NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उप्र चुनाव: अयोध्या सभी राजनीतिक दलों के लिए तीर्थ क्यों है
"‘1980 के उत्तरार्द्ध में, राजीव गांधी ने संसदीय चुनाव का आगाज अयोध्या से ही किया था, लेकिन कांग्रेस का यह दांव खुद उसी पर उल्टा पड़ गया था। अयोध्या का राम मंदिर पहले तो एक मिथक था;  पर अब वह एक यथार्थ बन गया है..."
रोहित घोष
24 Jul 2021
अयोध्या
अयोध्या। छवि केवल प्रतीकात्मक उपयोग के लिए। 

राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, कोई भी राजनीतिक दल उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक सीटें जीते बिना लोकसभा चुनाव नहीं जीत सकता है। उत्तर भारत के राज्य में विधानसभा चुनाव अगले कुछ महीनों में होने वाले हैं। भारत के लिए उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण है और वैसे ही, उसकी अयोध्या नगरी राज्य के लिए अपने आप में राजनीतिक महत्ता रखती है। 

प्रत्येक राजनीतिक पार्टी चाहती है कि इस समय अयोध्या में उसकी उपस्थिति महसूस की जाए। इसलिए मालूम होता है कि केंद्र एवं उत्तर प्रदेश की सरकारों ने इसके लिए रियायतों की कोई इंतेहा नहीं रखी है। 

इसके बीच, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 2007 की अपनी सोशल इंजिनियरिंग के फार्मूले को एक बार फिर आजमाने की कोशिश कर रही है। वह 2022 के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण मतों को लुभाने का प्रयास करेगी। पार्टी के एक खास ब्राह्मणवादी चेहरा, सतीश चंद्र मिश्र 23 जुलाई के बाद, इस समुदाय के सदस्यों के साथ राज्य भर में कई-कई बैठकें करेंगे। इसकी पहली बैठक की जगह अयोध्या नगरी होगी। यह, इस तथ्य के बावजूद है कि बसपा ने मंदिर मामले से अपने को हमेशा ही दूर रखा है। 

लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष एस.के. द्विवेदी कहते हैं, “बिना किसी संदेह के यह कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में राम और मंदिर मसला हिंदू मतदाताओं का ध्रुवीकरण कर सकता है। हिंदू राम के नाम पर प्रभावित हो सकते हैं।” द्विवेदी ने कहा कि मंदिर मसला सदियों पुराना है, लेकिन अब अयोध्या में मंदिर का निर्माण हो रहा है। 

द्विवेदी ने कहा, “हिंदू मतदाता, खास कर उत्तर प्रदेश में, राजनीतिक रूप से सजग हैं और यह जानता है कि किसके प्रयास से मंदिर निर्माण हो रहा है। स्पष्ट है कि राज्य के बहुसंख्यक मतदातों के ज्यादा से ज्यादा वोट पार्टी को मिलेंगे, लखनऊ में उसी की सरकार बनेगी। लिहाजा, इस बार बसपा के नेता पहले की तुलना में अयोध्या की परिक्रमा कर रहे हैं। जाहिर है, वे यह हिंदुओं को लुभाने के लिए कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि “बसपा और समाजवादी पार्टी (सपा) जैसी पार्टियां नहीं चाहती कि मंदिर निर्माण का श्रेय अकेले भाजपा लूट ले जाए।” 

सपा और आम आदमी पार्टी (आप) भी अयोध्या मामलों में सक्रिय हो गई है। दोनों पार्टियों के नेताओं ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा खरीदी गई भूमि में अनियमितताओं का आरोप लगाया था। यही ट्रस्ट मंदिर निर्माण का काम देख रहा है। 

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ला जो 1980 के दशक से ही मंदिर मामले को नजदीक से देखते आ रहे हैं, उनका कहना है कि अब समय बदल गया है। "राजीव गांधी ने 1980 के उत्तरार्द्ध में, संसदीय चुनाव का आगाज अयोध्या से ही किया था, लेकिन कांग्रेस का यह दांव खुद उसी पर उल्टा पड़ गया था। अयोध्या का राम मंदिर पहले तो एक मिथक था;  पर अब वह एक यथार्थ बन गया है…"

शुक्ला ने कहा कि एक समय मंदिर मसले को भारतीय जनता पार्टी के अलावा लगभग सभी पार्टियों ने निषिद्ध मान लिया था क्योंकि कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय से दुश्मनी मोल लेना नहीं चाहता था। 

शुक्ला ने कहा, “पहले, राजनीतिक पार्टियों का विश्वास था कि चुनाव जीतने के लिए मुस्लिम वोट भी जरूरी हैं। लेकिन, भाजपा ने उन्हें गलत साबित कर दिया। अत: अब हर राजनीतिक पार्टी हिंदू मतदाताओं का भी दिल जीतना चाहती है।" वे पूछते हैं, “पहले, मंदिर निर्माण को लेकर अनिश्चितता थीं, लेकिन अब तो यह अपना स्वरूप ग्रहण करने लगा है। ऐसे में कोई राजनीतिक पार्टी हिंदू वोटर से अपने को क्यों अलहदा रखना चाहेगी?”

