NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी विधानसभा उपचुनाव: 2022 के चुनाव से पहले ताक़त दिखाने की कोशिश में सभी दल
उत्तर प्रदेश विधानसभा की 7 सीटों पर 3 नवंबर को वोटिंग होगी। चुनाव नतीजे 10 नवंबर को जारी किए जाएंगे। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में इन सात सीटों में एक पर सपा का कब्जा था, शेष 6 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।
अमित सिंह
24 Oct 2020
यूपी विधानसभा उपचुनाव
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : गूगल

दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा की सात सीटों पर 3 नवंबर को उपचुनाव के लिए मतदान होना है। चुनाव नतीजे 10 नवंबर को जारी किए जाएंगे। जिन 7 सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें टूंडला (फिरोजाबाद), बुलंदशहर, नौगांवा सादात (अमरोहा), घाटमपुर (कानपुर नगर), बांगरमऊ (उन्नाव) और मल्हनी (जौनपुर), देवरिया सदर सीटें शामिल हैं।

इस उपचुनाव को लेकर सभी पार्टियां अपने-अपने तरीके से तैयारियों में जुटी हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में इन सात सीटों में एक पर सपा यानी समाजवादी पार्टी का कब्जा था, शेष 6 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की थी।

इस बार के चुनाव की खास बात यह है कि चारों प्रमुख दल भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा ने अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे हैं। उपचुनाव में भाजपा और सपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। वहीं, कांग्रेस और बसपा के पास खोने को कुछ नहीं है, लेकिन उपचुनाव से उम्मीदें जरूर हैं। कांग्रेस और बसपा को अगर एक सीट पर भी कामयाबी मिल जाती है, तो 2022 के चुनाव में दोंनों के पास सरकार पर निशाना साधने और अपनी ताकत बताने का एक आधार मिल जाएगा।

आपको बता दें कि जिन सात विधानसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है उसमें से पांच सीटें निर्वाचित विधायकों की मृत्यु की वजह से रिक्त हैं। विधायक कमला रानी वरुण, पारसनाथ यादव, वीरेंद्र सिरोही, जनमेजय सिंह, चेतन चौहान का निधन इस वर्ष ही हुआ है। बंगारमऊ से विधायक कुलदीप सेंगर रेप मामले में उम्रकैद की काट रहे हैं। जिसके चलते उनकी विधायकी निरस्त की गई है। फिरोजाबाद की टूंडला विधानसभा सीट एसपी सिंह बघेल के सांसद बनने के बाद से खाली है।

विधानसभा चुनाव 2022 से पहले सात सीटों पर हो रहे इस उपचुनाव को सेमीफाइनल माना जा रहा है। इसलिए यह प्रदेश की सत्तारूढ़ योगी सरकार के लिए परीक्षा की घड़ी है तो बाकी दल भी जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। इस सबके अलावा ये उपचुनाव कोरोना संकट, राम मंदिर निर्माण, हाथरस कांड और बेहाल होती कानून व्यवस्था के प्रति मतदाताओं के रुख को दर्शाएगा।

फिलहाल इस सबसे इतर हर सीट के अपने भी समीकरण हैं। वैसे इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में देवरिया सदर सीट की हो रही है। भाजपा विधायक जनमेजय सिंह के निधन से खाली हुई इस सीट पर सभी प्रमुख दलों ने ब्राह्मण प्रत्याशियों को टिकट दिया है और सभी का सरनेम त्रिपाठी है। यहां भाजपा ने सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी, सपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, बसपा ने अभयनाथ त्रिपाठी और कांग्रेस ने मुकुंद भास्कर मणि त्रिपाठी को चुनाव में उतारा है। दिवंगत जनमेजय के बेटे पिंटू सिंह यहां पर बीजेपी से बगावत करके चुनाव लड़ रहे हैं। उपचुनाव में बीजेपी के लिए यह परेशानी वाली बात है। बता दें कि जनमेजय सिंह 2012 से लगातार दूसरी बार देवरिया सीट से भाजपा के विधायक चुने गये थे। इसी साल अगस्त के महीने में जनमेजय सिंह का निधन हो गया था।

हाथरस कांड के बाद से उन्नाव की बांगरमऊ सीट भी चर्चा में है। यह भाजपा से विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर की सदस्यता जाने के कारण खाली हुई है। यह सीट बरकरार रखना बीजेपी के लिए चुनौती है। बीजेपी ने यहां से उन्नाव के पूर्व जिलाअध्यक्ष श्रीकांत कटियार को उतारा है। समाजवादी पार्टी ने सुरेश कुमार पाल और बीएसपी ने महेश प्रसाद को टिकट दिया है। कांग्रेस ने बांगरमऊ से आरती बाजपेयी को प्रत्याशी बनाया है।

