NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
बाइडेन के व्हाइट हाउस ने क्रेमलिन को दिया चकमा
इस बैठक का आयोजन पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यालय में रहने के अंतिम दिन किया गया था। 
एम. के. भद्रकुमार
11 Dec 2021
Translated by महेश कुमार
biden
अमेरिकी राष्ट्रपति जोए बाइडेन (दाएं) और उनके सहयोगी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत कर रहे हैं, 7 दिसंबर, 2021

यह एक दुर्लभ अवसर ही होगा जब क्रेमलिन में अपने 18 वर्षों के शासन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ टकराव के मामले में दूसरे स्थान पर आए हैं। और यह भी राष्ट्रपति जो बाइडेन के समय होना था, जिन्होंने अभी तक अपने कार्यालय में एक वर्ष भी पूरा नहीं किया है। जबकि, पुतिन, बिल क्लिंटन के बाद बने हर अमेरिकी राष्ट्रपति से मिले हैं, यहां तक कि अजीबोगरीब चुप्पी के साथ, बर्फीली निगाहों और भरोसे लायक कामकाज से भरी विकट परिस्थितियों में भी मिले हैं।

यह स्पष्ट है कि क्रेमलिन के अधिकारियों ने उपजे हालात को गलत तरीके से पढ़ा और इस बात की ऊंची संभावना पर दाव लगा दिया कि पुतिन और बाइडेन यूक्रेन में रूस की "लाल रेखाओं" पर एक साथ मिलकर एक सौदा करेंगे कि यूक्रेन को नाटो की सदस्यता नहीं दी जाएगी और पश्चिमी देश रूसी सीमाओं के करीब कोई सैनिक तैनात नहीं करेगा। 

पिछले बुधवार को ही पुतिन ने बताया था कि क्रेमलिन वार्ता से क्या उम्मीद करता है। क्रेमलिन समारोह में बोलते हुए, पुतिन ने जोर देकर कहा कि वार्ता के ज़रिए रूस "विश्वसनीय और दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी" मांगेगा।

पुतिन ने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ बातचीत में, हम विशिष्ट समझौतों पर काम करने पर जोर देंगे, जो आगे चलकर नाटो को पूर्व की ओर बढ़ने और हथियार प्रणालियों की तैनाती से रोकेगा खासकर उन्हे जो हमें रूसी क्षेत्र के करीब और उसके आसपास के क्षेत्र में धमकी देते हैं।"

उन्होंने आरोप लगाया कि "हमारी पश्चिमी सीमा पर खतरे बढ़ रहे हैं," नाटो ने अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को रूस के करीब रखा हुआ है और उन्होने पश्चिम देशों को इस मुद्दे पर पर्याप्त बातचीत में शामिल होने की पेशकश की है, यह कहते हुए कि मास्को को न केवल मौखिक आश्वासन की जरूरत है बल्कि "कानूनी गारंटी" की भी जरूरत है।"

लेकिन पुतिन को इसमें से कुछ भी नहीं मिला। उन्हें बाइडेन के साथ का आमने-सामने बात करने का भी मौका नहीं मिला। रूसी मीडिया ने बताया कि फोटो-ऑप के बाद "दोनों नेताओं से एक-के-बाद-एक वीडियो कॉल जारी रखने की उम्मीद की गई थी", और पुतिन ने विधिवत रूप से आमने-सामने चर्चा के प्रारूप का सख्ती से पालन करने के लिए अपने दुभाषिया को एक अलग कमरे में बैठाया था, लेकिन बाद में पता चला कि बाइडेन की तो अपनी कंपनी थी, फोन के बाद जारी व्हाइट हाउस की तस्वीर में दुभाषिया, साथ ही गृह सचिव एंटनी ब्लिंकन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन, और रूस के लिए एनएससी के वरिष्ठ निदेशक एरिक ग्रीन भी राष्ट्रपति के बगल के कमरे में बैठे थे।

क्रेमलिन की उस मिश्रित बैठक में क्या उम्मीद की जाए और जोकि भूलने की बीमारी की प्रतीक है कि यूक्रेन के प्रति अमेरिकी रणनीति वास्तव में यूक्रेन के बारे में बिल्कुल नहीं है  यह कभी रही भी नहीं है बल्कि यह हमेशा रूस को नीचा दिखाने की नीति रही है।

बाइडेन के एनएसए सुलिवन द्वारा दी गई प्रेस ब्रीफिंग में रेखांकित किया गया है कि "प्रत्यक्ष और सीधे" तरीके से, पुतिन को निम्नलिखित संदेश दिया गया है:

ए. यदि रूस अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाता है या यूक्रेन, अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों को धमकी देता है तो,

• रूस के साथ कठोर, अभूतपूर्व, दंडात्मक आर्थिक प्रतिबंधों के माध्यम से जवाब दिया जाएगा;

• यूक्रेन को पहले से दी जा रही सैन्य आपूर्ति को बढ़या जाएगा;

• दोनों ही मामले में, सैन्य आपूर्ति के साथ-साथ उसके साज-ओ-समान और क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सैनिकों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी और अतिरिक्त क्षमताओं को पूर्वी छोर पर नाटो सहयोगियों द्वारा मजबूत किया जाएगा।

बी. यूक्रेन को अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति जारी रहेगी और बदलती परिस्थितियों के आधार पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

सी. वाशिंगटन मॉस्को के व्यवहार का लाभ उठाने के लिए नॉर्ड स्टीम 2 गैस पाइपलाइन का इस्तेमाल करेगा, "क्योंकि अगर व्लादिमीर पुतिन को लगता है कि पाइपलाइन का इस्तेमाल गैस सप्लाई के लिए हो रहा है, तो वह यूक्रेन पर आक्रमण करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगा।"

डी. बाइडेन "निष्क्रिय खतरा" नहीं दे रहा है। परिस्थितियां 2008 से बहुत अलग हैं जब "2008 में तत्कालीन राष्ट्रपति मेदवेदेव के पीछे खड़े पुतिन ने जॉर्जिया पर आक्रमण किया था," क्योंकि उस समय अमेरिका इराक और अफ़गानिस्तान में व्यस्त था।

ई. हालांकि, रूस के सामने एक वैकल्पिक मार्ग है - "डी-एस्केलेशन" यानि टकराव कम करे। और ऐसा करने पर,

• वाशिंगटन और उसके सहयोगी देश शीत युद्ध के युग की तरह दोनों पक्षों की चिंता के बड़े रणनीतिक मुद्दों पर मास्को के साथ चर्चा में शामिल होंगे और "अस्थिरता को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करने के लिए एक तंत्र" विकसित करेंगे;

• अमेरिका मिन्स्क समझौते को आगे बढ़ाने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए भी तैयार होगा, जिसमें युद्धविराम और आपसी विश्वास बहाली के उपाय शामिल होंगे।

सुलिवन ने कहा कि अमेरिका हर किस्म के हालत की योजना बना रहा है –जोकि रूसी की किसी भी हमलावर नीति के प्रति एक "विशिष्ट, मजबूत, और स्पष्ट प्रतिक्रिया" है।

यूक्रेन की नाटो सदस्यता और उसकी कानूनी गारंटी पर पुतिन की लाल रेखाओं के संबंध में, सुलिवन ने इस बात पर जोर दिया कि बाइडेन ने "ऐसी कोई प्रतिबद्धता या रियायत नहीं दी है। वह इस प्रस्ताव पर कायम है कि देशों को स्वतंत्र रूप से यह चुनने में सक्षम होना चाहिए कि वे किसके साथ जुड़ना चाहते हैं।”

दूसरी ओर, यूरोपीय देशों की तरफ से सामरिक मुद्दों पर रूस से बात करने का पश्चिमी प्रस्ताव मेज पर मौजूद था। "इसके लिए सही तंत्र क्या है, उसके लिए क्या एजेंडा है, और उससे क्या निकलेगा इस पर अभी काम करना बाकी है क्योंकि हम देखना चाहते हैं कि आने वाले दिनों में चीजें कैसे बदलती हैं।"

निश्चित रूप से, सुलिवन की बड़ी बातें अपने घरेलू दर्शकों के मद्देनजर थी। बहरहाल, उनकी कठोर बातों से जो बात सामने आती है, वह यह है कि अमेरिका और रूस की स्थिति काफी अलग है, लगभग एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत।

क्रेमलिन द्वारा जारी बयान में इसके कुछ संकेत मिलते हैं कि, पुतिन ने "रूस पर सारी जिम्मेदारी डालने के खिलाफ चेतावनी दी है, क्योंकि यह नाटो ही है जो यूक्रेनी क्षेत्र पर पैर जमाने और रूसी सीमा के साथ अपनी सैन्य क्षमताओं का निर्माण करने के लिए खतरनाक प्रयास कर रहा है। यही कारण है कि रूस विश्वसनीय, कानूनी रूप से बाध्यकारी गारंटी हासिल करने के लिए काफी उत्सुक है ताकि नाटो के पूर्व की ओर विस्तार और रूस के पड़ोसी देशों में आक्रामक हथियार प्रणालियों की तैनाती की संभावना को रोका जा सके।"

