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यूपी: प्रतापगढ़ में शराब माफ़िया का पर्दाफ़ाश करने के बाद टीवी पत्रकार की 'सड़क दुर्घटना' में मौत
उनके परिवार के सदस्यों का कहना है कि घटना से एक दिन पहले 13 जून को पत्रकार ने प्रयागराज के एडीजी से अपनी जान का खतरा होने के डर से सुरक्षा की गुहार लगायी थी।
अब्दुल अलीम जाफ़री
15 Jun 2021
यूपी: प्रतापगढ़ में शराब माफ़िया का पर्दाफ़ाश करने के बाद टीवी पत्रकार की 'सड़क दुर्घटना' में मौत
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक हिंदी न्यूज़ चैनल के साथ काम करने वाले एक टेलीविज़न पत्रकार रविवार, 13 जून को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाया गया था,उनके परिवार के सदस्यों का कहना है कि अपनी मौत से ठीक एक दिन पहले उन्होंने प्रयागराज के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) को अपनी जान का ख़तरे होने को लेकर सूचित किया था।

सुलभ श्रीवास्तव के रूप  में शिनाख़्त किये गये पत्रकार प्रतापगढ़ ज़िले के कटरा के पास सुखपाल नगर इलाक़े में मृत पाये गये। पुलिस ने कथित तौर पर इस मौत का कारण "सड़क दुर्घटना" बताया है।

शहर के सर्किल ऑफ़िसर (CO),अभय कुमार पांडे ने न्यूज़क्लिक को बताया,"एबीपी न्यूज़ चैनल में कार्यरत पत्रकार,सुलभ श्रीवास्तव रविवार रात क़रीब 9:45 बजे कोतवाली थाने के कटरा मेदनीगंज इलाक़े में एक ईंट भट्ठे के पास मृत पाये गये। पहली नज़र में यह मामला सड़क दुर्घटना का लग रहा है। वह भारी बारिश के चलते फिसलन भरी सड़क पर अपनी एवेंजर बाइक से गिर गये; भारी बारिश के बाद सड़क पर कीचड़ के फैल जाने से सड़क पर फिसलन हो गयी और ख़ासकर दोपहिया वाहनों के लिए यह सड़क जोखिम भरी हो गयी। उनकी बायीं आंख के ऊपर एक छोटा सा निशान है और इसके अलावा कोई और चोट नहीं है। उन्हें कोई अंदरूनी चोटें आयी थीं या नहीं, इसका पता तो पोस्टमार्टम के बाद ही चल पायेगा।" उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि मृतक किसी हैंडपंप और बिजली के खंभे से टकरा गये थे,जिससे उन्हें चोट लगी।

रिपोर्टों के मुताबिक़,जिस वक़्त पत्रकार का शव मिला था,उनके पूरे शरीर पर कपड़े नहीं थे। हालांकि,पुलिस अधिकारी ने कहा कि उन्हें इसके बारे में पता नहीं है,उनका कहना था कि शायद ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मज़दूरों ने उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए उनके कपड़े उतार दिये हों,क्योंकि मौक़े पर कोई मौजूद नहीं था। उन्होंने बताया,”पत्रकार प्रतापगढ़ के लालगंज क्षेत्र से लौट रहे थे और कटरा क्षेत्र में सड़क के किनारे घायल पाये गये। मुझे वहां मौजूद कुछ मज़दूरों ने बताया था।”

इस बीच,पत्रकार के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि शरीर पर चोट के कई निशान थे और उनके शरीर पर कपड़े भी कम थे,जो साफ़-साफ़ इस बात का संकेत देता है कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या थी।उन्होंने कहा कि यह हत्या उन स्थानीय शराब माफ़ियाओं द्वारा की गयी है,जिन्हें लेकर उन्होंने हाल ही में खुलासा किया था।

परिवार के एक सदस्य ने न्यूज़क्लिक को बताया,"पुलिस कहानी बना रही है। सुलभ की मौत सड़क दुर्घटना में नहीं हुई है। उनकी हत्या एक साज़िश के तहत की गयी है। रविवार की शाम वह अन्य पत्रकारों के साथ एक घटना की कवरेज के लिए लालगंज कोतवाली गये थे। वे रात क़रीब साढ़े दस बजे वहां से लौट रहे थे। वह कटरा इलाक़े के पास सड़क के किनारे संदिग्ध हालत में पड़े मिले और उनके शव पर पूरे कपड़े भी नहीं थे।'

पत्रकार की 'हत्या' से दो दिन पहले 12 जून को सुलभ श्रीवास्तव द्वारा प्रयागराज रेंज,प्रयागराज के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) को लिखे पत्र का ज़िक्र करते हुए परिवार के सदस्य ने ज़िला प्रशासन पर उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं कराने का आरोप लगाया,जिसकी वजह से उनकी जान गयी।

