NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
यूपी : 5,000 से अधिक जल निगमकर्मियों को नौकरी एवं पेंशन से महरूम होने का डर
इन कर्मियों को “सरप्लस” घोषित कर दिया गया है, वे पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार के दौर में भर्ती किए गए थे और इन्हें विगत छह महीने से वेतन नहीं दिया गया है।
अब्दुल अलीम जाफ़री
14 Jul 2021
jal nigam

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्ववाली सरकार द्वारा 1,300 जल निगम कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द कर देने के महीनों बाद, विभाग के लगभग 5,000 कर्मचारियों को भी नौकरी जाने का भय सता रहा है। गौरतलब है कि जल निगम कर्मचारियों की नियुक्ति समाजवादी पार्टी की हुकूमत के दरम्यान की गई थी, जिन्हें योगी सरकार ने चयन प्रक्रिया में “अनियमितता बरते जाने” का हवाला देते हुए बर्खास्त कर दिया है। 

ये कर्मचारी, जिनकी अधिकतर अवस्था 50 साल से भी अधिक है, वे जल निगम के तकनीकी एवं गैर-तकनीकी विभाग में पम्प ऑपरेटर, हैंड पम्प मैकेनिक, फीटर, हेल्पर, चौकीदार, ड्रिलर, कम्प्रेशर ड्राइवर के रूप में करते रहे हैं। उन्हें डर है कि उन्हें पेंशन एवं रिटायरमेंट के पहले भत्ते भी नहीं मिलेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उत्तर प्रदेश जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार के बीच 9 फरवरी को हुई बैठक के बाद क्षेत्र में काम करने वाले इन 5,000 कर्मचारियों को विभाग में “सरप्लस” माना गया और उन्हें “अनुपयोगी” घोषित कर दिया गया। इनके वेतन और पेंशन के भुगतान में आ रही “वित्तीय कठिनाइयों” को देखते हुए, विभाग ने फैसला किया कि फील्ड में काम करने वाले सभी जल निगमकर्मियों को पंचायती राज एवं नगर निगम निकायों में समंजित किया जाएगा। इस बारे अनिल कुमार द्वारा एक आदेश भी जारी किया गया था। 

प्रबंध निदेशक अनिल कुमार के मुताबिक, जल निगम लगातार वित्तीय संकट से गुजर रहा है, जिसके चलते अपने कर्मचारियों की सैलरी एवं पेंशन का भुगतान करना कठिन हो गया है। ऐसी स्थिति में, ये जो “सरप्लस” कर्मचारी हैं, उन्हें अन्य विभाग में “शिफ्ट” किया जा रहा है। 

हालांकि इस आदेश के जारी होने के पांच महीने गुजर जाने के बाद, ये जल निगमकर्मी पंचायती राज एवं नगर निगम निकायों में ज्वाइन करने के लिए सरकारी अधिसूचना जारी किए जाने का इंतजार ही कर रहे हैं। इनका आरोप है कि उनकी सेवानिवृत्ति में जबकि महज चार-पांच साल ही बाकी रह गए हैं, ऐसे में उन्हें दूसरे विभाग में स्थानांतरित किए जाने का निर्णय बिना किसी पूर्व सूचना के लिया गया है। इससे लगता है कि सरकार की मंशा “कर्मचारियों को प्रताड़ित” करने की है। 

उत्तर प्रदेश जल निगम संस्थान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष सनेही यादव ने न्यूजक्लिक से कहा, "इस मोड़ पर जब ये सभी 5,000 कर्मचारी 50 के पार हो गए हैं और उनके रिटायर होने में महज चार-पांच साल ही बाकी रह गए हैं, सरकार का उन्हें फालतू करार देने तथा दूसरे विभाग में ठेले जाने का फैसला अमानवीय है। इससे सरकार की मंशा उनके वेतन एवं भत्ते की सुविधाओं से उन्हें महरूम करना है।” 

यूनियन ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है। उसका सवाल है कि “जब जल निगम विभाग न बंद किया जा रहा है और न ही इसका परंपरागत काम-सीवर लाइन, नदी प्रदूषण, जलापूर्ति और हैंडपंप लगाना-ही रुका है, तब कैसे विभाग के कुछ कर्मचारियों को “सरप्लस” होने और उनकी “जरूरत” न होने का दावा किया जा सकता है?"

यूनियन ने कहा कि सरकार के जारी आदेश के साथ जल निगम का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ अभियान शुरू कर  जल निगम के सारे काम ठप करने की धमकी दी। 

सनेही यादव ने कहा कि ये सभी “सरप्लस” कर्मचारी 50 वर्ष के ऊपर के हैं और इन्हें इसका कोई तजुर्बा नहीं है कि अगर उन्हें दूसरे विभाग में भेजा गया तो उनकी सेवा-शर्तें क्या होंगी? क्या उन्हें पेंशन मिलेगी?

