NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
यूपी: पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से एक आदिवासी की मौत, सरकारी अपराध पर लगाम कब?
उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार दावा करती है कि उसने गुंडाराज ख़त्म कर दिया है, मगर पुलिसिया दमन को देख कर लगता है कि अब गुंडाराज 'सरकारी' हो गया है।
सत्यम् तिवारी
25 Jan 2022
Custodial Deaths

लखीमपुर खीरी में 17 साल के आदिवासी लड़के की पुलिस हिरासत में कथित पिटाई के बाद हुई मौत से उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

मामला है लखीमपुर खीरी में संपूर्णानगर कोतवाली के कमलापुरी गांव का, जहाँ 17 साल के लड़के की मौत हो गई। हुआ ये कि 17 जनवरी को आदिवासी लड़के राहुल के चाचा ने उसपर मोबाइल चोरी का आरोप लगाया और पुलिस राहुल को थाने ले गई। आरोप है कि पुलिस ने उसे वहाँ उसे 2 दिन रखा और पिटाई की। 2 दिन बाद 19 जनवरी को राहुल की तबीयत बिगड़ी तो पुलिस ने उसे एक समझौते पर साइन करवा के छोड़ दिया, जिसके बाद राहुल को अस्पताल ले जाया गया।

राहुल के परिवार और गांव वालों का कहना है कि शनिवार रात को राहुल की मौत हो गई। रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें राहुल के परिवार और गांव वालों ने उनकी लाश को सड़क पर रख कर प्रदर्शन किया था।

इस मामले में चौकी इंचार्ज और दो सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया है, मगर पुलिस का कहना है कि राहुल को पीटा ही नहीं गया था।

देखने वाली बात है कि पुलिस ने अगर राहुल को गिरफ्तार किया, तो उसपर मामला दर्ज कर के 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना चाहिये था, मगर सभी नियमों को ताक पर रख कर राहुल को 2 दिन तक रखा गया।

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हिंसा का ये पहला मामला नहीं है। बल्कि पुलिस हिरासत और न्यायिक हिरासत में हो रही मौतों में उत्तर प्रदेश नंबर 1 पर है। पिछले 3 साल में यूपी में 1300 से ज़्यादा लोगों की पुलिस और न्यायिक हिरासत में मौत हो गई है। हाल ही में कासगंज, आगरा के मामले याद कीजिये।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC के आंकड़ों में मुताबिक हिरासत में मौत के मामलों में से 23% मामले यूपी में होते हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश अपराधों के मामले में भी सबसे ऊपर है। 2016 से 2020 तक 5 सालों में 20,000 से ज़्यादा लोगों की हत्या हुई है।

नागरिक अधिकार हनन में यूपी पहले नंबर पर है, पिछले 3 सालों में मानवाधिकार हनन के कुल मामलों का 40% मामलों का क्रेडिट उत्तर प्रदेश को मिला है।

दलितों, मुसलमानों, सरकार के आलोचकों पर पुलिस का दमन योगी आदित्यनाथ की बीजेपी सरकार के आने के बाद से बढ़ा है। हमने देखा है कि पुलिस हिरासत के हर मामले में पुलिस अपनी भूमिका से पल्ला झाड़ती है, मगर साथ ही अधिकारियों को सस्पेंड भी किया जाता है।

पिछले 5 सालों से हर रैली, हर भाषण, हर सभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री राज्य से गुंडाराज ख़त्म करने का दम्भ भरते हैं, और कहते हैं कि अब 'ठोक दो' का नियम चलता है।

उत्तर प्रदेश में बिज़नेस स्टैंडर्ड के पत्रकार सिद्धार्थ कालहंस का कहना है कि पुलिसिया दमन की यह घटनाएँ पहले की सरकारों में भी होती थीं, मगर वर्तमान की बीजेपी सरकार में यह घटनाएँ बढ़ी हैं।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सिद्धार्थ ने कहा, "पहले हिरासत में मौतों की जो घटनाएँ होती थीं, उन पर जो प्रतिरोध की आवाज़ थी, वह एकदम समाप्त हो गई है। उत्तर प्रदेश की सरकार लोकतांत्रिक आवाज़ों का दमन कर रही है। सरकार कहती है कि हम ठोको नीति पर विश्वास करते हैं।"

