NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
भारत
राजनीति
यूपी: केंद्र ने चुनाव से पहले गन्ने की एफआरपी बढ़ाई; किसान बोले विफलताओं को छुपाने का ढकोसला
किसानों ने कहा कि राज्य में योगी आदित्यनाथ सरकार जो गन्ने की क़ीमत 400 रुपये प्रति क्विंटल करने का "वादा" करके सत्ता में आई थी, उसने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में "एक पैसा" तक नहीं बढ़ाया।
अब्दुल अलीम जाफ़री
27 Aug 2021
यूपी: केंद्र ने चुनाव से पहले गन्ने की एफआरपी बढ़ाई; किसान बोले विफलताओं को छुपाने का ढकोसला
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बुधवार को उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में वृद्धि को मंजूरी दे दी। यह एक न्यूनतम मूल्य है जिसे चीनी मिलों को गन्ना उत्पादकों को 290 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान करना है जो कि पिछले वर्ष की तुलना में पांच रुपये अधिक है।

विपणन वर्ष 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य बढ़ाने का निर्णय नई दिल्ली में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। हालांकि, इस फैसले का कई किसान यूनियनों और गन्ना किसानों द्वारा विरोध किया जा रहा है जो कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि राज्य में योगी आदित्यनाथ सरकार जो गन्ने के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल देने का "वादा" करके सत्ता में आई थी, उसने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में "एक पैसा" नहीं बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र पांच रुपये की बढ़ोतरी कर किसानों के साथ 'मजाक' कर रहा है।

खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, “10% की मौलिक वसूली दर के लिए एफआरपी को बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 10% से अधिक रिकवरी में प्रत्येक 0.1 प्रतिशत की वृद्धि के लिए 2.90 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम प्रदान किया जाएगा।"

गन्ने के लिए एफआरपी बढ़ाने के केंद्र के फैसले पर तंज कसते हुए भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने व्यंग्यात्मक रूप से इसे "ऐतिहासिक निर्णय" कहा।

टिकैत ने कहा, “पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत में कई राज्य हैं जहां स्टेट एडवायजरी प्राइस (एसएपी) पहले से ही एफआरपी से अधिक है। इन राज्यों की मिलों को एसएपी का पालन करना है। अब सवाल यह उठता है कि सरकार का यह फैसला गन्ना किसानों के लिए कैसे फायदेमंद होगा। सरकार को हमें फॉर्मूला भी बताना चाहिए।”

बीकेयू नेता ने न्यूज़क्लिक को बताया, “पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रीढ़ कहे जाने वाले गन्ना पट्टी के किसान हमेशा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को याद करते हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के पांच वर्षों में कीमतों में 115 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी। 2007 में जब मायावती ने कार्यभार संभाला तो गन्ने की कीमत 125 रुपये प्रति क्विंटल थी। उन्होंने इसे पांच साल में बढ़ाकर 240 रुपये कर दिया। अखिलेश यादव ने भी अपनी समाजवादी सरकार के पांच साल में इसके मूल्य में 65 रुपये बढ़ा दिया। मौजूदा सरकार पिछली सरकार की तुलना में कमजोर साबित हो रही है, क्योंकि उसने कीमतों में एक पैसा भी वृद्धि नहीं की है।"

ध्यान रहे, टिकैत ने पिछले साल सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी और एसएपी को 325 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये करने की मांग की थी।

एक अन्य किसान ने कहा, “साल 2017 के बाद से, जब आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली थी, गन्ने के लिए एसएपी में केवल 10 रुपये की वृद्धि की गई है। दरों को संशोधित किए चार साल से अधिक समय हो गया है। डीजल, यूरिया और कीटनाशकों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण लागत बढ़ रही है।”

इस बीच, पंजाब सरकार द्वारा गन्ना किसानों के लिए स्टेट एग्रीड प्राइस (एसएपी) में 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी देने के एक दिन बाद अर्थात किसानों के आंदोलन के बाद और केंद्र द्वारा एफआरपी में पांच रुपये की वृद्धि के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अक्टूबर में आगामी क्रशिंग सेशन शुरू होने से पहले गन्ने के खरीद मूल्य में वृद्धि करने का निर्णय लिया है।

