NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
महिलाएं
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
यूपी: सत्ता के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाली महिलाओं का संघर्ष हार-जीत से कहीं आगे है
इन महिला उम्मीदवारों की पहचान हार-जीत से अलग इनका संघर्ष है, जो हमेशा याद रखा जाएगा। बीते पांच सालों में सीएम योगी आदित्यनाथ की छवि में भले ही कोई खासा बदलाव नहीं आया हो, लेकिन उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली महिलाओं की संख्या में इज़ाफ़ा ज़रूर हुआ।
सोनिया यादव
12 Mar 2022
Women's in up elections

उत्तर प्रदेश की सत्ता में योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार वापसी कर ली है। पहली बार साल 2017 में जब उनकी सरकार बनी तो, उनके सामने खुद को 'महिला विरोधी' टैग से मुक्ति दिलाने की बड़ी चुनौती थी। उनकी तथाकथित मनुवादी सोच, स्त्री विरोधी भाषण समय-समय पर महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाते रहे हैं। हालांकि बीते पांच सालों में उनकी छवि में कोई खास बदलाव नहीं आया। लेकिन उनके खिलाफ आवाज़ उठाने वाली महिलाओं की संख्या में इज़ाफ़ा जरूर हुआ। इस बार के विधानसभा चुनावों को देखें तो सीएम योगी से लोहा लेने वाली कई महिलाओं ने उनकी पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ा। इन महिला उम्मीदवारों की पहचान हार-जीत से अलग इनका संघर्ष है।

आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ महिला उम्मीदवारों की कहानी...

ऋचा सिंह

प्रयागराज शहर की पश्चिमी सीट से समाजवादी पार्टी ने छात्रनेता रहीं ऋचा सिंह को टिकट दिया था। ऋचा योगी सरकार में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में थी। साल 2017 में भी वो इसी सीट से सिद्धार्थ नाथ सिंह को टक्कर दे रहीं थी। भले ही पहले की तरह ही इस बार भी चुनाव के नतीजे ऋचा के पक्ष में नहीं रहे लेकिन उन्होंने योगी सरकार के खिलाफ लगातार मोर्चा तो खोल ही रखा है।

फाइल फोटो। 

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रसंघ अध्यक्ष रहीं ऋचा सिंह उस समय सुर्खियों में आ गई थीं जब उन्होंने आज के मुख्यमंत्री और उस समय बीजेपी सांसद रहे योगी आदित्यनाथ को विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में भाग लेने से रोक दिया था। ऋचा अपनी अन्य साथियों के साथ विश्वविद्यालय गेट पर धरने पर बैठ गई थीं। तब से अब तक वो लगातार जन सरोकार के मुद्दों के लिए संघर्ष करती आ रही हैं। साल 2020 में विश्वविद्यालय में अफवाह फैलाने के आरोप में ऋचा और अन्य चार लोगों के खिलाफ मुकदमा तक दर्ज हुआ था। इसके बाद साल 2021 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के इलाहाबाद दौरे से ठीक पहले समाजवादी पार्टी की नेता ऋचा को हाउस अरेस्ट कर लिया गया था।

सदफ़ जाफर

सदफ़ जाफर अभिनेत्री होने के साथ-साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए आंदोलन में वो सत्ता के खिलाफ एक मुखर आवाज़ बनकर उभरी थीं। उन्हें जेल में डाला गया, वसूली के लिए सड़कों पर उनके पोस्टर लगाए गए। यहां तक की उन्हें पीटे जाने की खबरे सामने आईं। ये सदफ़ की हिम्मत ही थी कि उन्होंने दिसंबर 2019 में इस कानून के विरोध में सत्ता की आंखों में आंखें डाल काले झंडे दिखाए थे।

फाइल फोटो। 

उन्हें धमकियां मिली, यातनाएं दी गईं लेकिन इन सब के बावजूद सदफ़ का हौसला नहीं टूटा और उन्होंने बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए लखनऊ सेंट्रल की सीट चुनी। सदफ़ को भले ही इस चुनाव में खास वोट नहीं मिले लेकिन उनके संघर्ष ने महिलाओं के मन में एक उम्मीद तो जगाई ही है।

पूजा शुक्ला

लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत करने वाली पूजा शुक्ला करीब तीन साल से सक्रिय सियासत में हैं। इस बार समाजवादी पार्टी ने उन्हें लखनऊ (उत्तरी) सीट से चुनावी मैदान में उतारा था। ये युवा नेत्री भले ही बीजेपी प्रत्याशी डॉ. नीरज बोरा से हार गई हो लेकिन मतगणना के 18 राउंड तक वे डॉ. बोरा से आगे चल रही थीं। आखिर के समय में मामला जरूर पलट गया लेकिन एक कड़ी टक्कर देखने को मिली।

फाइल फोटो। 

छात्र नेता रहीं पूजा भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को काला झंडा दिखाकर चर्चा में आई थीं। पूजा ने साल 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विरोध किया था जब वो लखनऊ यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। पूजा की इसी कार्यक्रम से जुड़ी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी, जिसमें उन्हें पुलिस घसीट कर ले जा रही थी।

सीएम योगी को काला झंडा दिखाने के आरोप में पूजा को 26 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। इसके अलावा पूजा शुक्ला का नए सत्र में दाखिला भी कैंसिल कर दिया गया था। इसे लेकर पूजा शुक्ला, लखनऊ यूनिवर्सिटी में करीब दो महीने तक हड़ताल पर बैठी रहीं थी।

