NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी: ज़िला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी पर धोखाधड़ी और धांधली के आरोप क्यों लग रहे हैं?
उत्तर प्रदेश ज़िला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए 26 जून को सपा के कई प्रत्याशी नामांकन ही नहीं करा सके। ये एक दो जगह की बात नहीं करीब दर्जनभर जगह की हक़ीक़त है। सपा ने इसके लिए बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि बीजेपी ने उनके प्रत्याशियों का अपहरण करके और तमाम अन्य तरीकों से उन्हें नामांकन कार्यालय तक पहुंचने ही नहीं दिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
28 Jun 2021
यूपी: ज़िला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी पर धोखाधड़ी और धांधली के आरोप क्यों लग रहे हैं?
Image courtesy : newsroom post

“गोरखपुर व अन्य जगह जिस तरह भाजपा सरकार ने पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को नामांकन करने से रोका है,वो हारी हुई भाजपा का चुनाव जीतने का नया प्रशासनिक हथकंडा है। भाजपा जितने पंचायत अध्यक्ष बनायेगी,जनता विधानसभा में उन्हें उतनी सीट भी नहीं देगी।”

ये ट्वीट और आरोप समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के हैं। अखिलेश ने बीजेपी की योगी सरकार पर हल्ला बोलते हुए कहा कि भाजपा पंचायत चुनाव में धोखाधड़ी और धांधली कर रही है। वह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक आचरण अपनाए हुए हैं। जिला पंचायत सदस्यों को अध्यक्ष पद पर नामांकन तक करने नहीं दिया गया। तमाम सदस्यों को धमका कर अपने खेमे में करने का प्रयास चल रहा है।

गोरखपुर व अन्य जगह जिस तरह भाजपा सरकार ने पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को नामांकन करने से रोका है, वो हारी हुई भाजपा का चुनाव जीतने का नया प्रशासनिक हथकंडा है।

भाजपा जितने पंचायत अध्यक्ष बनायेगी, जनता विधानसभा में उन्हें उतनी सीट भी नहीं देगी। pic.twitter.com/QNWtI92xJE

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 26, 2021

बता दें कि राज्‍य निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए शनिवार, 26 जून को नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख तय की थी। इस दिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), समाजवादी पार्टी (सपा), अपना दल (एस) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) समेत निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपना पर्चा दाखिल किया। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस चुनाव में नहीं उतरने का फैसला किया है। मतदान 3 जुलाई को होगा और उसी दिन शाम को नतीजे भी आएंगे।

आख़िर मामला क्या है?

उत्तर प्रदेश जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए 26 जून को सपा के कई प्रत्याशी नामांकन ही नहीं करा सके। ये एक दो जगह की बात नहीं करीब दर्जनभर जगह की हक़ीक़त है। सपा ने इसके लिए बीजेपी पर निशाना साधा और  कहा कि बीजेपी ने उनके प्रत्याशियों का अपहरण करके और तमाम अन्य तरीकों से उन्हें नामांकन कार्यालय तक पहुंचने ही नहीं दिया।

इस संबंध में पार्टी ने 26 और 27 जून को ताबड़तोड़ ट्वीट करते हुए बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगाए। सपा ने अपने ट्विटर हैंडल से बस्ती का एक वीडियो ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में वहां उनके नेताओं का अपहरण करने का प्रयास किया गया।

बस्ती में ज़िला पंचायत अध्यक्ष नामांकन के दौरान पुलिस की उपस्थिति में भाजपा नेता की गुंडई!

भाजपा प्रत्याशी संजय चौधरी ने सपा के ज़िला पंचायत सदस्य व प्रस्तावक को खींचकर अपहरण करने का किया प्रयास, घोर निंदनीय।

दंभी सत्ता के अब दिन हैं बचे चार। pic.twitter.com/RfnFEX5iMf

— Samajwadi Party (@samajwadiparty) June 26, 2021

एक अन्य ट्वीट में सपा ने वाराणसी की एक ख़बर की क्लिपिंग शेयर की, जिसमें लिखा है कि सपा के प्रत्याशी का पर्चा खारिज कर दिया गया और भाजपा की प्रत्याशी पूनम मौर्य निर्विरोध निर्वाचित हो गई हैं। यहां नामांकन पत्र में लगे शपथ पत्र में नोटरी का रिन्यूअल नहीं हुआ था। इस आधार पर सपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज कर दिया गया।

सपा ने लगाए गंभीर आरोप

इस ख़बर के साथ सपा ने लिखा, “PMO से भेजे गए अफ़सर को दरकिनार करने के बाद हुई “रार” से नाराज़ PM को खुश करने के लिए CM ने शासन-प्रशासन का दुरुपयोग कर लोकतंत्र का गला घोट दिया। वाराणसी में सत्ता के बल पर सपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज कराया जाना निंदनीय! संज्ञान ले चुनाव आयोग। BJP के दिन है बचे चार”

PMO से भेजे गए अफ़सर को दरकिनार करने के बाद हुई "रार" से नाराज़ PM को खुश करने के लिए CM ने शासन-प्रशासन का दुरुपयोग कर लोकतंत्र का गला घोट दिया।

वाराणसी में सत्ता के बल पर सपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज कराया जाना निंदनीय!

