NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
विधानसभा चुनाव
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।"
एम.ओबैद
22 Feb 2022
uttar pradesh
Image courtesy : NDTV

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है। तीन चरणों का चुनावों समाप्त हो चुका है और चौथे चरण का चुनाव 23 फरवरी को होना है। चौथे चरण के लिए प्रचार समाप्त हो गया। सातों चरण के चुनावों समाप्त होने के बाद 10 मार्च को नतीजों की घोषणा हो जाएगी और कुछ दिनों के बाद नई सरकार का गठन हो जाएगा। लेकिन लोगों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में से एक चिकित्सा व्यवस्था की बात करें तो प्रदेश की स्थिति बीते पांच वर्षों में बेहद खराब रही है। बीते साल नीति आयोग की रिपोर्ट में भी ये बात सामने आ चुकी वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि 'यह आम दिनों में भी जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।'

एक तरफ जहां प्रदेश में इलाज के अभाव में लोगों की मौत का सिलसिला जारी रहा वहीं दूसरी तरफ सुविधाओं के अभाव को लेकर भी रिपोर्टें आती रही हैं। 

इस महीने की शुरुआत में फिरोजाबाद में मुख्य आरक्षी के पद पर तैनात प्रेम सिंह की मौत इलाज के अभाव में अस्पताल की लापरवाही के चलते हो गई थी। प्रेम सिंह के भाई लाल सिंह का आरोप लगाते हुए कहा था कि ढाई घंटे तक इलाज में लापरवाही बरती गई। इस दौरान लगातार खून बहता रहा जिससे उन्होंने दम तोड़ दिया।

नवंबर 2021 में मऊ जिला अस्पताल की लापरवाही के कारण एक 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में इलाज नहीं मिला था। इलाज के अभाव में उनके मरीज की मौत हो गई थी।

वर्ष 2021 के अगस्त महीने में ही फिरोजाबाद में आधिकारिक तौर पर 36 बच्चों और 5 व्यस्क लोगों की जान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में वायरल और डेंगू बुखार के कारण चली गई थी।

पिछले साल अक्टूबर महीने में प्रदेश के आगरा जिले में डेंगू का कहर बरपा रहा इस दौरान इलाज के अभाव में करीब 120 से अधिक लोगों की जान चली गयी थी। इस बुखार से मरने वालों में बच्चों की सबसे अधिक संख्या थी।

बीते वर्ष उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर के एक गांव के सीएचसी के बाहर ही एक युवक की इलाज के अभाव में मौत हो गई थी। परिजनों का कहना था कि राजू की तबीयत अचानक खराब होने के बाद उसे आनन फानन में गांव के सीएचसी लेकर आए। लेकिन डॉक्टर और स्टाफ नदारद थे जिससे उसकी इलाज नहीं हो सकी और मौत हो गई थी।

वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ द्वारा मुख्यमंत्री का पद संभालने के कुछ महीने बाद ही अगस्त महीने में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी जहां ऑक्सीजन के अभाव में करीब 80 बच्चों की मौत हो गई थी। इस मामले में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कफील खान पर कार्रवाई की गई थी। इस मामले में उन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अगस्त 2017 में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी के कारण 80 बच्चों की हुई मौत के मामले में उन्हें बलि का बकरा बनाया गया।

उत्तर प्रदेश में इलाज के अभाव में मरीजों की हुई मौत की उपरोक्त घटनाएं महज बानगी हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में इलाज के अभाव में हुई मौतों का आंकड़ा निकाला जाए तो इसकी फिहरिस्त काफी लंबी हो जाएगी। समय-समय पर यूपी की चिकित्सा व्यवस्था की पोल खुलती रही है। चाहे वह कोरोना काल हो या सामान्य दिन। कोरोना काल में तो स्थिति विस्फोटक हो गई थी। शव नदियों में बहाए गए और नदियों के किनारे दफन किए गए। इस दौरान प्रदेश की चरमराई चिकित्सा व्यवस्था सुर्खियों में रही।

उपरोक्त मामला यह दिखाने के लिए काफी है कि मुख्यमंत्री के दावे और वादे के बावजूद प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। इसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी पिछले साल कोरोना काल में काफी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था आम दिनों के लिए भी पर्याप्त नहीं है। इतनी ही नहीं पिछले साल दिसंबर महीने में आए नीति आयोग की रिपोर्ट ने भी राज्य के इस विभाग चरमाराई स्थिति को भी उजागर कर दिया था।

'आम दिनों के लिए भी पर्याप्त नहीं सुविधाएं'

