NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
संकट: लगातार जा रही हैं लोगों की नौकरियां, ओला के बाद अब उबर ने की छंटनी
सरकार भले ही आपदा को अवसर में बदलने के दावे कर रही हो लेकिन हकीकत यही है कंपनियां मंदी की चपेट में हैं। कॉस्ट कटिंग के नाम पर हजारों लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं और लाखों की दांव पर लगी हुई हैं। उबर इंडिया ने देश में अपने कुल वर्कफोर्स का लगभग 25 फीसदी यानी 600 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है।
सोनिया यादव
27 May 2020
Ubar
Image Courtesy: TheStreet

तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है,
मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।


अदम गोंडवी की लिखी ये पंक्तियां कोरोना संकट के काल में मोदी सरकार के 2020 में 20 लाख करोड़ के पैकेज की सच्चाई बयां करती हैं। सरकार भले ही आपदा को अवसर बनाने के दावे कर रही हो लेकिन हकीकत यही है देश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है, कंपनियां मंदी की चपेट में हैं। कॉस्ट कटिंग के नाम पर हजारों लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं और लाखों की दांव पर लगी हुई हैं। ताजा मामला ऑनलाइन कैब बुकिंग सर्विस देने वाली कंपनी ‘उबर’ का है। उबर इंडिया ने देश में अपने कुल वर्कफोर्स का लगभग 25 फीसदी यानी 600 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है।

क्या कहा कंपनी ने?

उबर इंडिया के अध्यक्ष प्रदीप परमेश्वरण ने मंगलवार, 26 मई को बताया कि अमेरिकी कंपनी उबर टेक्नोलॉजीज इंक की भारतीय शाखा में 600 नौकरियों में कटौती होगी। उनके अनुसार कोरोना वायरस की वजह से कारोबार पर असर पड़ा है, इसलिए ऐसा किया जा रहा है।

प्रदीप परमेश्वरण ने कर्मचारियों को दिए संदेश में कहा, “COVID-19 और प्रकृति के ऐसे व्यवहार ने हमारे पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। हमारे पास और कोई चारा नहीं है। इस फैसले से ड्राइवर और राइडर सपोर्ट के करीब 600 फुलटाइम कर्मचारी प्रभावित होंगे। मैं निकाले गए सभी साथियों से माफी मांगता हूं। साथ ही भारत में अब तक सेवा देने के लिए उनका हार्दिक धन्यवाद करता हूं।”

बता दें कि उबर ने वैश्विक स्तर पर 6700 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है। भारत में जो कर्मचारियों की छंटनी की गई है, यह उसी का एक हिस्सा है। नौकरी से निकाले गए सभी कर्मचारी स्थाई सेवा से जुड़े थे। यह छंटनी कस्टमर एंड ड्राइवर सपोर्ट, बिजनेस डवलपमेंट, लीगल, फाइनेंस और मार्केटिंग वर्टिकल्स से की गई है।

कर्मचारियों को सता रहा रोज़ी-रोटी का संकट

इस समय कर्मचारियों में अपनी नौकरी को लेकर डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। उनका कहना है कि लॉकडाउन में पहले ही उनकी बचत खत्म हो गई है। ऐसे में अब नौकरी जाने के बाद उनके सामने रोज़ी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

उबर से जुड़े एक कर्मचारी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा “कंपनी ने बीते महीने ही कई लोगों को नौकरी से निकाल दिया है और अभी आगे भी कई लोगों को निकाले जाने की ख़बर चल रही है। सभी डरे हुए हैं क्योंकि लॉकडाउन के कारण दो महीनों से ज्यादा समय से काम बिल्कुल ठप्प पड़ा था। जो बचत के पैसे जोड़कर रखे थे, वो सब भी इस बंदी में खर्च हो गए। अब जब लगा था कि शायद कुछ ठीक हो जाए, तब लोगों को नौकरी से ही निकाला जाने लगा। कुछ नहीं समझ में आ रहा क्या करें और कहां जाएं।”

इस संबंध में उबर के दिल्ली ऑफिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस महामारी और बंदी के चलते कंपनी को बहुत नुकसान हुआ है। कंपनी के पास फिलहाल कोई और रास्ता नहीं था लेकिन इस छंटनी से प्रभावित सभी कर्मचारियों को 10 सप्ताह का पे-आउट और अगले 6 महीने के लिए मेडिकल इंश्योरेंस कवरेज दिया जाएगा। भविष्य में भी कंपनी निकाले गए सभी कर्मचारियों का पूरा सहयोग करेगी।