पत्रकार शुक्ला कहते हैं, “क्यों अचानक से हरेक राजनीतिक पार्टी चाहे वह सपा, बसपा हो या आप हो, सभी अयोध्या में कुछ न कुछ कर रही हैं?  इसके जरिए वे लोगों को दिखाना चाहती हैं कि मंदिर निर्माण का वह भी समर्थन करती हैं। ये पार्टियां नहीं चाहतीं कि सारा का सारा हिंदू वोट भाजपा की झोली में ही चला जाए।" 

अयोध्या में जब से मंदिर निर्माण शुरू हुआ है, उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने 15 योजनाओं की झड़ी लगा दी है। हालांकि इन सबको पूरा होने में थोड़ा समय लगेगा लेकिन सूबे की सरकार चाहती हैं  कि इनमें से अधिकतर योजनाएं विधानसभा चुनाव के शुरू होने तक पूरी हो जाएं। 

अगस्त के अंत में जिला प्रशासन द्वारा राम लीला का एक कार्यक्रम बनाया गया है, जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों के कलाकार भाग लेंगे। 

इसी दरम्यान, केंद्रीय भूतल परिवहन एवं उच्च पथ मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि अयोध्या तीर्थ को जाने वाले पुराने परिपथ को 3,000 करोड़ की धनराशि से विकसित किया जाएगा। 

कानपुर के राजनीतिक विश्लेषक मनोज त्रिपाठी कहते हैं, “राम मंदिर एक संवेदनात्मक मुद्दा और अयोध्या की कचौड़ी में से हर कोई हिस्सा पाना चाहता है।"

उनका कहना है कि मंदिर का निर्माण तो हो रहा है, लेकिन अगले विधानसभा चुनाव में इसका समूचा लाभांश भाजपा को उसकी मुराद लायक नहीं मिलेगा। "मंदिर का निर्माण जारी है पर भाजपा पंचायत चुनाव बुरी तरह हार गई है, न केवल अयोध्या में, बल्कि वाराणसी एवं मथुरा जैसे हिंदू धार्मिक स्थलों पर भी।” 

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहते हैं।)

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीच दिए गए लिंक पर क्लिक करें

UP Elections: Why Every Political Party is Making an Ayodhya Pilgrimage

Uttar pradesh
UP elections
BJP
UP
SP
BSP
AAP
ram temple
ayodhya

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'


बाकी खबरें

  • election
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव के मिथक और उनकी हक़ीक़त
    14 Mar 2022
    क्या ये कल्याणकारी योजनाएं थीं? या हिंदुत्व था? और बीजेपी ने चुनावों पर कितना पैसा ख़र्च किया?
  • Plural Democracy
    सहबा हुसैन
    दबाये जाने की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत का बहुलतावादी लोकतंत्र बचा रहेगा: ज़ोया हसन
    14 Mar 2022
    जानी-मानी राजनीतिक वैज्ञानिक ज़ोया हसन का कहना है कि पिछले कुछ सालों से कई समूहों और सार्वजनिक विरोधों से बड़े पैमाने पर जो प्रतिक्रियायें सामने आयी हैं, वे बहुमत के शासन की कमी और हमारे लोकतंत्र को…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में लगातार कम हो रहा कोरोना, पिछले 24 घंटों में 2,503 नए मामले सामने आए
    14 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.08 फ़ीसदी यानी 36 हज़ार 168 हो गयी है।
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव : 70 सालों से चल रहे चुनावों में कैसे भाग लिया है जनता ने?
    13 Mar 2022
    हाल ही में 5 राज्यों में #Elections ख़त्म हुए हैं। आखिर कैसे देश में हो रहे हैं चुनाव? क्या है जनता की भागीदारी ? इन्ही सवालों का जवाब ढूंढ रहे हैं नीलांजन और सलिल मिश्रा
  • bjp
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या BJP के अलावा कोई विकल्प नहीं ?
    13 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से पांच राज्यों के चुनाव के बाद की स्थिति के बारे में चर्चा की | क्या BJP के सिवा जनता के पास कोई विकल्प नहीं है? क्या Narendra Modi की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License