पिछले साल कोरोना काल में उत्तर प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था की उस समय पोल खुल गई थी जब लोगों को इलाज के लिए अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही थी और इलाज के अभाव में लोगों की मौत हो रही थी। इस दौरान स्वत: प्रेरित जनहित याचिका की सुनवाई करते हुएइलाहाबाद हाईकोर्ट ने फटकार लगाई थी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाजुक और कमजोर है। इतना ही नहीं पीठ ने यह भी कहा था कि "यह आम दिनों में भी जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। महामारी के दौर में इसका चरमरा जाना स्वाभाविक है। प्रदेश के 20 बेड वाले सभी नर्सिंग होम मेें कम से कम 40 प्रतिशत बेड आईसीयू हों और इसमें 25 प्रतिशत वेंटिलेटर हों। बाकी 25 प्रतिशत हाईफ्लो नसल बाइपाइप का इंतजाम होना चाहिए। 30 बेड वाले नर्सिंग होम में अनिवार्य रूप से ऑक्सीजन प्लांट होना चाहिए।”

नीति आयोग की रिपोर्ट में 19वें स्थान पर यूपी

बीते दिसंबर में नीति आयोग की रिपोर्ट में दिखाया गया कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य मानकों में राज्यों में सबसे निचले स्थान पर था। 'द हेल्दी स्टेट्स, प्रोग्रेसिव इंडिया' नाम के शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट को नीति आयोग, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तथा वर्ल्ड बैंक द्वारा संकलित किया गया था जिसमें 2019-2020 के बीच 19 बड़े राज्यों, 8 छोटे राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों का आंकड़ा इकट्ठा किया गया था। 19 बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश 19वें स्थान पर था।

पहले से ज़्यादा फिसड्डी साबित हुआ

जून 2019 में आए नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य और चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने में पहले से ज्यादा फिसड्डी साबित हुआ था। नीति आयोग की हेल्थ रिपोर्ट में 21 बड़े राज्यों की सूची में यूपी को 21वां स्थान मिला था। पिछली बार भी यूपी सबसे अंतिम पायदान पर था। राज्य की खराब स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि वर्ष 2018 में यूपी का कंपोजिट इंडेक्स स्कोर 33.69 था, जो वर्ष 2019 में 5.28 अंक घटकर 28.61 रह गया था।

Uttar pradesh
UP Health Care Facilities
UP Health Sector
Yogi Adityanath
yogi government
COVID-19
UP Assembly Elections 2022

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • सबरंग इंडिया
    उत्तर प्रदेश: पेपर लीक की रिपोर्ट करने वाले पत्रकार गिरफ्तार
    02 Apr 2022
    अमर उजाला के बलिया संस्करण ने जिस दिन दोपहर 2 बजे से परीक्षा होनी थी उस दिन सुबह लीक पेपर प्रकाशित किया था।
  • इलियट नेगिन
    समय है कि चार्ल्स कोच अपने जलवायु दुष्प्रचार अभियान के बारे में साक्ष्य प्रस्तुत करें
    02 Apr 2022
    दो दशकों से भी अधिक समय से कोच नियंत्रित फ़ाउंडेशनों ने जलवायु परिवर्तन पर सरकारी कार्यवाई को विफल बनाने के लिए 16 करोड़ डॉलर से भी अधिक की रकम ख़र्च की है।
  • DU
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूजीसी का फ़रमान, हमें मंज़ूर नहीं, बोले DU के छात्र, शिक्षक
    01 Apr 2022
    नई शिक्षा नीति के तहत UGC ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों को कई कदम लागू करने के लिए कहा है. इनमें चार साल का स्नातक कोर्स, एक प्रवेश परीक्षा और संस्थान चलाने के लिए क़र्ज़ लेना शामिल है. इन नीतियों का…
  • रवि शंकर दुबे
    इस साल यूपी को ज़्यादा बिजली की ज़रूरत
    01 Apr 2022
    उत्तर प्रदेश की गर्मी ने जहां बिजली की खपत में इज़ाफ़ा कर दिया है तो दूसरी ओर बिजली कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ आंदोलन छेड़े हुए हैं। देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी के बीच कैसे समन्वय होता है।
  • सोनिया यादव
    राजस्थान: महिला डॉक्टर की आत्महत्या के पीछे पुलिस-प्रशासन और बीजेपी नेताओं की मिलीभगत!
    01 Apr 2022
    डॉक्टर अर्चना शर्मा आत्महत्या मामले में उनके पति डॉक्टर सुनीत उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि कुछ बीजेपी नेताओं के दबाव में पुलिस ने उनकी पत्नी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया, जिसके चलते उनकी पत्नी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License