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे एनकाउंटर पर भी लगातार सवाल उठते रहते हैं। सिद्धार्थ ने इसपर कहा, "सरकार कहती है कि हम एनकाउंटर करते हैं। एनकाउंटर तो वह होता है कि किसी से मुठभेड़ हो जाए और अपराधी की मौत हो जाए, मगर यहाँ एनकाउंटर करने की और ठोको की नीतियाँ चल रही हैं, जिसकी वजह से पुलिस का मनोबल काफ़ी बढ़ा हुआ है।"

Uttar pradesh
Custodial Deaths
Custodial Deaths In UP
Yogi Adityanath
UP Law And Order
UP Jail
Police Custody
Torture In Jail

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 

यूपी चुनाव में दलित-पिछड़ों की ‘घर वापसी’, क्या भाजपा को देगी झटका?

मुद्दा: सवाल बसपा की प्रासंगिकता का नहीं, दलित राजनीति की दशा-दिशा का है

EXCLUSIVE: सोती रही योगी सरकार, वन माफिया चर गए चंदौली, सोनभद्र और मिर्ज़ापुर के जंगल

पड़ताल: पश्चिमी यूपी में दलितों के बीजेपी के ख़िलाफ़ वोट करने की है संभावना

दलितों के ख़िलाफ़ हमले रोकने में नाकाम रही योगी सरकार

यूपी चुनाव : क्या ग़ैर यादव ओबीसी वोट इस बार करेंगे बड़ा उलटफेर?

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?


बाकी खबरें

  • भाषा
    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री इस महीने के अंत में भारत आ सकते हैं
    05 Apr 2022
    जॉनसन की भारत यात्रा 22 अप्रैल के आसपास हो सकती है। पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण दो बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को भारत का दौरा रद्द करना पड़ा था। 
  • भाषा
    आगे रास्ता और भी चुनौतीपूर्ण, कांग्रेस का फिर से मज़बूत होना लोकतंत्र के लिए ज़रूरी: सोनिया गांधी
    05 Apr 2022
    ‘‘हम भाजपा को, सदियों से हमारे विविधतापूर्ण समाज को एकजुट रखने और समृद्ध करने वाले सौहार्द व सद्भाव के रिश्ते को नुकसान नहीं पहुंचाने देंगे।’’
  • भाषा
    'साइबर दूल्हो' से रहें सावधान, साइबर अपराध का शिकार होने पर 1930 पर करें फोन
    05 Apr 2022
    अगर आप अपने परिवार के किसी सदस्य की शादी के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन विज्ञापन देख रहे हैं, तो थोड़ा होशियार हो जाएं। साइबर ठग अब शादी के नाम पर भी ठगी करने में जुट गए हैं। देश के महानगरों मे अब तक इस तरह…
  • मीनुका मैथ्यू
    श्रीलंकाई संकट : राजनीति, नीतियों और समस्याओं की अराजकता
    05 Apr 2022
    वित्तीय संस्थानों के कई हस्तक्षेपों के बावजूद श्रीलंकाई सरकार अर्थव्यवस्था की व्यवस्थित गिरावट को दूर करने में विफल रही है।
  • इंद्रजीत सिंह
    विभाजनकारी चंडीगढ़ मुद्दे का सच और केंद्र की विनाशकारी मंशा
    05 Apr 2022
    इस बात को समझ लेना ज़रूरी है कि चंडीगढ़ मुद्दे को उठाने में केंद्र के इस अंतर्निहित गेम प्लान का मक़सद पंजाब और हरियाणा के किसानों की अभूतपूर्व एकता को तोड़ना है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License