गन्ना मूल्य बढ़ाने और किसानों के सभी बकाया भुगतान के अलावा सीएम ने यह भी घोषणा की कि सरकार किसानों के खिलाफ मामले वापस लेगी और खेतों में फसल की खूंटी को जलाने के लिए उन पर लगाए गए जुर्माने को रद्द करेगी। उन्होंने लखनऊ में अपने आवास पर राज्य के लगभग 150 किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करते हुए यह बात कही।

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) यूपी के महासचिव मुकुट सिंह ने कहा, “केंद्र के लिए कीमतों में केवल पांच रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करना अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए एक दिखावा है; पिछले चुनावों के दौरान किए गए वादे के मुताबिक इसे पूरा नहीं किया गया। यहां तक कि योगी सरकार ने साढ़े चार साल में कीमतों में एक रुपये की बढ़ोतरी नहीं की है। वे भी कीमतों में पांच से दस रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करेंगे जो 335 रुपये हो जाएगा। जब डीजल और कीटनाशकों की कीमतें आसमान छू रही हैं तो ऐसे में इससे किसानों को क्या फायदा होगा? उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चुनावी हथकंडा है और कुछ नहीं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

UP: Centre Hikes Sugarcane FRP Ahead of Polls; an “Eyewash” to Hide Failures, Say Farmers

Uttar pradesh
UP Farmers
Farmers Protests
Farm Laws
SAP
stubble burning
FRP
sugarcane farmers
BKU
rakesh tikait
Western UP

Related Stories

महाराष्ट्र में गन्ने की बम्पर फसल, बावजूद किसान ने कुप्रबंधन के चलते खुदकुशी की

युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

किसान आंदोलन: मुस्तैदी से करनी होगी अपनी 'जीत' की रक्षा

सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 

राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार


बाकी खबरें

  • Western media
    नतालिया मार्क्वेस
    यूक्रेन को लेकर पश्चिमी मीडिया के कवरेज में दिखते नस्लवाद, पाखंड और झूठ के रंग
    05 Mar 2022
    क्या दो परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध का ढोल पीटकर अंग्रेज़ी भाषा के समाचार घराने बड़े पैमाने पर युद्ध-विरोधी जनमत को बदल सकते हैं ?
  •  Mirzapur
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: चुनावी एजेंडे से क्यों गायब हैं मिर्ज़ापुर के पारंपरिक बांस उत्पाद निर्माता
    05 Mar 2022
    बेनवंशी धाकर समुदाय सभी विकास सूचकांकों में सबसे नीचे आते हैं, यहाँ तक कि अनुसूचित जातियों के बीच में भी वे सबसे पिछड़े और उपेक्षित हैं।
  • Ukraine return
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे ठाले:  मौत के मुंह से निकल तो गए लेकिन 'मोदी भगवान' की जय ना बोलकर एंटिनेशनल काम कर गए
    05 Mar 2022
    खैर! मोदी जी ने अपनी जय नहीं बोलने वालों को भी माफ कर दिया, यह मोदी जी का बड़प्पन है। पर मोदी जी का दिल बड़ा होने का मतलब यह थोड़े ही है कि इन बच्चों का छोटा दिल दिखाना ठीक हो जाएगा। वैसे भी बच्चे-…
  • Banaras
    विजय विनीत
    बनारस का रण: मोदी का ग्रैंड मेगा शो बनाम अखिलेश की विजय यात्रा, भीड़ के मामले में किसने मारी बाज़ी?
    05 Mar 2022
    काशी की आबो-हवा में दंगल की रंगत है, जो बनारसियों को खूब भाता है। यहां जब कभी मेला-ठेला और रेला लगता है तो यह शहर डौल बांधने लगाता है। चार मार्च को कुछ ऐसा ही मिज़ाज दिखा बनारस का। यह समझ पाना…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में क़रीब 6 हज़ार नए मामले, 289 मरीज़ों की मौत
    05 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 5,921 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 29 लाख 57 हज़ार 477 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License