NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
मज़दूर-किसान
भारत
सैकड़ों बीघा गेहूं की तैयार फसल जलकर ख़ाक, किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद
10 अप्रैल को डुमरियागंज तहसील के परसा हुसैन गाँव में कंबाइन से गेहूं काटते समय खेत में आग लग गई। देखते ही देखते 36 किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलकर ख़ाक हो गई।
रिज़वाना तबस्सुम
13 Apr 2020
सैकड़ों बीघा गेहूं की तैयार फसल जलकर ख़ाक

सिद्धार्थनगर (उत्तर प्रदेश) : "हम किसान हैं, किसानों की ज़िंदगी खेती होती है, जब खेती बर्बाद होती है तो हमारी पूरी ज़िंदगी बर्बाद होती है। एक किसान की खेती तबाह होने से केवल एक किसान तबाह नहीं होता है उसके साथ उसका पूरा परिवार तबाह हो जाता है। मेरे घर में ग्यारह लोग हैं, हम करीब तीन बीघे जमीन पर खेती करते हैं, उसी खेती से सालभर की तैयारी करते हैं। इस समय गेहूं की फसल बिलकुल तैयार थी, बस दो चार दिन में काटना ही था, लेकिन पूरी फसल में आग लग गई, पूरी खेती जलकर खाक हो गई। न हमारे पास कुछ खाने के लिए है न अगली खेती के लिए कोई तैयारी। सलभर हम क्या करेंगे, अपने परिवार को कैसे खिलाएँगे...नहीं मालूम।” इतना कहते ही डुमरियागंज तहसील के परसा हुसैन गाँव के किसान फूलचंद का गला भारी हो जाता है और वो शांत हो जाते हैं।

बीते 10 अप्रैल को डुमरियागंज तहसील के परसा हुसैन गाँव में कंबाइन (गेहूं काटने की मशीन) से गेहूं काटते समय खेत में आग लग गई। देखते ही देखते सैकड़ों बीघा फसल जलकर खाक हो गई। किसान फूलचंद कहते हैं कि, 'मशीन गरम हो गया था और उससे चिंगारी निकली जो खेतों में चली गई, जिसकी वजह से खेतों में आग लग गई। आग लगने की वजह से लगभग 36 किसानों की फसल जल गई।'

इसी गाँव के किसान मोहम्मद अकरम बताते हैं, 'हम दो भाई हैं, दोनों भाई मिलकर लगभग सवा तीन बीघा जमीन पर खेती करते हैं, ये खेती ही हमारी रोजी-रोटी है, इसी से हम गुजर-बसर करते हैं। आग लगने की वजह से हम लोगों की पूरे साल की मेहनत बर्बाद हो गया है। इस आग से हम दोनों भाइयों का लगभग चालीस हज़ार रुपए का नुकसान हुआ है। हम उम्मीद लगाए थे कि हमारी खेती हो जाएगी तो हम इसी से आगे की तैयारी करेंगे, अब न खेती बचा न पैसा रहा।' 

यहाँ की महिला किसान शहनाज़ बताती हैं कि, 'हम लोग तीन भाई साथ रहते हैं, सबका मिलाकर 6 बीघे की खेती है। एक चिंगारी से सबकी फसल जलकर खाक हो गई। हम लोगों ने दमकल वाले को फोन भी किया था लेकिन दमकल वाला समय पर नहीं आया। हम लोगों ने बहुत कॉल किया लेकिन जब आग बुझ गया तब दमकल वाला आया। चार गाँव के आदमी लोग मिलकर खुद से आग बुझाये।' महिला किसान शहनाज बताती हैं कि, 'अलग-अलग जगह पर ट्रैक्टर लगाया गया तब जाकर आग बुझी। शहनाज के पति सलाउद्दीन कहते हैं कि, 'बस सराकर हमारे नुकसान की भरपाई कर दे, और कुछ नहीं।'

शहनाज महिला किसान.jpg

खेती जलने के बाद आजीविका कैसे चलाएँगे के बारे में पूछने पर अकरम बताते हैं कि, 'अब जो हो गया वो तो हो गया, जो अल्लाह ताला लिखे हैं वही होगा।' मुआवजा के बारे में पूछने पर अकरम कहते हैं कि, 'ये जमीन हमारे मामू की है, हम लोग उन्हीं की जमीन पर खेती करते हैं, जिसकी जमीन होती है उसको मुआवजा मिलेगा, मुआवजा को लेकर हमें ज्यादा उम्मीद नहीं है।' 

एक अन्य किसान बताते हैं कि, 'बिलकुल तैयार फसल और जल गई, कैसे हम सब्र कर रहे हैं हमीं जानते हैं, जो खेती कट रही थी उसके बाद मेरी फसल कटनी थी लेकिन आग लगकर जल गई, कई गाँव के लोग इकट्ठा होकर आग बुझाये लेकिन तब तक लाखों की फसल जलकर राख़ हो चुकी थी।' किसान कहते हैं कि, 'जिस फसल से हम गेहूं की उम्मीद कर रहे थे आज वो जलकर राख़ हो चुकी है। मुआवजा के बारे में किसान कहते हैं कि, कितना मुआवजा मिल जाएगा, जितना नुकसान हुआ है उतना थोड़ी मिलेगा, कब मिलेगा ये भी तो नहीं पता।' 

