NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका ने जर्मनी से लगभग 12,000 सैनिकों की वापसी की घोषणा की
इस वापसी के बावजूद देश में 25,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक रहेंगे।
पीपल्स डिस्पैच
30 Jul 2020
अमेरिका

अमेरिका ने बुधवार 29 जुलाई को जर्मनी में तैनात 11,900 सैनिकों की वापसी और इस देश से इसके यूरोपीय कमांड के चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरण करने की घोषणा की। हालांकि रक्षा सचिव मार्क इस्पर ने कहा कि ये क़दम बेल्जियम के लिए इन बलों के "रणनीतिक स्थानांतरण" को लेकर है, वहीं राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ये फैसला जर्मनी की अपनी रक्षा के लिए ख़र्च करने के लिए उसकी अनिच्छा का परिणाम है।

जर्मनी से वापस लिए जाने वाले कुल 11,900 सैनिकों में से 6400 अमेरिका वापस चले जाएंगे और शेष यूरोप में नाटो के अन्य सदस्यों अर्थात् बेल्जियम और इटली में पुनः तैनात किए जाएंगे। जर्मनी में क़रीब 25,000 और अमेरिकी सैनिक रहेंगे।

पेंटागन ने जर्मनी में इसके मौजूदा लोकेशन से अपने यूरोपीय कमांड (यूरोकॉम) मुख्यालय और अफ्रीकी कमांड को बेल्जियम में क्रमिक रूप से स्थानांतरित करने की भी घोषणा की। हालांकि सटीक संख्या का पता लगाना मुश्किल है, विभिन्न अनुमानों के अनुसार जर्मनी में लगभग 50,000 अमेरिकी नागरिक और रक्षा कर्मी तैनात हैं जिनमें से लगभग 36,000 सक्रिय अमेरिकी सैनिक हैं।

जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति द्वितीय विश्व युद्ध का परिणाम है और जिसके चलते सोवियत संघ और अमेरिका के बीच शीत युद्ध की स्थिति बनी रही है। यूरोप के कुल सात अमेरिकी सैन्य ठिकानों में से पांच तो केवल जर्मनी में हैं। इस देश में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मध्य पूर्व, पूर्वी यूरोप और अफ्रीका में अमेरिकी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ट्रम्प प्रशासन ने कहा है कि सभी नाटो सदस्यों को अमेरिका पर अपनी निर्भरता को कम करते हुए अपनी सुरक्षा का बोझ साझा करना चाहिए। इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए ट्रम्प ने कहा कि "जर्मनी कसूरवार है" और इसने "कई वर्षों से हमारा लाभ उठाया है, इसलिए हम सैनिकों को कम कर रहे हैं क्योंकि वे अपने ख़र्च का भुगतान नहीं कर रहे हैं।" उन्होंने गुरुवार तड़के एक ट्वीट में इन दावों को दोहराया।

Germany pays Russia billions of dollars a year for Energy, and we are supposed to protect Germany from Russia. What’s that all about? Also, Germany is very delinquent in their 2% fee to NATO. We are therefore moving some troops out of Germany!

— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) July 29, 2020

नाटो के सदस्यों ने 2014 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके अनुसार सभी सदस्य अपने रक्षा बजट को अपने सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम 2% तक बढ़ाएंगे। 29 नाटो सहयोगियों में से केवल सात का ख़र्च अधिक है। जर्मनी वर्तमान में रक्षा पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.3% खर्च कर रहा है। जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने 2031 तक देश के रक्षा बजट को आवश्यक 2% तक बढ़ाने का वचन दिया है।

USA
America
Belgium
American soldiers
germany

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

यूक्रेन में छिड़े युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंध का मूल्यांकन

पश्चिम बनाम रूस मसले पर भारत की दुविधा


बाकी खबरें

  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    प्रेम दिवस पर यूपी, उत्तराखंड और गोवा की चुनावी परीक्षा: क्या वोटर नफ़रत को कहेंगे ना!
    12 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। अब दूसरे चरण की बारी है। और दूसरा चरण है प्रेम दिवस के दिन। जी हां, 14 फरवरी, वैलेंटाइन डे। इसी दिन एक ही चरण में उत्तराखंड और गोवा के…
  • Pfizer
    रिचा चिंतन
    फाइज़र का 2021 का राजस्व भारत के स्वास्थ्य बजट से सात गुना ज़्यादा है
    12 Feb 2022
    2020 से 2021 के बीच फाइज़र के राजस्व में 140 फ़ीसदी की बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। जहां कई गरीब़ देशों को वैक्सीन का इंतज़ार है, वहीं फाइज़र ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी आपूर्ति सिर्फ़ उच्च आय वाले…
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी-नज़र भी: आईपीएल में करोड़ों की बोली, यूपी में मुफ़्त राशन के नाम पर मांगे जा रहे हैं वोट
    12 Feb 2022
    एक तरफ़ चुनावी राज्यों ख़ासकर यूपी में मुफ़्त राशन का बखान कर वोट हासिल करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी तरफ़ हमारे क्रिकेटर इतने महंगे बिक रहे हैं कि अगर सबकी राशि जोड़ दी जाए तो यह कहना…
  • Ghost Village
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव: घोस्ट विलेज, केंद्र और राज्य सरकारों की विफलता और पहाड़ की अनदेखी का परिणाम है?
    12 Feb 2022
    प्रोफेसर ममगाईं ने कहा कि पहाड़ लगातार ख़ाली हो रहे हैं जबकि मैदानी ज़िलों में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है जो राज्य की डेमोग्रफी के लिए भी ख़तरा है।
  • sfi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!
    12 Feb 2022
    हिजाब विवाद की गूंज अब कर्नाटक के साथ यूपी और राजस्थान में भी सुनाई देने लगी है। दिल्ली में भी इसे लेकर प्रदर्शन किया गया। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने आश्वस्त किया है कि सभी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License