NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
अमेरिकी कंपनियों ने 2019 में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में 60% से अधिक हथियार बेचे
रूस और चीन के ख़िलाफ़ अमेरिकी प्रतिबंधों ने इसे वैश्विक हथियार व्यापार में अपना आधिपत्य बनाए रखने में मदद की है। हथियारों के उत्पादन और सैन्य सेवा प्रदाताओं वाली विश्व की शीर्ष 25 कंपनियों में अमेरिका की 12 कंपनियां हैं।
पीपल्स डिस्पैच
08 Dec 2020
अमेरिकी कंपनियों ने 2019 में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में 60% से अधिक हथियार बेचे

अगले साल अपना ईयरबुक जारी करने से पहले स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) ने सोमवार 7 दिसंबर को विश्व में शीर्ष 25 कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों की बिक्री का पहला आंकड़ा जारी किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी कंपनियों का वर्ष 2019 में बिकने वाले सभी हथियारों पर क़ब्ज़ा रहा। इस बिक्री में इन कंपनियों का शेयर 61% से अधिक है।

इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में दुनिया की शीर्ष 25 शस्त्र उत्पादक और मिलिट्री सर्विस कंपनियों द्वारा 361 बिलियन डॉलर के कुल हथियारों की बिक्री में से 12 अमेरिकी कंपनियों ने शीर्ष पांच कंपनियों के साथ 216 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक की बिक्री की। ये शीर्ष पांच कंपनियां अमेरिकी हैं और अकेले 166 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक की बिक्री के आंकड़ों को छुआ है। सूची में शीर्ष इन पांच कंपनियां में लॉकहीड मार्टिन, बोइंग, नॉर्थ्राप ग्रुमन, रेथियॉन और जनरल डायनेमिक्स हैं।

शीर्ष 25 कंपनियों द्वारा वर्ष 2019 में हथियारों की कुल बिक्री में अमेरिका के बाद छह यूरोपीय कंपनियां हैं जिसकी हिस्सेदारी लगभग 18% है। 16% की कुल हिस्सेदारी के साथ इन शीर्ष 25 कंपनियों में चार चीनी कंपनियों को भी सूचीबद्ध किया गया है। इस सूची में केवल 3.9% की कुल हिस्सेदारी के साथ रूस की सिर्फ दो कंपनियां हैं। यूएई आधारित एक मिड्ल ईस्टर्न कंपनी है जिसका नाम ईडीजीई है। यह पहला मौका है जब मिड्डल ईस्टर्न कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजार में हथियार बेचने वाली शीर्ष 25 कंपनियों में शामिल हुई है।

वर्ष 2019 में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हथियारों की कुल बिक्री में खतरनाक स्तर पर वृद्धि देखी गई। एसआईपीआरआई द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार शीर्ष इन 25 कंपनियों ने अकेले वर्ष 2018 की तुलना में अपनी कुल बिक्री में 8.5% की कुल वृद्धि दर्ज की है। इन 25 कंपनियों में एफ-35एस की निर्माता अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन ने सबसे अधिक हिस्सेदारी दर्ज की। इस कंपनी ने 5.1 बिलियन डॉलर से अधिक की कुल बिक्री दर्ज की है या शीर्ष 25 कंपनियों द्वारा कुल बिक्री का लगभग 11% है।

इन अंतरराष्ट्रीय हथियारों के उत्पादन और सैन्य सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों में ज़्यादातर कंपनियां पश्चिमी गोलार्ध में स्थित हैं। हालांकि, ट्रेंड से पता चलता है कि इन कंपनियों की उपस्थिति सऊदी अरब, भारत, सिंगापुर और यूएई के साथ दक्षिणी गोलार्ध में इन कंपनियों की सहायक कंपनियों के लिए नए हब के रूप में उभर रही है। एसआईपीआरआई के अनुसार इन कंपनियों की मौजूदगी वाले 49 देशों में से 17 निम्न या मध्यम आय वाले देश हैं।

America
US companies
Russia
China

Related Stories

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License