NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
यूपी: शाहजहांपुर में प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, यूनियन ने दी टीकाकरण अभियान के बहिष्कार की धमकी
पुलिस के बयान के उलट आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे उस रैली की ओर मार्च कर रही थीं, जहां मुख्यमंत्री सभा को सम्बोधित कर रहे थे और मुख्यमंत्री के दौरे के पूरा हो जाने के बाद ही उन्हें रिहा किया गया।
अब्दुल अलीम जाफ़री
11 Nov 2021
ASHA Workers
फ़ोटो:साभार; अमर उजाला

लखनऊ: मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा), जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बतौर 'कोरोना योद्धा कोविड-19 महामारी में उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए सम्मानित किया था, उन पर पुलिस ने बेरहमी से हमला किया।

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पुलिस ने मंगलवार को विरोध कर रही आशा कार्यकर्ताओं पर बेरहमी से हमला किया और उन्हें हिरासत में ले लिया। एक रैली को सम्बोधित करने के लिए शहर में मौजूद योगी आदित्यनाथ सरकार के ख़िलाफ़ मानदेय में बढ़ोत्तरी और, महामारी ड्यूटी के दौरान जोखिम भत्ता और बीमा कवर के साथ-साथ नियुक्तियों का नियमितीकरण, भविष्य निधि और सामाजिक सुरक्षा जैसी लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के बैनर तले ज़िले भर से सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता रैली स्थल के नज़दीक धरना प्रदर्शन करने पहुंची थीं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई घटना के कई वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला कांस्टेबल किस तरह कुछ आशा कार्यकर्ताओं की पिटाई कर रही हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि यह मामूली हाथापाई थी और किसी को चोट नहीं आयी और न ही किसी को हिरासत में लिया गया।

लेकिन, पुलिस के बयान के उलट आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे उस रैली की ओर मार्च कर रही थीं, जहां मुख्यमंत्री सभा को सम्बोधित कर रहे थे, और मुख्यमंत्री के दौरे के पूरा हो जाने के बाद ही उन्हें रिहा किया गया।

इस घटना ने पूरे राज्य में विवाद खड़ा कर दिया है, जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस पार्टी ने कार्यकर्ताओं की इस पिटाई में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्विटर पर इस घटना का एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आशा बहनों पर हर हमला उनके किये गये कार्यों का अपमान है। मेरी आशा बहनों ने कोविड-19 महामारी और दूसरे मौक़ों पर पूरी लगन से अपनी सेवायें दी हैं। मानदेय पाना उनका अधिकार है। उनकी बात सुनना सरकार का कर्तव्य है। आशा बहनें सम्मान की पात्र हैं और मैं इस लड़ाई में उनके साथ हूं।"

कांग्रेस नेता का आगे कहना था कि आने वाले विधानसभा चुनावों में राज्य में पार्टी के सत्ता में आने पर आशा कार्यकर्ताओं को प्रति माह 10,000 रुपये का भुगतान किया जायेगा।

इस बीच, पुलिस के इस हमले के बाद बरेली में कई संगठनों के तहत आशा कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर नाराज़गी जतायी और आरोपी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की।उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर आरोपी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की गयी, तो आशा कार्यकर्ता जल्द ही विरोध प्रदर्शन करेंगी और स्वास्थ्य कार्यक्रमों का बहिष्कार करेंगी।

आशा कार्यकर्ताओं की ज़िला उपाध्यक्ष शिववती साहू ने कहा कि आशा कार्यकर्ता अपनी जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों और योजनाओं को घर-घर पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री से मिलने जा रही आशा कार्यकर्ताओं की पिटाई निंदनीय है। अगर आरोपी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड नहीं किया गया, तो आशा वर्कर्स यूनियन सख़्त क़दम उठाने को मजबूर होगा, यहां तक कि हम काम का बहिष्कार करने से भी नहीं हिचकेंगे।"

आशा यूनियन ने कहा, "हम यूपी सरकार के इस कायराना कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं, जो लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं।" आशा यूनियन ने कहा कि मानदेय की बकाये राशि की मांग को लेकर कार्यकर्ता पिछले कई महीनों से उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में धरना प्रदर्शन कर रही थीं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ध्यान नहीं दिये जाने से नाराज़ होकर उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की ओर से चलाये जा रहे टीकाकरण अभियान का बहिष्कार करने की भी धमकी दी।

राज्य कर्मचारी का दर्जा दिये जाने और 18,000 रुपये मानदेय की मांग को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का यह आंदोलन सातवें महीने भी जारी है।

