NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
पर्यावरण
विधानसभा चुनाव
भारत
यूपी चुनावः सरकार की अनदेखी से राज्य में होता रहा अवैध बालू खनन 
राज्य में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों, एनजीटी की नियमावली और खनिज अधिनियम के निर्देशों की पूरी तरह अनदेखी की जाती रही है। 
एम.ओबैद
23 Feb 2022
यूपी चुनावः सरकार की अनदेखी से राज्य में होता रहा अवैध बालू खनन 
tv9 भारतवर्ष

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में अवैध बालू खनन को रोकने में विफल साबित हुई है। राज्य में आज भी इसका अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है और एनजीटी की गाइडलाइन्स का मजाक उड़ाया जा रहा है। बालू माफियाओं से नेताओं और अधिकारियों के गठजोड़ की खबरें कई बार सामने आ चुकी हैं, लेकिन शासन और प्रशासन इस पर पूरी तरह से लगाम लगाने में नाकाम रही है। 

उत्तर प्रदेश के खनन माफियाओं ने प्रदेश से लगे देश के छह राज्यों की सीमा और नेपाल से लगे सीमाक्षेत्र पर अवैध खनन का कारोबार फैला रखा है। वर्ष 2016 के जुलाई महीने में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश भर में अवैध खनन का कारोबार बंद करने और इसमें सक्रिय माफियाओं को कानूनी तौर पर सामने लाने के लिए सीबीआई जांच कराने का आदेश भी दिया था। 

राज्य में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों, एनजीटी की नियमावली और खनिज अधिनियम के निर्देशों की पूरी तरह अनदेखी की जाती रही है। 

प्रदेश के बांदा जिले के सभी घाटों पर अवैध खनन का काम होता रहा है। वहीं महोबा की बात करें तो यहां के पनवाड़ी और महोबकंठ थाना क्षेत्र की नदियों के आसपास बिजरारी, नोगाव फदना, इटौरा, पिपरी, महुआ, नकरा घाटों पर अवैध खनन बिना खौफ के चलता रहा है। प्रयागराज, फैजाबाद, गौतमबुद्ध नगर समेत कई अन्य जिलों में भी इसकी स्थिति कमोबेश यही है। प्रयागराज में बलुआघाट अवैध खनन सबसे बड़ा अड्‌डा माना जाता है। 

हाल में मीडिया में आई खबरों की मानें तो पानी के भीषण संकट से जूझने वाले प्रदेश के बुंदेलखंड के बांदा की नदियों से अवैध तरीके से बालू खनन का काम लगातार जारी है। बांदा में खपटिहा, पलानी, नरैनी, गिरवा, अक्षरा, कनवारा में अदालत के आदेशों, एनजीटी की गाइडलाइंस और खनिज अधिनियम के निर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। बालू कारोबारी नदियों की पानी को कई स्थानों पर रोक कर मशीनों से बालू खनन कर रहे हैं और गहरे गड्ढे बना दे रहे हैं। एनजीटी की गाइडलाइंस के मुताबिक तीन फिट से ज्यादा गहरा गड्ढा नहीं किया जा सकता है लेकिन 50-50 फीट गहरा गड्ढा कर बालू निकाला जा रहा है। इतना ही नहीं इन नदियों में बिना इजाजत के कच्चे पुल का भी निर्माण किया गया है। साथ ही सूरज डूबने के बाद नियमों की अनदेखी कर खनन का काम जारी रहता है। 

बीते साल दिसंबर महीने में ही प्रयागराज इलाके में सरायअकिल कोतवाली के यमुना नदी के नंदा का पूरवा घाट से बड़े पैमाने में बालू के अवैध खनन का मामला सामने आया था। इस इलाके में भी अवैध खनन में माफिया सक्रिय रहे हैं। ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस की शह पर ही अवैध खनन का खेल चल रहा था। चायल तहसील के नंदा का पूरा और केवट का पूरा यमुना घाट पर अक्सर अवैध खनन चलता रहता है। दोनों घाटों पर ट्रैक्टर और जेसीबी लगाकर बालू की अवैध निकासी होती रही है। ग्रामीणों का आरोप था कि माफिया पुलिस के इशारे पर बालू का अवैध खनन करते रहे हैं। ग्रामीण इसकी शिकायत अधिकारियों से करते रहे हैं लेकिन प्रशासन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

पिछले साल ही अगस्त महीने में राज्य के बलरामपुर इलाके के पहाड़ी नालों में बालू के अवैध खनन का मामला सामने आया था। ढोबहा, नकटी, खबरी व सीरिया जैसे नालों से दिन रात बालू की ढुलाई होती रही। खनन करने वाले बालू खनन के पट्टे की अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी नाले से खनन का काम तेजी से करते रहे हैं। पहाड़ी नालों से भारी मात्रा में बालू का अवैध खनन प्रशासन के नाक के नीचे होता रहा।

इस तरह राज्य भर में अवैध बालू खनन का काम वर्षों से होता रहा है। मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने इसके अवैध खनन को लेकर सख्ती करने की बात कही लेकिन लगाम नहीं लग सका और ये अवैध कोराबार चलता रहा जो अभी तक जारी है। 

