NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी: क्या चुनावी रैलियों पर रोक से बीजेपी को हो सकता है बड़ा फ़ायदा?
आयोग के नए नियमों का सीधा लाभ बीजेपी को मिल सकता है क्योंकि उसके पास अथाह पैसा है और वो टेक्नॉलजी के मामले में देश के किसी भी अन्य राजनीतिक दल के मुकाबले कहीं आगे है।
सोनिया यादव
10 Jan 2022
virtual rally
(फाइल) प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार गूगल

इलाहाबाद हाईकोर्ट की चुनाव टालने को लेकर की गई सख्त टिप्पणी 'जान है तो जहान है' के बावजूद निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। कोरोना महामारी की तीसरी लहर के बीच ये महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब नए ओमिक्रॉन वैरिएंट के आने के बाद से देश में कोरोना संक्रिमतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भारत में अब रोज़ाना एक लाख से अधिक संक्रमण के मामले आ रहे हैं।

हालांकि महामारी के चलते चुनावी रैलियों पर रोक की मांग को चुनाव आयोग ने मान लिया है और 15 जनवरी तक किसी भी तरह के रोड शो, रैली, पद यात्रा, साइकिल और स्कूटर रैली की इजाज़त नहीं दी है। आयोग के मुताबिक राजनीतिक दलों को वर्चुअल रैली के ज़रिए ही चुनाव प्रचार करना होगा। वहीं घर-घर जाकर प्रचार करने को भी सीमित किया गया है, सिर्फ़ पांच लोग ही जा सकते हैं। जीत के बाद भी किसी तरह के विजय जुलूस की मनाही है।

वैसे विपक्ष और जानकारों की मानें तो आयोग के इन नए नियमों का सीधा लाभ बीजेपी यानी भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके पास अथाह पैसा है और वो टेक्नॉलजी के मामले में देश के किसी भी अन्य राजनीतिक दल के मुकाबले कहीं आगे है।

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की बात करें, तो यहां 403 विधानसभा सीटों के लिए सात चरणों में मतदान होने हैं और इसके नतीजे 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे। बीजेपी अब तक यहां धुआंधार चुनाव प्रचार कर चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही प्रदेश में पिछले 48 दिनों में 13 बड़ी रैलियां कर चुके हैं। जिस रफ़्तार से बीजेपी ने चुनाव प्रचार किया है उसके मुक़ाबले बाकी दल काफ़ी पीछे रहे हैं। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने अभी तक कोई बड़ी रैली नहीं की है। वहीं चुनाव आयोग की घोषणाओं से पहले बीजेपी के बड़े नेताओं ने अधिकतर रैलियां कर ली हैं।

पार्टियों का क्या कहना है?

इन घोषणाओं को लेकर बीजेपी जहां अधिक उत्साही नज़र आ रही है तो वहीं कांग्रेस चुनाव आयोग से प्रचार में सबको बराबर का मौका सुनिश्चित करने की बात कर रही है।

इस मामले पर बीजेपी के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने मीडिया को बताया कि उनकी पार्टी कोविड महामारी की शुरुआत से ही डिजिटल और वर्चुअल कैंपेनिंग की तैयारी कर रही है। जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर अत्याधुनिक तकनीक से प्रशिक्षित हैं। इसके अलावा पार्टी हमेशा से कार्यकर्ताओं के माध्यम से काम करती रही है, जो परिस्थितियों के हिसाब से अपने आपको ढालते हैं। उन्हें पता है कि कोविड में लोगों के पास पहुंचने के लिए डिजिटल प्लैटफॉर्म्स का उपयोग किस तरह किया जा सकता है।

वहीं, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग को तय करना चाहिए कि चुनाव प्रचार में सबको बराबर का मौका मिले।

उन्होंने कहा, "पीएम मोदी कई राजनीतिक रैलियां कर चुके हैं। वो एक महीने से सभाएं कर रहे हैं और 10 से 15 बार यूपी जा चुके हैं... फंड की कमी वाली पार्टियों को समस्याएं झेलनी होंगी, सत्ताधारी दल तो मजे में है।"

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग से अपील की है कि वो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर छोटे राजनीतिक दलों को पर्याप्त स्पेस देना सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि आयोग को सीमित साधनों वाली छोटी पार्टियों को भी सहयोग करना चाहिए क्योंकि वर्चुअल रैली करने के लिए हर पार्टी उतनी तैयार नहीं है। डिजिटल माध्यम से प्रचार करना और वर्चुअल रैलियां करना बहुत आसान नहीं है। इसमें तकनीक और तैयारी लगती है। जो दल इस मामले में पीछे हैं उनके लिए ऐसा कर पाना बहुत आसान नहीं होगा।

