NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात
रूस की सर्वोच्च प्राथमिकता क्रीमिया के लिए एक कॉरिडोर स्थापित करना और उस क्षेत्र के विकास के लिए आर्थिक आधार तैयार करना था। वह लक्ष्य अब पूरा हो गया है।
एम. के. भद्रकुमार
27 May 2022
Translated by महेश कुमार
 Ukraine
यूक्रेन में चल रही तीव्र लड़ाई के बीच, रूसी सेना 24 मई, 2022 को डोनबास क्षेत्र के लुहान्स्क में सेवेरोडोनेट्सक शहर में प्रवेश कर गई है।

पश्चिम का यह प्रचार कि रूस, यूक्रेनी सेना के हाथों हार का सामना कर रहा है, अब झूठा साबित हो रहा है। यूक्रेन की "जीत" के काल्पनिक विचार ने कीव को भ्रमित कर दिया था जिसने बदले में वाशिंगटन और लंदन के हितों को देखते हुए युद्ध को आगे बढ़ाया और जिन्होने युद्ध की आड़ में रूस के खिलाफ युद्ध के लंबे संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी थी।

लेकिन दमदार वास्तविकता यह है कि डोनबास की लड़ाई में रूसी सेना लगातार हमलावर रही  है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि डोनबास में रूसी विशेष अभियान का "सबसे सक्रिय चरण" शुरू हो गया है। सैन्य दृष्टि से, रूसी सेनाओं के सामने यूक्रेन के उन सबसे मजबूत क्षेत्रों पर कब्जा करना एक कठिन काम है, जो सात साल से इस लड़ाई की तैयारी कर रहे थे। लेकिन दूसरी ओर, मारियुपोल में अपनी विजयी के बाद, रूसी सेना उत्साह में है। 

पिछले तीन महीने की अवधि को देखते हुए, रूस की सर्वोच्च प्राथमिकता क्रीमिया के लिए एक भूमि गलियारा स्थापित करना था और क्षेत्र के विकास के लिए आर्थिक आधार तैयार करना रहा है। वह उद्देश्य पूरा हो गया है। इस दृष्टिकोण से डोनबास में मौजूदा ऑपरेशन को समझने की जरूरत है। जबकि, यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगी उम्मीद जता रहे हैं कि आर्थिक प्रतिबंध अंततः रूस की सैन्य और आर्थिक क्षमता को तबाह कर देंगे।

लेकिन जीवन वास्तविक है। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, 2022 के अंत तक यूक्रेन की अर्थव्यवस्था 45 प्रतिशत तक सिकुड़ सकती है। इस साल के अंत में, पश्चिमी सहयोगियों की सहायता से भारी हथियारों के ज़रीए यूक्रेनी जवाबी हमले की बात एक ख़्वाब ही बनी रहेगी। साल के अंत तक कीव में युद्ध जारी रखने के लिए पर्याप्त जनशक्ति भी नहीं हो सकती है। रूस एक दुर्जेय दुश्मन है और कीव डोनबास में लड़ाई के चलते अपमानजनक शर्तों पर एक घोर आत्मसमर्पण का जोखिम उठा सकता है।

रूसी सेना अब डोनबास के लुहान्स्क क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने के करीब है। यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र के गवर्नर ने मंगलवार को स्वीकार किया है कि "रूस एक ही समय में सभी दिशाओं में आगे बढ़ रहा है; वे बड़ी संख्या में सेना और उपकरणों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यूक्रेनी बलों के सामने स्थिति तेजी से अनिश्चित दिख रही है। (पॉडकास्ट द बैटलफील्ड्स ऑफ द डोनबास एंड बियॉन्ड, वॉर ऑन द रॉक्स को सुनें)

प्रमुख साइनपोस्ट डोनबास में पोपसनाया और सेवेरोडोनेत्स्क और खार्किव क्षेत्र में उत्तर में इज़ियम शहर हैं। पोपसनाया और इज़्युम पहले से ही रूसी नियंत्रण में हैं, जबकि रूसी सैनिकों ने मंगलवार को सेवेरोडनेत्स्क में प्रवेश कर लिया है। 

रूसी सेना, वर्तमान में पोपसनाया के आसपास के अपने नियंत्रण क्षेत्र का विस्तार उत्तर, पश्चिम और दक्षिण की तरफ कर रही है; वे सेवेरोदेनेत्स्क शहर के बाहरी इलाके में पहुंच चुके हैं; और इज़्यूम के पश्चिम और दक्षिण की ओर फिर से आगे बढ़ रहे हैं।

