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भारत
राजनीति
यूपी चुनाव राउंडअप: बेहद कड़ा और दिलचस्प होता जा रहा है मुकाबला
राजधानी से: भाजपा से नेताओं के पलायन से लेकर सपा-रालोद, बीएसपी, कांग्रेस, आप और एआईएमआईएम के टिकट वितरण पर एक नज़र।
असद रिज़वी
18 Jan 2022
up elections

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनावों के केंद्र में “हिंदुत्व” को लाने की रूपरेखा बना रही थी। लेकिन “ओबीसी” नेताओं के पार्टी के पलायन ने उनके सारे गणित पर पानी फेर दिया है। उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव जितना महत्वपूर्ण हैं उतना ही दिलचस्प होता जा रहा है।

मंत्रियों और विधायकों के इस्तीफ़े

“किसानों” और “ब्राह्मण समाज” की नाराज़गी दूर करने का रास्ता तलाश रही भगवा पार्टी के लिये लगातार मंत्रियों और विधायकों के इस्तीफ़ों ने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। पिछले एक सप्ताह में 3 मंत्रियों समेत 14 विधायक भगवा ख़ेमा छोड़ चुके हैं।

भाजपा की चिंता

योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए बड़ी चिंता की बात यह है कि छोड़ कर जाने वालों में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और धर्म सिंह सैनी सहित 8 विधायकों ने शुक्रवार (14 जनवरी) को प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी सपा का दामन थाम लिया। उधर रविवार (16 जनवरी) को दारा सिंह चौहान भी सपा में शामिल हो गये।

ग़ैर-यादव ओबीसी 

कहा जा रहा है कि ओबीसी नेताओं विशेषकर मौर्य  के सपा में आने से अखिलेश यादव की पिछड़ी जातियों में पकड़ और मज़बूत होगी। प्रदेश की आबादी का क़रीब 35 प्रतिशत हिस्सा ओबीसी है। जिसकी चुनावों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

सपा की पकड़ क़रीब 8 प्रतिशत “यादव” वोटों पर पहले से ही है। लेकिन “ग़ैर-यादव” ओबीसी पर भी उसकी नज़र है। जिसमें उसने सबसे पहले 4 प्रतिशत “राजभर समाज” को अपने पक्ष में लाने के लिये सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से गठबंधन किया।

ओपी राजभर की सुभासपा भी भाजपा छोड़कर सपा में साथ आई है। लेकिन इस से बड़ा झटका सत्तारूढ़ दल को क़द्दावर ओबीसी नेता मौर्य के पार्टी छोड़ के चले जाने से लगा है। क्यूँकि मौर्य की अति-पिछड़ी “मौर्य और कश्यप” जातियों में मज़बूत पैठ है। उनका राजनीतिक प्रभाव सेंट्रल और पूर्वी प्रदेश दोनों जगह माना जाता है।

कांग्रेस के उम्मीदवार

प्रियंका गाँधी ने गुरुवार (13 जनवरी) को कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। कांग्रेस से 125 उम्मीदवारों की घोषणा की हैं। जिसमें क़रीब 40प्रतिशत यानी 50 महिलाएँ हैं। पार्टी ने उन महिलाओं को टिकट दिया हैं, जिन्होंने योगी सरकार में उत्पीड़न का सामना किया या सड़क पर “महिला सशक्तिकरण” के लिए आवाज़ उठाई है।

कांग्रेस ने उन्नाव रेप पीड़िता की माँ आशा सिंह को टिकट दिया है। जिन्होंने भाजपा के बर्खास्त विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। सेंगर के ख़िलाफ़ लड़ाई में उनके पति भी इस दुनिया से चले गये।

नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा कर जेल जाने वाली सदफ़ जाफ़र को भी कांग्रेस ने टिकट दिया है। पुलिस पर आरोप है कि हिरासत के दौरान सदफ़ को यातनाए भी दी गईं थी। सरकार ने उनकी ज़मानत ख़ारिज कराने के लिये अदालत में अर्ज़ी भी दी थी। इसके अलावा उनका नाम “बुल्ली बाई” ऐप पर भी पोस्ट किया गया।

आशा वर्कर पूनम पांडे, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सलमान ख़ुर्शीद की पत्नी लुईस ख़ुर्शीद और प्रमोद तिवारी की बेटी और प्रियंका की क़रीबी आराधना मिश्रा “मोना” को भी कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया गया है।

माना जा रहा है कि कांग्रेस बड़ी संख्या में महिलाओं को  चुनावी मैदान में उतार कर “महिला उत्पीड़न” के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की तैयारी कर रही है। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी घोषणा की है कि वह उन्नाव रेप पीड़िता के ख़िलाफ़ उम्मीदवार नहीं उतरेंगे।

सपा-रालोद का सीट बंटवारा

समाजवादी पार्टी (सपा) राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। गुरुवार (13 जनवरी) को सपा-रालोद गठबंधन उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की गई। जिसमें सपा 10 तो रालोद 19 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। रालोद में हाल ही में शामिल हुए अवतार सिंह भड़ाना को “जेवर” विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है।

सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशियों की दूसरी सूची शनिवार (15 जनवरी) को जारी हुई। इस सूची में सभी 7 उम्मीदवार रालोद के है। रालोद-सपा गठबंधन के अब तक 35 उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है जिसमें रालोद के 26 उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं।

बीएसपी की पहली लिस्ट

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के लिए जारी अपनी पहली लिस्ट में 25 प्रतिशत “मुस्लिम” उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। बसपा की ओर से शनिवार (15 जनवरी) को जारी 53 उम्मीदवारों की सूची में 14 मुस्लिम  उम्मीदवार हैं, यानी 26 प्रतिशत। उल्लेखनीय है कि सपा और रालोद के गठबंधन के 3 मुस्लिम प्रत्याशियों के सामने बसपा ने मुस्लिम उम्मीदवार ही उतारा है। यह सीटें हैं  अलीगढ़ धौलाना और कोल है।

पूर्व आईपीएस भाजपा में शामिल

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने पूर्व आईपीएस असीम अरुण को रविवार (16 जनवरी) को जनवरी भाजपा की सदस्यता दिलाई। कानपुर पुलिस कमिश्नर के पद से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने के बाद पूर्व आईपीएस असीम अरुण भाजपा में हुए है। 

अखिलेश करेंगे शिकायत 

कानपुर के पूर्व कमिश्नर असीम अरुण के यूपी चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की सपा प्रमुख अखिलेश यादव चुनाव आयोग से शिकायत करेंगे। अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि असीम अरुण के आज भाजपा में शामिल होने से साबित हो गया है कि वर्दी में कैसे कैसे लोग छुपे हुये हैं। चुनाव आयोग से अखिलेश ने मांग की है कि अरुण के साथ पिछले 5 साल में जितने अधिकारियों ने काम किया, उनकी पहचान कर चुनाव आयोग उन अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया से हटाये।

सपा कार्यकर्ताओं पर मुक़दमा

सपा कार्यालय में हुई एक 'वर्चुअल' रैली में शामिल 2500 लोगों पर मुक़दमा दर्ज हुआ है। सपा कार्यालय में शुक्रवार (14 जनवरी) को भारी भीड़ उमड़ने पर पार्टी के ढाई हजार कार्यकर्ताओं पर गौतमपल्ली थाने में मुक़दमा दर्ज हुआ है। मुक़दमा “आपदा प्रबंधन व महामारी अधिनियम” समेत 6 धाराओं में दर्ज हुआ है। 

अखिलेश-चंद्रशेखर नहीं बनी बात 

आज़ाद समाज पार्टी के मुख्य चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि सपा और उनकी पार्टी के बीच गठबंधन नहीं होगा। बता दें कि अखिलेश और चंद्रशेखर की मुलाकात सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 14 जनवरी करवाई थी। चंद्रशेखर सुहेलदेव के भागीदारी संकल्प मोर्चे से पहले ही जुड़े थे। अब चंद्रशेखर ने बिना गठबंधन के अकेले ही चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

योगी को अयोध्या से टिकट नहीं मिला

भाजपा ने शनिवार (15 जनवरी) को  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जो पहली जारी की है उसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर शहर से टिकट दिया है। बता दें कि इससे पहले माना जा रहा था कि योगी को अयोध्या या मथुरा से चुनाव लड़ाया जाएगा।

भाजपा में हुए शामिल

चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने भी सपा और कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया है। सपा, कांग्रेस के दो वर्तमान विधायक और सपा के एक पूर्व विधायक 12 जनवरी को भाजपा में शामिल हो गए।

सहारनपुर के “बेहट” से कांग्रेस विधायक नरेश सैनी, फिरोजाबाद के “सिरसागंज” सीट से सपा के विधायक हरिओम यादव और सपा के पूर्व विधायक धर्मपाल यादव भाजपा में शामिल हो गए हैं।

भाजपा आप और एआईएमआईएम के टिकट

सत्तारूढ़ भाजपा समेत आम आदमी पार्टी (आप) और असदउद्दीन ओवैसी ने भी उम्मीदवारों की घोषणा की है। मकर संक्रांति के मौक़े पर भगवा पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे दौर के चुनाव के लिए 107 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। इनमें पार्टी ने 20 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया है। क़रीब 3 सीटें ऐसी हैं, जहां के विधायकों ने टिकट कटने से पहले ही वह दल बदल लिया।

आप ने एक 150 उम्मीदवारों और मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी अपने 9 प्रत्‍याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। सूची में 9 प्रत्‍याशियों की के नाम हैं। एआईएमआईएम ने प्रदेश 100 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। आप ने ऐलान किया है कि वह सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।

आप के प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि उनकी सूची में एमबीए की शिक्षा प्राप्तकर चुके 8, परास्नातक 38, डाक्टर चार, पीएचडी 8, इंजीनियर 7 , बीएड 8, ग्रेजुएट 39 और डिप्लोमाधारक 6 उम्मीदवार हैं। पहली सूची में 8 महिलाओं को भी टिकट दिया गया है।

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