करीब 60 साल के किसान फूलचंद बताते हैं कि, हमारे यहाँ एक बीघा में लगभग सात क्विंटल गेहूं होता है। गेहूं जब खेत में होता है तभी व्यापारी खरीद लेते हैं। पूरी गेहूं की खेती पैतीस हज़ार से कम का नहीं बिकता। उसी पैसे से गृहस्थी का बाकी सामान खरीदते, कपड़े खरीदते, लेकिन अब तो सब खत्म हो गया। मैं बूढ़ा हो गया हूँ, कोई साग-सब्जी नहीं बेच सकता। शरीर में इतना ताकत भी नहीं है कि पुलिस का चार लाठी खाकर कोई और काम कर लें। कोई सहारा भी नहीं है।

किसान कहते हैं कि, 'खेती से हम केवल पेट पालते हैं कोई नफ़ा (फायदा) तो होता नहीं है, एक बार की खेती में आधे से ज्यादा पूंजी लगा होता है तो जो घर में था वो भी चला गया और मिलने का जो उम्मीद था वो भी चला गया। अब तो भगवान ही सहारा है क्या कहें।' मुआवजा के नाम पर फूलचंद किसान कहते हैं कि, 'हम लोग उम्मीद कर रहे थे कि कुछ सरकार सहायता कर देगी, कुछ विधायक हमारे विधायक निधि से सहायता कर देंगे तो कुछ हम लोगों का सहायता हो जाएगा, लेकिन उन्होंने कुछ कहा नहीं, केवल मंडी समिति वाले है, जो दो हज़ार चार हज़ार देंगे, वही एक आश्वासन देकर गए हैं। देखो, कितना क्या देते हैं।

किसानों की बर्बाद फसल की मुआवजा के बारे में जब डुमरियागंज से बीजेपी विधायक और हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी राघवेंद्र प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होंने ठीक से बात नहीं की। मुआवजा के सवाल पर बीजेपी विधायक ने कहा कि, 'जो भी करना होगा हम किसानों को बता देंगे।' बताया जाता है कि राघवेंद्र प्रताप सिंह प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी लोगों में से एक हैं।

इसके बारे में जब डुमरिया के तहसीलदार राजेश प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होने कहा कि, 'मंडी परिषद पैसा देता है, हम रिपोर्ट जल्दी-जल्दी बनाकर मंडी परिषद भेज रहे हैं, तहसीलदार ने कहा कि 11 अप्रैल को मंडी परिषद के अधिकारियों से मीटिंग भी हुई थी, ताकि जल्दी से जल्दी मुआवजा मिल सके।  

 (रिज़वाना तबस्सुम स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

UttarPradesh
farmer
farmer crises
wheat crop burn
Yogi Adityanath
poverty

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

बनारस: आग लगने से साड़ी फिनिशिंग का काम करने वाले 4 लोगों की मौत

कौन हैं ओवैसी पर गोली चलाने वाले दोनों युवक?, भाजपा के कई नेताओं संग तस्वीर वायरल

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सड़क दुर्घटना में 15 लोगों की मौत

बसों में जानवरों की तरह ठुस कर जोखिम भरा लंबा सफ़र करने को मजबूर बिहार के मज़दूर?

बाराबंकी में सड़क हादसे में 18 लोगों की मौत, 25 अन्य घायल

यूपी: आज़मगढ़ में पुलिस पर दलितों के घर तोड़ने, महिलाओं को प्रताड़ित करने का आरोप; परिवार घर छोड़ कर भागे

गैस सिलिंडर फटने से दोमंजिला मकान ढहा, आठ लोगों की मौत


बाकी खबरें

  • kashmir jammu
    सुहैल भट्ट
    विशेषज्ञों के मुताबिक़ कश्मीर में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति अपने कगार पर है
    27 Dec 2021
    जम्मू-कश्मीर में तनाव से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिसका बड़ा कारण साल 2019 में हटाई गई धारा 370 को मुख्य माना जा रहा है, खुद को कैदी जैसा महसूस कर रहे जम्मू-कश्मीर के लोगों में…
  • Ethiopia
    पीपल्स डिस्पैच
    अमेरिका समर्थित टीपीएलएफ़ ने इथियोपिया में जंग हारने के बाद संयुक्त राष्ट्र से सुरक्षा की गुहार लगाई
    27 Dec 2021
    संघीय सरकार की फ़ौज ने टीपीएलएफ़ को टिगरे राज्य में वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया, अब टीपीएलएफ़ शांति प्रक्रिया के लिए बातचीत शुरू करने की गुहार लगा रहा है। सरकार ने समूह के नि:शस्त्रीकरण और इसके…
  • Mental health
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड: मानसिक सेहत गंभीर मामला लेकिन इलाज के लिए जाएं कहां?
    27 Dec 2021
    फ़रवरी 2019 में उत्तराखंड में मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का गठन करने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई। ये प्राधिकरण काग़ज़ों में भी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। प्राधिकरण में मानसिक स्वास्थ्य के लिए…
  •  Muzaffarpur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुज़फ़्फ़रपुर: हादसा या हत्याकांड!, मज़दूरों ने कहा- 6 महीने से ख़राब था बॉयलर, जबरन कराया जा रहा था काम
    27 Dec 2021
    बॉयलर छह महीने से ख़राब था। कामगारों ने ख़तरे की आशंका जताई थी। बॉयलर का सेफ्टी वाल्व भी ख़राब था। इसके विरोध में दो दिन तक मज़दूरों ने काम भी बंद रखा था लेकिन प्रबंधन ने इसको ठीक नहीं कराया था।
  • haridwar
    वसीम अकरम त्यागी
    राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग: आख़िर तुम किस मर्ज़ की दवा हो?
    27 Dec 2021
    हरिद्वार, आगरा से लेकर गुरुग्राम तक, त्रिपुरा से लेकर कर्नाटक तक, नमाज़ से लेकर चर्च की प्रार्थना सभा तक अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिये बना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License