जो नवीनतम रिपोर्टें मिल रही हैं उसके मुताबिक, पोपसनया के हमलावर समूह पश्चिम में  बखमुट की ओर बढ़ रहे हैं, जो पूर्वी क्षेत्र में अपनी सेना को फिर खड़ा करने के लिए कीव का  एक रणनीतिक केंद्र है। बखमुट और लिसिचंस्क के बीच का राजमार्ग रूसी सेना की फायरिंग रेंज के भीतर आता है जिसकी वजह से सेवेरोडोनेट्स्क और लिसिचांस्क में यूक्रेनी सेना के लिए सैन्य आपूर्ति समस्याग्रस्त हो गई है।

इज़ीयम के मामले में, लिमन के दक्षिण वाले (सेवेरोडनेत्स्क के पश्चिम) क्षेत्र में, रूसी सेना ने यूक्रेनी सेनाओं को घेर लिया है। रूसी सेना ने कल सेवेरोडनेत्स्क शहर में प्रवेश किया था और सड़क पर भी लड़ाई चल रही है।

सेवेरोडनेत्स्क, दोनों पक्षों के लिए एक अत्यधिक रणनीतिक संपत्ति है। अनुमानित 15-16,000 यूक्रेनी सैनिक वहां तैनात हैं, जिन्हें मज्जबूत बनाया जा रहा है। यदि रूसी सेना सेवेरोडनेत्स्क और लिसिचन्स्क के बीच यूक्रेनी सेना को फंसाने और नष्ट करने में सफल हो जाती है, तो पूर्वी डोनबास क्षेत्र में कीव की लड़ने की क्षमता गंभीर रूप से कमजोर हो जाएगी।

"आने वाली लड़ाई, क्रेमलिन के डोनबास अभियान के मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। पूर्वी डोनबास क्षेत्र पर रूसी नियंत्रण, यूक्रेन को उसके औद्योगिक गढ़ वाले क्षेत्रों से अलग कर देगा और क्रीमिया के लिए एक सुरक्षित भूमि पुल स्थापित करने के मामले में क्रेमलिन के प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य को पूरा कर देगा।

"अगर रूस की सेना सफलतापूर्वक सेवेरोडनेत्स्क और लिसिचन्स्क के बीच यूक्रेनी सेना को फंसा देती है और उसे नष्ट कर देती है, तो वे पूर्वी डोनबास क्षेत्र में यूक्रेन की क्षमता काफी कम हो जाएगी। यह स्पष्ट नहीं है कि सेवेरोडनेट्स्क में यूक्रेनी सैन्य इकाइयां संभावित रूसी हमलों से बचने के लिए पश्चिम की ओर पीछे हटने की योजना पर विचार कर रही हैं या नहीं।

रूस के सामने अगला बड़ा लक्ष्य स्लोवियांस्क इलाका है। इसे नियंत्रित करने से रूसी सेना को पश्चिम की तरफ बढ़ने और इज़ियम के दक्षिण-पूर्व में बढ़ने वाली ताकतों के साथ जुड़ने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य सड़क मार्ग से आपूर्ति लाइनों को नियंत्रित करना और पश्चिम से रेल मार्गों तक यूक्रेन की पहुंच को रोकना है। फरवरी में युद्ध शुरू होने पर दस यूक्रेनी ब्रिगेड को पूर्व में तैनात किया गया था, जिन्हें कीव के पास सबसे अच्छी तरह से सुसज्जित और सबसे अच्छी तरह से प्रशिक्षित सैनिकों के रूप में माना जाता था।

दरअसल, रूसी सेना सामने मारियुपोल का पतन एक महत्वपूर्ण मोड़ बन कर आया है। रूस अब इसके ज़रीए क्रीमिया में आसानी से प्रवेश कर सकता है और उसने क्रीमिया में पानी और बिजली की नाकाबंदी को समाप्त कर दिया है। नीपर नदी को शुष्क क्रीमिया प्रायद्वीप से जोड़ने वाली मीठे पानी की नहर अब रूस के हाथों में है। तो प्रायद्वीप के उत्तर में एक परमाणु ऊर्जा स्टेशन है, दक्षिणपूर्वी यूक्रेन में उस पावर ग्रिड का उल्लेख करना जरूरी नहीं जो अब रूस से जुड़ी  हो सकती है। ये रूस के कुछ रणनीतिक लाभ हैं।