सुलभ ने अपनी मौत से एक दिन पहले ही प्रयागराज ज़ोन के एडीजी को एक शिकायत पत्र इसलिए भेजा था, क्योंकि ज़िले के शराब माफ़ियाओं पर उनकी रिपोर्टिंग के बाद से उन्हें अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की जान का ख़तरा महसूस हो रहा था। उस पत्र में उन्होंने कहा था कि प्रतापगढ़ ज़िले के कई थानों में स्थानीय पुलिस द्वारा की गयी छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में शराब की बोतलें ज़ब्त की गयी हैं। उन्होंने एबीपी न्यूज़ के लिए भी यह ख़बर की थी, जो 9 जून को उनके डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर प्रसारित हुआ था। पत्रकार ने अपने उस पत्र में इस बात का ज़िक़्र किया था कि तब से वह जहां भी जाते हैं, कुछ लोग उनका पीछा कर रहे हैं।

मृतक के पिता ने न्यूज़क्लिक को बताया,"असल में मेरे बेटे द्वारा दिखायी गयी ख़बर से कुछ शराब माफ़िया परेशान और नाराज़ थे और वे हर जगह उनका पीछा कर रहे थे। एडीजी को अपनी जान को ख़तरा होने की शिकायत करने के बावजूद किसी भी अधिकारी ने उस बात पर ध्यान नहीं दिया और हमने उन्हें खो दिया।"

इस घटना पर टिप्पणी करते हुए लखनऊ पत्रकार संघ के अध्यक्ष,आलोक त्रिपाठी ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले कुछ सालों में राज्य में पत्रकारों पर हमले पहले से कई गुना बढ़ गये हैं और सरकार अपनी जान को जोखिम में डालकर ख़बर लाने वाले इस समुदाय को सुरक्षा मुहैया कराने में बार-बार नाकाम रही है।

त्रिपाठी सवाल करते हैं,“जब से उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार आयी है,पत्रकार बिरादरी के लिए सचाई की रिपोर्टिंग करना गुनाह बन गया है और न तो सरकार और न ही प्रशासन ऐसी घटनाओं पर कोई संज्ञान लेता है,और इसका नतीजा उनकी मौत रूप में सामने आता है। प्रतापगढ़ पुलिस का दावा है कि यह एक दुर्घटना थी,लेकिन बिजली के खंभे से टकराते समय उसकी शर्ट कैसे फट गयी ? पत्रकार की सुरक्षा की गुहार के बावजूद कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए एडीजी को जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए ?”  वह आगे कहते हैं कि सत्तारूढ़ सरकार नहीं चाहती कि पत्रकार सच लिखें,घोटालों या अनियमितताओं का पर्दाफ़ाश करें।

त्रिपाठी कहते हैं,“पत्रकार पिछली सरकारों में भी अपना काम करने के लिए मारे जाते थे,लेकिन यह नया चलन तो पत्रकारों के लिए एक उत्पीड़न बन गया है। भाजपा सरकार के दौरान सख़्त क़ानूनों के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाती है और इससे पत्रकारों में डर पैदा हो गया है।”

उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष,हेमंत तिवारी प्रतापगढ़ पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहते हैं,“ पोस्टमॉर्टम से पहले ही पुलिस अधिकारियों का यह बयान देना कि यह सड़क दुर्घटना थी,बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। ज़िले में पुलिस और शराब माफ़ियाओं के बीच सांठगांठ इस इलाक़े में काफ़ी तगड़ी है और पत्रकार द्वारा इसका पर्दाफ़ाश करने के बाद तो यह और भी ज़्यादा स्पष्ट हो गया है। सवाल उठता है कि एडीजी ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की या उनके उस दरख़्वास्त का जवाब क्यों नहीं दिया,जो उन्होंने अपनी मौत से ठीक एक दिन पहले लिखी थी ?”

ऐसा नहीं कि उत्तर प्रदेश की यह पहली घटना है,जहां शराब माफ़िया का पर्दाफ़ाश करने वाले किसी पत्रकार पर हमला किया गया हो, पिछले साल उन्नाव ज़िले में एक अन्य पत्रकार की कथित तौर पर उस इलाक़े में अवैध रेत खनन माफ़िया और भूमि हथियाने वालों को बेपर्द करने के कारण गोली मार दी गयी थी।

न्यूज़क्लिक ने पहले ही यह ख़बर दी थी कि पत्रकार शुभम मणि त्रिपाठी उर्फ़ निक (25) को पिछले साल जून में उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के गंगाघाट इलाक़े में दूध मंडी के पास अज्ञात लोगों ने उस दौरान गोली मार दी थी,जब वह मोटरसाइकिल पर अपने दोस्त के साथ घर लौट रहे थे।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

UP: TV Journalist in Pratapgarh Dies in ‘Road Accident’ Days After Exposing Liquor Mafia

Attacks on Journalists in Uttar Pradesh
Uttar Pradesh Government
Attack on Freedom of Press
Yogi Adityanath Government
Journalist Booked for Sedition
Journalist Booked Under NSA
journalist killed

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