डिजिटल दुनिया में चुनावी प्रचार

बता दें कि हाल के सालों में डिजिटल माध्यम के ज़रिए प्रचार चुनावी अभियानों का अहम हिस्सा बना है। पार्टियां डिजिटल दुनिया में अपनी स्थिति को मज़बूत कर रही हैं और कई पार्टियों ने अपने विशेष आईटी सेल भी बनाए हैं। लेकिन बाकी दलों की तुलना में डिजिटल पहुंच के मामले में बीजेपी काफ़ी आगे है। बीजेपी के पास बाकी दलों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा क्षमता हैं। इस मामले में असमानता बहुत ज़्यादा है। बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों में बहुत मज़बूत है। बीजेपी के पास व्हाट्सऐप पर भी एक बहुत बड़ा नेटवर्क है जिसे पिछले सालों में विकसित किया गया है। बीजेपी के पास ब्लॉक स्तर तक आईटी सेल हैं जिनसे लाखों लोग जुड़े हैं।

दरअसल, जानकारों का मानना है कि राजनीतिक दलों का सबसे बड़ा मक़सद ये होता है कि उनका घोषणापत्र और उनकी घोषणाएं लोगों तक पहुंचे, इसलिए बड़ी-बड़ी रैलियां की जाती हैं, चुनावी जुलूस निकाले जाते हैं और घर-घर जाकर वोट मांगे जाते हैं। उत्तर प्रदेश में कई ऐसे दल ऐसे हैं जिनके पास ना तो बीजेपी जितने संसाधन हैं और ना ही उनके जैसी तैयारी। ऐसे में चुनाव आयोग को सभी पार्टियों को बराबर मौक़ा देना चाहिए ताकि सभी दल अपनी बात को लोगों तक पहुंचा सकें।

एक सच ये भी है कि भारत में अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों के बीच बड़ा डिजिटल डिवाइड भी है। सब लोगों तक डिजिटल माध्यमों की पहुंच बराबर नहीं है। ऐसे में सभी पार्टियों के लिए कंटेट क्रिएट करना और उसकी आर्गेनिक रीच बढ़ाना एक बड़ी चुनौती होगी। जिसके पास जितना पैसा होगा वो पेड प्रोमोशन करके अपना कंटेंट उतने अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा पाएगा और बाकी लोग पीछे रह जाएंगे।

गौरतलब है कि कई लोगों का मानना है कि चुनाव आयोग को रैलियों पर पूरी तरह से रोक नहीं लगानी चाहिए थी बल्कि उन्हें सीमित करना चाहिए था, जिससे सभी छोटी-बड़ी पार्टियों को एक बराबर स्पेस मिल पाता। इसके अलावा मीडिया-सोशल मीडिया पर प्रत्याशी के साथ-साथ पार्टी के खर्चे पर भी लगाम लगानी चाहिए थी, जिससे सबके लिए एक बराबर बजट अलॉट हो सकता और जनता को सभी विकल्प इक समान नजर आ पाते और चुनाव में आसानी होती।

Uttar pradesh
UP elections
UP Assembly Elections 2022
Virtual rally
BJP Virtual Rally
election commission

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारी बवाल


बाकी खबरें

  • Ukraine
    स्टुअर्ट ब्राउन
    यूक्रेन: एक परमाणु संपन्न राज्य में युद्ध के खतरे
    03 Mar 2022
    यूक्रेन के ऊपर रूस के आक्रमण से परमाणु युद्ध का खतरा वास्तविक बन गया है। लेकिन क्या होगा यदि देश के 15 परमाणु उर्जा रिएक्टरों में से एक भी यदि गोलीबारी की चपेट में आ जाए?
  • banaras
    विजय विनीत
    यूपी का रणः मोदी के खिलाफ बगावत पर उतरे बनारस के अधिवक्ता, किसानों ने भी खोल दिया मोर्चा
    03 Mar 2022
    बनारस में ऐन चुनाव के वक्त पर मोदी के खिलाफ आंदोलन खड़ा होना भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। इसके तात्कालिक और दीर्घकालिक नतीजे देखने को मिल सकते हैं। तात्कालिक तो यह कि भाजपा के खिलाफ मतदान को बल…
  • Varanasi District
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : बनारस की मशहूर और अनोखी पीतल पिचकारी का कारोबार पड़ रहा है फीका
    03 Mar 2022
    बढ़ती लागत और कारीगरों की घटती संख्या के कारण पिचकारी बनाने की पारंपरिक कला मर रही है, जिसके चलते यह छोटा उद्योग ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष रहा है।
  • migrants
    एपी
    एक सप्ताह में 10 लाख लोगों ने किया यूक्रेन से पलायन: संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी
    03 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) के आंकड़ों के अनुसार, पलायन करने वाले लोगों की संख्या यूक्रेन की आबादी के दो प्रतिशत से अधिक है। विश्व बैंक के अनुसार 2020 के अंत में यूक्रेन की आबादी…
  • medical student
    एम.ओबैद
    सीटों की कमी और मोटी फीस के कारण मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं छात्र !
    03 Mar 2022
    विशेषज्ञों की मानें तो विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाने की दो मुख्य वजहें हैं। पहली वजह है यहां के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में सीटों की संख्या में कमी और दूसरी वजह है प्राइवेट कॉलेजों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License