बयान में दावा किया गया है कि पुतिन और बाइडेन "अपने प्रतिनिधियों को इन संवेदनशील मामलों पर सार्थक परामर्श में शामिल होने का निर्देश देने के लिए सहमत हुए हैं।"

सुलिवन की पूरी ब्रीफिंग इस तरह से लिखी गई थी कि पुतिन को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जा सके। सुलिवन की भाषा मुश्किल से सम्मानजनक थी। उन्होंने ऐसे बात की जैसे पुतिन किसी जांच का सामना कर रहे हों।

जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यालय में रहने के अंतिम दिन बाइडेन टीम ने इस बैठक का आयोजन किया था। रूस के आमने-सामने होने की स्थिति का इस तरह से शोषण किया जा रहा है जो अमेरिका के ट्रान्साटलांटिक नेतृत्व को एक ऐसे मोड़ पर फिर से ला रहा है जब जर्मन-फ्रांसीसी धुरी संक्रमण कर रही है।

टकराव और गैर-टकराव की गाथा को आधार बनाकर- अमेरिका ने खुद को "जीत-जीत" की स्थिति में पाया है। जबकि रूस का एजेंडा कभी भी यूक्रेन पर आक्रमण करने का नहीं रहा है, बल्कि केवल अपनी लाल रेखाओं को स्पष्ट करने और अमेरिका को बातचीत में शामिल करने का रहा है।

"गैर-टकराव" की मांग निरर्थक है क्योंकि रूस की सेना की तैनाती केवल उसके अपने क्षेत्रों के भीतर है, और वह भी यूक्रेन की सीमा से 200 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर है।

लेकिन जानबूझकर तनाव भड़काकर, अमेरिका ने यूक्रेन में पश्चिमी देशों की उपस्थिति, विशेष रूप से नाटो की उपस्थिति को आगे बढ़ा कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है और मॉस्को को जता दिया है कि अगर स्थिति बिगड़ती है तो रूस को उससे क्या उम्मीद करनी चाहिए।

कहने का मतलब यह है कि "गैर-टकराव" का बोझ अब पूरी तरह से रूस के कंधों पर है। गेंद अब रूस के पाले में है और क्रेमलिन को अमेरिकी आरोपों का जवाब देने की अपनी क्षमता दिखाने की जरूरत है। मूल रूप से, यूक्रेन का मुद्दा और नाटो का विस्तार एक नए संकट को जन्म दे सकता है।

मॉस्को की नाटो के पूर्वी विस्तार के खिलाफ कानूनी रूप से बाध्यकारी गारंटी की मांग उचित है क्योंकि आज से तीस साल पहले मिखाइल गोर्बाचेव के प्रति पश्चिमी आश्वासन अधूरे रह गए थे, और हाल ही में, डोनबास के खिलाफ कीव की उत्तेजक कार्रवाइयों के साथ-साथ पश्चिमी गठबंधन द्वारा यूक्रेनी क्षेत्र का सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल रूस की चिंताका सबसे बड़ा विषय है। 

मामले की जड़ यह है कि अमेरिका रूस को रोकने या डराने के लिए नाटो को एक मुख्य हथियार के रूप में इस्तेमाल करना जारी रखेगा, साथ ही वह यूक्रेन को उसकी पश्चिमी सीमा पर एक रूसी-विरोधी देश में बदलने की कोशिश कर रहा है। यदि अमेरिका नाटो के विस्तार पर जोर देना जारी रखता है, और रूस को लगातार धमकी देता है, तो मास्को जवाबी कदम उठाने के लिए मजबूर होगा। यह केवल कुछ समय की बात हो सकती है।आने वाले कुछ सप्ताह काई महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं। 

साभार: Indian Punchline

अंग्रेज़ी में प्रकाशित इस मूल लेख को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Biden White House Spoofs the Kremlin

TAGSNATO
ukraine
US-Russia

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

गुटनिरपेक्षता आर्थिक रूप से कम विकसित देशों की एक फ़ौरी ज़रूरत

यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल

रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार

पुतिन की अमेरिका को यूक्रेन से पीछे हटने की चेतावनी


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License