पूनम पांडे

'लड़की हूं लड़ सकती हूं' के नारे के साथ शाहजहांपुर सीट से कांग्रेस ने आशा वर्कर पूनम पांडे को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। इस सीट पर पूनम भले ही सफल नहीं रहीं, लेकिन उनका जज्बा देखने लायक था। एक सामान्य आशा बहू से कांग्रेस की सदर सीट से प्रत्याशी बनीं पूनम पांडे पूरे चुनाव यूपी में घूमी और लोगों से मुखातिब हुईं।

फाइल फोटो। 

पूनम पांडे ने शासन प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा था कि पुलिस ने उनके साथ मार पीट की है। पूनम के मुताबिक जब वो आशा कार्यकत्री थीं तो वह अपने संगठन की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मांग पत्र देना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उनका रास्ता रोक रखा था, तब उनकी पुलिस से भिड़ंत हुई थी। इसमें पूनम का हाथ भी टूट गया था और उन पर मुकदमा भी लिखा गया था।

उरुसा राणा

मशहूर शायर मुनव्वर राणा की बेटी उरुसा राना उन्नाव की पुरवा सीट से प्रत्याशी थीं। उरुसा ये चुनाव बीजेपी के अनिल कुमार सिंह से हार गईं लेकिन उन्होंने अपने संघर्ष से लोगों का दिल जरूर जीता है। उरुषा सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लगातार अपनी आवाज बुलंद करते हुए मुस्लिम महिलाओं के हितों की पैरवी करती नज़र आई हैं। सीएए के खिलाफ प्रोटेस्ट में अपनी बहनें फौजिया, सुमैया के साथ उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। सीएए प्रोटेस्ट के बाद ही यह तीनों लगातार मुकदमें को लेकर सुर्खियों में रहीं थी।

फाइल फोटो। 

गौरतलब है कि सीएम योगी के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी भी अपनी रैलियों में महिला हितों की रक्षा के वादे और दावे करते रहे। लेकिन हालांकि ज़मीनी हक़ीक़त की बात करें तो आज भी महिलाओं के ख़िलाफ़ सबसे ज्यादा विवादित बयान और भाषा का प्रयोग इन्हीं की पार्टी से होता है। नागरिकता संशोधन कानून इसका जीता जागता उदाहरण है, जहां महिलाओं के इस संघर्ष को बदनाम करने की खूब कोशिश हुई। तरह-तरह के फ़ेक फ़ोटो और झूठे दावों के साथ इन महिलाओं का चरित्र-हनन किया गया। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कई बड़े नेताओं द्वारा महिलाओं को अपशब्द कहे गए। लेकिन बावजूद इसके महिलाओं के हौसले बुलंद रहे हैं और आगे भी रहेंगे।

UttarPradesh
UP Assembly Elections 2022
Women in UP Elections
Women Candidate
Women in Politics
Richa Singh
Sadaf Jafar
Pooja Shukla
Poonam Pandey
Urusha Rana
Uroosa Rana

Related Stories

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

विधानसभा चुनाव 2022: पहली बार चुनावी मैदान से विधानसभा का सफ़र तय करने वाली महिलाएं

पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन

पंजाब की सियासत में महिलाएं आहिस्ता-आहिस्ता अपनी जगह बना रही हैं 


बाकी खबरें

  • Honduras President
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: मध्य अमेरिका में एक और कास्त्रो का उदय
    30 Nov 2021
    वामपंथी पार्टी की शियोमारा कास्त्रो बनेंगी होंदुरास की पहली महिला राष्ट्रपति। रविवार को हुए राष्ट्रपति पद के चुनावों में कास्त्रो ने सत्तारूढ़ नेशनल पार्टी नासरी असफुरा को पीछे छोड़ दिया है।
  •  Mid Day Meal Workers
    सरोजिनी बिष्ट
    बंधुआ हालत में मिड डे मील योजना में कार्य करने वाली महिलाएं, अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में भरी हुंकार
    30 Nov 2021
    मिड डे मील योजना में काम करने वाली रसोइयों का आक्रोश उस समय सामने आया जब वे अपनी मांगों के साथ 29 नवम्बर को लखनऊ के इको गार्डेन में "उत्तर प्रदेश मिड डे मील वर्कर्स यूनियन" के बैनर तले एक दिवसीय धरने…
  • workers
    मुकुंद झा
    निर्माण मज़दूरों की 2 -3 दिसम्बर को देशव्यापी हड़ताल,यूनियन ने कहा- करोड़ों मज़दूर होंगे शामिल
    30 Nov 2021
    भारत की निर्माण मज़दूर फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर ने कहा कि इस हड़ताल में केंद्रीय मुद्दों के साथ साथ राज्य के अपने मुद्दे भी शामिल होंगे। इस हड़ताल में हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों में…
  • UP farmers
    प्रज्ञा सिंह
    पश्चिम उत्तर प्रदेश में किसान बनाम हिंदू पहचान बन सकती है चुनावी मुद्दा
    30 Nov 2021
    किसान आंदोलन ने पश्चिमी उत्तरप्रदेश में सामाजिक पहचान बदल दी है, उत्तरप्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में यहां से 122 सीटें हैं और अगले साल की शुरुआत में यहां चुनाव होने हैं।
  • fact check
    किंजल
    UP का वीडियो दिल्ली के सरकारी स्कूल में मदरसा चलाने के दावे के साथ वायरल
    30 Nov 2021
    वीडियो को गौर से देखने पर ऑल्ट न्यूज़ ने स्कूल के बोर्ड पर ‘प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर’ लिखा हुआ पाया. प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर, गाज़ियाबाद के विजयनगर इलाके में है. यानी, ये घटना उत्तर प्रदेश की है…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License