NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी: बांदा में अवैध बालू खनन की रिपोर्ट कर रहे पत्रकार ने पुलिस पर लगाया टॉर्चर का आरोप!
पत्रकार आशीष सागर के मुताबिक जिस अमलोर मौरम खदान से नियमों का उल्लंघन कर बालू निकाला जा रहा है, उसके संचालक बीजेपी के कद्दावर नेता रामकांत त्यागी के बेटे विपुल त्यागी हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि 16 नवंबर की रात पुलिसवाले उनके घर ऐसे आ धमके जैसे किसी अपराधी के घर रेड डालने आई हो।
सोनिया यादव
18 Nov 2021
Ashish Sagar

"बिना नोटिस या समन के देर रात भारी पुलिस मेरे दरवाजे पर आ गई। माता-पिता जो ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।"

ये लाइनें पत्रकार आशीष सागर के फेसबुक पोस्ट की हैं। आशीष उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के पत्रकार हैं और ‘वॉयस ऑफ बुंदेलखंड’ नाम से अपना एक चैनल चलाते हैं। बीते कुछ समय से आशीष बांदा ज़िले में केन नदी में अवैध बालू खनन की रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आरोप है कि ज़िले के पैलानी क्षेत्र की अमलोर मौरम खदान से नियमों का उल्लंघन कर बालू निकाला जा रहा है, जिसके चलते नदी एवं पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है।

इसी संबंध में आशीष सागर ने पुलिस पर उन्हें टॉर्चर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट और फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी आपबीती बताई है। उन्होंने लिखा है कि 16 नवंबर की रात पुलिसवाले उनके घर ऐसे आ धमके जैसे किसी अपराधी के घर रेड डालने आई हो। आशीष के मुताबिक जिस अमलोर मौरम खदान से नियमों का उल्लंघन कर बालू निकाला जा रहा है, उसके संचालक बीजेपी के कद्दावर नेता रामकांत त्यागी के बेटे विपुल त्यागी हैं और इसके हिस्सेदार जयराम सिंह नाम के एक बसपा नेता हैं।

मालूम हो कि आशीष ने वीडियो वॉलेंटियर के लिए बतौर सामुदयिक संवाददाता भी काम किया है और इसके अलावा वे द प्रेस ट्रस्ट ऑफ बुंदेलखंड के संस्थापक हैं। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित होने वाले आदिवासियों की कहानी लिखने के मामले में इससे पहले भी आशीष उन्हें और उनके परिवार को मिल रही धमकियों का जिक्र कर चुके हैं।

पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां

बीते 14 जून के एक वाक्ये के बारे में बताते हुए आशीष ने कहा था कि जयराम सिंह अपने पांच साथियों के साथ उनके घर पर पहुंचे थे और उनकी मां से कहा था, ‘अपने बेटे को समझा लेना। मेरे खिलाफ इस तरह की खबरें न लिखे।’

अब एक बार फिर आशीष सागर ने पुलिस पर गंभीर आरेप लगाते हुए विपुल त्यागी पर कई खुलासे किए हैं। उन्होंने इंडिया टुडे को बताया कि ये पूरा मामला सैंड माइनिंग से जुड़ा है। लोगों ने मशीनों से हो रही लैंड माइनिंग को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है और इसलिए आंदोलन भी हो रहा है। इस संबंध में ज़िला प्रशासन से शिकायत की गई है। वहीं इलाके के एसडीएम का कहना है कि अवैध खनन नहीं हो रहा है।

आशीष के मुताबिक, “ऊषा निषाद सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो केन नदी के अवैध खनन को लेकर शुरू हुए विरोधी आंदोलन से जुड़ी हैं। सीओ सदर सत्यप्रकाश शर्मा ने उन पर समझौते का दबाव बनाया। जब उन्होंने समझौता नहीं किया तो इन्होंने पंचायत बुलवाई। पंचायत में ये हुआ कि समझौता नहीं करेंगे, पहले खनन रुकवाइए, फिर देखा जाएगा। इस बीच ऊषा निषाद को लगा कि उनके ऊपर केस हो सकता है, तो वो लगातार जून से पत्राचार करती रहीं हैं। उन्होंने सीओ से लेकर एसपी तक को हलफनामे दिए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।"

अवैध खनन के खिलाफ खड़ी समाजिक कार्यकर्ता पर मुकदमा

आशीष ने आगे बताया कि पुलिस ने बीती 21 जुलाई को ऊषा निषाद के खिलाफ मुकदमा दायर किया। उनका कहना है कि खदान के जिस वीडियो को लेकर ये केस किया गया था, वो ढाई महीने पहले बनाया गया था। एफआईआर में ऊषा के नाबालिग भतीजे का नाम भी जोड़ा गया है। खदान में जाकर वीडियो बनाने वाले लड़के को आरोपी बनाया गया है।

आशीष का कहना है कि इसके बाद ऊषा निषाद को टॉर्चर करना शुरू किया गया। डीआईजी, एसपी सबसे गुहार लगाई, लेकिन नहीं सुनी गई। जब नहीं सुनी गई, तो छठ के दिन लखनऊ में आशीष सागर ने विधानसभा के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें उठा लिया। हजरतगंज थाने में बिठाए रखा। एसपी बांदा को फटकार लगाई गई। पुलिस उन्हें लेकर बांदा आई।