यादव ने आगे बताया, "अगर किसी विभाग को अपने यहां काम के लिए अतिरिक्त कर्मियों जरूरत होगी तो वह आधिकारिक स्तर पर इसके लिए अनुरोध कर सकता है और वहां भेजे जाने वाले कर्मियों के बारे में दिशा-निर्देश जारी करता है और उन्हें मिलने वाले लाभों के बारे में बताता है। लेकिन इस मामले में कुछ भी नहीं किया गया है। सीधे आदेश जारी कर दिया गया है। अब इन कर्मचारियों को छह महीनों से पगार तक नहीं मिली है। जो कर्मचारी इन सबके दरम्यान रिटायर हो गए हैं, उन्हें भी ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वे भी अपने बकाए वेतन एवं पेंशन, ग्रैच्यूटी एवं छुट्टी के बदले नकद भुगतान किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।”

यूनियन के अध्यक्ष ने कहा कि नियम-कायदे के अनुसार, किसी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के कुछ साल पहले, उनका मूल विभाग उन्हें बुलाता है और उनके सारे देय लाभों का भुगतान करता है। इस नियम-कायदे का इस मामले में उल्लंघन किया गया है क्योंकि जल निगम ने अपने कर्मचारियों को पंचायती राज एवं स्थानीय निकायों में स्थांतरित कर दिया है। 

इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जल निगम के एक अवकाशप्राप्त कर्मचारी प्रताप साहनी ने कहा: "योगी सरकार की योजना जल निगम को बंद करने की है। उसे निजी हाथों में सौंप देने की है।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जल निगम को छोड़ कर कोई ऐसा निगम नहीं है, जो लोगों को साफ पानी मुहैया कराता है। 

साहनी आगे कहते हैं,  “सरकार ने जल निगम के 5,000 से अधिक कर्मचारियों को दूसरे विभाग में स्थानांतरित कर देने का निर्णय किया है, उसके बाद मात्र 2,000 कर्मचारी ही निगम में बच जाएंगे। इनमें अधिकतर क्लर्क एवं इंजीनियर हैं। अगर आप इन 2,000  कर्मचारियों को राज्य के 75 जिलों में बांट दें तो यह सरकार ओवरहेड टैंक पानी फिल्टर, सीवर उपचार, जल उपचार, पाइपलाइन जैसे कामों को कैसे करेगी? सरकार का मकसद ही जल निगम को प्राइवेट हाथों में दे देना है।” वे केंद्र सरकार के श्रम-सुधार पर गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहते हैं कि भाजपा सरकार का असल मकसद ऐसा कानून बनाना है, जिससे कि केवल पूंजीपतियों को ही उसका लाभ मिले। 

साहनी ने आगे कहा, “उत्तर प्रदेश में तीन सबसे बड़े निगम हैं-जल निगम, यूपी रोडवेज एवं वन निगम। पिछले दो दशकों से इन तीनों ही निगमों में कोई भर्ती नहीं की गई है। इसके बजाय, सरकार ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए अपने कर्मचारी घटा दिए हैं, लेकिन असलियत यह है कि इनको निजी हाथों में सौंपने की अंदरखाने तैयारी कर रही है।" 

मार्च 2021 में, उत्तर प्रदेश सरकार ने जल निगम के 1,300 कर्मचारियों की नियुक्तियों में गलत प्रक्रिया अपनाए जाने का हवाला देते हुए बर्खास्त कर दिया था। ये कर्मचारी समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में तात्कालीन विभागीय मंत्री (अब सांसद) मोहम्मद आजम खान द्वारा नियुक्त किए गए थेI 

उत्तर प्रदेश जल निगम के अतिरिक्त मुख्य अभियंता आइ के श्रीवास्तव ने एक आदेश जारी कर 122 सहायक अभियंताओं, 853 कनीय अभियंताओं और 325 लिपिकों को उनकी नियुक्ति की तारीख से ही बर्खास्त कर दिया था। यह कार्रवाई विशेष जांच टीम (एसआइटी) और विभागीय जांच के आधार पर की गई थी। 

इसी बीच, जल निगम कामगार समन्वय कमेटी के मुख्य प्रवक्ता डीपी मिश्रा ने कहा कि “यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब निगम वित्तीय संकट से गुजर रहा है, तब वे कर्मचारियों को विश्वास में लिए बगैर या बिना उन्हें सूचित किए ही मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में 1.50 करोड़ रुपये का योगदान कर दिया है।”

मिश्रा ने न्यूजक्लिक से कहा, “जब जल निगम वित्तीय बदहाली से रूबरू है और वह अपने स्टाफ को विगत छह महीनों से सैलरी नहीं दे पा रहा है, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन नहीं दे पा रहा है तथा सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले अन्य लाभों को नहीं दे रहा है तब विभागीय प्रशासन कैसे इतनी बड़ी धनराशि मुख्यमंत्री कोष में दे सकता है? इस राशि का इस्तेमाल कर्मचारियों के लिए किया जा सकता था, लेकिन कौन चिंता करता है अगर सरकार का काम करते-करते हम मर भी जाते हैं तो।” 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

https://www.newsclick.in/UP-Over-5000-Jal-Nigam-Employees-Fear-Losing-Jobs-Retirement-Benefits

job loss
Workers' Layoffs
Public Sector Employees
employees protest
Layoffs
Yogi Adityanath govt

Related Stories

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

हिमाचल: होटल ईस्टबोर्न के कर्मचारियों ने अपने 16 महीने के बक़ाया वेतन देने की मांग को लेकर किया विरोध प्रदर्शन

दिल्ली में किसानों ने बोला हल्ला तो यूपी के कई जिलों में कर्मचारियों और छात्र संगठनों की रही हड़ताल

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने भी उठाई पुरानी पेंशन बहाली की मांग : ‘न कामदार, न नामदार, मैं हूं बिना पेंशन सरहदों का चौकीदार!’  

CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के बीच नाबालिगों पर यूपी पुलिस की बर्बरता

दिल्लीः स्थायी पद की मांग को लेकर तीनों निगमों के डीबीसी कर्मचारियों का हड़ताल

UPPCL पीएफ घोटाला : क्या है डीएचएफएल और बीजेपी का कनेक्शन!

डीबीसी को भुलाकर कैसे होगी डेंगू से लड़ाई? स्थायी नौकरी की मांग को लेकर हड़ताल

अब लिंचिंग के लिए गाय के बहाने की भी ज़रूरत नहीं रही


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License