एक अन्य आशा कार्यकर्ता सावित्री ने न्यूज़क्लिक को बताया, "आशा किसी भी स्वास्थ्य सेवाओं की मज़बूत कड़ी हैं। हमने कोविड-19 काल के दौरान बिना किसी डर के काम किया। आशा कार्यकर्ता सरकार के शुरू किये गये सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। हालांकि, सरकार हमारी चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रही है। हमारी प्रमुख मांग है कि हमें 18,000 रुपये मानदेय दिया जाये और राज्य कर्मचारियों का दर्जा भी दिया जाये।"

सितंबर में कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे आगे रहीं हज़ारों आशा कार्यकर्ता, सहायक नर्स दाइयों और उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी, सर्व शिक्षा अभियान और मध्याह्न भोजन योजना (MDM) कार्यकर्ता स्कीम वर्कर्स यूनियन के बैनर तले भारत ने एक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर और अन्य यूनियनों से से जुड़े फेडरेशन ने पर्याप्त मानदेय, नियुक्तियों के नियमितीकरण, भविष्य निधि और सामाजिक सुरक्षा और महामारी ड्यूटी के दौरान जोखिम भत्ता और बीमा कवर की मांग की।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

UP: Protesting Shahjahanpur ASHA Workers Beaten By Cops, Union Threaten to Boycott Vaccination Drive

asha workers
Shahjahanpur
Asha Workers Protest
LOW WAGES
workers protests
COVID-19

Related Stories

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे

दिल्ली: कोविड वॉरियर्स कर्मचारियों को लेडी हार्डिंग अस्पताल ने निकाला, विरोध किया तो पुलिस ने किया गिरफ़्तार

बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में स्कीम वर्कर्स की बिगड़ती स्थिति और बेपरवाह सरकार

एक बड़े आंदोलन की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशा बहनें, लखनऊ में हुआ हजारों का जुटान

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

नीट-पीजी 2021 की काउंसलिंग की मांग को लेकर रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को देश भर से मिल रहा समर्थन

दिल्ली: महंगाई के ख़िलाफ़ मज़दूरों, महिलाओं, छात्र-नौजवानों व कलाकारों ने एक साथ खोला मोर्चा

दिल्ली: बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ मज़दूर, महिला, छात्र, नौजवान, शिक्षक, रंगकर्मी एंव प्रोफेशनल ने निकाली साईकिल रैली


बाकी खबरें

  • climate change
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: धरती एक दावानल की चपेट में आने जा रही है
    11 Aug 2021
    कुछ साल पहले तक तो जलवायु परिवर्तन को एक सैद्धांतिक बात कहकर टाल दिया जाता था लेकिन अब हक़ीक़त यह है कि जलवायु परिवर्तन का असर हमारे रोज़मर्रा के जीवन में दिखाई देने लगा है।
  • SOCIALISM
    प्रभात पटनायक
    बराबरी और किल्लत: कैसे समाजवाद ने पूंजीवाद को पछाड़ा
    11 Aug 2021
    सामान के लिए उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें लगना, समाजवादी उत्पादन व्यवस्था की अकुशलता को नहीं, बल्कि इन समाजवादी समाजों की बहुत ही समतावादी प्रकृति को ही दिखाता था।
  • AIDWA PROTEST
    असद रिज़वी
    अध्ययन: स्मार्ट फ़ोन, इंटरनेट और बढ़ती फ़ीस इस सबने ग़रीब मेहनतकशों के बच्चों को पीछे धकेला
    11 Aug 2021
    अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) ने कोविड-19 के दौरान प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा पर पड़े नकारात्मक प्रभाव पर एक अध्ययन किया है। अध्ययन में सामने आया है कि सुविधाओं की कमी और ख़राब आर्थिक हालत के…
  • पीपल्स डिस्पैच
    थाईलैंडः पुलिस की कार्रवाई के बावजूद "कार" रैली में हज़ारों लोग शामिल हुए
    11 Aug 2021
    प्रयुत चान-ओ-चा की सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी के कुप्रबंधन के ख़िलाफ़ गुस्साए हज़ारों लोगों ने 2020 में थम्मासैट विश्वविद्यालय के विरोध के एक साल पूरे होने पर रैली निकाली।
  • सुभाष गाताडे
    जब सार्वजनिक हित के रास्ते में बाधा बनती आस्था!
    11 Aug 2021
    अगर हम अपने ही हालिया इतिहास के पन्नों को पलटें तो हमें देश के अलग-अलग भागों से ऐसी कई मिसालें मिल सकती हैं कि किस तरह लोगों ने आपसी सूझबूझ से आस्था के सवाल को सार्वजनिक हित के मातहत करने में संकोच…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License