NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी: बाक़ी दो चरणों के पंचायत चुनावों को स्थगित कराना चाहते हैं राज्य कर्मचारी
“प्रचण्ड महामारी के बीच में हमारी जिंदगियों को दांव पर मत लगाओ”, यह कहना है राज्य कर्मचारी संघ का। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो चुनावों का बहिष्कार किया जायेगा।
अब्दुल अलीम जाफ़री
21 Apr 2021
 यूपी: बाक़ी दो चरणों के पंचायत चुनावों को स्थगित कराना चाहते हैं राज्य कर्मचारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कोरोनावायरस पॉजिटिव मामलों की संख्या में जैसे-जैसे लगातार इजाफा होता जा रहा है, 26 अप्रैल को होने वाले पंचायत चुनावों के तीसरे चरण को स्थगित करने के लिए सामूहिक स्वर लगातार तेज होते जा रहे हैं। राज्य सरकार ने पहले से ही राज्य भर में विभिन्न स्तरों की कड़ाई के साथ सप्ताहांत लॉकडाउन को लागू कर दिया है।

अधिकांश विपक्षी दल भी चुनावों को स्थगित किये जाने के पक्ष में हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है कि ऐसे समय में चुनावों को आयोजित करना, लोगों पर एक अतिरिक्त बोझ साबित होगा।

राज्य सरकार के कर्मचारी संघों ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि पंचायत चुनावों के संचालन के लिए संसाधनों को तैनात करने के बजाय उन्हें कोविड-19 से लड़ने पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके साथ ही उनके द्वारा शेष चरणों को स्थगित करने का आह्वान किया गया है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि उन्होंने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये हालात के बारे में कर्मचारियों के साथ चर्चा की, जिन्हें पंचायत चुनावों के लिए नियुक्त किया गया है। बैठक के बाद यह तय पाया गया कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री और राज्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा जाए, और उनसे अनुरोध किया जाए कि इस प्रचण्ड महामारी के बीच में पंचायत चुनाव न कराये जाएं।

तिवारी ने न्यूज़क्लिक से अपनी बातचीत में कहा कि “लाखों की संख्या में लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हैं और सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है। अगर किसी इंसान की कोरोना से मौत हो जाती है, तो उसके परिवार के सदस्य और रिश्तेदार उसके अंतिम संस्कार तक में शामिल होने से वंचित रह जाते हैं। कई परिवार शोक-संतप्त हैं, क्योंकि वे अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे समय में पंचायत चुनाव कराने और हमारी जिन्दगी को दांव पर लगाकर, राज्य सरकार अपने गैर-जिम्मेदाराना रुख एवं असंवेदनशीलता का परिचय दे रही है।”

उनका कहना था कि चुनावों के लिए जिन कर्मचारियों को तैनात किया गया है, वे यात्रा के दौरान संक्रमण से ग्रस्त होने की आशंका से डरे हुए हैं।

तिवारी ने आगे कहा कि जिन कर्मचारियों का टीकाकरण हो चुका है, उन्हें चुनावी ड्यूटी के लिए नियुक्त किया जाना चाहिए या उन सभी को पहले से ही टीके की दो खुराक दी जानी चाहिए। उन्हें पर्याप्त सुरक्षा किट भी मुहैया करानी चाहिए, जिसमें पीपीई किट, दस्ताने, मास्क इत्यादि शामिल हैं। यूनियन ने कहा है कि यदि सरकार ऐसी गंभीर परिस्थितियों में भी इन मांगों पर विचार नहीं करती है तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरकर चुनाव का बहिष्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

एक अन्य राज्य कर्मचारी शिव बरन यादव ने बताया कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को चुनाव संबंधी कार्यों में लगाया गया है। ऐसी परिस्थिति में इस बात की पूरी संभावना है कि कोरोनावायरस और आगे फैल जाये। इसलिए वे राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) से विनती करते हैं कि जब तक सभी का टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक के लिए पंचायत चुनावों को स्थगित कर दिया जाये।

यादव ने न्यूज़क्लिक को बताया “संक्रमण की वजह से पंचायत चुनावों के कार्य में व्यस्त कर्मियों की असायमिक एवं दुखद मौतों की दैनिक रिपोर्टों ने समूचे कर्मचारी समुदाय को अंदर से हिला कर रख दिया है। हम अपने सहयोगियों को अलविदा कह पाने तक की स्थिति में नहीं हैं। राज्य चुनाव आयोग को इन चुनावों को जुलाई-अगस्त तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए।”

राज्य कर्मचारी संघ ने कहा है कि यदि फिलहाल चुनाव को रोकना संभव या व्यवहारिक नहीं लगता, तो बाकी के बचे दो चरण के चुनाव में शामिल कर्मियों को कम से कम कुछ सुविधायें तो निश्चित ही प्रदान की जानी चाहिए।

यूनियन ने कहा है “सरकार के समक्ष एक मांग रखी गई है कि चुनाव ड्यूटी में शामिल सभी कर्मचारियों को इलेक्शन ड्यूटी स्थल पर टीका लगाया जाए, और ड्यूटी के दौरान यदि कोई भी कर्मी संक्रमित होता है तो उसे मुफ्त उचित चिकित्सा उपचार का लाभ मुहैया कराया जाना चाहिए।”