संज्ञान ले चुनाव आयोग।

BJP के "दिन है बचे चार" pic.twitter.com/fZ4tzz87Lq

— Samajwadi Party (@samajwadiparty) June 27, 2021

राजनीति के जानकारों का मानना है कि यहां पीएमओ से भेजे गए अफसर का मतलब सपा का इशारा एके शर्मा की तरफ है। लगातार इस तरह की ख़बरें आती रही हैं कि एके शर्मा को यूपी भेजे जाने को लेकर प्रदेश बीजेपी और केंद्र के बीच तनातनी है। इसे लेकर बीते दिनों कई हलचल भी देखने को मिली थी।

वाराणसी के बाद सपा ने झांसी को लेकर भी ऐसा ही ट्वीट किया। इसमें लिखा था, “झांसी में भाजपा ने लोकतंत्र को किया हाईजैक! झांसी में सपा प्रत्याशी का नामांकन रोक दिया गया, शर्मनाक! प्रशासन और पुलिस ने सपा प्रत्याशी के पास बहुमत होने के बावजूद भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं करने दिया। संज्ञान ले कार्रवाई करे चुनाव आयोग।”

झाँसी में भाजपा ने लोकतंत्र को किया हाईजैक!

झांसी में सपा प्रत्याशी का नामांकन रोक दिया गया, शर्मनाक!

प्रशासन और पुलिस ने सपा प्रत्याशी के पास बहुमत होने के बावजूद भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं करने दिया।

संज्ञान ले कार्रवाई करे चुनाव आयोग। pic.twitter.com/F10yl31pxA

— Samajwadi Party (@samajwadiparty) June 27, 2021

इसी तरह गोरखपुर में भी नामांकन को लेकर ख़ासा बवाल देखने को मिला। यहां बीजेपी की प्रत्याशी साधना सिंह का नामांकन तो हो गया लेकिन गहमा-गहमी तब शुरू हुई, जब सपा प्रत्याशी आलोक गुप्ता नामांकन भरने नहीं आए और न ही उनका कुछ अता-पता चल रहा था। सपा नेताओं का उनसे संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। ऐसे में आनन-फानन में सपा ने जितेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाकर नामांकन कराना चाहा। सपा जिलाध्यक्ष नगीना साहनी जब जितेंद्र यादव को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे तो बीजेपी समर्थकों से कहासुनी शुरू हो गई और इस झड़प के बीच जितेंद्र यादव भी नामांकन नहीं कर सके।

अब सपा ने आरोप लगाया है कि उनके घोषित प्रत्याशी आलोक गुप्ता का अपहरण कर लिया गया, जिसकी वजह से वो नहीं आए और फिर दूसरे प्रत्याशी को भी नामांकन नहीं करने दिया गया। यहां सपा ने प्रशासन और सत्ताधारी भाजपा पर गुंडई का आरोप लगाया है।

कुल 11 जिलों में सपा प्रत्याशी नामांकन दाखिल नहीं कर सके

सिर्फ गोरखपुर ही नहीं, बलरामपुर में भी सपा प्रत्याशी किरन यादव नामांकन नहीं कर सकीं। इसके बाद जिले के सपा नेता और पूर्व मंत्री एसपी यादव ने भी बीजेपी पर वही आरोप लगाया, जो गोरखपुर में लगा है।

ग़ाज़ियाबाद में सपा ने धौलाना से विधायक असलम चौधरी की पत्नी नसीम बेगम को उम्मीदवार बनाया लेकिन नामांकन के दिन उनके प्रस्तावक जितेंद्र को डरा-धमकाकर जिला मुख्यालय तक नहीं पहुंचने दिया गया।  इसके बाद पार्टी ने रजनी खटिक को प्रस्तावक बनाया लेकिन सपा का आरोप है कि उन्हें भी नहीं पहुंचने दिया गया।

वहीं बागपत से तो अलग ही किस्सा सामने आया। यहां नामांकन से ऐन वक्त पहले राष्ट्रीय लोक दल की प्रत्याशी ममता किशोर पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गईं। उनके बीजेपी में आने के बाद बागपत से कोई आरएलडी उम्मीदवार ही नहीं बचा। लेकिन बीजेपी में जाने के चंद घंटे बाद ही ममता किशोर फिर से आरएलडी में आ गईं और फिर नामांकन दाखिल किया।

बता दें कि गोरखपुर, मुरादाबाद, झांसी, आगरा, गौतमबुद्धनगर, मऊ, बलरामपुर, श्रावस्ती, भदोही, गोंडा और ललितपुर सहित कुल 11 जिलों में सपा प्रत्याशी नामांकन दाखिल नहीं कर सके। इसके बाद  कुल 17 जिलों में भाजपा के प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया।

चुनाव की निष्पक्षता एवं पवित्रता नष्ट!

अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा ने जिस तरह से जिलों में पंचायत अध्यक्षों के नामांकन अलोकतांत्रिक तरीके से रोके हैं उससे इन चुनाव की निष्पक्षता एवं पवित्रता नष्ट हुई है। यह लोकतंत्र की हत्या की साजिश है। हालांकि सपा के इतने आरोपों के बाद भी न तो बीजेपी की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई और नाही चुनाव आयोग न को संज्ञान लिया।

हालांकि इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने खुद ही जहां प्रत्याशी नामांकन नहीं कर सके, वहां के जिलाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया। इस संबंध में 26 तारीख को ही पार्टी कार्यालय की ओर से ज्ञापन जारी कर दिया गया।

image

पंचायत चुनावों में समाजवादी पार्टी से पीछे रह गई बीजेपी

गौरतलब है कि हाल ही में प्रदेश में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणाम को एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। राज्य के सभी 75 ज़िलों के परिणामों के आकलन से पता चलता है कि ज़िला पंचायत सदस्यों के चुनाव में समाजवादी पार्टी को सबसे ज़्यादा सीटें मिली तो वहीं सत्ताधारी दल बीजेपी दूसरे नंबर पर ही रह गई।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान कुल 3,050 जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे। इनमें से समाजवादी पार्टी के 747, भारतीय जनता पार्टी के 666, बहुजन समाज पार्टी के 322, कांग्रेस के 77, आम आदमी पार्टी के 64 और 1,174 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीते थे।

रिपोर्ट के अनुसार, ज़िला पंचायत अध्यक्ष के लिए 75 में से अब 18 का निर्विरोध निर्वाचन (17 बीजेपी तथा एक समाजवादी पार्टी) तय होने के बाद 58 जिलों में चुनाव के बाद जीत-हार का फैसला होगा, लेकिन बसपा के पहले ही किनारे होने के बाद इतना तो तय है कि मुख्य लड़ाई बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच ही है।

वैसे जैसे-जैसे 2022 का विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है यूपी की राजनीति और पार्टियों की नीति और दिलचस्प होती जा रही है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तो पहले से ही जारी है अब धोखाधड़ी और धांधली के आरोप भी सामने आने लगे हैं। चुनावी नतीजा जो भी हो इतना तो तय है कि कभी समाजवादी पार्टी को भ्रष्टाचार और गुंडई का आरोप लगाकर सत्ता से बाहर करने वाली बीजेपी पर अब खुद सत्ता में चार साल बीताने के बाद उन्हीं आरोपों को झेलती नज़र आ रही है।

UttarPradesh
District panchayat elections
BSP
MAYAWATI
SP
AKHILESH YADAV
BJP
Yogi Adityanath
Congress

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • नाइश हसन
    मेरे मुसलमान होने की पीड़ा...!
    18 Apr 2022
    जब तक आप कोई घाव न दिखा पाएं तब तक आप की पीड़ा को बहुत कम आंकता है ये समाज, लेकिन कुछ तकलीफ़ों में हम आप कोई घाव नहीं दिखा सकते फिर भी भीतर की दुनिया के हज़ार टुकड़े हो चुके होते हैं।
  • लाल बहादुर सिंह
    किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़
    18 Apr 2022
    किसानों पर कारपोरेटपरस्त  'सुधारों ' के अगले डोज़ की तलवार लटक रही है। जाहिर है, हाल ही में हुए UP व अन्य विधानसभा चुनावों की तरह आने वाले चुनाव भी भाजपा अगर जीती तो कृषि के कारपोरेटीकरण को रोकना…
  • सुबोध वर्मा
    भारत की राष्ट्रीय संपत्तियों का अधिग्रहण कौन कर रहा है?
    18 Apr 2022
    कुछ वैश्विक पेंशन फंड़, जिनका मक़सद जल्द और स्थिर लाभ कमाना है,  ने कथित तौर पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति को लीज़ पर ले लिया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,183 नए मामले, 214 मरीज़ों की मौत हुई
    18 Apr 2022
    देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। दिल्ली में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 517 नए मामले सामने आए है |
  • भाषा
    दिल्ली में सीएनजी में सब्सिडी की मांग को लेकर ऑटो, टैक्सी संगठनों की हड़ताल
    18 Apr 2022
    दिल्ली में ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के विभिन्न संगठन ईंधन की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर सीएनजी में सब्सिडी और भाढ़े की दरों में बदलाव की मांग को लेकर सोमवार को हड़ताल पर हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License