सपा के लिए जौनपुर की मल्हली सीट भी प्रतिष्ठा का विषय बनी हुई है। जिन सीटों पर उपचुनाव हो रहा है उसमें से इसी एकमात्र सीट पर 2017 के चुनाव में उनकी पार्टी ने जीत दर्ज की थी। सपा ने यहां से दिवंगत विधायक पारसनाथ के पुत्र लकी यादव को प्रत्याशी बनाया है। उनके सामने भाजपा ने मनोज सिंह को टिकट दिया है। मनोज सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। बसपा ने जयप्रकाश दुबे और कांग्रेस ने राकेश मिश्रा को मैदान में उतारा है। इस सीट पर दो बार विधायक रहे धंनजय सिंह भी मैदान पर ताल ठोककर लड़ाई को रोचक बना रहे हैं।

आपको बता दें कि दो बार से इस सीट पर सपा का कब्जा रहा है। पारसनाथ यादव की मजबूत पकड़ और जिले में अपनी बिरादरी का छत्रप होने के कारण भरपूर कोशिशों के बावजूद इस सीट पर भाजपा एक बार भी जीत दर्ज नहीं कर सकी। पारसनाथ यादव के न रहने के कारण बदली हुई स्थितियों में भाजपा इस सीट को अपना बनाने की पूरी कोशिश में है। इसके लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत लगा रखी है। इसी सीट के लिए पूर्व बसपा सांसद धनंजय सिंह भी निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनौती दे रहे हैं। वे‌ जौनपुर संसदीय क्षेत्र से एक बार सांसद और इसी विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं।

इसके अलावा फिरोजाबाद की टूंडला सुरक्षित सीट योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल के सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई है। इस सीट पर भाजपा ने प्रेमपाल धनगर को मैदान में उतारा है। इनके सामने सपा के महाराज सिंह धनगर चुनाव मैदान में हैं। बसपा ने संजीव कुमार चक को और कांग्रेस ने यहां से स्नेहलता को प्रत्याशी बनाया है।

इसी तरह कानपुर की घाटमपुर सुरक्षित सीट योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री कमलारानी वरुण के दिवंगत होने से खाली हुई है। भाजपा ने यहां से कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र में अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र पासवान को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने इंद्रजीत कोरी, बसपा ने कुलदीप कुमार संखवार और कांग्रेस ने कृपा शंकर को टिकट दिया है।

अमरोहा की नौगांवा सादात सीट पर कैबिनेट मंत्री रहे चेतन चौहान के निधन के कारण चुनाव हो रहे हैं। इस सीट पर भाजपा ने दिवंगत मंत्री चेतन चौहान की पत्नी संगीता चौहान को टिकट दिया है। इनका मुकाबला सपा के सैयद जावेद अब्बास, बसपा के मोहम्मद फुरकान अहमद और कांग्रेस के कमलेश सिंह से है।

इसी तरह बुलंदशहर की सीट बीजेपी विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही के निधन से रिक्त हुई है। बीजेपी ने यहां भी सिरोही की पत्नी ऊषा को प्रत्याशी बनाया है। सपा रालोद गठबंधन से यहां प्रवीण सिंह, बसपा से मोहम्मद युनूस और कांग्रेस से सुशील चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं।

UttarPradesh
UP Assembly by-election
BJP
Congress
BSP
SP
Yogi Adityanath
PRIYANKA GANDHI VADRA
MAYAWATI
AKHILESH YADAV

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • putin
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध; अहम घटनाक्रम: रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश 
    28 Feb 2022
    एक तरफ पुतिन ने रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश दिया है, तो वहीं यूक्रेन में युद्ध से अभी तक 352 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • mayawati
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है
    28 Feb 2022
    एसपी-आरएलडी-एसबीएसपी गठबंधन के प्रति बढ़ते दलितों के समर्थन के कारण भाजपा और बसपा दोनों के लिए समुदाय का समर्थन कम हो सकता है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 8,013 नए मामले, 119 मरीज़ों की मौत
    28 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1 लाख 2 हज़ार 601 हो गयी है।
  • Itihas Ke Panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी: आज़ादी की आखिरी जंग
    28 Feb 2022
    19 फरवरी 1946 में हुई रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी को ज़्यादातर लोग भूल ही चुके हैं. 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में इसी खास म्युटिनी को ले कर नीलांजन चर्चा करते हैं प्रमोद कपूर से.
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर में भाजपा AFSPA हटाने से मुकरी, धनबल-प्रचार पर भरोसा
    27 Feb 2022
    मणिपुर की राजधानी इंफाल में ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंचीं वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह। ज़मीनी मुद्दों पर संघर्षशील एक्टीविस्ट और मतदाताओं से बात करके जाना चुनावी समर में परदे के पीछे चल रहे सियासी खेल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License