आशीष का कहना है, "उस दिन से पुलिस मेरे पीछे पड़ी है। मेरे दोनों नंबर सर्विलांस पर लगे हैं। 14 तारीख को मैं घर पर नहीं था। मम्मी-पापा मथुरा गए थे। पुलिस घर आई, मेरे भाई से परिवार के बारे में पूछताछ की। मेरे बारे में पूछताछ की। अर्निंग का सोर्स पूछ कहा कि आपके भाई पर कई मुकदमे चल रहे हैं और वापस आने पर कोतवाल से मिल लें। इसके बाद मैंने अपने मुकदमों की लिस्ट देखी, मेरे ऊपर साल 2010 से 7 मुकदमें लगाए गए हैं। उन मामलों में कभी कोई कॉन्स्टेबल तक मेरे दरवाजे पर नहीं आया। मेंटली टॉर्चर करने के लिए ये सब चीजें की गईं। डकैती, लूट जैसे मामले मेरे ऊपर लगाए गए हैं।"

इसके बाद आशीष ने कोतवाल से मुलाकात की। उन्हें बताया गया कि शासन से रिपोर्ट मांगी गई है। लेकिन अगले दिन देर रात कई पुलिसकर्मी उनके घर पहुंच गए। इस घटनाक्रम को लेकर आशीष ने बताया कि आधे लोग सादी वर्दी में और आधे वर्दी में मेरे घर पर आ गए। कोतवाल खुद मौके पर मौजूद थे।

पुलिस प्रशासन द्वारा प्रताड़ना की कोशिश

आशीष के अनुसार, "रात में सवा 10 से साढ़े 11 बजे तक पुलिस मेरे दरवाजे पर खड़ी रही। कोतवाल ने मेरी मां से दरवाजा खोलने के लिए कहा। आवाज सुन मैं बाहर आया। पुलिस ने मुझे बाहर आने को कहा लेकिन मैंने इन्कार कर दिया। मैंने पुलिस के रात में घर आने को लेकर आपत्ति जताई। कहा कि अगर पुलिस मुझसे मिलना ही चाहती है तो मैं दिन में मिलूंगा। फिर पुलिस अमर्यादित होने लगी। लेकिन देखा कि मैं नहीं मानूंगा, तो आधे घंटे बाद चली गई। मैंने ट्वीट किया, थोड़ी भद्द पिटने के बाद पुलिस बैकफुट पर आई।"

गौरतलब है कि पत्रकारों को अपना काम करने के चलते बर्बर तरीके से मारने, डराने-धमकाने समेत कई मामले सामने आ चुके हैं। मीडिया की आजादी से संबंधित ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ की सालाना रिपोर्ट में प्रेस की आजादी के मामले में भारत 180 देशों में लगातार 142वें स्थान पर है, यानी ये देश पत्रकारिता के लिए बेहद खतरनाक है। इसमें से उत्तर प्रदेश की स्थिति और ज्यादा दयनीय है। यहां पर आए दिन सच को उजागर करने वाले पत्रकारों पर मुकदमें और गिरफ्तारी की खबरें सुर्खियां बनी रहती हैं। योगी सरकार भले ही प्रदेश में 'रामराज्य' और 'बेहतर कानून व्यवस्था' का दावा करती हो, लेकिन जमीनी पत्रकार तस्वीर इससे उलट ही देखते हैं।

UttarPradesh
Ashish Sagar
sand mining
journalist
Press freedom
BJP
Yogi Adityanath
yogi government
attack on journalists
attack on journalism
Freedom of Press

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • tirchi nazar
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: 'सरकार जी' ने भक्तों के साथ की वर्चुअल मीटिंग
    31 Oct 2021
    दीपावली के शुभ अवसर पर आयोजित उस मीटिंग में सरकार जी ने सबसे पहले भक्तों को भक्त होने का महत्व बताया। भक्तों को बताया कि वह चमचों से किस तरह अलग हैं।
  • raid
    राजेंद्र शर्मा
    लक्ष्मी जी और ईडी का छापा
    31 Oct 2021
    जब ईडी ने लक्ष्मी जी पर मनी लॉन्डरिंग के आरोप में कर डाली छापेमारी!
  • Communalism
    शंभूनाथ शुक्ल
    अति राष्ट्रवाद के भेष में सांप्रदायिकता का बहरूपिया
    31 Oct 2021
    राष्ट्रवाद का अर्थ है अपने देशवासियों से प्रेम न कि किसी राजनीतिक विचारधारा के प्रति समर्पण। अपने देश के संविधान को मानना और उस पर अमल करना ही राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में भाजपा के आगे विपक्षी इतने सुस्त क्यों और तीन अन्य खबरें
    30 Oct 2021
    यूपी में भाजपा के आगे मुख्य विपक्षी इतने सुस्त क्यों नजर आ रहे हैं? एनसीबी या इस जैसी अन्य एजेंसियां संविधान और राज्य के प्रति जवाबदेह हैं या सरकार चलाने वाले सर्वसत्तावादी सियासतदानों के प्रति? 32…
  • COP26
    रश्मि सहगल
    कॉप26 : भारत कर रहा है पर्यावरणीय संकटों का सामना  
    30 Oct 2021
    विकसित दुनिया कार्बन का मुख्य उत्सर्जक है, इसलिए इसे वैश्विक जलवायु परिवर्तन विरोधी प्रयासों के लिए अवश्य ही धन देना चाहिए। फिर भी, भारत घरेलू पर्यावरण संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License