NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
यूपी: एसआरएन अस्पताल का मामला शासन-प्रशासन पर कई सवाल क्यों खड़े करता है?
इस मामले में अस्पताल और पुलिस प्रशासन दोनों सवालों के घेरे में हैं। पुलिस पर आरोप लग रहा है कि पहले उसने खुद ही एफआईआर दर्ज ना कराने का दबाव बनाया और फिर खुद ही यह भी कहा कि परिवार की तरफ से एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।
सोनिया यादव
05 Jun 2021
यूपी: एसआरएन अस्पताल का मामला शासन-प्रशासन पर कई सवाल क्यों खड़े करता है?
Image courtesy : LatestLy

एक अस्पताल जिसके चार डॉक्टर्स पर ऑपरेशन के दौरान बलात्कार का आरोप लगता है। पुलिस उस मामले में शुरुआती एफआईआर तक दर्ज नहीं करती। और तो और बिना जांच के ही अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे देती है।

ये हैरान कर देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल का है। यहां इलाज के लिए भर्ती 21 साल की एक लड़की के परिजनों का आरोप है कि चार डॉक्टरों ने ऑपरेशन के नाम पर लड़की का रेप किया। शुरुआत में अस्पताल और पुलिस प्रशासन की तरफ से इन आरोपों को नकार दिया गया। हालांकि इस मामले के सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद आनन फानन में जांच कमेटी गठन की गई। बाद में लड़की के आरोपों को झूठा बताया गया।

सवाल उठा कि आखिर युवती जब बोल पाने की हालत में भी नहीं थी तो ऐसे में बेवजह इतना संगीन आरोप क्यों लगाएगी। और फिर अगर कुछ हुआ ही नहीं था तो पुलिस ने युवती द्वारा लिखित पर्ची क्यों फाड़ दी। जाहिर है कि उगंली अस्पताल प्रशासन के साथ साथ पुलिस प्रशासन पर भी उठना लाजमी है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता मिर्जापुर जिले की रहने वाली है। 29 मई को उसे स्वरूपरानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसका 31 मई को आंत का ऑपरेशन होना था, जिसके लिए डॉक्टर उसे ओटी यानी ऑपरेशन थिएटर में ले गए थे।

पीड़िता के भाई ने मीडिया को बताया कि रात एक बजे वह ऑपरेशन के बाद जब लौटी तो अचेत लग रही थी। वह कुछ कहना चाह रही थी। उसे पेन दिया तो उसने कागज पर लिखा कि कुछ लोगों ने उसके साथ गलत काम किया है। इसके बाद उसने प्रयागराज के एसएसपी को कॉल करके सूचना दी। थोड़ी देर बाद पुलिस आ गई। लेकिन पुलिस ने पूछताछ कर पीड़ित लड़की द्वारा लिखी पर्ची फाड़ दी। इसके बाद युवक ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती वायरल की।

गैंगरेप का आरोप लगाने वाले युवक ने अपनी बहन का वीडियो और हाथ से लिखी हुई पर्ची को भी सोशल मीडिया पर वायरल किया है। जिस पर्ची को उसकी बहन द्वारा लिखा बताया जा रहा है, उसमें लिखा है कि झूठ बोला सब। इलाज नहीं किया। गंदा काम हुआ है मेरे साथ।

पीड़िता का परिवार उन्हें डराने-धमकाने का आरोप भी लगा रहा है। पीड़िता अभी भी अस्पताल में भर्ती है और पुलिस ने अभी तक मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। इस घटना का खुलासा उस वक्त हुआ जब पीड़िता के भाई ने सोशल मीडिया पर इस बात को बताया। शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने पीड़िता के भाई संपर्क किया और मामले की जांच शुरू कर दी।

अस्पताल प्रशासन का क्या कहना है?

इस मामले में अस्पताल के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह की सफाई सामने आई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन थिएटर में आठ सदस्य थे, जिसमें पांच महिला स्टाफ भी शामिल थीं। वहां ट्रांसपैरेंट शीशा लगा हुआ है। ऑपरेशन थिएटर के बाहर उसके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। फिलहाल इस मामले में प्राचार्य ने वरिष्ठ चिकित्सकों की पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है।

वहीं, डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन से पहले शरीर के अन्य हिस्सों की सफाई की गई। मरीज के पेशाब की नली दो बार लगाई गई। इस वजह से प्रक्रिया को युवती गलत समझ बैठी। दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान चार महिला डॉक्टर, एक नर्स और तीन पुरुष डॉक्टर मौजूद रहे।

पुलिस का क्या कहना है?

इस मामले में डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि रात में सूचना मिलने पर सीओ कोतवाली सतेंद्र तिवारी मौके पर गए थे। पुलिस ने पीड़िता की मां और अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ की। किसी ने ऐसा आरोप नहीं लगाया है। युवती के होश में आने पर पूछताछ की जाएगी। इस प्रकरण की जांच के लिए डॉक्टरों ने टीम गठित की गई है।

वहीं इस मामले को लाइम लाइट में लाने वाले  कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई एनएसयूआई से जुड़े अक्षय यादव ने मीडिया को बताया कि इस मामले में अस्पताल प्रशासन और पुलिस आपस में मिले हुए हैं और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

अस्पताल प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत!

अक्षय यादव ने बताया कि हंगामा होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन थियेटर में पीड़िता के ऑपरेशन के दौरान दो महिला डॉक्टरों की मौजदूगी की बात कही है। यह पूरी तरह से झूठ है। अक्षय यादव ने यह भी बताया कि पुलिस ने बिना किसी जांच के ही इस अस्पताल के बयान के आधार पर ट्वीट कर दिया है, जिसमें अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी गई है।

अक्षय यादव के मुताबिक पीड़िता के परिवार पर एफआईआर दर्ज न करने का दबाव बनाया गया। जबकि परिवार एफआईआर दर्ज कराने के लिए तैयार था। इसके लिए पीड़िता का लिखित बयान भी दर्ज करा लिया था। यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले खुद ही एफआईआर दर्ज न कराने का दबाव बनाया और फिर खुद ही यह भी कहा कि परिवार की तरफ से एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। जबकि पीड़िता के भाई ने तीन जून को ही इस मामले में शिकायती पत्र कोतवाली थाने को दे दिया था।

महिला सुरक्षा के मामले पर लगातार योगी सरकार विफल

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा के मामले पर लगातार योगी सरकार विफल ही नज़र आती है। ऊपर से बीते कुछ समय में खस्ता कानून व्यवस्था और शासन-प्रशासन की पीड़ित को प्रताड़ित करने की कोशिश, बलात्कार और हत्या जैसे संवेदशील मामलों में एक अलग ही ट्रैंड सेट करता दिखाई पड़ रहा है।

एनसीआरबी के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले में अभी भी पहला स्थान उत्तर प्रदेश का ही है। साल 2019 में देश भर में महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले कुल अपराधों में क़रीब 15 फ़ीसद अपराध यूपी में हुए हैं। हालांकि महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कम रहा है। साल 2019 में इस मामले में देश का कुल औसत 62.4 फ़ीसद दर्ज किया गया जबकि उत्‍तर प्रदेश में यह 55.4 फ़ीसद ही रहा।

UttarPradesh
SRN Hospital
SRN Hospital case
rape case
gang rape
crimes against women
violence against women
women safety
UP police

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License