इनसे पहले डीयू के हैनी बाबू समेत कुल चार प्रोफ़ेसर को गिरफ़्तार किया जा चुका है। इनमें मशहूर मानवाधिकार वकील और दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में विज़िटिंग फैकल्टी सुधा भारद्वाज, गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में प्रोफेसर और जाति व्यवस्था पर दो दर्जन से अधिक किताबें लिख चुके आनंद तेलतुम्बडे, मानवाधिकार कार्यकर्ता और नागपुर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर शोमा सेन शामिल हैं। जबकि इस मामले में कुल 12 लोगों की गिरफ़्तारी हुई ,बाकी सात मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जिनमें  सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, अरुण फरेरा, सुधीर धवले, रोना विल्सन, वर्नोन गोंसाल्वेस, वरवर राव, और गौतम नवलखा हैं, जिनमें से सभी को बार-बार जमानत देने से इनकार किया गया है।

इसी तरह दिल्ली दंगे में भी डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद से तीन घंटे तक पूछताछ की गई और उन्हें दिल्ली दंगो के साजिशकर्ता के तौर पर पेश किया जा रहा है। ये सभी लोगों लगातार सरकार के नीतियों पर लिखते और बोलते रहे हैं और इसके साथ ही समाज के पिछड़े तबके की आवाज़ उठाते रहे हैं। ये सभी खुले तौर से मोदी सरकार के आलोचक रहे हैं। कई जानकारों का कहना है इसलिए इन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

हिंदू कॉलेज के प्रोफेसर पीके विजयन के समर्थन में जारी संयुक्त बयान जिसे 1200 से अधिक लोगों ने साइन किया है। उसमें कहा गया है कि एनआईए द्वारा प्रोफेसर विजयन को जारी किए गए समन से छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक समुदाय के सदस्यों में चिंता है। हाल ही में, दिल्ली विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रो. हैनी बाबू को भी एनआईए ने इसी तरह से तलब किया था और फिर उन्हें प्रगतिशील शिक्षकों, पत्रकारों, वकीलों, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ही भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में यूएपीए आरोपों के तहत गिरफ्तार किया था।

इस बयान में यह भी बतया गया है कि प्रो. विजयन एक विख्यात अकादमिक व्यक्ति हैं जिनकी लोकतांत्रिक अधिकारों, सभी के लिए शिक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता है उनकी अकादमिक व्यस्तताओं और सामाजिक सक्रियता दोनों में परिलक्षित होती है। वह सार्वजनिक शिक्षा के निजीकरण, संवैधानिक सामाजिक न्याय मानदंडों पर हमले, आरएसएस-भाजपा शासन द्वारा पाठ्यक्रम के भगवाकरण और राजनीतिक विरोध के अपराधीकरण के खिलाफ एक बुलंद आवाज़ रहे हैं। उन्होंने कई शैक्षिक पत्रों को लिखा है और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों और सम्मेलनों में भाग लिया है। उनकी सबसे हालिया पुस्तक, 'जेंडर एंड हिंदू नेशनलिज्म: अंडरस्टैंड मैस्क्युलिन हेगमेनी' को रूटलेज द्वारा प्रकाशित किया गया है ।

इस बयान में संयुक्त रूप से कहा गया है कि विजयन एक अधिक समतावादी, सिर्फ सामाजिक व्यवस्था के लिए संघर्ष में साहित्य के लिए एक जुनून को प्रेरित करते हैं। अकादमिक समुदाय के सदस्यों के रूप में,  हम दमनकारी कानूनों के आरएसएस-भाजपा शासन के बढ़ते उपयोग और जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं में हेरफेर की निंदा करते हैं। जो आलोचनात्मक सोच और लोकतांत्रिक विरोध के खिलाफ है।

इस बयान के माध्यम से मांग की गई है कि:

1. प्रोफेसर पीके विजयन को परेशान करने के लिए राज्य एजेंसियों के प्रयोग को तुरंत रोका जाए।

2. भीमा कोरेगांव मामले में सभी राजनीतिक कैदियों को जिन्हें गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया उन्हें तत्त्काल रिहा किया जाए।

3. भीमा कोरेगांव मामले में दलित विरोधी हिंसा के आरोपी जैसे मिलिंद एकबोटे, संभाजी भिडे और अन्य लोगो को गिरफ्तार किया जाए।

4. बड़े आंदोलनों को अपराधी बनाने के लिए यूएपीए, एनएसए, एएफएसपीए और सेडिशन जैसे कानूनों का प्रयोग होता है। ऐसे सभी दमनकारी कानूनों को निरस्त करें।

पूरा पत्र नीचे पढ़े :-

Delhi University
DU professor
bheema goregaon
Professor Rakesh Ranjan
Professor PK Vijayan
DU student protest
Student Protests

Related Stories

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे भर्ती मामला: बिहार से लेकर यूपी तक छात्र युवाओं का गुस्सा फूटा, पुलिस ने दिखाई बर्बरता

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र, अचानक सिलेबस बदले जाने से नाराज़

झारखंड विधान सभा में लगी ‘छात्र संसद’; प्रदेश के छात्र-युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर

उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं

डीयू के छात्रों का केरल के अंडरग्रेजुएट के ख़िलाफ़ प्रोफ़ेसर की टिप्पणी पर विरोध

डीयू: एनईपी लागू करने के ख़िलाफ़ शिक्षक, छात्रों का विरोध

प्रत्यक्ष कक्षाओं की बहाली को लेकर छात्र संगठनों का रोष प्रदर्शन, जेएनयू, डीयू और जामिया करेंगे  बैठक में जल्द निर्णय

बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!


बाकी खबरें

  • mamta banerjee
    भाषा
    तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में चारों नगर निगमों में भारी जीत हासिल की
    15 Feb 2022
    तृणमूल कांग्रेस ने बिधाननगर, चंदरनगर और आसनसोल नगरनिगमों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है तथा सिलीगुड़ी में माकपा से सत्ता छीन ली।
  • hijab
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    हिजाब विवादः समाज सुधार बनाम सांप्रदायिकता
    15 Feb 2022
    ब्रिटेन में सिखों को पगड़ी पहनने की आज़ादी दी गई है और अब औरतें भी उसी तरह हिजाब पहनने की आज़ादी मांग रही हैं। फ्रांस में बुरके पर जो पाबंदी लगाई गई उसके बाद वहां महिलाएं (मुस्लिम) मुख्यधारा से गायब…
  • water shortage
    शिरीष खरे
    जलसंकट की ओर बढ़ते पंजाब में, पानी क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा?
    15 Feb 2022
    इन दिनों पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रचार चल रहा है, वहीं, तीन करोड़ आबादी वाला पंजाब जल संकट में है, जिसे सुरक्षित और पीने योग्य पेयजल पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। इसके बावजूद, पंजाब चुनाव में…
  • education budget
    डॉ. राजू पाण्डेय
    शिक्षा बजट पर खर्च की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? 
    15 Feb 2022
    एक ही सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे बजट एक श्रृंखला का हिस्सा होते हैं इनके माध्यम से उस सरकार के विजन और विकास की प्राथमिकताओं का ज्ञान होता है। किसी बजट को आइसोलेशन में देखना उचित नहीं है। 
  • milk
    न्यूज़क्लिक टीम
    राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ खिलवाड़ क्यों ?
    14 Feb 2022
    इस ख़ास पेशकश में परंजॉय गुहा ठाकुरता बात कर रहे हैं मनु कौशिक से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सम्बंधित कानूनों में होने वाले बदलावों के बारे में
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License