2021 के उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को चार चरणों में आयोजित किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 15 अप्रैल से हो चुकी है। नतीजे 2 मई को घोषित किये जायेंगे। पहले चरण का मतदान 15 अप्रैल को, दूसरा चरण 19 अप्रैल को, तीसरा 26 अप्रैल को और चौथे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होने जा रहा है, जबकि वोटों की गिनती का काम पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों के साथ 2 मई को किया जाना है।

इस बीच राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 20 अप्रैल तक उत्तर प्रदेश का कुल केस लोड 8,79,831 था, और मृतक संख्या 10,000 तक पहुँच चुकी थी।

कोविड नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं

राज्य की राजधानी लखनऊ और राज्य के अन्य हिस्सों में हर गुजरते दिन के साथ कोविड-19 के मामलों की संख्या में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। मंगलवार को लखनऊ में स्तब्धकारी 5,100 मामले दर्ज किये गए। अगर यही हालात रहे तो प्रशासन को एक सप्ताह का लॉकडाउन लगाने के लिए मजूबर भी होना पड़ सकता है। मामलों की संख्या अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच चुकी है, लेकिन इस सबके बावजूद लोगों को सुरक्षा मानकों और दिशानिर्देशों की धज्जियां उड़ाते देखा जा सकता है।

इससे पूर्व के चरणों में हो चुके मतदान में कई बूथों पर मतदाताओं को कंधे से कंधा मिलाकर लंबी कतारों में देखा गया था, जिसमें बमुश्किल से कुछ ही लोगों ने मास्क पहना हुआ था।

सामाजिक कार्यकर्त्ता और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडे का इस बारे में कहना है कि यूपी सरकार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पांच जिलों जिनमें लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज शामिल हैं, में लॉकडाउन लागू किये जाने के आदेश का उल्लंघन कर रही है (मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी)।

पांडे ने न्यूज़क्लिक को बताया “सरकार ने अपने सभी कर्मचारियों को पंचायत चुनावों में झोंककर उनकी जिंदगियों को खतरे में डाल दिया है।”

वहीं इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को लॉकडाउन का आदेश जारी करते हुए कहा था कि “जो लोग शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं, वे इस वर्तमान अराजक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार हैं।”

हालांकि मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के महामारी के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सख्त लॉकडाउन लागू किये जाने के आदेश पर रोक लगाते हुए अपनी टिप्पणी में कहा है कि यह “सही दृष्टिकोण” नहीं हो सकता है।

 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


UP State Employees Want Postponement of Remaining 2 Phases of Panchayat Elections

UP Panchayat elections
Karmchari Sangathan
UP State Employees

Related Stories

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

कोविड-19: यूपी अध्यापक संघ ने तत्काल स्वास्थ्य बीमा मुहैया ना करवाने पर विरोध प्रदर्शन की धमकी दी

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के बाद हिंसा का तांडव, ज़िम्मेदार कौन?


बाकी खबरें

  • Gogoi
    वी. वेंकटेशन
    क्या रंजन गोगोई ख़ुद को क्लीन चिट देने में कामयाब रहे ?
    11 Dec 2021
    भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और अब संसद सदस्य जस्टिस रंजन गोगोई की लिखी किताब, ‘जस्टिस फ़ॉर द जज: एन ऑटोबायोग्राफ़ी’ में सुप्रीम कोर्ट में उनके विवादास्पद कार्यकाल को लेकर कई ख़ुलासे हैं।
  • KANPUR DEHAT
    रवि शंकर दुबे
    यूपी की मित्र पुलिस!: ‘बच्चे को लग जाएगी सर...’, पिता चिल्लाता रहा, लेकिन उनकी लाठी न रुकी
    11 Dec 2021
    कानपुर देहात के अकबरपुर में गोद में बच्चा लिए शख़्स को पुलिस ने बेरहमी से पीटा, वीडियो वायरल होने पर जांच और कार्रवाई
  • mullaperiyar
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु और केरल के बीच मुल्लापेरियार बांध के संघर्ष का इतिहास
    11 Dec 2021
    पश्चिम की ओर बहने वाली पेरियार नदी को पश्चिमी घाट के पूर्व में अर्ध-शुष्क कृषि भूमि की ओर मोड़ने के लिए एक बांध बनाने का विचार बहुत पुराना है। एक स्थानीय प्रशासक प्रदानी मुथिरुलप्पा पिल्लई ने वर्ष…
  • biden
    एम. के. भद्रकुमार
    बाइडेन के व्हाइट हाउस ने क्रेमलिन को दिया चकमा
    11 Dec 2021
    इस बैठक का आयोजन पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यालय में रहने के अंतिम दिन किया गया था। 
  • domestic violence
    राज कुमार
    घरेलू हिंसा के फ़र्ज़ी आंकड़े बन रहे संसदीय चर्चा और संसदीय रिपोर्टों का आधार!
    11 Dec 2021
    आख़िर क्या है इन आंकड़ों के पीछे की सरकारी सच्चाई? ये मामला सिर्फ़ आंकड़ों तक सीमित नही है बल्कि मामला इससे कहीं ज़्यादा गंभीर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License