डोनबास और क्रीमिया से परे, रूस के दक्षिणी क्षेत्र में अन्य उद्देश्य भी हो सकते हैं। स्थानीय स्तर पर अब तक - ज़ापोरिज़्झिया, खेरसॉन और मायकोलाइव के दक्षिणी क्षेत्रों को क्रीमिया (रूस) के साथ विलय करने की मांग की गई है, जिसमें बड़ी रूसी आबादी शामिल है। ऐसा लगता है कि रूस के साथ इस क्षेत्र का कुछ हद तक एकीकरण शुरू हो गया है।

खरसॉन क्षेत्र में, रूसी मुद्रा रूबल को पेश किया गया है; रूसी, यूक्रेनी भाषा के साथ, एक राज्य भाषा बन जाएगी और कार्यालय, संचार और राष्ट्रीय महत्व के सभी मुद्दों के मामले में मुख्य भाषा बन जाएगी; और साथ ही स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षण रूसी भाषा में होगा।  खरसॉन क्षेत्र के अधिकारियों ने इस क्षेत्र में रूसी सैन्य अड्डे की स्थापना की मांग की है।

रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव, निकोलाई पेत्रुशेव ने मंगलवार को प्रकाशित एक साक्षात्कार में कहा कि रूसी सरकार "किसी समय सीमा के साथ नहीं चल रही है।" वास्तव में, पश्चिमी अनुमान भी दक्षिणी क्षेत्रों में भविष्य के रूसी अभियानों का अनुमान लगाते हैं। इसके कुछ संकेत भी हैं। 23 मई को, अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने घोषणा की थी कि डेनमार्क यूक्रेन को अपने तटों की सुरक्षा के लिए एक आधुनिक हार्पून एंटी-शिप लॉन्चर और मिसाइल प्रदान करेगा।

24 मई को, हंगरी ने, यूक्रेन में युद्ध से उत्पन्न खतरों के खिलाफ देश के सामने मौजूद हालात के सामने तत्काल कदम उठाते हुए राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है।

पिछले सप्ताह के अंत में, मास्को ने, मोल्दाविया को नाटो हथियारों की आपूर्ति की संभावना के बारे में एक ब्रिटिश बयान पर सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया है।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Ukraine After 90 Days of War

NATO
US
Russia
ukrain
EU

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन


बाकी खबरें

  • Syrian refugees
    सोनाली कोल्हटकर
    क्यों हम सभी शरणार्थियों को यूक्रेनी शरणार्थियों की तरह नहीं मानते?
    07 Mar 2022
    अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, सीरिया, सोमालिया, यमन और दूसरी जगह के शरणार्थियों के साथ यूरोप में नस्लीय भेदभाव और दुर्व्यवहार किया जाता रहा है। यूक्रेन का शरणार्थी संकट पश्चिम का दोहरा रवैया प्रदर्शित कर रहा…
  • air pollution
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हवा में ज़हर घोल रहे लखनऊ के दस हॉटस्पॉट, रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयार किया एक्शन प्लान
    07 Mar 2022
    वायु गुणवत्ता सूचकांक की बात करें तो उत्तर प्रदेश के ज्यादातर शहर अब भी प्रदूषण के मामले में शीर्ष स्थान पर हैं। इन शहरों में लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद जैसे बड़े शहर प्रमुख हैं।
  • Chaudhary Charan Singh University
    महेश कुमार
    मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भर्ती विज्ञापन में आरक्षण का नहीं कोई ज़िक्र, राज्यपाल ने किया जवाब तलब
    07 Mar 2022
    मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस कोर्स के लिए सहायक शिक्षक और सहआचार्य के 72 पदों पर भर्ती के लिए एक विज्ञापन निकाला था। लेकिन विज्ञापित की गई इन भर्तियों में दलितों, पिछड़ों और…
  • shimla
    टिकेंदर सिंह पंवार
    गैर-स्टार्टर स्मार्ट सिटी में शहरों में शिमला कोई अपवाद नहीं है
    07 Mar 2022
    स्मार्ट सिटी परियोजनाएं एक बड़ी विफलता हैं, और यहां तक कि अब सरकार भी इसे महसूस करने लगी है। इसीलिए कभी खूब जोर-शोर से शुरू की गई इस योजना का नए केंद्रीय बजट में शायद ही कोई उल्लेख किया गया है।
  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License