विरोध करने पर धमकी

पिछले साल जून महीने में पत्रकार आशीष सागर द्वारा प्रदेश के बांदा ज़िले में केन नदी में अवैध बालू खनन की रिपोर्ट करने पर उनके माता-पिता को धमकी दी गई थी। जिले के पैलानी क्षेत्र की अमलोर मौरम खदान से नियमों का घोर उल्लंघन कर बालू निकाले जाने के मामले को उठाया गया था। इस खदान के संचालक गाजियाबाद निवासी विपुल त्यागी हैं और इसके हिस्सेदार जयराम सिंह नाम के एक बसपा नेता थें। सागर ने मीडिया से हुई बातचीत में कहा था कि बीते 14 जून को सिंह अपने पांच साथियों के साथ उनके घर पर पहुंचे थे और उनकी मां से कहा था कि ‘अपने बेटे को समझा लेना। मेरे खिलाफ इस तरह की खबरें न लिखे।’

माफिया से अधिकारियों की सांठगांठ

बीते साल सितंबर महीने में प्रदेश के बांदा जनपद में तैनात एएसपी महेंद्र प्रताप सिंह को बालू माफिया से गठजोड़ को लेकर निलंबित कर दिया गया था। इन पर थानों के सामने से गुजरते रहे बालू भरे ओवरलोड ट्रक व डंपरों मौन स्वीकृति देते रहने और इस पर उचित कार्रवाई न करने का आरोप था।

महेंद्र प्रताप सिंह से पहले अवैध खनन मामले में एक खनिज अधिकारी को निलंबित किया जा चुका है।

पिछले वर्ष खनन माफिया से सांठगांठ में महोबा के एक थानेदार को निलंबित किया जा चुका है। 

एनजीटी का आदेश

एनजीटी ने वर्ष 2013 के पहले अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में देश की किसी भी नदी में बिना किसी लाइसेंस या पर्यावरण मंजूरी के बालू खनन करने पर रोक लगा दी थी। अपने आदेश में उसने देश के सभी राज्यों के खनन अधिकारियों व पुलिस से इसे सख्ती से लागू करने को भी कहा था। इसके आदेश के अनुसार देश भर में किसी भी नदी से बालू खनन करने से पहले केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय या संबंधित राज्य के पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से इजाजत लेना जरूरी है। अवैध बालू खनन को लेकर इसी तरह का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले दिया था।

ये भी पढ़ें: बिहार : बालू खनन का विरोध कर रहे ग्रामीणों के साथ पुलिस ने की बर्बरता, 13 साल की नाबालिग को भी भेजा जेल 

UP
Assembly Election 2022
Sand Illegal Mining
Banda
Bundelkhand
Water crisis
River

Related Stories

विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया

यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल

जनादेश-2022: यूपी समेत चार राज्यों में बीजेपी की वापसी और पंजाब में आप की जीत के मायने

गोवाः बहुमत के आंकड़े से पिछड़ी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी

यूपी की 28 सीटों पर जीत हार के फासले के बीच केवल हजार वोटों का अंतर

Election Results : जनादेश—2022, 5 राज्यों की जंग : किसकी सरकार

आज़मगढ़: फ़र्ज़ी एनकाउंटर, फ़र्ज़ी आतंकी मामलों को चुनावी मुद्दा बनाया राजीव यादव ने

चुनाव में, याद उन वीरों की जिन्होंने मणिपुर को बनाया सेकुलर

मणिपुरः जो पार्टी केंद्र में, वही यहां चलेगी का ख़तरनाक BJP का Narrative


बाकी खबरें

  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: स्वास्थ्य विभाग का नया ‘संकल्प पत्र, सरकारी ब्लड बैंकों से नहीं मिलेगा निःशुल्क ख़ून, स्वास्थ्य जन संगठनों ने किया विरोध
    06 Dec 2021
    राजधानी रांची स्थित रिम्स और सदर अस्पताल में लोगों को पैसों से ब्लड मिल रहा है। बीपीएल व आयुष्मान कार्ड धारकों को छोड़ किसी भी गरीब-लाचार अथवा धनवान व्यक्ति को समान रूप से प्रदेश के किसी भी सरकारी…
  • Babasaheb
    बादल सरोज
    65 साल बाद भी जीवंत और प्रासंगिक बाबासाहब
    06 Dec 2021
    जाति के बारे में उनका दृष्टिकोण सर्वथा वैज्ञानिक था। उन्होंने जाति व्यवस्था का तब तक का सबसे उन्नत विश्लेषण किया था। वे अपने जमाने के बड़े नेताओं में अकेले थे, जिसने जाति व्यवस्था के ध्वंस यानि…
  • vinod dua
    शंभूनाथ शुक्ल
    मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!
    06 Dec 2021
    हम लोगों ने जब पत्रकारिता शुरू की थी, तब इमरजेंसी के दिन थे। लोगों में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रति ग़ुस्सा था और लोग आंदोलन कर रहे थे। किंतु धार्मिक आधार पर बँटवारे की कोई बात नहीं थी। कोई…
  • india and bangladesh
    एम. के. भद्रकुमार
    भारत-बांग्लादेश संबंध का मौजूदा दौर
    06 Dec 2021
    नई दिल्ली के मौन प्रोत्साहन से प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की घरेलू राजनीति को उनके सत्तावादी शासन के मामले में निर्णायक रूप से फ़ायदा हुआ है।
  • Ambedkar
    राज वाल्मीकि
    वर्तमान संदर्भ में डॉ. अंबेडकर की प्रासंगिकता
    06 Dec 2021
    बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की आज पुण्यतिथि है। 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में उनका निधन हुआ। उन्होंने हमें सफलता के तीन मंत्र दिए थे – ‘शिक्षित हो,  संगठित हो, संघर्ष करो।’ हाल ही में हमें किसान आंदोलन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License