ओला पहले ही कर चुका है छंटनी

मालूम हो कि कोरोना से कैब चलाने वाले ड्राइवर और उनके परिवार को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले कैब सेवा प्रदाता कंपनी ‘ओला’ ने भी हाल ही में अपने 1400 कर्मचारियों को बाहर कर दिया था। इसमें कंपनी की कैब, वित्तीय सेवा और फूड कारोबार में शामिल कर्मी थे। कंपनी के सीईओ भावीश अग्रवाल ने कहा था कि ऐसे दौर में आगे कंपनी चलाना मुश्किल होता जा रहा है। इसके पीछे की वजह भी कंपनी की कमाई में पिछले दो महीनों की गिरावट बताई गई थी।

ऑटोमोबाइल प्लेटफॉर्म की खस्ता हालत

बात सिर्फ ओला-उबर की ही नहीं है। ऑटोमोबाइल प्लेटफॉर्म कारदेखो डॉटकॉम ने भी कर्मचारियों को निकालने और सैलरी में कटौती का फैसला किया है। इसकी पेरेंट कंपनी गिरनरसॉफ्ट ग्रुप का कहना है कि कोविड-19 की वजह से इंडस्ट्री में अवरोध उत्पन्न हुआ है और ऑटो सेक्टर इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसलिए ऐसे कठोर फैसले लेने पड़ रहे हैं। हालांकि कंपनी ने अभी नौकरी से निकाले जाने वाले कर्मचारियों की संख्या की जानकारी नहीं दी है।

इस संबंध में कंपनी में काम कर रहे एक कर्मचारी ने बताया, “पहले कंपनी ने सैलरी के आधार पर 12 से 15 फीसदी तक की कटौती का फैसला किया। उसके बाद अंदर ही अंदर करीब 200 लोगों को नौकरी से निकाला दिया गया है। मैनेजमेंट कुछ भी साफ तौर पर बताने को तैयार नहीं है। किसी की नौकरी कभी भी जा सकती है।”

 पहले मंदी को नकारा और अब कोरोड़ों के पैकेज में उलझाया

वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार पुलकित भारद्वाज का कहना है कि आज जो अर्थव्यवस्था की हालत है या लोगों की नौकरियां जा रही हैं, ये कुछ भी अचानक नहीं हुआ। देश में मंदी के हालात पहले से थे। ऑटोमोबाइल सेक्टर इस वायरस के आने से पहले ही मुश्किल दौर से गुज़र रहा था। मांग कम होने के कारण कंपनियों ने उत्पादन में कटौती शुरू कर दी थी। हजारों लोगों की नौकरियां कोरोना के पहले ही जा चुकी थीं।

पुलकित कहते हैं, “शायद आपको याद हो कि कोरोना वायरस के आने से पहले बीते साल ऑटो सेक्टर की मंदी को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 सितंबर 2019 को अपने एक बयान में कहा था कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर बीएस6 और लोगों की सोच में आए परिवर्तन का असर पड़ रहा है, लोग अब गाड़ी खरीदने की बजाय ओला और उबर को तरजीह दे रहे हैं। तब सरकार मंदी को नकार रही थी और आज सरकार लोगों को अपने करोड़ों के पैकेज में उलझा रही है।”

बता दें कि रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन समेत कई अर्थशास्त्रियों ने इस समय सरकार को लोगों के हाथ में कर्ज़ के बजाय नगद पैसे देने की बात पर ज़ोर दिया है, जिससे अर्थव्यवस्था में मांग की गति को बढ़ाया सके। फिर पूर्ति और निवेश में अपने आप तेज़ी देखी जा सकती है।

गौरतलब है कि पहले से खस्ता हालात में चल रहे ऑटो सेक्टर को कोरोना महामारी ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। सियाम के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में कोरोना संक्रमण के सामने आने के बाद से अब तक पैसेंजर कार सेगमेंट में 51 फीसदी बिक्री प्रभावित हुई है। वहीं इस अवधि में कॉमर्शियल व्हीकल की बिक्री 88 फीसदी, थ्रीव्हीलर की बिक्र 58 फीसदी और दोपहिया वाहनों की बिक्री में 40 फीसदी की गिरावट आई है।

Uber India
OLA
Coronavirus
indian economy
economic crises
job loss

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

जब 'ज्ञानवापी' पर हो चर्चा, तब महंगाई की किसको परवाह?

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना मामलों में 17 फ़ीसदी की वृद्धि

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 


बाकी खबरें

  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में सात चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतज़ार है, देखना दिलचस्प होगा कि ईवीएम से क्या रिजल्ट निकलता है।
  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License